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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में तीन पूर्व बीजेपी नेताओं सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और जॉर्ज फर्नांडीज़ को मरोणपरांत पद्म विभूषण सम्मान से नवाज़ा है.
पवन सिंह अतुल, मोहम्मद शाहिद and अनंत प्रकाश
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में तीन पूर्व बीजेपी नेताओं सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और जॉर्ज फर्नांडीज़ को मरोणपरांत पद्म विभूषण सम्मान से नवाज़ा है.
इन तीन नेताओं के अतिरिक्त पंडित छन्नूलाल मिश्र को भी पद्म विभूषण सम्मान से नवाज़ा है.
इसके अलावा पी वी सिंधू, प्रोफेसर जगदीश एन शेठ, डॉ नीलकंठ रामकृष्ण माधव मेनोन (मरणोपरांत), डॉ. अनिल जोशी, डॉ. एस सी जमीर, प्रोफेसर बालकृष्ण दोशी, मुमताज अली, और महामान्यवर सय्यद मुअज्जम अली (मरणोपरांत) को पद्म भूषण सम्मान दिया है.
इसके साथ ही कुल 61 लोगों को पद्म श्री सम्मान से नवाज़ा गया है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सुषमा स्वराज, अरुण जेटली और जॉर्ज फर्नांडीज़ के योगदान को याद करते हुए कई ट्वीट किए हैं.
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संयुक्त राष्ट्र ने बीते रविवार चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में लाखों लोग भुखमरी का शिकार हो रहे हैं और ये देश तेजी से दुनिया के सबसे भयानक मानवीय संकट की ओर बढ़ रहा है.
संयुक्त राष्ट्र ने दुनिया के तमाम नेताओं से कहा है कि इस संकट के निवारण के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए.
वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के प्रमुख डेविड बीज़ली ने बीबीसी से बात करते हुए अफ़ग़ानिस्तान के मौजूदा हालातों और आने वाले दिनों के ख़तरों को बयां किया.
उन्होंने कहा, “हालात उतने बुरे हैं जितने बुरे हालातों की आप कल्पना कर सकते हैं. हम इस समय दुनिया के सबसे भयानक मानवीय संकट को देख रहे हैं. 95 फीसदी लोगों के पास पर्याप्त खाद्य सामग्री नहीं है. और 23 फीसदी लोग भुखमरी की ओर बढ़ रहे हैं. इनमें से लगभग नब्बे लाख से ज़्यादा लोग अकाल की मार झेल रहे हैं. और सर्दियां आती जा रही हैं. हम इस समय सूखे से बाहर निकल रहे हैं. ऐसे में आने वाले छह महीने काफ़ी ख़तरनाक साबित होने वाले हैं. ये जगह हमारी दुनिया में नरकीय हालातों का सामना करने जा रही है.”
वीज़ली दुनिया भर के नेताओं और अरबपतियों से अपील करके अफ़ग़ानिस्तान के लिए मदद की गुहार लगाना चाहते हैं.
वह कहते हैं, “वैश्विक नेताओं और अरबपतियों, कल्पना करिए कि आपकी छोटी बच्ची, बच्चा और नाती भूख की वजह से मौत के आगोश में जा रहा है. आप वो सब करेंगे जो आपकी क्षमता में होगा. जब दुनिया में चार सौ ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति है तो हमें शर्म आनी चाहिए. (अगर) हम किसी बच्चे को भूख से मरने देते हैं तो हमें शर्म आनी चाहिए. मुझे इस बात की परवाह नहीं है कि वो बच्चा कहां है.”

