1971 भारत-पाकिस्तान युद्ध में लोंगेवाला के हीरो भैरों सिंह राठौड़ का निधन
1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बीएसएफ के हीरो रिटायर्ड नाइक भैरों सिंह राठौड़, जो लोंगेवाला पोस्ट अपनी बहादुरी के लिए प्रसिद्ध हुए और जिनका किरदार सुनील शेट्टी ने बॉलीवुड फिल्म 'बॉर्डर' में निभाया था, सोमवार को जोधपुर में निधन हो गया. वे 81 साल के थे.
बीएसएफ़ ने एक ट्वीट कर इसकी जानकारी दी. बीएसएफ़ की तरफ़ से कहा गया, "डीजी बीएसएफ़ और सभी रैंक नाइक (रिटा.) भैरों सिंह, सेना मेडल, 1971 की लड़ाई के लोंगेवाला के हीरो को श्रद्धांजलि देते हैं.बीएसएफ़ उनकी बहादुरी, जज़्बे और काम के प्रति निष्ठा को सलाम करता है. प्रहरी परिवार इस कठिन घड़ी में उनके परिवार के साथ खड़ा है."
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी. पीएम मोदी ने ट्विटर पर लिखा, "नाइक (रिटायर्ड) भैरों सिंह जी को उनकी देश सेवा के लिए याद किया जाएगा. उन्होंने इतिहास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर बहुत बहादुरी दिखाई. उनके निधन से दुखी हूं. इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं.ओम शांति."
गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें श्रद्धांजलि दी.
अभिनेता सुनिल शेट्टी ने भी उन्हें याद किया. रिटायर्ड नाइक भैरों सिंह राठौड़ के बेटे सवई सिंह ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि उनके पिता को 14 दिसंबर को जोधपुर एम्स में भर्ती किया गया था.
"डॉक्टरों ने बताया कि मुमकिन है कि उन्हें ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, पिछले कुछ दिनों से वो आईसीयू में ले जाना पड़ रहा था."
बीएसएफ़ के एक प्रवक्ता ने बताया कि उनके शव को जोधपुर में बीएसएफ़ से ट्रेनिंग सेंटर ले जाया जाएगा जहां उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी. मंगलवार को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
राठौड़ की तैनाती जैसलमेर के थार के रेगिस्तान में थी. वो बीएसएफ़ की एक छोटी टुक़ड़ी को कमांड कर रहे थे. इस टुकड़ी ने सेना के 120 जवानों की कंपनी का साथ दिया था.
ये इन लोगों की बहादुरी थी जिसके कारण 5 दिसंबर, 1971 को इस जगह पर एक हमलावर पाकिस्तानी ब्रिगेड और टैंक रेजिमेंट को ध्वस्त कर दिया था.
उन्हें 1972 में बहादुरी के लिए सेना मेडल दिया गया था. उनके बारे में बीएसएफ़ के रिकॉर्ड में कहा गया है, "जब पंजाब के 23 जवानों में से एक मारा गया, लांस नायक भैरों सिंह ने अपनी हल्की मशीन गन ली और आगे बढ़ते दुश्मन को भारी नुकसान पहुँचाया."
"यह केवल उनके साहस और करो या मरो का दृढ़ संकल्प था जिसने उन दिन जीत हासिल की और लांस नायक भैरों सिंह अपने अन्य साथियों के लिए एक महान प्रेरणा बन गए."