हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी और केंद्रीय
मंत्री गिरिराज सिंह के बीच बाबरी मस्जिद से शुरू हुई तीख़ी बयानबाज़ी अब जिन्ना
तक पहुंच गयी है.
ओवैसी ने सोमवार को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के
दौरान कहा था कि “नौजवानों!
अपनी मस्जिद हमने खो दी... और वहां पर क्या किया जा रहा है, आप देख रहे हैं. क्या तुम्हारे
और हमारे दिलों में तकलीफ़ नहीं होती? जिस जगह पर हमने 500 साल हैया-अलस-सलाह (आओ नमाज़ की
तरफ़) की सदाएं दीं, जहां बैठकर
हमने क़ुरान-ए-करीम का ज़िक्र किया, आज वो जगह हमारे हाथ में नहीं हैं. नौजवानों क्या तुम्हें नहीं दिख रहा कि अभी
ऐसे तीन चार मस्जिद हैं जिसमें दिल्ली की सुनहरी वाली मस्जिद भी है.”
ओवैसी के इस बयान पर विश्व हिंदू परिषद के
साथ-साथ बीजेपी नेता गिरिराज सिंह की ओर से आपत्ति जताई गयी.
विहिप ने जहां इस मामले में ओवैसी के ख़िलाफ़
क़ानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी, वहीं गिरिराज सिंह ने कहा है कि ओवैसी
के अंदिर जिन्ना का जिन्न घुस गया है.
उन्होंने कहा, “ओवैसी के अंदर जिन्ना का जिन्न
प्रवेश कर गया है. फिर भारत को ये तोड़ना चाहते हैं. युवाओं को भड़का रहे हैं. हम सब
के अंदर प्रभु श्री राम का डीएनए फिर चाहे हिंदू हो या मुसलमान.
हम सब उनकी संतान हैं.
हज़ारों साल सनातन हिंदू धर्म को सताया गया. कभी ग़ज़नी, कभी लोदी, कभी बाबर के
रूप में. मुग़ल आक्रांताओं के द्वारा. फिर अंग्रेज आए...
प्रभु श्रीराम तब तक कैद
रहे टेंट में. 22 तारीख़ को अब हिंदू पुनर्जागरण का समय है. मैं युवाओं से कहूंगा कि
जागो और संकल्प लो कि फिर कोई बाबर, ग़ज़नी, औरंगज़ेब नज़र उठाकर न देखे.”
गिरिराज सिंह ने एक निजी टीवी चैनल के साथ बातचीत
में ये भी कहा – “सुन लो, ओवैसी...राम मंदिर तो झांकी है. अभी और सभी बाकी हैं.”
इस पर पलटवार करते हुए ओवैसी ने कहा कि केस
वग़ैराह होता रहता है क्योंकि उनका नाम असदुद्दीन ओवैसी है.
वहीं, अपने भाषण के बचाव में उन्होंने कहा
कि उनकी स्पीच तथ्यों पर आधारित है.
उन्होंने कहा, “मेरी स्पीच सच पर टिकी थी. क्या बाबरी
मस्जिद को छह दिसंबर को नहीं गिराया गया था. और जब गिराया गया था तो किसी एक को भी
सज़ा नहीं दी गयी. मोदी सरकार ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील क्यों नहीं की."
उन्होंने पूछा कि "क्या
ये सच नहीं है कि अगर छह दिसंबर को मस्जिद शहीद नहीं की जाती तो कोर्ट का जजमेंट
क्या आता. क्या ये बात सच नहीं है कि मुस्लिम पक्ष को बताए बिना ताले खोले गए. जब
कंप्यूटर नहीं था तो चंद मिनटों की सुनवाई में 26 या 25 पन्नों का ऑर्डर दे दिया.
बाद में उन्हीं जज साहब ने अपनी किताब में लिखा कि ऊपर से इशारा मिला क्योंकि अपने
कोर्ट की दीवार पर एक काले बंदर को देखा."
"क्या ये बात सच नहीं है कि जब जीबी पंत
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो रात के अँधेरे में बाबरी मस्जिद में मूर्तियां
रख दी गयीं. उसके बाद मस्जिद को बंद कर दिया गया. ये तथ्य है. सुप्रीम कोर्ट का
जजमेंट तथ्य है. इसी लिए जब सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट आया था तब हमने कहा था कि सुप्रीम
कोर्ट का जजमेंट मान्यता पर आया है. हमें उस वक़्त इस बात का डर था जो अब
दुर्भाग्य से सच साबित हो रहा है. आप देख रहे हैं कि मुख़्तलिफ़ मस्जिदों पर मुकदमे
किए जा रहे हैं.”
इसके साथ ही उन्होंने कहा, “हम नरेंद्र मोदी सरकार से जानना
चाहते हैं कि वह 1991 के उपासना स्थल क़ानून को लेकर क्या सोचती है. पीएम मोदी
क्यों नहीं ये कह देते हैं कि हम इस क़ानून का पालन करेंगे. किस्सा ख़त्म कर दीजिए
न, जब आप उस क़ानून को मानेंगे तो सारे किस्से ख़त्म हो जाएंगे. मैं आज भी कह रहा
हूं कि जिस दिन देश के प्रधानमंत्री चाहेंगे कि किसी मस्जिद पर तमाशा न हो तो सब
ख़त्म हो जाएगा.”