मणिपुर पुलिस ने दो महिलाओं को भीड़ द्वारा निर्वस्त्र कर के परेड करवाने के मामले में इलाक़े के थाना इंचार्ज सहित पाँच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पुलिस अधिकारियों ने बताया कि 19 जुलाई को इस पूरे मामले का वीडियो वायरल होने के बाद ही मणिपुर पुलिस ने नोंगपोक सेकमई पुलिस थाने के इंचार्ज और चार अन्य पुलिसकर्मियों के निलंबन का फ़ैसला कर लिया था.
पुलिस ने ये भी बताया कि तीन अगस्त को हथियार लूटने के मामले की जाँच भी इंसपेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस के अधीन की जा रही है. ये जाँच पूरी करने के लिए छह सप्ताह का समय दिया गया है.
मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच छिड़े संघर्ष को तीन महीने से भी अधिक समय बीत चुका है. अभी तक अलग-अलग मामलों में 300 के क़रीब लोगों को गिरफ़्तार किया जा चुका है.
इस बीच मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदायों के बीच तीन महीने से जारी संघर्ष के बीच हिंसक झड़पें एक बार फिर तेज़ हो गई हैं.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शनिवार रात इम्फाल वेस्ट ज़िले में कम से कम 15 घरों को जला दिया गया.
हालांकि, टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि ताज़ा हिंसा में 6 लोगों की मौत हो गई है.
इसको लेकर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर निशाना साधा है.
एक ट्वीट में कांग्रेस ने कहा है, "ख़बरों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में 6 लोगों की मौत हो गई. कई जगह उपद्रव भी हुए. देश का एक हिस्सा जल रहा है और पीएम मोदी अपनी दुनिया में मगन हैं. उन्हें फर्क नहीं पड़ता."
समाचार एजेंसी पीटीआई को शुक्रवार को बिष्णुपुर ज़िले में भी पिता-बेटे सहित कुल तीन लोगों की मौत हो गई थी. पुलिस के अनुसार इन तीनों की सोते समय हत्या की गई और बात में तलवार से काटा गया. पुलिस के अनुसार, हमलावर चुराचांदपुर से आए थे.
इस हिंसा में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग घायल हो गए हैं. ये हिंसा तीन मई को मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के ख़िलाफ़ निकाली गई कुकी समुदाय के मार्च के बाद शुरू हुई थी.