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साढ़े तीन किलो का चावल का पैक और 88 ग्राम बिस्किट का पैकेट खरीदने वाले ग्राहकों को क्या ये पता चल पाता है कि वे जो खरीद रहे हैं, वो असल में सस्ता है या महंगा?
केंद्र सरकार ने ग्राहकों की इस मुश्किल को हल करने का रास्ता खोज लिया है.
अगले साल अप्रैल से ग्राहकों को ये पता लगाने में मुश्किल नहीं होगी कि वे जो खरीद रहे हैं कि उसकी प्रति यूनिट कीमत क्या होगी.
यानी ग्राहक ये जान पाएंगे कि एक ग्राम चावल या बिस्किट की कीमत पड़ रही है.
इसके लिए केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज़) रूल्स, 2011 में संशोधन किया है.
इस बदलाव के लागू होने के बाद अब कंपनियों को पैकेज्ड उत्पादों पर प्रति यूनिट सेल प्राइस बताना होगा.
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, "एक किलो से ज़्यादा वजन वाले उत्पादों को प्रति किलो की दर से कीमत बतानी होगी जबकि एक किलो से कम वजन वाले उत्पादों की कीमत प्रति ग्राम कीमत बतानी होगी."

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ग्लासगो में हुए संयुक्त राष्ट्र के 26वें जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में किसी भी एक देश के प्रतिनिधिमंडल के मुक़ाबले तेल उद्योग से प्रतिनिधि ज़्यादा संख्या में मौजूद थे.
ग्लोबल विटनेस के नेतृत्व वाले जलवायु संकट पर काम करने वाले समूहों ने सम्मेलन में भाग वालों की संयुक्त राष्ट्र की सूची के अध्ययन के आधार पर इस संख्या का पता लगाया है.
इस अध्ययन के मुताबिक जीवाश्म ईंधन उद्योग से जुड़े 503 लोगों को जलवायु सम्मेलन में शामिल होने की स्वीकृति दी गई थी. ईंधन उद्योग का मतलब कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल आदि से जुड़े उद्योगों से है.
इन प्रतिनिधियों एजेंडा तेल और गैस उद्योग की पैरवी (लॉबी) करना है. पर्यावरण कार्यकर्ता इन्हें प्रतिबंधित करने की मांग करते हैं.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कस्बे कैराना का दौरा किया है.
आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए ये दौरा काफ़ी अहम है. क्योंकि पिछले विधानसभा चुनाव में कैराना से हिंदू परिवारों के कथित पलायन की ख़बरें एक बड़ा मुद्दा रही थीं.
योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर उसी मुद्दे में जान फूंकते हुए उन परिवारों को मुआवजा देने का एलान किया है जिन पर 2014 और 2016 के बीच कथित रूप से कस्बा छोड़कर जाने का दबाव बनाया गया था.
योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि “मैंने ज़िला प्रशासन से उन परिवारों के बारे में रिपोर्ट मांगी है जिन्हें समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान नुकसान पहुंचाया गया था या जिनके घरवालों को मार दिया गया था.
सरकार पीड़ित परिवारों को कुछ मुआवजा देगी ताकि वे एक बार फिर अपना व्यवसाय और आर्थिक गतिविधियां शुरू कर सकें.”
इस दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या आगामी चुनाव उनकी इस यात्रा की वजह हैं तो उन्होंने कहा, “इस समय चुनाव नहीं हो रहे हैं. हर पीड़ित से मिलना मेरा कर्तव्य है और अगर पीड़ित एक हिंदू है तो उससे मिलना कोई अपराध नहीं है.”
लेकिन एक अन्य सवाल के जवाब में योगी आदित्यनाथ ने कहा कि “पलायन भी एक मुद्दा है.”

