बिहार के सरकारी स्कूलों में 1.70 लाख पदों पर होने वाली नियुक्ति में डोमिसाइल नीति हटाने के विरोध में शिक्षक अभ्यर्थियों ने शनिवार को जमकर विरोध प्रदर्शन किया.
राजधानी पटना के गांधी मैदान से लेकर डाकबंग्ला चौराहे और पटना जंक्शन तक पुलिस ने आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज किया.
दरअसल, बिहार सरकार ने हाल ही में शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में एक संशोधन किया है जिसके मुताबिक दूसरे राज्य के निवासी भी बिहार के सरकारी स्कूलों में अध्यापक बन सकेंगे.
बता दें बीती 27 जून को कैबिनेट की बैठक में 'बिहार राज्य विद्यालय अध्यापक (नियुक्ति, स्थानान्तरण, अनुशासनिक कार्रवाई एवं सेवाशर्त) (संशोधन), नियमावली 2023 को स्वीकृति दी गई थी.
इससे राज्य में विद्यालय अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लिए बिहार का स्थानीय निवासी होना अनिवार्य नहीं रह गया है.
नीतीश सरकार के इस फैसले से नाराज बिहार प्रारंभिक युवा शिक्षक संघ ने 1 जुलाई को महाआंदोलन का आह्वान किया था.
जिसके बाद सुबह से ही शिक्षक अभ्यर्थी पटना के गांधी मैदान स्थित गांधी मूर्ति के पास जुटने शुरू हो गए थे.
स्थिति को भांपते हुए पहले पटना पुलिस ने गांधी मैदान के गेट्स को बंद कर दिया लेकिन आंदोलनकारियों का एक धड़ा गांधी मैदान के पास जेपी गोलंबर तक पहुंच गया था.
जेपी गोलंबर पर आंदोलनकारियों की पुलिस से हल्की नोंकझोंक हुई.
इस बीच आंदोलनरत अभ्यर्थियों का दूसरा जत्था डाकबंग्ला के पास पहुंचकर प्रदर्शन करने लगा जिसे पुलिस ने रोकने की कोशिश की तो पत्थरबाज़ी शुरू हो गई.
इसके बाद पुलिस ने अभ्यर्थियों पर लाठीचार्ज करके उन्हें तितर बितर किया.
मौके पर मौजूद डीएसपी (लॉ एंड आर्डर) नुरूल हक ने बताया, "प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से हटा दिया गया है. कोई भी गैर कानूनी काम करेंगे या ट्रैफिक रोकेंगे तो उन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. कांड दर्ज किया जाएगा. अभी आंदोलनकारी हट गए हैं."
टीईटी-एसटीईटी नियोजित शिक्षक (गोप) गुट के प्रवक्ता अश्विनी पांडेय ने बीबीसी को बताया, "16 राज्यों में डोमिसाइल नीति लागू है. तेजस्वी यादव के मैनिफैस्टो में ये बात शामिल है. लेकिन अचानक सरकार ने डोमिसाइल नीति हटा दी."
"सरकार शिक्षक नियोजन को लेकर जो मनमाने फैसले ले रही है उसके खिलाफ हम लोग 11 जुलाई को विधानसभा मार्च करेंगे और हम लोगों ने अपना संरक्षक पालीगंज से भाकपा माले विधायक संदीप सौरभ को बनाया है."
आंदोलन में शामिल छात्र नीरज कुमार ने बीबीसी से कहा, "सरकार हमारे पेट पर लात मारना चाहती है. बिहार सरकार पहले अपने युवाओं को रोजगार दें, उसके बाद दूसरे राज्य के युवाओं का भविष्य देखें. बाकी शिक्षा मंत्री को हमारी काबिलियत पर भरोसा कम हो गया है."
इससे पहले शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने डोमिसाइल नीति को हटाने को सही कदम ठहराते हुए समर्थन कहा था कि बिहार के सरकारी स्कूलों के लिए विज्ञान और गणित के योग्य टीचर नहीं मिलते.
बिहार सरकार की डोमिसाइल नीति हटाने का विरोध बीजेपी के साथ साथ भाकपा माले भी कर रही है.
भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल ने डोमिसाइल नीति हटाने को बेहद 'अप्रत्याशित और अनुचित' बताया है.