लॉ कमीशन ने मांगी यूनिफॉर्म सिविल कोड पर आम लोगों से राय
बाइसवें विधि आयोग ने यूनीफ़ॉर्म सिविल कोड के मुद्दे पर परामर्श प्रक्रिया को एक बार फिर शुरू करने का फ़ैसला किया है.
इसके तहत आयोग ने आम लोगों और सरकारी मान्यता प्राप्त धार्मिक संस्थाओं के विचार मांगे हैं.
पीआईबी के मुताबिक़,जो लोग यूनीफ़ॉर्म सिविल कोड पर अपने विचार रखना चाहते हैं वे विधि आयोग यानी लॉ कमीशन की वेबसाइट पर जाकर नोटिस के जारी होने के 30 दिन के भीतर अपनी राय रख सकते हैं.
इससे पहले 21वें विधि आयोग ने भी इस विषय पर अध्ययन किया था और इस पर और चर्चा की ज़रूरत बताई थी.
इस बात को 3 साल से ज़्यादा समय बीत चुका है. अब इस प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू किया जा रहा है.
क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?
शादी, तलाक़, उत्तराधिकार और गोद लेने के मामलों में भारत में विभिन्न समुदायों में उनके धर्म, आस्था और विश्वास के आधार पर अलग-अलग क़ानून हैं.
हालांकि, देश की आज़ादी के बाद से समान नागरिक संहिता या यूनिफ़ॉर्म सिविल कोड की मांग चलती रही है.
इसके तहत इकलौता क़ानून होगा जिसमें किसी धर्म, लिंग और लैंगिक झुकाव की परवाह नहीं की जाएगी.
यहां तक कि संविधान कहता है कि राष्ट्र को अपने नागरिकों को ऐसे क़ानून मुहैया कराने के 'प्रयास' करने चाहिए.
लेकिन एक समान क़ानून की आलोचना देश का हिंदू बहुसंख्यक और मुस्लिम अल्पसंख्यक दोनों समाज करते रहे हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार इस विचार को वापस उठा रही है.
बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और मध्य प्रदेश यूसीसी पर चर्चा कर रहे हैं.