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बाइडन ने बनाया कोविड-19 टास्क फोर्स, कहा, 'ज़िंदगियां' बचानी है तो मास्क लगाइए

बाइडन ने कहा कोरोना की दूसरी लहर का बुरा दौर आना अभी बाक़ी है. उन्होंने लोगों से मास्क इस्तेमाल करने की गुज़ारिश की.

लाइव कवरेज

  1. बाइडन ने बनाया कोविड-19 टास्क फोर्स, कहा, 'ज़िंदगियां' बचानी है तो मास्क लगाइए

    अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने चुनाव जीतने के बाद सबसे पहले कोरोना महामारी से निपटने के लिए कोविड-19 टास्क फोर्स का गठन किया है.

    13 सदस्यों के इस टास्क फोर्स में तीन को-चेयर और 1 सदस्य हैं. टास्क फोर्स के बारे में बाइडन ने कहा है कि वो वैज्ञानिकों और एक्सपर्ट से सलाह लेंगे.

    उन्होंने कहा कोरोना महामारी से निपटना उनके प्रशासन की पहली प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि उनके लिए बड़ी चुनौती है संक्रमण के लगातार बढ़ते मामलों पर लगाम लगाना और लोगों के लिए कारगर वैक्सीन खोजना.

    बीबीसी ने अनुमान में बताया कि बाइडन ने बहुमत के लिए ज़रूरी 270 इलेक्टोरल कॉलेज वोटों का आँकड़ा पार कर लिया है. हालांकि ट्रंप ने अभी अपनी हार स्वीकार नहीं की है और सुप्रीम कोर्ट जाने की बात की है.

    पूरे देश में पड़े वोटों की संख्या के लिहाज़ से बाइडन और ट्रंप के बीच 45 लाख वोटों का फर्क है.

    शनिवार को बाइडन की जीत की घोषणा की गई थी जिसके बाद बाइडन ने ट्रांज़िशन यानी पद की ज़िम्मेदारी लेने से पहले की तैयारियां शुरू कर दी हैं.

    नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन और उप-राष्ट्रपति कलमा हैरिस ने ट्रांज़िशन वेबसाइट लॉन्च की है जहां उन्होंने स्पष्ट किया है कोरोना महामारी के साथ साथ अर्थव्यवस्था को फिर से दुरुस्त करना, नस्लीय समानता और जलवायु परिवर्तन के लिए वो काम करेंगे.

    बाइडन का कोविड-19 टास्क फोर्स

    टास्क फोर्स में जो मेडिकल एक्सपर्ट शामिल हैं उनमें कोविड-19 बनाने की मुहिम पर नज़र रखने वाली सरकारी एजेंसी के प्रमुख और इम्यूनोलॉजिस्ट डॉक्टर रिक ब्राइट प्रमुख हैं.

    इसमें वो जानकार भी शामिल हैं जो पहले की रिपब्लिकन सरकार औरडेमोक्रेटिक सरकार के साथ काम किया है.

    बाइडन ने कहा है कि महामारी पर नियंत्रण के लिए वो राज्यों और स्थानीय अधिकारियों से भी राय लेंगे.

    फ़ेडेरेशन ऑफ़ अमेरिकन साइंटिस्ट्स में सीरियर फैलो डॉक्टर एरिक फ़िजल डिंग ने बीबीसी को बताया कि महामारी का मुक़ाबला करने के लिए सबसे पहले काम होना चाहिए विज्ञान को आधार बना कर नीति बनाना, जो करने में डोनाल्ड ट्रंप नाकाम रहे.

    डॉक्टर एरिक कहते हैं, "इस मामले में मास्क लगाने को लेकर ढुलमुल रवैय्या था और नेतृत्व भी परेशान करने वाला था. बिना आपात स्थति के दवाओं के अप्रूवल को लेकर जल्दबाज़ी करना अपने आप में विज्ञान का ग़लत इस्तेमाल था."

    "मुझे लगता कि बाइडन ने डॉक्टर रिक का चुनाव कर के बेहद अच्छा काम किया है, वो पहले बायोमेडिकल एडवांस्ड रीसर्च एंड डेवेलपमेंट ऑथोरिटी के प्रमुख रह चुके हैं. वो उन डॉक्टरों में से हैं जिन्होंने महामारी से निपटने के ट्रंप के तरीके की आलोचना की थी."

    "उन्होंने सर्जन जनरल डॉक्टर विवेक मर्फी और फूड एंड ड्रर एडमिनिस्ट्रेशन डेविड केसलर को चुन है. ये संकेत है कि वो विज्ञान समझते हैं."

