ईरान ने बेरूत में हमास नेता की हत्या पर दी कड़ी प्रतिक्रिया
ईरानी अधिकारियों ने बेरूत में संदिग्ध इसराइली हमले में हमास के नेता सालेह अल-अरौरी की हत्या की कड़ी निंदा की है.
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विकास त्रिवेदी and अनंत प्रकाश
ईरान ने बेरूत में हमास नेता की हत्या पर दी कड़ी प्रतिक्रिया
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इमेज कैप्शन, ईरानी विदेश मंत्री हुसैनी अमीर अब्दुल्लाहेन
ईरानी अधिकारियों ने बेरूत में संदिग्ध इसराइली हमले में हमास के नेता सालेह अल-अरौरी की हत्या की कड़ी निंदा की है.
ईरानी विदेश मंत्री हुसैनी अमीर अब्दुल्लाहेन एक्स पर लिखे अपने पोस्ट में इसे एक कायरता भरी आतंकी गतिविधि करार देते हुए इसके लिए इसराइल की निंदा की है.
इस घटना को ईरान की मीडिया में काफ़ी जगह दी जा रही है. इन ख़बरों में अल-अरौरी को शहीद का दर्जा दिया जा रहा है. इन ख़बरों में कहा जा रहा है कि इसराइल की बेबसी उसे ये सब करने पर मजबूर कर रही है.
वहीं, इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इस घटना की निंदा करते हुए कहा है कि इससे इसराइल के ख़िलाफ़ संघर्ष कर रहे फ़लस्तीनी लड़ाकों का मनोबल मजबूत होगा.
इसके साथ ही आईआरजीसी ने इसे लेबनानी संप्रभुता का उल्लंघन भी करार दिया.
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ग़ज़ा युद्ध की मार झेल रहे लोगों ने सुनाई आपबीती- 'सर्दी की वजह से…'
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ग़ज़ा में जारी युद्ध के बीच वहां रहने वाले लोग अब अपने घरों को छोड़ टेंट, शरणार्थी कैंपों या खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में ज़ायदा अल-ब्रीम ने कहा, "विस्थापन झेला जा सकता है लेकिन सर्दियों में ये असहनीय हो जाता है."
अल-ब्रीम मूल रूप से ख़ान यूनिस की रहने वाली हैं लेकिन फिलहाल वह रफ़ाह में रह रही हैं.
वह कहती हैं कि पूरी रात वह अपने बच्चों को ढंकने और अपने पास रखने में ही गुज़ार देती हैं.
उन्होंने कहा, "ये मुश्किल है, बेहद मुश्किल."
ग़ज़ा से विस्थापित हुई एक अन्य निवासी यासिर अबू रियालेह कहते हैं कि वह पिछले एक महीने से नहा नहीं सके हैं.
वह कहते हैं, "घर पर तो मैं एक दिन में चार बार नहाया करता था. अधिकांश समय नदी में बिताता था."
रियालेह मूल रूप से उत्तरी ग़ज़ा के अल-शति के हैं लेकिन अब वह भी रफ़ाह में हैं.
उत्तरी ग़ज़ा की रहने वाली आलिया घबन भी इन्हीं समस्याओं से जूझने की बात कहती हैं.
हालांकि, उन्होंने बताया कि उनके बच्चे बहुत बीमार हो गए हैं.
वह कहती हैं, "ठंड और बारिश के बीच कपड़े और आश्रय की कमी के कारण उन्हें डायरिया और उल्टियां, कफ़ और कंपकंपी से जूझना पड़ रहा है. यहां कुछ नहीं है. हम बीमार हैं, सर्दी की वजह से हमारा सीना दुखता है. यहां गर्माहट का कोई ज़रिया नहीं है."
संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक़, अक्टूबर में शुरू हुई जंग के बाद ग़ज़ा से 19 लाख लोग विस्थापित हो चुके हैं. ये ग़ज़ा की 85 फ़ीसदी आबादी है.
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झारखंड: इस्तीफ़ा नहीं देंगे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधायकों के साथ बैठक ख़त्म,
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इमेज कैप्शन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (नीली जैकेट में)
झारखंड में पिछले कुछ दिनों से जारी सियासी हलचल के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा है कि वे इस्तीफ़ा नहीं देंगे.