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भारत की सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को लखीमपुर खीरी हिंसा मामले पर सख़्त टिप्पणी करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़, सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि वह ये नहीं चाहता कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नियुक्त एक सदस्यीय न्यायिक आयोग लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की जांच करे.
बीते 3 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में हुई हिंसा की वजह से चार किसानों समेत आठ लोगों की मौत हो गयी थी.
इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के पूर्व जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को लखीमपुर खीरी ज़िले में तिकोनिया-बनबीरपुर रोड पर हुई हिंसा की जांच करने के लिए नामित किया था.
मुख्य न्यायाधीश एन वी रमना ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस सुनवाई में उत्तर प्रदेश सरकार को सुझाव दिया कि इस जांच की मॉनिटरिंग किसी अन्य उच्च न्यायालय के पूर्व जज से करवाई जाए ताकि (जांच में) “स्वतंत्रता, तटस्थता और निष्पक्षता” लाई जा सके.
इसके बाद बेंच जिसमें जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस हिमा कोहली भी शामिल हैं, ने कहा, “हम किसी वजह से आश्वस्त नहीं हैं. और ये नहीं चाहते कि आपकी राज्य सरकार द्वारा नियुक्त कोई न्यायिक आयोग अपना काम जारी रखे.”
बेंच ने किसानों को कुचलने और बीजेपी कार्यकर्ता को भीड़ द्वारा मारे जाने के संबंध में दायर दो अलग – अलग एफआईआर रिपोर्ट्स का ज़िक्र करते हुए कहा कि पहली नज़र में ऐसा लगा कि पहले मामले में सबूत अभियुक्त को बचाने के लिए जुटाए गए.
इस मामले में योगी सरकार को आगामी 12 नवंबर तक जवाब देना है.
टी20 विश्व कप में न्यूज़ीलैंड और अफ़ग़ानिस्तान के रविवार को हुए मैच में न्यूज़ीलैंड की जीत के बाद भारत के लिए विश्व कप का सफर यहीं ख़त्म हो गया है.
भारतीय क्रिकेट टीम सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई नहीं कर पाई और अब उसे सोमवार शाम को नामीबिया के साथ मैच खेलना है जो एक औपचारिकता भर रह गया है.
अगर अफ़ग़ानिस्तान रविवार को न्यूज़ीलैंड को हरा देता तो भारतीय टीम के लिए सेमीफाइनल की उम्मीद बाक़ी रहती, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.
भारतीय क्रिकेट टीम के टी20 विश्व कप से बाहर होने को लेकर भारत में तो चर्चा हो रही है, लेकिन पाकिस्तान में भी इसे लेकर काफ़ी प्रतिक्रियाएँ आई हैं.

नोटबंदी की वर्षगांठ पर आज का कार्टून.

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टी20 क्रिकेट वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल मैच देखने वालों में सानिया मिर्ज़ा अकेली भारतीय होंगी या नहीं ये तो पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता है लेकिन सोशल मीडिया पर चल रही इस बतकही की अपनी वजह है.
दरअसल, नामीबिया से अपना आख़िरी मुक़ाबला खेल रहे भारत पर इस मैच के नतीजे का कोई असर नहीं पड़ने वाला है और सेमीफ़ाइनल मैचों में जगह बनाने वाली टीमों के नाम का पहले ही एलान हो चुका है.
इंग्लैंड, न्यूज़ीलैंड, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया इस दौड़ में भारत से आगे रहे और कैप्टन विराट कोहली की टीम काफी पहले ही रेस से बाहर हो गई.
लौटते हैं सानिया मिर्ज़ा पर चल रही चर्चा पर. सानिया मिर्ज़ा के पति शोएब मलिक ने रविवार को स्कॉटलैंड के ख़िलाफ़ 18 गेंदों पर 54 रनों की आतिशी पारी खेली और उस मैच को सानिया मिर्ज़ा भी स्टेडियम में देख रही थीं.