    डॉक्टर रिक ब्राइट का कहना है कि वक्त से पहले कोविड के बारे में दी गई चेतावनी को ट्रंप प्रशासन ने नज़रअंदाज़ कर दिया था.

    बुरा दौर अभी आने वाला है- बाइडन

    जो बाइडन ने कहा है कि वैक्सीन हमारे लिए उम्मीद की किरण है और ये अगले साल हमारे लिए परिस्थिति बदल सकती है.

    हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि कोरोना की दूसरी लहर का बुरा दौर आना अभी बाक़ी है. उन्होंने लोगों से गुज़ारिश की कि वो मास्क का इस्तेमाल करें और सभी सुरक्षा कदमों का पालन करें.

    बाइन ने कहा, "इस महामारी से निपटने के लिए हमें कड़े कदम उठाने की ज़रूरत है. हमारे सामने अभी सर्दी का पूरा मौसम बाक़ी है. अमेरिका में संक्रमितों का आंकड़ा एक करोड़ से अधिक है. बीते सप्ताह देश में कुछ दिनों तक लगातार संक्रमण के एक लाख बीस हज़ार नए मामले दर्ज किए गए."

    "कोरोना वायरस संक्रमण बढ़ रहा है, अधिक संख्या में लोग अस्पतालों में आ रहा हैं, मौतों के आंकड़े बढ़ रहे हैं."

  2. अमेरिका के नतीजों पर अब तक ख़ामोश हैं अर्दोआन

    अमेरिका के राष्ट्रपति चुनावों के नतीजों पर तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है.

    डेमोक्रेट उम्मीदवार जो बाइडन को राष्ट्रपति चुनावों का विजेता माना जा रहा है.

    2016 में अर्दोआन ने नतीजों के एक दिन बाद ही डोनाल्ड ट्रंप से फ़ोन पर बात की और उन्हें मुबारकबाद देते हुए ट्वीट किया था.

    इसी तरह साल 2012 में जब बराक ओबामा दोबारा चुने गए थे तो उसके कुछ देर बाद ही उन्होंने मुबारकबाद भेजी थी.

    बीते चार सालों में अर्दोआन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ मज़बूत रिश्ता बनाया था. वो रूस से हथियार ख़रीदने और दूसरे मतभेदों के बावजूद तुर्की को अमरीकी प्रतिबंधों से बचाते रहे हैं.

    राष्ट्रपति चुनावों के दौरान तुर्की के सरकार की तरफ झुकाव रखने वाले मीडिया ने बाइडन के ख़िलाफ़ सुर अपना लिया था.

    बाइडन ने अर्दोआन की विदेश नीति की आलोचना की है और तुर्की के विपक्षियों का समर्थन करने का वादा किया है.

    उप राष्ट्रपति फवात ओकते ने कहा है कि तुर्की नए अमेरिकी प्रशासन के साथ मिलकर काम करेगा और नेटो के हितों का ध्यान रखेगा.

    कुछ विश्लेषकों का मानना है कि अर्दोआन राष्ट्रपति ट्रंप के कार्यकाल के अंतिम दिनों में उन्हें नाराज़ नहीं करना चाहते और इसी वजह से ख़ामोश हैं.

    हालांकि अभी तक बाइडन को मुबारकबाद न भेजने से तुर्की और अमेरिका के भविष्य के संबंधों पर ज़रूर असर हो सकता है.

  3. कमला हैरिस का चीनी नाम? क्या है पूरी कहानी

    अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव पर चीनी सोशल मीडिया में भी पिछले कई दिनों में काफ़ी सरगर्मी रही.

    इनमें ज़्यादातर चर्चा तो ट्रंप और बाइडन पर केंद्रित रही मगर चीनी सोशल मीडिया नेटवर्क वीबो के यूज़र्स का ध्यान एक और बात ने खींचा. वो था कमला हैरिस का चीनी(चाइनीज़) नाम.

    और ये सवाल हर कोई पूछ रहा था – कमला का नाम चीनी कैसे हो सकता है?

    दरअसल चीन में पश्चिम के ज़्यादार राजनेताओं के नाम का फ़ोनेटिक अनुवाद किया जाता है, जैसे बाइडन को वहाँ बाइ डेंग कहा जाता है.

    मगर, कमला का चीनी नाम अलग सुनाई देता है. हे जिन ली – कमला का ये नाम बिल्कुल चीनी नाम लगता है.