यह बात उन्होंने मुख्यमंत्री आवास में बुधवार की शाम सत्तारूढ़ गठबंधन दलों के विधायकों की बैठक के दौरान कही.
उन्होंने विधायकों से कहा कि सोशल मीडिया और मीडिया में चल रही बातों पर ध्यान देने की ज़रूरत नहीं है.
इस बैठक में उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), कांग्रेस और आरजेडी के 37 विधायक शामिल हुए.
कांग्रेस के दो और जेएमएम के भी दो विधायक व्यक्तिगत कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो सके.
कांग्रेस विधायक दीपिका पांडेय सिंह अपने पिता के देहान्त की वजह से बैठक में नहीं आईं. इन विधायकों ने अपने नहीं आने की सूचना दे रखी थी.
यह बैठक करीब दो घंटे तक चली.
इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने मीडिया रिलीज़ में बताया कि इस दौरान राज्य के राजनीतिक हालात पर विशेष चर्चा की गई.
रिलीज़ में कहा गया, “मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आज सत्तारूढ़ दल के मंत्री और विधायक गणों की अहम बैठक हुई. इस बैठक में मुख्यमंत्री ने पूरे घटनाक्रम पर अपनी बात रखते हुए सभी को इससे अवगत कराया. इस मौके पर सभी विधायकों ने मुख्यमंत्री के प्रति अपना पूरा विश्वास जताया.”
“उन्होंने कहा कि वे हमेशा उनके साथ हैं और आगे भी बने रहेंगे. किसी भी तरह की स्थिति में वे सभी पूरी तरह एकजुट हैं और मुख्यमंत्री और राज्य सरकार के खिलाफ किसी भी तरह की साजिश को सफल नहीं होने देंगे. उन्होंने यह भी कहा की मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास और जनहित में लगातार कार्य कर रही है और यह निरंतर जारी रहेगा.”
इस बैठक से बाहर निकलने के बाद कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने मीडिया से कहा कि उनलोगों की पहली मंशा झारखंड में लोकतंत्र को स्थापित करना है.
इस पर कोई खतरा नहीं आने देंगे और यह सरकार अपना कार्यकाल पूरा करेगी.
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अरविंद केजरीवाल ने ईडी का तीसरा समन भी ठुकराया, पत्र लिखकर मांगे सवाल
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इमेज कैप्शन, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से भेजा गया तीसरा समन ठुकराने के बाद पत्र लिखकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं.
केजरीवाल ने इन समनों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए कहा है कि ये स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि उन्हें संदिग्ध या गवाह में से किस हैसियत से बुलाया जा रहा है.
इसी पत्र में केजरीवाल ने कहा है कि अगर ईडी को उनसे कोई जानकारी चाहिए तो उन्हें सवालों की सूची भेजी जा सकती है.
केजरीवाल की ओर से आने वाले दिनों में व्यवस्तताओं का भी हवाला दिया गया है. इस पत्र में आगामी राज्य सभा चुनाव और गणतंत्र दिवस के कार्यक्रमों का ज़िक्र किया गया है.
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इस पर बीजेपी नेता अनिल विज ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि जितनी बार केजरीवाल जी अपने रंग बदल रहे हैं, उतनी बार तो गिरगिट भी अपने रंग नहीं बदलता.
उन्होंने कहा, "आज से छह सात साल पहले इन्होंने ट्वीट किया था कि जब राजनेता ईडी और आयकर विभाग के बार-बार बुलाने पर भी नहीं पहुंचते हैं. आज इनका क्या कहना है? आज वही सिर है या कोई और सिर है. आज इन्हें शर्म नहीं आती है. आज बार बार इन्हें समन भेजा जा रहा है. जिसके मन में चोर होता है, वही छिपता है. अगर आपका मन साफ है तो आप जाओ और अपनी बात कहो."
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लेकिन आम आदमी पार्टी की ओर से लगातार ईडी को समन पर सवालिया निशान लगाया जा रहा है.
