बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के रामचरितमानस पर दिए बयान पर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है.
इस मुद्दे पर अब बिहार के सत्ताधारी महागठबंधन के साझेदार जेडीयू और आरजेडी भी आमने-सामने हैं.
शनिवार को जेडीयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने पटना के पंचरूपी हनुमान मंदिर में मानस पाठ किया. नीरज कुमार ने बीबीसी से कहा है कि भारत में 'राम रहीम की परंपरा रही है.'
नीरज कुमार का कहना है, “राम को गांधी, लोहिया और आंबेडकर भी मानते थे. हमारे देश में संविधान है. अगर कोई बात होगी तो न्यायपालिका देखेगी. शिक्षा मंत्री का इस तरह से बोलना उन्माद की राजनीति है, ”
इससे पहले बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने रामचरितमानस को 'नफ़रत फ़ैलाने वाला ग्रंथ' कहा था. उन्होंने एक युग में मनुस्मृति और दूसरे युग में रामचरितमानस को नफ़रत फ़ैलाने वाला ग्रंथ भी कहा था.
इस मुद्दे पर बीजेपी लगातार महागठबंधन सरकार पर हमला कर रही है. शनिवार को बीजेपी युवा मोर्चा की तरफ से बिहार की राजधानी पटना में विरोध प्रदर्शन किया है.
बीजेपी कार्यकर्ताओं समेत, बजरंग दल और विश्व हिन्दू परिषद ने कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किया है. वो इस मुद्दे पर शिक्षा मंत्री को हटाने की मांग कर रहे हैं.
'कार्रवाई करना न करना आरजेडी का मामला'
वहीं जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा है कि हम सारे धर्म ग्रंथों का सम्मान करते हैं. कार्रवाई करना न करना ये उनका (आरजेडी) मामला है.
इस मुद्दे पर आरजेडी की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. हालांकि आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर के बयान का समर्थन कर चुके हैं.
बिहार में आरजेडी के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी ने इसे लेकर जगदानंद सिंह का विरोध किया है. उन्होंने कहा है कि बगैर समझे जगदानंद सिंह को इस मुद्दे पर चंद्रशेखर का समर्थन करने का कोई अधिकार नहीं है.
शिवानंद तिवारी ने बीबीसी से कहा, “बीजेपी युवा मोर्चा और फलाना, ठेकाना जो धर्म के ठेकेदार बने हुए हैं, इनको धर्म के बारे में कोई ज्ञान नहीं है. इनकी कोई समझदारी नहीं है. हमारा वैचारिक समर्पण लोहिया, गांधी और जेपी के साथ रहा है. इन सब ने राम को आदर्श पुरुष माना है.”
शिवानंद तिवारी ने कहा, ‘’लोहिया ने राम की तरह व्यक्तित्व की प्रार्थना की है. मैं नहीं कहता कि चंद्रशेखर ने जानबूझकर ऐसा बयान दिया है, लेकिन राम को बगैर समझे हुए बयान देना सही नहीं है.’’
शिवानंद तिवारी ने कहा, “तुलसीदास ने राम से सबरी का झूठा बेर खिलवाया है, सबरी जीतनराम मांझी की जाति है. लोग उसी से अपना ऑरिजिन मानते हैं. इतना बड़ा ग्रंथ है उसमें किसी चौपाई पर आपका विरोध है तो आप पूरे ग्रंथ को गलत नहीं बता सकते. आपको देखना होगा कि वो बात ग्रंथ में किस पात्र ने कहा है.”
शिवानंद तिवारी ने सवाल उठाया है कि जो लोग विरोध कर रहे हैं, उन्होंने कभी रामचरित मानस को पढ़ा है. गांधी की बातों में भी विरोध होता था तो लोग पूछते थे कि हम कौन-सी बात माने. इसपर गांधी कहते थे कि जो नई वाली बात है. इसका मतलब यह नहीं है कि गांधी ग़लत थे बल्कि लोग अनुभव से सीखते हैं.