    और ये उनका आधिकारिक नाम भी है.

    न्यूज़ वेबसाइट एससीएमपी के अनुसार कमला हैरिस ने लगभग 20 साल पहले सैन फ़्रांसिस्को में डिस्ट्रिक्ट अटर्नी का चुनाव लड़ते समय अपना चीनी नाम भी रखने का फ़ैसला किया था.

    उन्होंने ऐसा अपने एक चीनी मूल के अमरीकी दोस्त की सलाह पर किया जिसने कहा था कि ऐसा करने से शहर की चीनी मीडिया में उनकी कवरेज हो सकती है.

    तब उनकी दोस्त के पिता ने उनके लिए एक चीनी नाम चुना जिस का अर्थ होता है – गहन सुंदर.

    और ये अच्छा ही हुआ कि कमला ने तब अपना चीनी नाम रख लिया क्योंकि पिछले साल सैन फ़्रांसिस्को में क नया क़ानून लागू हुआ है जिसके मुताबिक़ प्रत्याशी अपने-आप कोई चीनी नाम नहीं रख सकते, वे ऐसा तभी कर सकते हैं जब उनका चीनी नाम कम-से-कम दो सालों से चलन में रहा हो.

  4. ब्रेकिंग न्यूज़, राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे के बाद ट्रंप की पार्टी में मतभेद

    अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे आने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद नज़र आने लगे हैं.

    पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने डेमोक्रेट जो बाइडन की जीत पर उन्हें बधाई दी है और कहा है कि चुनाव निष्पक्ष हुए.

    मगर रिपब्लिकन पार्टी के कुछ और बड़े नेताओं ने अभी तक राष्ट्रपति ट्रंप की हार को स्वीकार नहीं किया है.

    हाउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स में पार्टी के नेता केविन मैक्कार्थी ने कहा है कि पहले हर क़ानूनी चुनौती पर विचार किया जाना चाहिए.

    वहीं राष्ट्रपति ट्रंप अभी भी ट्विटर पर दावा कर रहे हैं कि मतदान में धोखा हुआ और चुनाव परिणाम को 'चुरा' लिया गया. हालाँकि ट्विटर ने उनके दावे को 'विवादित' बताया है.

    राष्ट्रपति ट्रंप ने कई ट्वीट किए हैं जिनमें एक में उन्होंने लिखा है,"हम मानते हैं कि ये लोग चोर हैं....ये एक चुराया हुआ चुनाव था."

    हालाँकि, रिपब्लिकन पार्टी में कई लोग राष्ट्रपति चुनाव से नतीजों को स्वीकार करने का अनुरोध कर रहे हैं.

    वर्ष 2000 के चुनाव में हुए चुनाव में जॉर्ज डब्ल्यू बुश की ओर से फ़्लोरिडा में मतों की दोबारा गिनती करवाने के लिए क़ानूनी रणनीति बनाने वाले वकील बेन गिन्सबर्ग ने अमरीकी टीवी चैनल सीबीएस से कहा कि “ट्रंप को थोड़ा ठहरकर, नतीजों को देखना चाहिए”.

    उन्होंने राष्ट्रपति को सीधे संबोधित करते हुए कहा, “ये एक लोकतंत्र है. ये वो देश है जो आपके लिए बहुत अच्छा रहा है. आपको केवल इतना करना है कि आप संस्थाओं का आदर करें और इनमें सबसे महान संस्था हमारे चुनाव हैं जिनसे कि सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण होता है. और आप उसको तहस-नहस नहीं कर सकते.”

  5. सऊदी अरब ने दी बाइडन को जीत की बधाई

    सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुलाज़ीज़ अल सऊद और उनके बेटे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए जो बाइडन और कमला हैरिस को बधाई दी है.

    चुनावों में बाइडन की जीत की ख़बर आने के बाद कई अरब देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने बाइडन और हैरिस को बधाई दी, लेकिन सऊदी अरब ने इस पर चुप्पी साथ रखी थी. सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान डोनाल्ड ट्रंप के क़रीबी माने जाते हैं.

    ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद अपने पहले विदेश दौरे पर वो सऊदी अरब गए थे जहां उनकी शानदार आवभगत की गई. इससे पहले सऊदी अरब ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा स्वागत के लिए इस तरह का विशेष आयोजन नहीं किया था. ओबामा ईरान के प्रति नरम रुख़ रखने वाले माने जाते रहे हैं.