दिल्ली सरकार में मंत्री और आप नेता गोपाल राय ने कहा है कि 'ईडी की ओर से भेजे गए शुरुआती समन पर उठाए गए सवालों का जवाब नहीं मिल रहा है. ईडी जवाब देने की जगह बीजेपी के दबाव में केवल समन दे रही है. क्योंकि बात सिर्फ अरविंद केजरीवाल जी के समन की नहीं है. पूरे देश में जिस तरह ईडी और सीबीआई की ओर से समन का सिलसिला चल रहा है, वो दिखा रहा है कि इन सारे अभियानों के पीछे सिर्फ एक मकसद है - लोकसभा चुनाव."
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राय ने कहा कि 'अगर बीजेपी राजनीति से प्रेरित होकर समन जारी करवा रही है तो उसका जवाब देना ज़रूरी नहीं है.'
झारखंड से LIVE: सीएम हेमंत सोरेन विधायकों के साथ बैठक में बोले - 'वो इस्तीफ़ा…'
एएसआई ने किया आग्रह – ‘चार हफ़्तों तक न जारी की जाए ज्ञानवापी वाली रिपोर्ट’,
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भारतीय
पुरातत्व सर्वेक्षण (विभाग) ने वाराणसी की अदालत से आग्रह किया है कि ज्ञानवापी पर
उनकी ओर से सील बंद लिफाफे में दाखिल की गयी रिपोर्ट को चार हफ़्ते तक सार्वजनिक न
किया जाए.
वाराणसी की
ज़िला अदालत ने बुधवार को ज्ञानवापी मस्जिद परिसर पर एएसआई की रिपोर्ट हासिल करने
के लिए याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका पर फ़ैसला नहीं दिया है.
एएसआई ने ये
रिपोर्ट बीती 18 दिसंबर को एक सील बंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी थी. इसके बाद से
जहां एक ओर हिंदू पक्ष इस रिपोर्ट को हासिल करने की कोशिश कर रहा है. वहीं,
मुस्लिम पक्ष की ओर से इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किए जाने का आग्रह किया जा
रहा है.
इस मामले में
सुनवाई के बाद जिला जज डॉ. अजय कृष्ण विश्वेश की अदालत ने आदेश के लिए तीन जनवरी की
तारीख तय की थी.
लेकिन अदालत ने
आज अपने फ़ैसले को सुरक्षित कर लिया है. और अब ये फ़ैसला कल आने की उम्मीद जताई जा
रही है.
लेकिन एएसआई ने
बुधवार को सुनवाई शुरु होने से पहले ही कोर्ट से आग्रह किया कि उनकी रिपोर्ट को अगले
चार हफ़्ते तक सार्वजनिक न किया जाए.
एएसआई ने हाई कोर्ट
के आदेश का हवाला देते हुए यह मांग की है. हाईकोर्ट ने हाल ही में 1991 के मूल मुकदमे
को फिर से चलाने का आदेश दिया है.
एएसआई ने प्रार्थना
पत्र में लिखा है कि "चूँकि 18 दिसंबर को एएसआई ने रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष जमा
कर दी है और 19 दिसंबर को ज्ञानवापी के 1991 के एक मुकदमे में हाईकोर्ट ने एएसआई सर्वे
कराने का आदेश दिया है. ऐसे में वह भी कार्यवाही पूर्ण हो जाने तक कोर्ट द्वारा उन्हें चार सप्ताह
का समय और दिया जाना चाहिये."
केपटाउन टेस्ट: 153 रन बनाकर सिमटी टीम इंडिया, बिना रन बनाए गए आख़िरी छह विकेट
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भारत और दक्षिण अफ़्रीका के बीच केपटाउन में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन भारतीय टीम 153 रन के कुल स्कोर पर पवेलियन लौट गयी.
भारत की ओर से सबसे ज़्यादा 46 रन विराट कोहली ने बनाए. इसके बाद रोहित शर्मा ने 39 और शुभमन गिल ने 36 रन बनाए.
इससे पहले दक्षिण अफ़्रीकी टीम भी 55 रन बनाकर ऑल आउट हो गयी थी.
भारत की ओर से सबसे अधिक छह विकेट मोहम्मद सिराज ने लिए. इसके अलावा बुमराह और मुकेश कुमार ने 2-2 विकेट लिए.
