रूस-यूक्रेन के बीच अनाज की सप्लाई को लेकर हुआ अहम समझौता, निगरानी के लिए तुर्की में बनेगा सेंटर

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रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से दुनिया के बड़े हिस्से में गहराए खाद्यान्न संकट के कुछ हद तक कम होने के आसार बन गए हैं.
शुक्रवार को रूस और यूक्रेन ने 'ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव' समझौते पर दस्तखत किए जिसके मुताबिक़ यूक्रेन से अब गेहूं और मक्के का निर्यात जल्द शुरू होगा. समझौता चार महीनों के लिए होगा.
रूस ने कहा है कि वह समुद्र के रास्ते अनाज की ढुलाई करने वाले मालवाही जहाजों पर हमले नहीं करेगा. वह उन बंदरगाहों पर भी हमले नहीं करेगा, जहां से अनाज की सप्लाई हो रही है.
संयुक्त राष्ट्र ने इसे ऐतिहासिक समझौता करार दिया है.
समझौते के तहत यूक्रेन भी कुछ शर्तें मानने को तैयार हो गया है. इसके तहत उसे खाद्यान्न सप्लाई ले जाने वाले जलपोतों की जांच की अनुमति देनी होगी. जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि कहीं इनके ज़रिए हथियारों की सप्लाई तो नहीं की जा रही है.
रूस और यूक्रेन के बीच यह समझौता तुर्की के शहर इंस्ताबुल में आयोजित एक समारोह में हुआ. इसमें तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप्प अर्दोआन ने कहा कि इस समझौते से दोनों देशों के बीच भविष्य में सुलह का रास्ता खुल सकता है.
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समझौते की निगरानी के लिए तुर्की में बनेगा सेंटर
समझौते के तहत रूस और यूक्रेन अनाज सप्लाई ले जाने वाले जहाजों को ब्लैक सी में सुरक्षित गलियारा देने के लिए राजी हो गए हैं.
इन जहाजों के रास्ते में अड़चन न आए इसके लिए इनके साथ यूक्रेन का सुरक्षा दस्ता चलेगा. यह दस्ता समुद्र में बिछाई बारूदी सुरंग से बचने में मदद करेगा. अगर रास्ते में बिछाई बारूदी सुरंगों को हटाना होगा तो यह काम कोई तीसरा देश करेगा.
इस समझौते के तहत खाद्यान्न सप्लाई के काम के समन्वय और निगरानी के लिए इंस्ताबुल में एक सेंटर बनेगा. इसमें संयुक्त राष्ट्र, तुर्की, रूसी और यूक्रेन के अधिकारी काम करेंगे.
समझौता चार महीने के लिए होगा. माना जा रहा है कि यूक्रेन के गोदामों से अनाज बाहर भेजने के लिए ये पर्याप्त वक्त होगा.

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यूएन ने कहा- यह ऐतिहासिक समझौता
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस समझौते के लागू करवाने की अपील करते हुए कहा, "मैं सभी पक्षों से अपील करता हूं कि वो अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में कोई कसर न छोड़ें. हमें शांति के लिए हर कोशिश करनी है. यह खूनी संघर्ष में उलझे दो पक्षों के बीच हुआ अभूतपूर्व समझौता है."
"यह एक ऐसी लड़ाई है जिसमें हर दिन लोग मर रहे हैं. हर दिन लड़ाई और तेज़ होती जा रही है. लेकिन अब ब्लैक सी में उम्मीद की रोशनी दिख रही है. इसके लिए तमाम लोगों ने कोशिश की है. इस मुश्किल वक्त में उम्मीद की यह रोशनी लोगों की दिक्कतें दूर करेगी और शांति सुनिश्चित करेगी.''

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा कि इस समझौते में भूमिका निभाकर उनका देश गर्व महसूस कर रहा है.
उन्होंने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि यह समझौता दुनिया में जारी खाद्यान्न संकट को सुलझाने में अहम भूमिका निभाएगा.
उन्होंने कहा, "दुनिया के एजेंडे में इस संकट को सुलझाना अहम प्राथमिकता है. इस समझौते से हम अफ्रीका से लेकर मध्यपूर्व और अमेरिका से लेकर एशिया तक अरबों लोगों के सामने आए खाद्यान्न संकट को सुलझा सकेंगे."

















