प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को फ्रांस की दो दिनों की यात्रा
पर पेरिस पहुंच गए हैं. लेकिन वहाँ उनके पहुँचने के कुछ घंटे पहले यूरोपीय संसद ने मणिपुर में पिछले दो महीने से जारी हिंसा पर चिंता
जताई है.
पूर्वी फ्रांस के स्ट्रॉसबर्ग में स्थित यूरोपीय संसद ने भारत सरकार से इस जातीय और सांप्रदायिक हिंसा पर रोक लगाने और सभी धार्मिक
अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए जरूरी सभी क़दम उठाने के लिए पुरजोर अपील की है.
क्या कहा गया है इस प्रस्ताव में?
भारत के मणिपुर में मई 2023 से जारी हालिया हिंसक झड़पों में कम
से कम 120 लोगों
की मौत हो चुकी है,
50 हज़ार लोग विस्थापित हो गए हैं और 1,700 घर और 250 चर्च
बर्बाद कर दिए गए हैं.
प्रस्ताव के अनुसार, अल्पसंख्यक समुदायों के प्रति असहिष्णुता ने ताज़ा हिंसा में योगदान दिया है. राजनीति से प्रेरित विभाजक नीतियों को लेकर चिंताएं हैं, जो इलाके में हिंदू बहुसंख्यकवाद को बढ़ावा दे रही है.
मणिपुर की राज्य सरकार ने इंटरनेट कनेक्शन पर रोक लगाने के साथ मीडिया की रिपोर्टिंग में गंभीर रुकावटें डाली हैं. सुरक्षा बलों को हाल की कई हत्याओं में लिप्त पाया गया है.
यूरोपीय संसद ने भारत के अलावा वेनेजुएला और किर्गिस्तान पर भी प्रस्ताव जारी किए हैं. वेनेजुएला की सरकार से देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाने की अपील की गई है.
वहीं किर्गिस्तान में मीडिया पर से दबाव हटाने वाला प्रस्ताव जारी करके सरकार से अनुरोध किया गया है.
भारत के विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने भारत के अख़बार ‘द हिंदू’ से कहा है, ''ये पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है. हमें पता है कि यूरोपीय संसद में क्या चल रहा है. हमने उनसे इस बारे में बात की है. लेकिन हम ये भी बता दें कि ये पूरी तरह भारत का आंतरिक मामला है.’’
नई दिल्ली में उन्होंने कहा कि भारत ने यूरोपीय संसद के सांसदों को इस मुद्दे को उठाने से रोकने की कोशिश की थी. भारत ने इस मुद्दे पर अपना नज़रिया उनके सामने रखा था.
हालांकि उन्होंने अख़बार को एक मणिपुरी अख़बार में छपे इस ख़बर के बारे में बताने से साफ इनकार कर दिया कि भारत सरकार ने इस मुद्दे पर लॉबिइंग के लिए ब्रसेल्स में एक कंपनी ‘अल्बेर एंड जिजर’ को हायर किया है.
इस कंपनी की सेवा यूरोपीय सांसदों से संपर्क करने के ली गई थी. कहा जा रहा है कि भारत सरकार की ओर से उन्हें इस बारे में चिट्ठी भेजी गई थी.