    ट्रंप ने ईरान के साथ 2015 में हुई परमाणु संधि से अलग होने के फ़ैसला किया था. 2018 में इस्तांबुल में मौजूद सऊदी कंसुलेट में वॉशिंगटन पोस्ट के पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के मामले में उन्होंने सऊदी अरब का समर्थन किया था. ख़ाशोज्जी की मौत के लिए दुनिया के कई देशों में सऊदी अरब की आलोचना की थी.

    लेकिन इसराइल के साथ मध्यपूर्व के देशों के रिश्ते बेहतर करने की ट्रंप की योजना का हिस्सा सऊदी अरब अब तक नहीं बना है. ट्रंप की इस योजना के तहत अब तक संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन और यूडान ने इसराइल के साथ अपने रिश्ते सामान्य करने की बात की है.

    जो बाइडन के नेतृत्व में हो सकता है कि सऊदी अरब के प्रति अमेरिकी सरकार की रवैय्या बदले. बाइडन पहले ही सऊदी अरब के साथ संबंधों का फिर से मूल्यांकन करने की बात कर चुके हैं.

    वो ख़ाशोज्जी की हत्या के मामले में ज़िम्मेदारी तय करने और यमन की लड़ाई को ख़त्म करने की भी बात कर चुके हैं. यमन में हो रही लड़ाई में सऊदी नेतृत्व की भी अहम भूमिका है जो वहां गठबंधन सेना का नेतृत्व कर रहा है.

  6. मेलानिया ट्रंप ने कहा, सभी वैध वोटों की गिनती हो

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पत्नी मेलानिया ट्रंप ने अमेरिकी चुनाव के बारे में कुछ मिनटों के अंतर पर ट्वीट कर चुनाव के नतीजों को खारिज किया है.

    रविवार को ट्रंप वर्जीनिया के गोल्फ़ क्लब में थे जहां उन्होंने बाइडन को विजेता बताने के लिए मीडिया पर निशाना साधा.

    ट्रंप ने कहा "मीडिया कब से ये तय करने लगी कि हमारा अगला राष्ट्रपति कौन होगा. बीते दो सप्ताह में हम सबने काफी कुछ सीखा है."

    इससे कुछ मिनट पहले ही ट्रंप की पत्नी मेलानिया ट्रंप ने एक ट्वीट कर कहा था कि सभी वोटों की गिनती होनी चाहिए.

    सीएनएन पर एक अपुष्ट रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद मेलानिया ट्रंप ने ट्वीट किया, "अमेरिकियों को पारदर्शी तरीके से कराए गए चुनावों का हक है. सभी वैध वोटों को गिना जाना चाहिए."

    सीएनएन की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मेलानिया, डोनाल्ड ट्रंप से चुनाव नतीजे मानने की गुज़ारिश कर रही हैं.

  7. बाइडन की जीत को कैसे देख रहे हैं मध्यपूर्व के देश?

    सेबास्टियन अशर

    अरब मामलों के संपादक, बीबीसी

    पूरी दुनिया के जिस एक इलाक़े में ट्रंप प्रशासन का काफी असर रहा था वो है ईरान और इसराइल. उनकी नीति ईरान पर अधिक से अधिक दवाब बनाने की थी और 2015 की परमाणु संधि से अलग होने के फ़ैसले के साथ उन्होंने इस पर अमल करना शुरू भी कर दिया था. इसका नतीजा ये हुआ कि ईरान और इसराइल के रिश्तों के बीच तल्ख़ी बढ़ती गई और दोनों संघर्ष की कग़ार पर पहुंच गए.

    ट्रंप से पहले, ओबामा प्रशासन की विदेश नीति में ईरान के साथ परमाणु समझौता बेहद अहम मुद्दा था. अगर ईरान परमाणु समझौते की सभी शर्तों को मानने पर राज़ी हो जाए तो अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन इसमें फिर से शामिल होने का फ़ैसला ले सकते हैं.

    लेकिन इससे अमेरिका के मित्र सऊदी अरब के नाराज़ होने का ख़तरा है जो अमेरिका के ईरान-विरोधी रुख़ का समर्थन करता है. इसके मद्देनज़र बाइडन की जीत पर सऊदी अरब की ख़ामोशी को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.

    देर में ही सही लेकिन इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने बाइडन को नया राष्ट्रपति चुने जाने पर बधाई दी है. वो ट्रंप प्रशासन के बेहद क़रीबी माने जाते हैं.

