कर्नाटक विधानसभा के मौजूदा सत्र में सरकारी कागज फाड़कर डिप्टी स्पीकर के ऊपर फेंकने को लेकर बीजेपी के 10 विधायकों को निलंबित कर दिया गया है जिनमें चार पूर्व मंत्री हैं.
बीजेपी विधायक बेंगलुरु में विपक्षी पार्टियों की मीटिंग में आने वाले नेताओं के लिए वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों की तैनाती के मुद्दे पर चर्चा कराए जाने की मांग करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे, जिसकी अनुमति नहीं दी गई.
निलंबित किए गए विधायकों में डॉ. अश्वथ नारायण, आर अशोक, ए. जनेंद्र, अरविंद बेलाड, सुनील कुमार, भारत शेट्टी, वेदव्यास कामथ, यशपाल सुवर्णा, डी मुनीराज और उमाकांत कोटियां शामिल हैं.
सरकार की ओर से कहा गया कि अधिकारियों की तैनाती में किसी भी नियम का उल्लंघन नहीं किया गया और ज़रूरी प्रोटोकॉल के तहत ही ऐसा किया था.
भारी हंगामे के बीच सदन को सुबह स्थगित कर दिया गया. शाम को जब सत्र शुरू हुआ तो बीजेपी विधायक इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए स्पीकर के आसन के पास चले गए. उस समय डिप्टी स्पीकर रुद्रप्पा लमानी मौजूद थे.
जब डिप्टी स्पीकर ने विधायकों से शांत होने को कहा तो वे और उग्र हो गए और नारेबाज़ी के साथ अध्यक्ष के आसन के पास आकर कागज फाड़ दिए और इसे लमानी पर फेंकने लगे.
इसके बाद स्पीकर यूटी खादर ने संचालन संभाला, जिसके बाद क़ानून और संसदीय मामलों के मंत्री एचके पाटिल ने एक प्रस्ताव पेश किया जिसमें 10 विधायकों को निलंबित किए जाने की मांग की गई.
इसमें सदन के प्रति असम्मान दिखाने और डिप्टी स्पीकर का अपमान करने के आरोप लगाए गए.
जब बीजेपी सदस्यों ने सदन से बाहर जाने से इनकार किया तो मार्शल की मदद से निलंबित विधायकों को बाहर किया गया.
इनमें एक बीजेपी विधायक बासनगौड़ा पाटिल यतनाल की तबीयत ख़राब हो गई और उन्हें अस्पताल ले जाना पड़ा.
कुछ कांग्रेस विधायकों ने मीडिया को बताया कि बीजेपी विधायकों ने डिप्टी स्पीकर का इसलिए अपमान किया क्योंकि वो दलित जाति से आते हैं.
पूर्व मुख्यमंत्री बासवराज बोम्मई ने कहा, “सरकार लोकतंत्र का गला घोंटने की कोशिश कर रही थी. जबतक ये निलंबन वापस नहीं होता, हम सदन का बहिष्कार करेंगे.”
बोम्मई ने कहा, “हम स्पीकर के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाएंगे.”
बाद में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सदन में कहा, “बीजेपी इस सच्चाई को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है कि हम अपनी पांच गारंटी के वायदे को लागू कर रहे हैं. उनके खुद के सांसद वीरेंद्र हेगड़े ने धर्मस्थलों पर बड़ी संख्या में जाने वाली महिलाओं की मदद के लिए मुझे खुद चिट्ठी लिख कर धन्यवाद दिया था."
"उन्होंने लिखा कि लोग मेरे नाम से पूजा कर रहे हैं क्योंकि महिलाओं को लिए फ्री बस ट्रैवल की गारंटी दी गई."”