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चीन में कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की एक बैठक चल रही है. इस बैठक एजेंडे के बारे में अधिक जानकारी नहीं है. अनुमान है कि ये मीटिंग चीन के राजनीतिक भविष्य के लिए अहम हो सकती है.
बीबीसी के चीन संवाददाता स्टीफ़ मैकडोनेल के मुताबकि ये चीन की पावर पॉलिटिक्स में एक टर्निंग प्वाइंट साबित हो सकता है. बैठक में चीन के राष्ट्रपति और कम्युनिस्ट पार्टी के बॉस शी जिनपिंग के तीसरे पंच-वर्षीय कार्यकाल में प्रवेश करने पर मुहर लग सकती है.
इस सालाना बैठक के लिए राजधानी बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ़ द पीपल में कम्युनिस्ट पार्टी के सैकड़ों सदस्य जुटे हैं.
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की हर बैठक की तरह इस मीटिंग का एजेंडा भी सीक्रेट ही है. सिर्फ़ इतनी घोषणा की गई है कि बैठक में पार्टी की ऐतिहासिक उपलब्धियों पर बातचीत होगी.
लेकिन बीबीसी संवाददाता के मुताबिक पार्टी दरअसल मौजूद लीडर की ही बात करेगी.
बंता सिंह 82 साल के हैं.
वो पंजाब में लुधियाना के डल्ला गांव से जगराओं तक रोज़ाना 10 किमी साइकिल चलाकर किसानों के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जाते हैं.
उनका दावा है, वो पिछले 400 दिनों से किसान आंदोलन में जा रहे हैं.

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भारत में आजादी के बाद अहिंसा और सत्याग्रह के मसीहा मोहनदास करमचंद गांधी को राष्ट्रपिता का सम्मान दिया गया.
लेकिन आज के भारत में, खासकर भाजपा के बीते साढ़े सात साल के शासनकाल में गांधी के विचार और उनके आदर्श इस देश में अब कितना मायने रखते हैं, इस सवाल को बार-बार उठाया गया है.
हाल ही में राष्ट्रपिता की 150वीं जयंती थोड़ी सादगी के साथ ख़त्म हुई है.
दूसरी ओर गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे की पूजा और तारीफ खुलेआम की जा रही है. तमाम हिंदुत्ववादी ताक़तें, यहां तक कि भाजपा सांसद भी गोडसे-वंदना में शामिल हैं. बॉलीवुड ने इस साल गांधी जयंती पर गोडसे की बायोपिक बनाने का भी एलान किया है.
क्या आज के भारत में मोहनदास करमचंद गांधी की राष्ट्रपिता की पहचान खत्म हो रही है?
यूपी की सियासत में फिर उठा कैराना के कथित पलायन का मुद्दा,
सीएम आदित्यनाथ बोले - अपराधी पलायन के लिए मजबूर हुए
अफ़ग़ानिस्तान के मानवीय संकट पर संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
खेल और खिलाड़ी में बात ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की नाकामी की
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भारतीय विदेश मंत्रालय ने भारतीय मछुआरे की हत्या और गोलियां चलाए जाने के मामले में कथित रूप से एक वरिष्ठ पाकिस्तानी राजनयिक को समन भेजा है.
समाचार एजेंसी एएनआई ने सूत्रों के हवाले से ख़बर देते हुए बताया है कि "भारतीय विदेश मंत्रालय ने सोमवार को पाकिस्तानी उच्चायोग के एक वरिष्ठ राजनयिक को समन भेजकर बुलाया था और बीती छह नवंबर को पाकिस्तान की तरफ़ से भारतीय मछुआरों पर अकारण गोलियां चलाने की घटना पर कड़ा विरोध दर्ज किया है."
बता दें कि बीती छह नवंबर को पाकिस्तान की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने अरब सागर क्षेत्र में भारतीय मछुआरों की नाव पर गोलियां चलाई थीं.
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इस मामले में एक भारतीय मछुआरे की मौत हो गयी थी.
अंग्रेजी अख़बार द हिंदू के मुताबिक़, पाकिस्तानी समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने बताया है कि "गुजरात से एक नाव अवैध रूप से पाकिस्तान के क्षेत्र में प्रवेश कर रही थी. इसके बाद पाकिस्तानी समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने इस नाव को रोकने की कोशिश की लेकिन तमाम चेतावनियों के बावजूद नाव ने अपना रास्ता नहीं बदला और रुकी भी नहीं."
इसके साथ ही गुजरात पुलिस ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि मृतक थाणे ज़िले का रहने वाला था.
देवभूमि द्वारका के एसपी सुनील जोशी ने बताया है, "महाराष्ट्र के थाणे ज़िले से आने वाले एक मछुआरे की मौत हो गयी है जब पाकिस्तानी समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने उन पर और उनके साथ नाव पर मौजूद अन्य सदस्यों पर गोलियां चला दीं."