    2017 में डोनाल्ड ट्रंप ने यरुशलम को इसराइल की राजधानी के रूप में मान्यता दे दी थी. एक मौक़े पर वो वेस्ट बैंक में इसराइली बस्तियों का समर्थन भी कर रहे थे.

    संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के अधिकतर देश फ़लस्तीनी क्षेत्र (वेस्ट बैंक) में बसी इसराइली बस्तियों को अंतराराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन बताते आए हैं. जबकि 2019 में ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि वो इन बस्तियों को अवैध नहीं मानेगा.

    इसराइल के क़रीब जा कर ट्रंप प्रशासन ने फ़लस्तीन को और भी अलग-थलग कर दिया. इधर फ़लस्तीन ने इलाक़े के लिए ट्रंप प्रशासन की योजनाओें में शामिल होने से इनकार कर दिया.

    अमरीकी विदेश नीति को लेकर फ़लस्तीन अब भी निश्चिंत नहीं है लेकिन उसे बाइडन से उम्मीद है. फ़लस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा है कि उन्हें अमरीका के नए प्रशासन के साथ मिल कर काम करने का इंतज़ार है.

  8. पुतिन ने बाइडन को नहीं भेजा बधाई संदेश, रूसी चैनल ने की चुनाव की आलोचना

    दुनियाभर के कई छोटे-बड़े देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने जो बाइडन को उनकी जीत पर बधाई दी लेकिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन की तरफ़ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. न ही कोई ट्वीट, न टेलीफ़ोन, न ही कोई बधाई संदेश देने वाली चिट्ठी.

    लेकिन रूस के सरकारी चैलन पर विवादास्पद एंकर दिमित्री किसलेव ने अमेरिकी चुनाव को लेकर कई सवाल उठाए हैं.

    उन्होंने अपने साप्ताहिक कार्यक्रम में कहा, “अमेरिकी चुनाव प्रणाली इतनी पुरातन है, डायनासोर की तरह. मैं इसे लोकतांत्रिक नहीं कह सकता.”

    “अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बड़ी मात्रा में डेमोक्रैट्स द्वारा बैलेट भेजने की बात कह रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें चुनाव हराने के लिए धोखाधड़ी के कई तरीक़ों का इस्तेमाल किया गया.”

    हालांकि किसलेव ने ये नहीं बताया कि ट्रंप ने आरोपों को साबित करने के लिए कोई सबूत नहीं दिए.

    किसलेव पश्चिमी देशों के ख़िलाफ़ बोलने के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने इस कार्यक्रम में उन अमेरिकी टीवी चैनलों की भी आलोचना की जिन्होंने ट्रंप का भाषण बीच में ही काट दिया था.

  9. उत्तर कोरिया और किम जोंग-उन के मामले में जो बाइडन का क्या रुख़ होगा?

    प्रतीक जाखड़

    बीबीसी मॉनिटरिंग

    जब से डेमोक्रैटिक पार्टी ने जो बाइडन का नाम उनके राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर फ़ाइनल किया, तभी से राजनीतिक विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि ‘अगर बाइडन अमेरिका के राष्ट्रपति बने तो डेमोक्रैट सरकार की विदेश नीति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से कितनी अलग होगी.’

    अमेरिका में विदेश नीति एक ऐसा विषय है जिसके बारे में बात होती है, तो उत्तर कोरिया से अमेरिका के रिश्तों का ज़िक्र ज़रूर होता है.

    ट्रंप के कार्यकाल में अमेरिका के उत्तर कोरिया से रिश्ते बनते-बिगड़ते रहे. एक समय वो भी आया जब ट्रंप ने उत्तर कोरिया को धमकाया कि ‘अगर सुधार नहीं किया, तो नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहें.’

    लेकिन कुछ ही सप्ताह में नाटकीय बदलाव हुआ और ट्रंप उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन से मिले. इससे दुनिया में यह संदेश गया कि उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच फ़िलहाल सब सामान्य है.

    ट्रंप प्रशासन ने भी इसे अपनी कूटनीतिक जीत बताया और कहा कि उत्तर कोरिया से संबंधों में ऐसा सुधार उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धि है.

    लेकिन बाइडन किम जोंग-उन को ‘ठग’ कहते हैं. राष्ट्रपति चुनाव की बहसों में भी उन्होंने इसी संबोधन से किम का ज़िक्र किया.

    इससे ऐसा लगता है कि जो बाइडन उत्तर कोरिया और किम जोंग-उन को लेकर थोड़ा सतर्क रहेंगे.

