उत्तर प्रदेश में मदरसा बोर्ड का सर्वे अभियान 15 नवंबर को समाप्त होने जा रहा है. प्रदेश के मदरसा बोर्ड के मुताबिक तकरीबन 65 दिन से चलाए गए इस सर्वे में पूरे राज्य में लगभग 8500 गै़र मान्यता प्राप्त मदरसे पाए गए हैं.
10 सिंतबर को शुरू हुए इस सर्वे के बारे में जानकारी देते हए मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉ इफ़्तेख़ार अहमद जावेद ने बताया कि, "जो मदरसे मदरसा बोर्ड से मान्यता प्राप्त हैं उनकी संख्या 16,513 है. वो अलग है. 75 जिलों में सर्वे हुआ, उसमें से साढ़े आठ हजार के आस-पास गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का डेटा आया है."
डॉ अहमद के मुताबिक सबसे ज़्यादा गै़र मान्यता प्राप्त मदरसे, तकरीबन 550 मदरसे, पश्चिम उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले में पाए गए.
सर्वे के नतीजों के इस्तेमाल के बारे में इस बारे में डॉक्टर इफ़्तेख़ार अहमद कहते हैं कि इस सर्वे के बाद, "कितने लोग (मदरसे) हमसे जुड़ते हैं, कितने लोगों (मदरसों) को हम मान्यता देते हैं, सब चीजें आगे बैठकों में तय होगी. मान्यता के लिए बहुत सारे लोग दिलचस्पी ले रहे है. सात सालों से मदरसा बोर्ड ने किसी मदरसे को मान्यता नहीं दी है. इस लिए भी संख्या ज़्यादा हो गई है."
सर्वे में सामने आए जो मदरसे मदरसा बोर्ड की मान्यता नहीं लेंगे तो क्या वो गैरकानूनी माने जायेंगे?
इस सवाल पर मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डॉक्टर इफ़्तेख़ार अहमद कहते हैं, "नहीं ये बहुत गलत लाइन है. ऐसा नहीं करना चाहिए किसी को. शिक्षा के मामले में किसी को ऐसा नहीं बोलना चाहिए. वो (गै़र मान्यता प्राप्त मदरसे) बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रहे हैं."
"चूंकि उनको सात साल से मदरसा बोर्ड से मान्यता नहीं मिल रही है, तो वो गैर मान्यता कहलाए. लेकिन हम डेटा कलेक्शन के द्वारा आने वाले दिनों में लोगों को जोड़ने का काम करेंगे. ज़्यादातर मदरसे हमसे जुड़ना चाहते हैं. क्योंकि अभी तक मान्यता हो नहीं रही थी इसलिए वो बंद पड़े थे. लेकिन उन्हें ग़ैरक़ानूनी नहीं कहा जा सकता."
क्या अब दारुल-उलूम देवबंद, लखनऊ का नदवा जैसी बड़े इस्लामिक शिक्षा संस्थाओं को भी लेनी होगी मदरसा बोर्ड से मान्यता?
डॉ. अहमद कहते हैं, "वो सब ज़रूरत नहीं हैं क्योंकि हमारे पोर्टल पर देखेंगे तो उसके चौथे नंबर पर जो है गवर्नमेंट के सरकारी आदेश वगैरह लिखे हुए हैं. उसमें हमारी नियमावली बकायदा है. एक्ट है जो असेंबली से पारित है, उसमे लिखा हुआ है कि जो इस तरह के मदरसे हैं, दारुल-उलूम देवबंद है, नदवा है, सलफिया है, जो इंटरनेशनल लेवल के मदरसे हैं, दुनिया के 57 देशों में इनका काम है. ये बड़े मदरसे हैं. इनके यहाँ से बच्चे निकल कर विदेशों में जाते हैं."
वो कहते हैं, "एक्ट में लिखा है कि इन मदरसों में जाकर के आप ट्रेनिंग लीजिए. जो छोटे मदरसे हमारे यहाँ चल रहे हैं वो यहाँ जाकर ट्रेनिंग लें. एक्ट में ऐसी बातें लिखी हुई हैं. नियमावली 16 में ऐसे 9 मदरसों का नाम लिखा हुआ है, जिनकी मार्कशीट और सर्टिफिकेट वो मदरसा बोर्ड के समकक्ष समझी जाएगी. तो ज़ाहिर है कि वो हमारे समान्तर हैं तो उनको फिर हम मान्यता क्यों देंगे?"
वहीं उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धरम पाल सिंह ने कहा है कि, "इस रिपोर्ट का एक रिव्यू किया जाएगा कि वो तय मानकों पर तल रहे हैं या नहीं."