तमिलनाडु के कई इलाकों में भारी बारिश के बाद राजधानी चेन्नई समेत 22 ज़िलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं.
मौसम विभाग की ताज़ा घोषणाओं से पता चलता है कि चेन्नई और उसके आस-पास के ज़िलों को फ़िलहाल कोई राहत नहीं मिलने वाली.
शनिवार से हुई बारिश के बाद चेन्नई बाढ़ से जूझ रहा है. अब शहर के कई हिस्सों में पानी कम हुआ है. बारिश की रफ़्तार भी थमी है लेकिन आने वाले दिनों में और बारिश का अनुमान है.
बीबीसी संवाददाता मुरलीधरन कासी विश्वानाथन के मुताबिक शहर के निचले हिस्से अभी भी पानी से भरे हुए हैं. भारी बारिश के कारण कई जलाशय ओवरफ़्लो कर रहे हैं.
साल 2015 में भयंकर बाढ़ में भी ऐसा ही हुआ था. अब सरकार काफ़ी ध्यान से झीलों और तालाबों के पानी के छोड़ रही है.
मौसम विभाग के चेन्नई दफ़्तर ने कहा है कि बंगाल की खाड़ी के दक्षिण-पूर्व में कम दवाब का क्षेत्र बना हुआ है जो आने वाले घंटों में इस इलाक़े में और बारिश ला सकता है.इस बारिश से चेन्नई के पास के ज़िले जैसे चेंगलपेट, कांचिपुरम, कड्डालोर और कावेरी डेल्टा के इलाक़े ख़ासे प्रभावित हो सकते हैं.
हालांकि मौसम विभाग ने कहा है कि आने वाली बारिश की तीव्रता का पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं है.

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया.
इसके साथ ही पीएम मोदी ने बीते रविवार सीएम स्टालिन से बात करके बचाव और राहत कार्यक्रमों को चलाने में हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया है.
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मौसम विभाग ने जारी की चेतावनी
पिछले दो दिनों की बारिश से ही चेन्नई में बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं. और लोग इसकी तुलना साल 2015 में आई भीषण बाढ़ से करने लगे हैं.

लेकिन मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों के लिए 14 ज़िलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है.
इसका मतलब ये है कि आने वाले दो दिनों में इन ज़िलों में भारी बारिश हो सकती है.

