ग़ज़ा संघर्ष विराम पर सहमति की उम्मीद बढ़ी, इसराइली पीएम नेतन्याहू ने क्या कहा
ग़ज़ा संघर्ष विराम को लेकर पेरिस में चल रही वार्ता में शनिवार को हुई प्रगति के लेकर उम्मीदें जगी हैं. इसके बारे में इसराइल वॉर कैबिनेट को रविवार को जानकारी दी गई.
इस बीच इसराइल में प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू पर पद छोड़ने का दबाव बढ़ गया है.
रविवार को नेतन्याहू के इस्तीफ़े की मांग को लेकर तेल अवीव में प्रदर्शन हुआ.
बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने बल प्रयोग किया. प्रदर्शनकारी डेमोक्रेसी स्क्वायर तक जाना चाह रहे थे.
सात अक्टूबर को हुए हमास के हमले से पहले इसराइल में सरकार विरोधी प्रदर्शनों का तांता लगा हुआ था. एक साल तक नेतन्याहू और उनकी कट्टरपंथी कैबिनेट के खिलाफ़ प्रदर्शन चले.
लेकिन शनिवार को हुआ प्रदर्शन अक्टूबर हमले के बाद का सबसे बड़ा प्रदर्शन था.
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नेतन्याहू सरकार की रुचि बंधकों को छुड़ाने की बजाय हमास को हराने में अधिक है.
पेरिस वार्ता में सहमति
संघर्ष विराम और बंधकों की रिहाई को लेकर पेरिस में वार्ता चल रही है.
इस समझौते में इसराइली जेलों में बंद फ़लस्तीनी कैदियों की रिहाई की भी मांग शामिल है.
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर नेतन्याहू ने लिखा, “अपने बंधकों को छुड़ाने के लिए हम एक और योजना पर काम कर रहे हैं. इसीलिए मैंने एक प्रतिनिधिमंडल पेरिस भेजा है और आज रात समझौता वार्ता में अगले चरण पर बात होगी.”
इसके बाद ख़बर आई कि इसराइल एक प्रतिनिधिमंडल क़तर भी भेज रहा है.
रविवार को व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन ने कहा कि बंधकों की रिहाई और अस्थाई संघर्ष विराम पर 'बुनियादी समझादारी' बन गई है.
मिस्र की सरकारी मीडिया के अनुसार, रविवार को दोहा में वार्ता फिर से शुरू हुई है जिसमें मिस्र, क़तर और अमेरिका और इसराइल के एक्सपर्ट शामिल हैं. रिपोर्ट ये भी है कि इसमें हमास के प्रतिनिधि भी शामिल हैं.
इस बीच ग़ज़ा पट्टी के दक्षिणी हिस्से में इसराइली हवाई बमबारी जारी है.
नेतन्याहू ने कहा है कि रफ़ाह पर ज़मीनी हमले के लिए इसराइली सेना तैयार है और इसी हफ़्ते कैबिनेट में फैसला लिया जाएगा.
जबकि यूएन एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि अगर रफ़ाह पर हमला होता तो और गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो जाएगा.
हमास प्रशासित स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि इसराइली हमलों में अबतक 29,600 लोग मारे जा चुके हैं जिनमें अधिकांश महिलाएं और बच्चे हैं. जबकि हज़ारों की संख्या में शव पूरे ग़ज़ा में मलबों के नीचे दबे हुए हैं.
सात अक्टूबर को हुए हमले में 1200 इसराइली मारे गए थे और हमास क़रीब 250 लोगों को बंधक बनाकर ग़ज़ा ले गया था.