बीजेपी आईटी सेल के
प्रमुख अमित मालवीय ने कांग्रेस नेता राजेश पायलट के मिज़ोरम पर बम गिराने का दावा किया था.
मालवीय के दावे का राजेश
पायलट के बेटे और कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने खंडन किया था.
अब राजस्थान के सीएम अशोक
गहलोत ने भी अमित मालवीय के दावे पर मीडिया से बात की है.
अशोक गहलोत ने कहा,
''राजेश पायलट और मैं साथ-साथ संसद गए थे. हम
काफ़ी क़रीब से एक-दूसरे को जानते थे. इसलिए इस प्रकार की जो बेहूदा बातें मिस्टर
मालवीय कर रहे हैं. उनका धंधा ही यही है... झूठ बोलना. फेक न्यूज़ फैलाना. अब पूरे
देश में बुद्धिजीवियों में वो एक्सपोज हो गए हैं.''
गहलोत बोले, ''अब बीजेपी के लिए वो असेट नहीं, लाइबिलिटी (बोझ) बन गए हैं. बीजेपी हटाए या नहीं हटाए, हमें मतलब नहीं है. आज बीजेपी के लिए लाइबिलिटी (बोझ) कोई है तो अमित मालवीय जी हैं. ये मैं कह सकता हूं. जनता समझ गई है कि ये फ़ेक न्यूज़ फैलाता रहता है बीजेपी के बिहाव पर. आप चिंता ना करें, राजस्थान में माहौल बहुत अच्छा बना हुआ है.''
मणिपुर के मुद्दे पर विपक्ष का लाए अविश्वास प्रस्ताव पर जवाब देते हुए पीएम मोदी ने मिज़ोरम में इंदिरा गांधी की सरकार में सेना के बम गिराने की घटना का ज़िक्र किया था.
पीएम मोदी के इस बयान के कुछ दिन बाद 15 अगस्त को अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखी थी.
मालवीय ने दावा किया था, "राजेश पायलट और सुरेश कलमाड़ी भारतीय वायुसेना के उन विमानों को उड़ा रहे थे जिन्होंने 5 मार्च 1966 को मिज़ोरम की राजधानी आइज़वाल पर बम गिराए. बाद में दोनों कांग्रेस के टिकट पर सांसद और सरकार में मंत्री भी बने. स्पष्ट है कि नार्थ ईस्ट में अपने ही लोगों पर हवाई हमला करने वालों को इंदिरा गांधी ने बतौर इनाम राजनीति में जगह दी, सम्मान दिया."
कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने मालवीय के इन दावों को ख़ारिज किया था.
सचिन पायलट ने लिखा था, "आपने गलत तारीख़ और गलत तथ्यों का इस्तेमाल किया. हां, भारतीय वायु सेना के पायलट के तौर पर मेरे पिता ने बम गिराए थे, लेकिन वो बम तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में भारत-पाकिस्तान के 1971 युद्ध के दौरान गिराए गए थे, न कि तब जिसका दावा- पांच मार्च, 1966-आप कर रहे हैं. वह भारतीय वायु सेना में 29 अक्टूबर, 1966 को शामिल हुए थे. इसका सर्टिफिकेट मैं यहां जोड़ रहा हूं. जय हिंद और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं.''
पायलट ने लिखा था, ''राजेश पायलट जी दिनांक 29 अक्टूबर, 1966 को भारतीय वायु सेना में कमीशन हुए थे. यह कहना कि उन्होंने 5 मार्च 1966 में मिज़ोरम में बमबारी की थी - काल्पनिक है, तथ्यहीन है और पूरी तरह भ्रामक है. हाँ 80 के दशक में एक राजनेता के रूप में मिज़ोरम में युद्ध विराम करवाने और स्थाई शांति संधि स्थापित करवाने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका ज़रूर निभाई थी.''