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ऑल इंडिया मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन यानी 'एआईएमआईएम' के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सोमवार को चीन के साथ जारी सीमा विवाद के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए कई सवालों के जवाब मांगे हैं.
इससे पहले ओवैसी ने बीती सात नवंबर को अपने ट्विटर अकाउंट पर गलवान घाटी से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी साझा कीं थी.
और इन तस्वीरों को साझा करते हुए उन्होंने कहा था कि अगर ये तस्वीरें सच्ची हैं तो पीएम मोदी को बहुत सवालों के जवाब देने हैं.
इसके बाद सोमवार यानी 8 नवंबर को ओवैसी ने चीन के मुद्दे पर एक पूर्ण संसदीय बहस की मांग की है.
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ट्वीट करते हुए उन्होंने लिखा, “हम चीन और भारत के बीच संबंधों और सीमा से जुड़ी स्थितियों पर एक व्यापक संसदीय बहस की मांग करते हैं. सांसदों के सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को सभी विवादित सीमावर्ती इलाकों में भी ले जाया जाए. यह हमें अपनी संप्रभुता फिर से स्थापित करने और जनता को सूचित रखने की अनुमति देगा.
यदि आवश्यक हो, तो लोकसभा के नियम 248 के तहत सदन की गुप्त बैठक आयोजित की जा सकती है.
चीन के मुद्दे पर मोदी की चुप्पी, इनकार और घबराहट की रणनीति ख़ुद का नुकसान करने वाली है. यह बीजिंग को कमजोरी का संदेश देता है. वहीं, ये व्यवहार हमारे सहयोगियों को बताता है कि हम सच्चाई का सामना करने में हमारी अक्षम हैं.
अफसोस की बात है कि यह सरकार भारतीयों का ध्रुवीकरण और विभाजन करके हमें आंतरिक रूप से कमजोर कर रही है. घरेलू स्तर पर यह विभाजन पड़ोसियों के साथ हमारे रिश्तों की कीमत पर हुआ है जहां चीन इसका फायदा उठा रहा है.
साल 2014 से पहले मोदी कहते थे कि समस्या सरहदों पर नहीं है, समस्या दिल्ली में है. यह पहले से कहीं ज्यादा सच है. सीएम मोदी राष्ट्रीय सुरक्षा की बड़ी-बड़ी बातें करते थे लेकिन अब पीएम मोदी चीन का नाम तक नहीं लेते. क्या हुआ? यह हिचकिचाहट क्यों?”
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पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस ग़ुलज़ार अहमद ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत के करक ज़िले में स्थित हिंदू संत श्री परम हंस जी महाराज की ऐतिहासिक समाधि और मंदिर में दिवाली मनाने पहुँचें.
इसी समाधि को दिसंबर 2020 में एक भीड़ ने ढहा दिया था.
उस समय पुलिस ने कहा था कि भीड़ इस बात को लेकर नाराज़ थी कि एक हिंदू नेता घर बनवा रहे थे और वो घर एक इस समाधि से लगा हुआ था.

उसके बाद जनवरी 2021 में पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने दो हफ़्ते के अंदर हिंदू संत की समाधि का पुनर्निर्माण शुरू करने का आदेश दिया था.
इसके साथ ही ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांत की सरकार को कोर्ट में रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने इस घटना का स्वत: संज्ञान लेते हुए इसकी सुनवाई की थी.
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस ग़ुलज़ार अहमद की अगुवाई में तीन सदस्यों की बेंच ने मामले की सुनवाई की थी.

चीफ़ जस्टिस का दौरा
सोमवार को पाकिस्तान के चीफ़ जस्टिस गुलज़ार अहमद समाधि पर पहुंच कर दिवाली में हिस्सा लेने आने वाले हैं.
दिवाली के कार्यक्रम और मंदिर-समाधि के उद्घाटन समारोह में पाकिस्तान के कई इलाक़ों से हिंदू समुदाय के लोग जमा हुए हैं.

सिंध प्रांत की एडिशनल सोलिसिटर जनरल कल्पना देवी भी इस कार्यक्रम में शामिल हुईं हैं.
उन्होंने बीबीसी को बताया, “जहां भी अल्पसंख्यक रहते हैं, थोड़े-बहुत मसले होते हैं. लेकिन हम ख़ुशकिस्मत हैं कि जैसे ही ये मुद्दा सामने आया तो पाकिस्तान सरकार और चीफ़ जस्टिस साहब ने हस्तक्षेप किया. कुछ ही दिनों के भीतर हमारा मंदिर दोबारा बना दिया गया. इस मंदिर और समाधि को मानने वाले बाहर के मुल्क़ों से भी आए हैं.”
सिंध के हैदराबाद शहर से आए विष्णुमल ने बीबीसी को बताया, “कुछ तत्व हैं उनकी वजह से सारे देश को कुछ नहीं कह सकते. हम अपनी सरकार के काम से ख़ुश हैं.”