    राष्ट्रपति चुनाव की बहस में डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, “बराक ओबामा से जब मेरी बातचीत हुई थी, जो एक लंबी बातचीत थी, तब उन्होंने कहा था कि उत्तर कोरिया हमारे लिए चिंता का सबसे बड़ा विषय है और ऐसा हो सकता है कि हमें उनसे युद्ध करना पड़े और अगर यह युद्ध हुआ, तो वो एक परमाणु युद्ध होगा. मेरे राष्ट्रपति बनने के बाद उत्तर कोरिया से हमारे संबंध बेहतर हुए हैं और युद्ध की कोई संभावना नहीं रह गई है.”

    ट्रंप ने यह भी कहा था कि “किम जोंग-उन के साथ मेरे संबंध अच्छे हैं. वो थोड़े अलग किस्म के इंसान हैं, पर अच्छे हैं और शायद वो भी मेरे बारे में यही सोचते होंगे.”

    इसके जवाब में जो बाइडन ने कहा था, “जिन संबंधों का हवाला ट्रंप दे रहे हैं, वो एक ऐसे इंसान के साथ हैं, जो एक ठग है. इनका यह कहना इस बात को दिखाता है कि ट्रंप को किम जोंग-उन और उत्तर कोरिया की परमाणु मिसाइलों से ख़तरा महसूस होता है. उन्हें लगता है कि उत्तर कोरिया के परमाणु हथियार अमेरिका की धरती को छू सकते हैं.”

    इस बारे में एक दक्षिण कोरियाई रिसर्चर पार्क वॉन-गोन ने समाचार एजेंसी योनहाप से बातचीत में कहा, “बाइडन उत्तर कोरिया के मामले में फिर से एक पारंपरिक दृष्टिकोण लाने की कोशिश करेंगे, ऐसी संभावना बहुत ज़्यादा है. वो बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए कुछ शर्तें भी रख सकते हैं, जिनमें परमाणु कार्यक्रमों को पूरी तरह बंद करके दिखाना एक ज़रूरी शर्त हो सकती है.”

    पर कुछ विश्लेषकों का यह भी मानना है कि बाइडन अमेरिका की ओर से बराक ओबामा की ‘रणनीतिक धैर्य’ वाली नीति को भी लागू कर सकते हैं जिसे कुछ लोग ‘रणनीतिक अज्ञानता’ या ‘रणनीतिक कोमा’ के रूप में समझते हैं.

    उनके एक सलाहकार ने कहा है कि ‘जो बाइडन किम जोंग-उन से मिलने के इच्छुक तभी होंगे, अगर वे डेमोक्रैटिक पार्टी के परमाणु कार्यक्रम बंद करवा देने के उद्देश्यों का पालन करेंगे. लेकिन जो बाइडन उत्तर कोरिया और किम जोंग-उन से अपने रिश्तों को उस तरह आगे नहीं बढ़ाएंगे, जैसे डोनाल्ड ट्रंप ने किया.’

    सेंटर फ़ॉर नेशनल इंटरेस्ट में कोरियन स्टडीज़ के डायरेक्टर हैरी जे काज़ियानिस ने एक समाचार नेटवर्क से बातचीत में कहा कि “डोनाल्ड ट्रंप के जाने से, हम सुप्रीम लीडर किम जोंग-उन और उनके रिश्तों की ‘कैमिस्ट्री’ को खो देंगे. हालांकि, यह बात ज़्यादातर लोगों को पसंद नहीं है, पर ट्रंप और किम जोंग-उन के दोस्ताना रिश्तों के कुछ फ़ायदे भी थे.”

    साल 2019 में, उत्तर कोरिया के सरकारी मीडिया ने जो बाइडन के किम जोंग-उन पर आरोप लगाने की निंदा की थी और उन्हें अपशब्द भी कहे थे.

    हालांकि, अब उनके लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग किये जाने की संभावना बहुत कम है.

    अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में जो बाइडन की जीत पर उत्तर कोरिया ने अब तक कोई टिप्पणी नहीं की है.

  10. अमेरिका चुनावः अगर डोनाल्ड ट्रंप ने हार नहीं मानी, तब क्या होगा?

  11. बाइडन के दौर में अमेरिका के चीन से रिश्ते कैसे होंगे?

    रॉबिन ब्रांट

    चीन संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

    जो बाइडन की जीत पर चीन ने अभी तक कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन जब भी यह आएगी तब उम्मीद है कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर भी बातचीत हो. इसके साथ ही शायद कोरोना वायरस से लड़ने के लिए भी दोनों देश हाथ मिला लें.

