अमेरिकी कांग्रेस की स्पीकर नैंसी पेलोसी की संभावित ताइवान यात्रा पर भारत स्थित चीन के दूतावास ने भी प्रतिक्रिया व्यक्त की है.
चीन के दूतावास ने कहा है कि अगर पेलोसी ताइवान जाती हैं, तो इसके परिणाम अमेरिका को भुगतने पड़ेंगे.
भारत में चीन के दूतावास के प्रवक्ता वैंग शियोज़ियान ने ट्विटर पर लिखा, "वन-चाइना नीति चीन-अमेरिका संबंधों का राजनीतिक आधार है. चीन 'ताइवान स्वतंत्रता' की ओर अलगाववादी क़दमों और बाहरी ताक़तों के हस्तक्षेप का पूरी तरह से विरोध करता है और 'ताइवान की स्वतंत्रता' की बात करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है."
उन्होंने लिखा, "स्पीकर पेलोसी की ताइवान की यात्रा से चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप होगा, ताइवान में शांति और स्थिरता को ख़तरा पहुँचेगा, चीन-अमेरिका संबंध कमज़ोर होंगे और इसके परिणाम गंभीर होंगे."
इसके अलावा उन्होंने लिखा कि अमेरिका को परिणाम भुगतने होंगे. अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, "लोगों की राय को दरकिनार नहीं किया जा सकता. आग से खेलने वालों को नतीजा भुगतना होगा. अगर अमेरिका वहां जाने पर अड़ा रहता है और चीन को चुनौती देता है तो उसे जवाब मिलेगा. इसके परिणाम अमेरिका को भुगतने पड़ेंगे."
नैंसी पेलोसी एशिया के दौरे पर हैं और इस दौरान वो ताइवान भी जा सकती है. अमेरिका के कैलिफ़ोर्निया से डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद नैंसी पेलोसी अमेरिका की प्रतिनिधि सभा की स्पीकर हैं.
वे राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के बाद अमेरिका की तीसरी सबसे ताक़तवर शख़्सियत हैं. अगर वे ताइवान की यात्रा करती हैं तो वे साल 1997 के बाद ऐसा करने वालीं अमेरिका की सबसे वरिष्ठ नेता होंगी.
चीन स्व-शासित ताइवान को एक अपने एक प्रांत के रूप में देखता है. चीन का मानना है कि उसे देश का हिस्सा होना चाहिए. ऐसा करने के लिए चीन सैन्य हस्तक्षेप भी कर सकता है. दूसरी ओर, ताइवान ख़ुद को एक आज़ाद मुल्क मानता है.