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ईरान में धमाके से 73 की मौत, हमास-हिज़्बुल्लाह लेंगे इंतक़ाम?, 3 जनवरी का 'दिनभर', सुनिए सुमिरन प्रीत कौर और मोहन लाल शर्मा से
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ब्रेकिंग न्यूज़, ईरान में जनरल क़ासिम सुलेमानी की मज़ार के पास धमाके में मरने वालों की संख्या बढ़कर 73 हुई
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ईरान की रिवॉल्यूशनरी
गार्ड्स के जनरल क़ासिम सुलेमानी की मज़ार के पास हो रहे समारोह में धमाके से मरने
वालों की संख्या 73 तक पहुंच गई है.
ईरान की सरकारी
मीडिया ने बताया है कि सुलेमानी की हत्या की चौथी बरसी पर हो रहे समारोह में कई धमाके
हुए.
सरकारी ब्रॉडकास्टर
इरिब ने कहा कि इन धमाकों में कम से कम 60 लोग घायल भी हुए हैं.
ये धमाके केर्मान
प्रांत में हुए हैं. ईरान की सरकारी मीडिया ने केर्मान प्रांत के गवर्नर के हवाले से
इसे 'आतंकवादी हमला'
बताया है.
सोशल मीडिया पर
शेयर किए जा रहे कुछ वीडियो में सड़क पर शव दिखाई दे रहे हैं.
अमेरिका ने जनरल क़ासिम सुलेमानी को
साल 2020 में एक ड्रोन हमले में मारा था.
इरिब के अनुसार
साहब अल-ज़मान मस्जिद के पास सैकड़ों लोग जनरल सुलेमानी की हत्या की चौथी बरसी पर आयोजित
कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बढ़ रहे थे.
ईरान के सुप्रीम
लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बाद सुलेमानी को देश के सबसे ताक़तवर लोगों में गिना जाता
था.
ब्रेकिंग न्यूज़, ईरानी जनरल क़ासिम सुलेमानी की मज़ार के क़रीब धमाका, 73 की मौत
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इमेज कैप्शन, क़ासिम सुलेमानी की फाइल फोटो
ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के जनरल रहे क़ासिम सुलेमानी की हत्या की चौथी बरसी पर हो रहे समारोह में धमाके हुए हैं.
ईरान सरकार के टीवी चैनल इरिब ने कहा है कि 73 लोगों की मौत हुई है. इसके साथ ही कई लोगों के घायल होने की ख़बरें आ रही हैं.
शुरुआत में 20 लोगों के मरने की ख़बर आई थी लेकिन बाद में ईरान के सरकारी मीडिया ने मरने वालों की संख्या 50 बताई. अब बताया जा रहा है कि मरने वालों की संख्या 73 तक पहुंच गई है.
ये धमाके केरमान शहर की साहेब अल-ज़मान मस्जिद के करीब हुए हैं.
एक ऑनलाइन वीडियो में घटनास्थल पर कई शव देखे जा सकते हैं.
इससे पहले समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने ईरानी अधिकारियों के हवाले से लिखा था कि "आतंकवादी हमले के तहत हुए दो धमाकों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है और दर्जनों घायल हुए हैं."
ये धमाके केर्मान प्रांत में हुए हैं. इससे पहले सरकारी न्यूज़ एजेंसी नूर न्यूज़ ने कहा था कि मज़ार की ओर जाने वाली सड़क पर कई गैस कनस्तर भी छोड़े गए.
रॉयटर्स ने सरकारी टीवी चैनल पर चलाए जा रहे विज़ुअल्स के हवाले से बताया है कि बचावकर्मी घायलों की मदद के लिए जुट गए हैं. यहां सैकड़ों लोग सुलेमानी की बरसी पर जुटे थे. कुछ ईरानी न्यूज़ एजेंसियों का कहना है कि कम से कम 50 लोग घायल हुए हैं.
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असदुद्दीन ओवैसी और गिरिराज सिंह के बीच छिड़ी बहस पीएम मोदी और जिन्ना तक पहुंची
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हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी और केंद्रीय
मंत्री गिरिराज सिंह के बीच बाबरी मस्जिद से शुरू हुई तीख़ी बयानबाज़ी अब जिन्ना
तक पहुंच गयी है.
ओवैसी ने सोमवार को हैदराबाद में एक कार्यक्रम के
दौरान कहा था कि “नौजवानों!
