नेस्ले ने भगवान जगन्नाथ की तस्वीर वाले किटकैट वापस लिए, जताया अफ़सोस
नेस्ले इंडिया ने गुरुवार को बताया है कि उसने बाज़ार से किटकैट चॉकलेट की वह खेप पहले ही वापस ले ली है, जिसके रैपर पर भगवान जगन्नाथ की तस्वीर छपी थी.
स्विस बहुराष्ट्रीय एफएमसीजी कंपनी नेस्ले की भारतीय इकाई नेस्ले इंडिया को सोशल मीडिया पर विरोध का सामना करना पड़ा था.
सोशल मीडिया यूजर्स ने कंपनी पर 'किटकैट' चॉकलेट के रैपर पर पवित्र तस्वीरों का इस्तेमाल कर के धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप लगाया था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, कंपनी ने इस मसले पर खेद जताया है और कहा है कि उसने बीते साल ही इस तरह के रैपर वाले चॉकलेट की खेप को बाजार से वापस ले लिया था.
क्या कहा नेस्ले ने
नेस्ले के प्रवक्ता ने कहा, "हम मामले की संवेदनशीलता को समझते हैं और अगर अनजाने में हमने किसी की भावनाएं आहत की हैं तो उसके लिए खेद व्यक्त करते हैं. हमने ये पैकेट्स बीते साल ही बाज़ार से हटा दिए थे. आपके सहयोग और समर्थन के लिए आभार."
कंपनी के अनुसार, ये चॉकलेट के ट्रैवल पैक थे, जिन्हें कुछ स्थानीय खूबसूरत स्थलों का गुणगान करते हुए छापा गया था. मैगी, नेसकैफ़े, मिल्कमेड, मंच और मिल्किबार जैसे ब्रांड्स नेस्ले के अधीन ही आते हैं.
कंपनी ने बताया कि उसने ओडिशा की संस्कृति को दिखाने के मकसद से चॉकलेट के पैकेट पर 'पट्टचित्र' के डिजाइन छापे थे. पट्टचित्र ओडिशा और पश्चिम बंगाल मेंकपड़े पर की जाने वाली पारंपरिक पेंटिंग को कहा जाता है.
कंपनी ने कहा, "बीते साल, हम चॉकलेट के पैकेटों पर पट्टचित्र वाले डिज़ाइनों के ज़रिए ओडिशा की संस्कृति को उत्सव के तौर पर मनाना चाहते थे. हम लोगों को पट्टचित्र कला और उसके कारीगरों के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते थे. हमारे पिछले अभियानों में भी यह दिखा कि उपभोक्ता ऐसे सुंदर डिज़ाइनों को इकट्ठा करना और रखना पसंद करते हैं."
क्या है पट्टचित्र
पट्टचित्र ओडिशा की पारंपरिक कपड़ा आधारित स्क्रॉल पेंटिंग है.इस कलाकृति का विषय अधिकतर पौराणिक, धार्मिक कहानियां और लोक कथा है.
इसे मूल रूप से अनुष्ठान में इस्तेमाल के लिए और पुरी के तीर्थयात्रियों तथा ओडिशा के अन्य मंदिरों के लिए स्मृति चिह्न के रूप में बनाया गया था.
नेस्ले इंडिया के पास देश में 9 उत्पादन केंद्र हैं, जिनका टर्नओवर साल 2021 में 13 हज़ार 350 करोड़ रुपये रहा.
बीते साल भी नेस्ले इंडिया को किटकैट के पैकेट पर ही मणिपुर के केईबुल लामजाओ नेशनल पार्क को राज्य मेघालय का बताकर छापने के लिए राज्य सरकार की आपत्ति के बाद माफ़ी मांगनी पड़ी थी.