बिहार के बक्सर ज़िले के चौसा में हालात फिलहाल काबू में आ गए हैं. बड़ी संख्या में पुलिस बल और अधिकारियों की तैनाती के बाद अब वहां शांति बनी हुई है.
बनारपुर गांव के मुखिया प्रतिनिधि रोहित ओझा ने बीबीसी को बताया, "बनारपुर गांव में किसान जमीन के मुआवजे को लेकर 90 दिनों से धरना दे रहे थे. पुलिस ने उन पर बल प्रयोग किया और मंगलवार देर रात गिरफ्तारी के लिए जिस तरह से आंदोलन कर रहे किसानों के परिवार वालों के साथ व्यवहार किया उससे हंगामा शुरू हुआ."
दरअसल चौसा के बनारपुर गांव में केंद्र सरकार ने थर्मल पावर प्लांट बनाया है. इसके लिए साल 2013 के रेट पर जमीन का मुआवजा दिया गया लेकिन अब इस प्लांट के लिए करीब 6 से 7 किलोमीटर की रेल लाइन और पाइप लाइन की भी जरूरत है और उसके लिए किसानों की जमीन ली जा रही है.
किसान इस ज़मीन का मुआवजा नए दर से देने की मांग कर रहे हैं. इसी को लेकर किसानों ने मंगलवार को प्लांट के दरवाजे पर ताला भी जड़ दिया और वहां का कामकाज बंद करा दिया.
इसी मांग से जुड़े स्थानीय व्यक्ति नरेंद्र तिवारी ने बीबीसी को बताया कि रेल लाइन और पाइप लाइन के लिए करीब 225 एकड़ जमीन ली जा रही है जिसमें 150 परिवार प्रभावित हो रहे हैं.
उनका आरोप है कि बिना किसी सूचना के कंपनी ने जमीन पर काम शुरू करा दिया जिसका विरोध किया गया था और उसी के बाद मंगलवार रात पुलिस प्रदर्शन करने वालों के घर उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची थी.
वहीं बक्सर पुलिस के मुताबिक़ मंगलवार शाम को करीब 600 ग्रामीणों ने राज्य सरकार के पावर प्लांट का घेराव किया. प्लांट की गाड़ियों के अलावा प्रशासन की गाड़ियों में तोड़फोड़ की. बक्सर पुलिस का आरोप है कि इस हंगामे की वजह से पावर प्लांट का काम भी बंद करना पड़ा.
बक्सर के एसपी मनीष कुमार ने बीबीसी को बताया कि बुधवार सुबह भी करीब 1000 किसान इकट्ठा हो गए और उन लोगों ने भारी हंगामा किया. पुलिस ने अपने बचाव में बल प्रयोग का भी इस्तेमाल किया.
एसपी के मुताबिक इसमें ग्रामीणों को चोट नहीं आई है, जबकि कल से आज तक 4 पुलिस वाले घायल हुए हैं.
इससे पहले केंद्रीय मंत्री और बक्सर के सांसद अश्विनी चौबे ने बक्सर में पुलिस की कार्रवाई की निंदा की है. उन्होंने नीतीश कुमार की अगुवाई वाली महागठबंधन सरकार को इसके लिए ज़िम्मेदार ठहराया है.
उन्होंने दो ट्वीट में लिखा, "बक्सर में किसानों के घर में घुसकर पुलिस ने जो गुंडागर्दी की है, यह घोर निंदनीय है. क्या किसान अपराधी थे, वारंटी थे, जो रात में उनके घर में घुस कर मारपीट की गई. महिलाओं के साथ गाली गलौज और अमानवीय व्यवहार किया गया. महागठबंधन की सरकार किसान विरोधी है."
उन्होंने लिखा, "किसानों के साथ अत्याचार को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. बिहार में छात्र नौकरी मांग रहे हैं, तो पुलिस पीट रही है. किसान हक मांग रहे हैं तो पुलिस बर्बरता कर रही है. बिहार में पुलिस और अपराधी दोनों बेलगाम हो गए हैं. नीतीश बाबू यही जंगलराज है, धृतराष्ट्र मत बनिए."