ब्रेकिंग न्यूज़, द्रौपदी मुर्मू होंगी राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए उम्मीदवार: बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा

इमेज स्रोत, ANI
झारखंड की पूर्व राज्यपाल और आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू को भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाया है.
भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने मंगलवार को इसकी घोषणा की.
जेपी नड्डा ने बताया कि पहली बार किसी आदिवासी महिला उम्मीदवार को प्राथमिकता दी गई है. अगर द्रौपदी मुर्मू राष्ट्रपति पद का चुनाव जीतती हैं तो वे देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति होंगी.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 1
एनडीए गठबंधन के द्रौपदी मुर्मू को राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार बनाए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ट्वीट कर अपनी प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने लिखा, "श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी ने अपना जीवन समाज की सेवा और गरीबों, दलितों के साथ-साथ हाशिए के लोगों को सशक्त बनाने के लिए समर्पित कर दिया है. उनके पास समृद्ध प्रशासनिक अनुभव है और उनका कार्यकाल उत्कृष्ट रहा है. मुझे विश्वास है कि वे हमारे देश की एक महान राष्ट्रपति होंगी."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त, 2
आदिवासी नेता द्रौपदी मुर्मू का मुकाबला विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा से होगा.
द्रौपदी मुर्मू ओडिशा के मयूरभंज जिले की रहने वाली हैं और आदिवासी समुदाय से आती हैं. उन्होंने एक शिक्षक के रूप में शुरुआत की और फिर ओडिशा की राजनीति में प्रवेश किया.
साल 1997 में पार्षद का चुनाव जीतकर वे ओडिशा में रायरंगपुर की उपाध्यक्ष बनीं. इसी साल उन्हें बीजेपी के एसटी मोर्चा का राज्य उपाध्यक्ष चुना गया था.
वे मयूरभंज के रायरंगपुर से बीजेपी की टिकट दो बार विधायक (2000-2009) बनीं.
द्रौपदी मुर्मू 2015 से 2021 तक झारखंड की राज्यपाल भी रह चुकी हैं.

