अपनी मस्जिद हमने खो दी... और वहां पर क्या किया जा रहा है, आप देख रहे हैं. क्या तुम्हारे
और हमारे दिलों में तकलीफ़ नहीं होती? जिस जगह पर हमने 500 साल हैया-अलस-सलाह (आओ नमाज़ की
तरफ़) की सदाएं दीं, जहां बैठकर
हमने क़ुरान-ए-करीम का ज़िक्र किया, आज वो जगह हमारे हाथ में नहीं हैं. नौजवानों क्या तुम्हें नहीं दिख रहा कि अभी
ऐसे तीन चार मस्जिद हैं जिसमें दिल्ली की सुनहरी वाली मस्जिद भी है.”
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ओवैसी के इस बयान पर विश्व हिंदू परिषद के
साथ-साथ बीजेपी नेता गिरिराज सिंह की ओर से आपत्ति जताई गयी.
विहिप ने जहां इस मामले में ओवैसी के ख़िलाफ़
क़ानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी, वहीं गिरिराज सिंह ने कहा है कि ओवैसी
के अंदिर जिन्ना का जिन्न घुस गया है.
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उन्होंने कहा, “ओवैसी के अंदर जिन्ना का जिन्न
प्रवेश कर गया है. फिर भारत को ये तोड़ना चाहते हैं. युवाओं को भड़का रहे हैं. हम सब
के अंदर प्रभु श्री राम का डीएनए फिर चाहे हिंदू हो या मुसलमान.
हम सब उनकी संतान हैं.
हज़ारों साल सनातन हिंदू धर्म को सताया गया. कभी ग़ज़नी, कभी लोदी, कभी बाबर के
रूप में. मुग़ल आक्रांताओं के द्वारा. फिर अंग्रेज आए...
प्रभु श्रीराम तब तक कैद
रहे टेंट में. 22 तारीख़ को अब हिंदू पुनर्जागरण का समय है. मैं युवाओं से कहूंगा कि
जागो और संकल्प लो कि फिर कोई बाबर, ग़ज़नी, औरंगज़ेब नज़र उठाकर न देखे.”
गिरिराज सिंह ने एक निजी टीवी चैनल के साथ बातचीत
में ये भी कहा – “सुन लो, ओवैसी...राम मंदिर तो झांकी है. अभी और सभी बाकी हैं.”
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इस पर पलटवार करते हुए ओवैसी ने कहा कि केस
वग़ैराह होता रहता है क्योंकि उनका नाम असदुद्दीन ओवैसी है.
वहीं, अपने भाषण के बचाव में उन्होंने कहा
कि उनकी स्पीच तथ्यों पर आधारित है.
उन्होंने कहा, “मेरी स्पीच सच पर टिकी थी. क्या बाबरी
मस्जिद को छह दिसंबर को नहीं गिराया गया था. और जब गिराया गया था तो किसी एक को भी
सज़ा नहीं दी गयी. मोदी सरकार ने इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील क्यों नहीं की."
उन्होंने पूछा कि "क्या
ये सच नहीं है कि अगर छह दिसंबर को मस्जिद शहीद नहीं की जाती तो कोर्ट का जजमेंट
क्या आता. क्या ये बात सच नहीं है कि मुस्लिम पक्ष को बताए बिना ताले खोले गए. जब
कंप्यूटर नहीं था तो चंद मिनटों की सुनवाई में 26 या 25 पन्नों का ऑर्डर दे दिया.
बाद में उन्हीं जज साहब ने अपनी किताब में लिखा कि ऊपर से इशारा मिला क्योंकि अपने
कोर्ट की दीवार पर एक काले बंदर को देखा."
"क्या ये बात सच नहीं है कि जब जीबी पंत
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो रात के अँधेरे में बाबरी मस्जिद में मूर्तियां
रख दी गयीं. उसके बाद मस्जिद को बंद कर दिया गया. ये तथ्य है. सुप्रीम कोर्ट का
जजमेंट तथ्य है. इसी लिए जब सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट आया था तब हमने कहा था कि सुप्रीम
कोर्ट का जजमेंट मान्यता पर आया है. हमें उस वक़्त इस बात का डर था जो अब
दुर्भाग्य से सच साबित हो रहा है. आप देख रहे हैं कि मुख़्तलिफ़ मस्जिदों पर मुकदमे
किए जा रहे हैं.”