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दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत ने सोमवार को उपहार सिनेमा अग्निकांड मामले से जुड़े अहम सबूतों से छेड़छाड़ करने के मामले में अंसल बंधुओं को सात साल जेल की सज़ा सुनाई है.
इसके साथ ही कोर्ट ने असंल बंधुओं समेत अन्य आरोपियों को हिरासत में लेने का आदेश दिया है.
कोर्ट ने सुनील अंसल और गोपाल अंसल पर प्रति व्यक्ति के लिहाज़ से 2.5 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

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साल 1997 में 13 जून को उपहार सिनेमा में लगी आग में 59 लोग मारे गए थे, जबकि 100 से ज़्यादा घायल हुए. मृतकों में बच्चे भी काफ़ी थे.
इस मामले में 16 लोगों को अभियुक्त बनाया गया था. इनमें सिनेमा हॉल में काम करने वाला स्टाफ़ और सेफ़्टी इंस्पेक्टर भी शामिल थे जिन्होंने इमारत में नियमों के उल्लंघन की अनदेखी की.
16 अभियुक्तों में सबसे हाई-प्रोफाइल नाम सुशील और गोपाल अंसल का था. दोनों भाई सिनेमा हॉल के मालिक थे.

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पाकिस्तान टेलीविज़न ने पूर्व तेज़ गेंदबाज़ शोएब अख्तर को हर्जाने का नोटिस भेजा है जिसमें कहा गया है कि उनके ऑन-एयर इस्तीफे के एलान से पीटीवी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है.
नोटिस में शोएब अख्तर द्वारा पीटीवी के साथ किए गए समझौते के उल्लंघन का भी जिक्र है. नोटिस में हर्जाने में 10 करोड़ रुपये के अलावा तीन महीने के वेतन के बराबर रिफंड की भी मांग की गई है.
कानूनी नोटिस में कहा गया है कि पाकिस्तान टेलीविजन और शोएब अख्तर के बीच हुए समझौते के अनुच्छेद 22 में कहा गया है कि दोनों पक्ष समझौते को समाप्त कर सकते हैं, हालांकि, तीन महीने का नोटिस देना आवश्यक होगा या फिर आपको बराबर वेतन देना होगा.
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नोटिस के अनुसार, जब से शोएब अख्तर ने 26 अक्टूबर को ऑन एयर पीटीवी से अपने इस्तीफे की घोषणा की, उन्होंने न केवल समझौते का उल्लंघन किया है, बल्कि पीटीवी को असाधारण वित्तीय नुकसान भी पहुंचाया है.
लीगल नोटिस में कहा गया है कि शोएब अख्तर टी20 वर्ल्ड कप के दौरान पीटीवी को बिना बताए दुबई गए थे और वहां वो भारतीय क्रिकेटर हरभजन सिंह के साथ एक भारतीय टीवी शो में नजर आए.
नोटिस में आगे कहा गया है कि शोएब अख्तर ने टी20 वर्ल्ड कप के दौरान पीटीवी के कार्यक्रम 'गेम ऑन है' से गैरहाजिर रहकर समझौते का उल्लंघन किया और साथ ही दो निजी चैनलों के कार्यक्रमों में हिस्सा लिया.
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ऐसा करके उन्होंने अपने समझौते का भी उल्लंघन किया है. पीटीवी के मुताबिक, समझौते के तहत उन्हें केवल टी20 वर्ल्ड कप के दौरान पीटीवी पर ही दिखना था.
शोएब अख्तर ने पाकिस्तान टेलीविजन द्वारा भेजे जा रहे कानूनी नोटिस पर अपनी निराशा जाहिर की है और स्पष्ट किया कि वो एक जूझने वाले शख़्स हैं और वे इस कानूनी लड़ाई को लड़ेंगे.
शोएब अख्तर ने अपने ट्वीट में यह भी कहा कि उनके वकील सलमान नियाजी इस मामले को कानून के मुताबिक देखेंगे.
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