प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बजट सत्र के
दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए लोकसभा में बोल रहे हैं.
सबसे पहले उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का धन्यवाद दिया. उन्होंने चर्चा में शामिल सभी सदस्यों का आभार जताया.
मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद करता हूं और यह मेरा सौभाग्य रहा है कि पहले भी कई बार उनके अभिभाषण पर धन्यवाद करने का अवसर मिला है, लेकिन इस बार धन्यवाद के साथ उनका अभिनंदन भी करना चाहता हूं.
गणतंत्र के मुखिया के रूप में उनकी उपस्थिति ऐतिहासिक तो है ही, देश की कोटि-कोटि बेटियों के लिए यह बहुत बड़ा प्रेरणा का अवसर भी है.
यहां चर्चा में हर किसी ने अपने अपने आंकड़े और तर्क दिए. अपनी रुचि, प्रवृति और प्रकृति के अनुसार अपनी बातें रखी और जब इन बातों को समझने का प्रयास करते हैं, तो यह भी ध्यान में आता है कि किसकी कितनी क्षमता, योग्यता और इरादा है. देश इन सभी का मूल्यांकन करता है.
राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप
उन्होंने आरोप लगाया कि एक बड़े नेता ने माननीया राष्ट्रपति महोदया का अपमान भी किया. उन्होंने जनजातीय समाज का अपमान करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनके अंदर नफ़रत का जो भाव था, वो सामने आ गया.
उन्होंने कहा, "जब राष्ट्रपति का भाषण हो रहा था तो कुछ लोग कन्नी भी काट गए और एक बड़े नेता राष्ट्रपति का अपमान भी कर चुके हैं. जनजातीय समुदाय के प्रति नफ़रत और उनके प्रति उनकी सोच क्या है, ये भी दिखाई दी. जब टीवी पर इस प्रकार की बातें कही गई तो अंदर पड़ा नफ़रत का भाव बाहर आ गया."
पीएम मोदी ने कहा कि नेताओं के भाषणों को सुनने के बाद ऐसा लगा कि किसी को भी राष्ट्रपति महोदया के अभिभाषण पर कोई ऐतराज नहीं है.
उन्होंने कहा कि मुझे ख़ुशी है कि किसी ने भी उनके अभिभाषण का विरोध नहीं किया. इससे बड़ी गौरव की बात क्या होगी.
उन्होंने कहा कि एक नेता के संबोधन के बाद पूरा इकोसिस्टम उछल रहा था और कुछ लोग तो कह रहे थे कि ये हुई न बात
पीएम मोदी ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर तंज़ कसते हुए कहा, ''शायद नींद बहुत अच्छी आई होगी, शायद उठ भी नहीं पाए होंगे. ऐसे लोगों के लिए ही कहा गया है- ये कह कह कर हम दिल को बहला रहे हैं, वो अब चल चुके हैं वो अब आ रहे हैं.''
कोरोना से निपटने के लिए थपथपाई अपनी सरकार की पीठ
100 साल में आई हुई यह भयंकर महामारी, दूसरी तरफ युद्ध की स्थिति, बंटा हुआ विश्व…इस स्थिति में भी, संकट के माहौल में, देश जिस प्रकार से संभला है, इससे पूरा देश आत्मविश्वास और गौरव से भर रहा है.