इसके साथ ही उन्होंने कहा, “हम नरेंद्र मोदी सरकार से जानना
चाहते हैं कि वह 1991 के उपासना स्थल क़ानून को लेकर क्या सोचती है. पीएम मोदी
क्यों नहीं ये कह देते हैं कि हम इस क़ानून का पालन करेंगे. किस्सा ख़त्म कर दीजिए
न, जब आप उस क़ानून को मानेंगे तो सारे किस्से ख़त्म हो जाएंगे. मैं आज भी कह रहा
हूं कि जिस दिन देश के प्रधानमंत्री चाहेंगे कि किसी मस्जिद पर तमाशा न हो तो सब
ख़त्म हो जाएगा.”
'मुझे भी नहीं मिला न्योता', राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के निमंत्रण पर प्रल्हाद जोशी बोले
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अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के लिए विपक्ष के कई नेताओं को न्योता न मिलने को लेकर केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि अभी तक उन्हें भी समारोह का निमंत्रण नहीं मिला है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में उनसे राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के न्योते में राजनीति करने के आरोपों को लेकर सवाल किया गया.
इस पर केंद्रीय मंत्री मंत्री ने कहा, "इसमें राजनीति कहां है? अगर वो (विपक्षी) ऐसा सोचते हैं तो इसमें हमारी क्या गलती है? हमने सबको निमंत्रण भेजा है."
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उन्होंने कहा, "हमने सोनिया गांधी को भी न्योता दिया है. हमने का मतलब ट्रस्ट ने. भारत सरकार का इससे कोई लेना-देना नहीं है. अभी तो मुझे भी न्योता नहीं दिया है, क्योंकि अगर सभी मंत्री अयोध्या जाएंगे तो भारी भीड़ इकट्ठा हो जाएगी. इसलिए जो प्रमुख पार्टियों के प्रमुख लोग हैं उन्हें न्योता दिया गया है. बीजेपी के कालखंड में राम मंदिर बन रहा है, इसमें हमारी ग़लती तो नहीं है न..."
उद्धव ठाकरे, शरद पवार सहित कई विपक्षी नेताओं ने ये दावा किया है कि उन्हें राम मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का निमंत्रण नहीं मिला है.
विपक्ष ने ये भी कहा है कि बीजेपी ने इसे राजनीतिक इवेंट बना दिया है.
'राम लला की वह मूर्ति कहां है जिस पर सारा झगड़ा हुआ', दिग्विजय सिंह ने पूछा सवाल
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इमेज कैप्शन, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह
कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अयोध्या में बनाए जा रहे राम मंदिर की प्रतिमा को लेकर सवाल खड़ा किया है.
दिग्विजय सिंह ने कहा है, "राम लला की वो मूर्ति कहां है जिस पर सारा झगड़ा हुआ. वो मूर्ति स्थापित क्यों नहीं हुई. नयी मूर्ति कहां से आ रही है. हम लोग उनसे पूछना चाहते हैं कि नयी मूर्ति की ज़रूरत क्यों पड़ी."
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बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने एक जनवरी की सुबह एक तस्वीर जारी करते हुए लिखा था कि 'राम मंदिर में लगने वाली मूर्ति का चुनाव कर लिया गया है. ये मूर्ति दक्षिण भारतीय मूर्तिकार योगिराज अरुण ने बनाई है.'
हालांकि, इस मामले में अब तक राम जन्मभूमि क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से अंतिम घोषणा नहीं की गयी है.
ट्रस्ट के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने दो जनवरी को एएनआई से बात करते हुए कहा है कि "तीन मूर्तिकारों से भगवान राम की तीन मूर्तियां तैयार कराई गई हैं. मंदिर में तीन तलों पर तीन मूर्तियों की आवश्यकता भी है. तीनों मूर्तियों का आयुवर्ग एक ही है. गर्भगृह में कौन सी मूर्ति लगेगी, यह विषय हमने आचार्य लोगों पर छोड़ दिया है."
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लेकिन जिस मूर्ति का ज़िक्र दिग्विजय सिंह कर रहे हैं, उसे राम लला की मूर्ति के रूप में मान्यता हासिल है.
