मणिपुर संकटः कुकी विधायकों की पीएम मोदी से मांग, 5 ज़िलों के लिए हो अलग डीजीपी और मुख्य सचिव,
मणिपुर में जारी हिंसा और तनावपूर्ण स्थिति के बीच कुकी-ज़ो जनजाति के 10 विधायकों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पांच पहाड़ी जिलों के लिए मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) के समान अलग-अलग पद बनाने की मांग की है.
इस संदर्भ इन विधायकों ने 16 अगस्त को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी को एक ज्ञापन सौंपा है. इस ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वाले सभी विधायकों ने कुकी-ज़ोमी लोगों के पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री राहत कोष से 500 करोड़ रुपये की मंजूरी भी मांगी है.
दरअसल इन विधायकों का कहना है कि तीन महिने से ज्यादा दिनों से चल रही इस व्यापक हिंसा के कारण कुकी-ज़ोमी लोग राजधानी इंफाल नहीं जा पा रहें है.
विधायकों ने ज्ञापन में लिखा है, "कोई भी कुकी-ज़ो लोग इंफाल नहीं जा सकते, न ही इंफाल की राजधानी और अन्य घाटी जिलों में तैनात सरकारी कर्मचारी अपने कार्यालयों में जा सकते हैं. यहां तक की कुकी समुदाय के आईएएस और एमसीएस अधिकारी और आईपीएस और एमपीएस अधिकारी काम करने और अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हैं क्योंकि इंफाल घाटी हमारे लिए मौत की घाटी बन गई है."
पीएम मोदी को सौंपे गए इस ज्ञापन पर सबसे ऊपर हस्ताक्षर करने वाले कुकी विधायक हाओखोलेट किपगेन ने बीबीसी से कहा, "हम 10 विधायकों ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक ज्ञापन सौंपा है. क्योंकि अब जो यहां का माहौल है इसमें हमारे लोग इंफाल नहीं जा सकते. चाहे सरकार हमें कितनी ही सुरक्षा दे दे.''
उन्होंने आगे कहा, ''इसलिए हम चाहते है कि भारत सरकार मुख्य सचिव और डीजीपी स्तर के समकक्ष अधिकारियों को चुराचांदपुर या कांगपोकपी में नियुक्त करें. सरकारी कर्मचारियों का वेतन रोका गया है. लिहाजा इन सब कार्यों का सुचारू रूप से संचालन के लिए ही हमने शीर्ष स्तर के प्रशासनिक अधिकारियों की मांग की है."
जिन पांच जिलों के 10 विधायकों ने उच्च पदस्थ अधिकारियों की मांग की है वे हैं चुराचांदपुर, कांगपोकपी, चंदेल, तेंगनौपाल और फेरज़ौ है. इस ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने वालों में से सात बीजेपी के विधायक हैं. ये सभी विधायक हिंसा शुरू होने के कुछ दिन बाद से मणिपुर के कुकी-ज़ोमी लोगों के लिए एक अलग प्रशासन की मांग करते आ रहें है.
हालांकि मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह की सरकार ने इस तरह की मांग के खिलाफ 21 अगस्त को मणिपुर विधानसभा का एक विशेष सत्र बुलाया है जिसमें सरकार मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता को संरक्षित करने के लिए एक प्रस्ताव पेश कर सकती है.
पीएम मोदी को भेजे गए ज्ञापन में इन विधायकों ने मणिपुर की एन. बीरेन सिंह सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए है.
इन आरोपों में कहा गया है कि मुख्यमंत्री सिंह लगभग हर दिन पहाड़ी जिलों के गांवों पर हमला करके कुकी-ज़ो पहाड़ी आदिवासियों के खिलाफ युद्ध छेड़ते रहते हैं.
कुकी लोगों पर हुए अत्याचार से जुड़े कई उदाहरणों का इसमें उल्लेख करते हुए विधायकों ने आरोप लगाया कि कुकी-ज़ो आदिवासियों के खिलाफ यह एक राज्य प्रायोजित युद्ध है.