    शुरुआती विचार यह हैं कि जो भी बातचीत होगी वह सकारात्मक होगी और व्यापार पर लड़ाकू भाषा और आमना-सामना बंद होगा. अमेरिका की ओर से अब ‘चाइना वायरस’पर अधिक चर्चा नहीं होगी.

    लेकिन अचानक ही महत्वपूर्ण मुद्दों पर कोई बदलाव नहीं होने वाला है. वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक ने नाम न बताने की शर्त पर इसी बात की पुष्टि भी की है.

    नए राष्ट्रपति कह चुके हैं कि वो जारी ट्रेड वॉर पर सहयोगियों से बात करने के बाद फ़ैसला लेंगे कि चीनी आयात पर लगाए गए टैरिफ़ का क्या करना है.

    हालांकि, उन्होंने ऐसा कोई संकल्प नहीं लिया है कि वो टैरिफ़ को तुरंत वापस ले लेंगे.

    चुनाव से पहले वरिष्ठ सलाहकारों में इस बात को लेकर चर्चा थी कि नए राष्ट्रपति बाइडन वीगर मुसलमानों के शी जिनपिंग सरकार में हो रहे उत्पीड़न को ‘नरसंहार’ कह सकते हैं. यह एक बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक क़दम होता.

    चीन के क्षेत्रीय प्रभुत्व को देखते हुए बाइडन प्रशासन एशिया में एक गठबंधन बनाना चाहेगा या फिर उसको मज़बूत करना चाहेगा जिनमें दक्षिण कोरिया, जापान और अन्य देश शामिल होंगे. यह एक प्रकार से चीन की बढ़ती ताक़त के ख़िलाफ़ एकजुट क़दम होगा.

    कई मामलों में डोनाल्ड ट्रंप का जाना चीन के लिए अच्छा भी नहीं है. एक नेता के बहाने चीन यह कहने में समर्थ था कि अमेरिका लगातार सुपरपावर का दर्जा खो रहा है जहां पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को नज़रअंदाज़ किया जाता है.

    नए राष्ट्रपति का सबसे पहला ध्यान ट्रेड वॉर पर होगा और उस पर ही कोई पहला फ़ैसला होगा. लेकिन शायद अमेरिका-चीन के बीच भविष्य के रिश्तों की सबसे बड़ी परीक्षा कोरोना वायरस पर टिकी हुई है.

    चीन उम्मीद करेगा कि अमेरिका विश्व स्वास्थ्य संगठन के पास वापस लौटे लेकिन इसके साथ ही चीन पर यह भी दबाव पड़ने की संभावना है कि वह इस बात को लेकर पारदर्शी रहे कि कैसे, कहां और क्यों यह सब शुरू हुआ.

  12. ट्रंप के समर्थक क्या कह रहे हैं?

    जो बाइडन ने डेलावेयर में अपनी जीत की घोषणा वाले भाषण में ट्रंप समर्थकों भी संबोधित किया और कहा कि ‘आपकी निराशा समझ सकता हूं.’

    लेकिन ट्रंप समर्थक उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं.

    बीबीसी की जेन ओ ब्रायन ने वॉशिंगटन में ट्रंप समर्थकों से बात की.

    एक समर्थक पर नतीजों के लेकर पूछा तो उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बहुत बड़ा फ्रॉड हुआ है.”

    “जिस दौरान नंबर इतने ऊपर गए हैं, वैसा होना संभव नहीं है.”

    ट्रंप ने दावा किया है कि चुनाव में धांधली हुई है. हालांकि चुनाव अधिकारियों का कहना है कि इसका कोई सबूत नहीं है लेकिन ट्रंप के कुछ वोटर इस आरोप पर विश्वास कर रहे हैं.

  13. जो बाइडन की जीत पर कैसे मनाया गया जश्न?

  14. जो बाइडन ने जीतने के बाद ट्रंप समर्थकों से क्या कहा?

  15. कमला हैरिस ने जीत के बाद भारत को कैसे याद किया?

  16. अमेरिकी चुनाव के नतीजों पर भारतीय मूल के लोग क्या बोले?

  17. डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों में निराशा

    ट्रंप के समर्थकों का मानना है कि मतगणना में धोखाधड़ी की गई है. बीबीसी से एक ट्रंप समर्थक ने कहा कि उन्हें बिल्कुल भरोसा नहीं हो रहा कि बाइडन जीत गए.