ये मूर्ति साल 1949 से तिरपाल से ढके एक अस्थाई मंदिर में रखी हुई थी जिसे मंदिर निर्माण का काम शुरू होने के बाद हटाया गया.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, इस मूर्ति को लेकर ट्रस्ट की ओर से कहा गया है कि इस मूर्ति के दर्शन साल के कुछ विशेष दिनों पर ही किए जा सकेंगे.
शिवराज सिंह चौहान बोले - 'कई बार राजतिलक होते-होते वनवास भी हो जाता है'
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इमेज कैप्शन, मोहन यादव के साथ शिवराज सिंह चौहान
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को अपने गृह क्षेत्र बुधनी में आयोजित जनसभा के दौरान मुख्यमंत्री न बनाए जाने पर एक बार फिर टिप्पणी की.
इस जनसभा के दौरान भीड़ में से कुछ महिलाओं ने चिल्लाते हुए कहा - 'हमें छोड़कर कहीं न जाना...भैया'.
शिवराज सिंह ने इसका जवाब देते हुए कहा, "कहीं नहीं जाऊंगा, जिऊंगा यहां और मरूंगा यहां. चिंता मत करना."
बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व की ओर से शिवराज सिंह को मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने के बाद इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें केंद्र में कोई अहम भूमिका दी जा सकती है.
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान की जगह मोहन यादव को मुख्यमंत्री बनाया गया है. इस जनसभा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने लोगों को आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी की सरकार सभी वादों को पूरा करेगी.
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उन्होंने कहा, "बहनों की योजनाएं भी जारी रहेंगी. और भांजे-भांजियों के कल्याण में भी कोई कसर नहीं रहेगी. चाहें ग़रीब हो, किसान हो. हमने कई तरह की बातें कही हैं. लाड़ली बहना के लिए जो कहा है, वो हम करेंगे. सरकार भारतीय जनता पार्टी की है. कोई कांग्रेस की थोड़े ही है. और अपनी सरकार काम करेगी. किसानों के लिए जो वचन दिए हैं, वो भी पूरे होंगे."
इसके बाद उन्होंने खुद को मुख्यमंत्री न बनाए जाने पर कहा, "कहीं न कहीं कोई बड़ा उद्देश्य होगा, यार... कई बार राजतिलक होते-होते वनवास भी हो जाता है."
अरिंदम बागची की जगह रणधीर जायसवाल ने संभाला विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का पद
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अरिंदम बागची की जगह अब रणधीर जायसवाल विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंगे.
जायसवाल ने अपना कार्यभार संभाल लिया है.
पिछले साल अक्टूबर में अरिंदम बागची को संयुक्त राष्ट्र में भारत का स्थायी प्रतिनिधि नियुक्त किया गया था.
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भारतीय विदेश सेवा के 1995 बैच के अधिकारी बागची ने मार्च 2021 में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता का पदभार संभाला था.
रणधीर जायसवाल जुलाई 2020 में न्यूयॉर्क में कॉन्सुल जनरल का पद संभाल चुके हैं.
जायसवाल भारतीय विदेश सेवा के 1998 बैच के अधिकारी हैं. उन्होंने पुर्तगाल, क्यूबा, दक्षिण अफ़्रीका और संयुक्त राष्ट्र में भारत के परमानेंट मिशन सहित कई स्थानों पर अहम भूमिका निभाई है.
ब्रेकिंग न्यूज़, केपटाउन टेस्ट: दक्षिण अफ़्रीका की पहली पारी 55 रनों पर सिमटी, सिराज ने लिए छह विकेट
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केपटाउन टेस्ट के पहले ही दिन दक्षिण अफ़्रीका की पहली पारी 55 रनों पर सिमट गई है.
भारत की ओर से सबसे अधिक छह विकेट मोहम्मद सिराज ने लिए. इसके अलावा बुमराह और मुकेश कुमार ने 2-2 विकेट लिए.
दक्षिण अफ़्रीका की टीम ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी चुनी थी.
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दक्षिण अफ़्रीका के लिए सबसे ज़्यादा 15 रन कायले वेरनन ने बनाए.
दो मैचों की टेस्ट सिरीज़ में पहला मुक़ाबला भारत हार चुका है.