    बीबीसी संवाददाताओं की एक टीम ने वॉशिंगटन में जो बाइडन के कुछ समर्थकों से पूछा कि ‘अब जब डेमोक्रैटिक पार्टी की चुनाव में जीत पक्की हो गयी है, तो वो रिपब्लिकन नेता डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?’

    कई ने कहा कि ‘आने वाले दिनों में हर घर-परिवार में होने वाली चर्चा का ढर्रा बदलेगा.’ एक महिला समर्थक ने कहा कि ‘मुझे विश्वास है कि जो बाइडन हर अमेरिकी के राष्ट्रपति साबित होंगे. जो लोग चुनाव में उनके साथ नहीं थे, उन्हें उन पर विश्वास करना चाहिए.’

  18. मेक्सिको के राष्ट्रपति ने कहा- 'अभी जो बाइडन को बधाई देना जल्दबाज़ी होगी'

    जहाँ कई देशों के नेताओं ने जो बाइडन को जीत की बधाई दे दी है, वहीं एक नेता हैं जो बधाई देने में सावधानी बरत रहे हैं.

    मेक्सिको के राष्ट्रपति एंड्रेस मेनवेल लोपेस ओबराडोर जिन्हें एमलो के नाम से भी जाना जाता है, उनका कहना है कि 'अभी बधाई देना जल्दबाज़ी होगी और वह क़ानूनी मुद्दे के ख़त्म होने तक इंतज़ार करना चाहते हैं.'

    उनका इशारा ट्रंप के चुनाव में धांधली के आरोपों को लेकर था जिसको लेकर ट्रंप अदालत में चुनौती देना चाहते हैं. हालांकि इन दावों को लेकर अभी तक ट्रंप ने कोई सबूत पेश नहीं किया है.

    शनिवार को एमलो ने मीडिया से कहा, “हम लापरवाही नहीं करना चाहते.”

    “हम बिना विचार के कुछ नहीं करना चाहते और हम लोगों के फ़ैसले और हक़ का सम्मान करना चाहते हैं.”

  19. इसराइल से बाइडन को बधाई, तो डोनाल्ड ट्रंप को धन्यवाद

    इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू ने जो बाइडन और कमला हैरिस को बधाई दी है.

    उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, “जो और हमारा क़रीब 40 साल पुराना नाता है और मैं उन्हें इसराइल के एक अच्छे दोस्त के तौर पर जानता हूँ. मैं दोनों नव-निर्वाचित नेताओं के साथ और बेहतर काम करने की आशा करता हूँ तो अमेरिका और इसराइल के संबंध पहले से भी मज़बूत हों.”

    एक अन्य ट्वीट में बिन्यामिन नेतन्याहू ने डोनाल्ड ट्रंप को भी उनके सहयोग के लिए शुक्रिया कहा है.

    उन्होंने लिखा है, “धन्यवाद डोनाल्ड ट्रंप, उस दोस्ती के लिए जो आपने इसराइल और निजी तौर पर मेरे साथ बनाये रखी. यरूशलम और गोलन को पहचान देने के लिए शुक्रिया. साथ ही ईरान के मुद्दे पर खड़े होने और ऐतिहासिक शांति समझौते कर इसराइल और अमेरिका के रिश्तों को अभूतपूर्व ऊंचाइयों पर पहुँचाने के लिए भी धन्यवाद.”

  20. ट्रंप के आरोपों का समर्थन कर रहे हैं पार्टी के नेता

    रिपब्लिकन पार्टी के कई नेताओं ने ट्रंप का समर्थन किया है. मार्को रुबिओ का कहना है कि वोटर फ्रॉड के मुद्दे की कोर्ट में जाँच होनी चाहिए.

    मिसूरी के सांसद जॉश हॉले ने भी ट्विट किया है कि जब तक वोटों की दोबारा गिनती ना हो, तब तक किसी को विजेता घोषित नहीं करना चाहिए.

    उन्होंने लिखा, “मीडिया घोषित नहीं करता कि कौन राष्ट्रपति होगा. लोग फ़ैसला करते हैं. जब सभी वैध वोट गिन लिए जाएंगे, दोबारा गिनती ख़त्म हो जाएगी और धांधली के मुद्दे को सुलझा लिया जाएगा तो हमें पता चलेगा कि विजेता कौन है.''

    सांसद लिंडसे ग्राहम ने भी ट्रंप का कई बार समर्थन किया है और क़ानूनी मुक़दमे के लिए पाँच लाख डॉलर की रक़म भी दान की है.