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दिल्ली हाईकोर्ट ने पति द्वारा मानसिक क्रूरता के आधार पर एक जोड़े को तलाक की मंजूरी दे दी है.
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भारत सरकार ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में बताया है कि भारत में 33 लाख से अधिक बच्चे कुपोषित हैं. अत्याधिक कुपोषित बच्चों की सूची में महाराष्ट्र, बिहार और गुजरात शीर्ष पर हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने ये जानकारी आरटीआई के जवाब में दी है.
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का अनुमान है कि इनमें से 17.6 लाख बच्चे तीव्र कुपोषित हैं जबकि 15.5 लाख बच्चे मध्यम तीव्र कुपोषित हैं. मंत्रालय के मुताबिक कुल 33,23,322 कुपोषित बच्चो का आंकड़ा 34 प्रांतों और केंद्र शाषित प्रदेशों के डाटा के आधार पर है.
तीव्र कुपोषित बच्चों की संख्या में नवंबर 2020 से अक्तूबर 2021 के बीच 91 प्रतिशत की वृद्धि हुई है. 2020 में अत्याधिक तीव्र कुपोषित बच्चों की संख्या 9 लाख 27 हज़ार थी जबकि अब ये 17.6 लाख है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक जिन बच्चों का वज़न बहुत कम होता है और ऊपरी बाहों की परिधि 115 मिलीमीटर से कम होती है उन्हें अत्याधिक तीव्र कुपोषित माना जाता है. जिन बच्चों में पोषण ओएडेमा (शोफ) होता है उन्हें भी अत्याधिक कुपोषित माना जाता है. जिन बच्चों की ऊपरी बाहों की परिधि 115 से 125 मिलीमीटर के बीच होती है उन्हें मध्यम तीव्र कुपोषित माना जाता है.

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अत्याधिक तीव्र कुपोषण और मध्यम तीव्र कुपोषण का बच्चों की सेहत पर नकारात्मक असर होता है. अत्याधिक कुपोषित बच्चों का वज़न लंबाई की तुलना में बेहद कम होता है और उनके बीमार पड़ने पर मरने की आशंका 9 गुणा अधिक होती है.
पोषण ट्रैकर के डाटा के मुताबिक सर्वाधिक कुपोषित बच्चे महाराष्ट्र में हैं. यहां 6,16,772 बच्चे कुपोषित दर्ज किए गए हैं. वहीं बिहार में 4,75,824 बच्चे कुपोषित है जबकि गुजरात में 3,20,465 बच्चे कुपोषित हैं.
कुपोषित बच्चों की संख्या पर टिप्पणी करते हुए बच्चों के लिए काम करने वाली संस्था चाइल्ड राइट्स एंड यू (सीआरवाई) की सीईओ पूजा मारवाहा ने कहा कि कोविड महामारी की वजह से सभी सामाजिक-आर्थिक सूचकांक नकारात्मक रूप से प्रभावित हुए हैं और बीते एक दशक में जो प्रगति हुई है उस पर ख़तरा मंडरा रहा है.
स्कूल बंद होने की वजह से कई स्थानों पर मिड डे मील जैसी पोषण योजनाएं भी प्रभावित हुई हैं जिनका असर भी बच्चों पर हुआ है.

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दिल्ली हाईकोर्ट ने पति द्वारा मानसिक क्रूरता के आधार पर एक जोड़े को तलाक की मंजूरी दे दी है. कोर्ट ने माना कि पति अपनी पत्नी को "दुधारू गाय" की तरह देखता था और उसने अपनी पत्नी में तभी दिलचस्पी लेना तभी शुरू किया जब पत्नी को दिल्ली पुलिस में नौकरी मिली.
न्यायमूर्ति विपिन सांघी की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि बिना किसी भावनात्मक संबंध के पति के भौतिकवादी रवैये से पत्नी को मानसिक पीड़ा और आघात पहुंची होगी, जो क्रूरता के दायरे में आने के लिए काफ़ी है.
न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि आम तौर पर हर विवाहित महिला की इच्छा होती है कि वह एक परिवार शुरू करे लेकिन इस मामले में पति को "शादी को सही तरीके से निभाने में दिलचस्पी नहीं थी, बल्कि उसकी दिलचस्पी केवल पत्नी की आय में थी.
अदालत ने एक फ़ैमिली कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी की तलाक की याचिका को ख़ारिज कर दिया था और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत दोनों पक्षों के बीच विवाह को भंग कर दिया था.पत्नी ने इस आधार पर तलाक मांगा कि पति बेरोजगार है, शराबी है,उसका शारीरिक शोषण करता है और पैसे की मांग करता है.

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चीन ने कहा है कि इस जाड़े और उसके बाद आनेवाले बसंत में बिजली सप्लाई को बहाल रखना एक जंग की तरह होगा.
चीन के कई इलाकों में इस साल बिजली कटौती होगी.
हालांकि सरकार के कोयला की सप्लाई बढ़ाने के हुक्म के बाद हालात में सुधार आया है.
लेकिन सरकारी ग्रिड कंपनी का जो एक अरब से अधिक लोगों को बिजली पहुंचाती है, का कहना है कि अभी भी ज़रूरत और जितना कोयला मिला है, दोनों में अंतर है.
चीन के अधिकतर हिस्सों में इस साल बेहद ठंडक पड़ रही है.
बीजिंग में वक्त से तीन हफ्ते पहले ही बर्फबारी शुरू हो गई है.

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इलेक्ट्रिक कार निर्माता कंपनी टेस्ला के मालिक और अरबपति कारोबारी एलन मस्क ने ट्विटर पर ख़ुद को फॉलो करने वाले लोगों से पूछा है कि वो टेस्ला में अपने हिस्से के दस प्रतिशत शेयर बेचें या नहीं. ट्विटर पर मस्क के 6.26 करोड़ फॉलोवर हैं.
मस्क ने ट्विटर पर जो पोल शुरू किया है वो रविवार शाम को समाप्त हो रहा है. मस्क का कहना है कि वो ट्विटर के इस पोल के नतीजों का सम्मान करेंगे.
मस्कर ने ये पोल अमेरिका के प्रस्तावित 'अरबपति टैक्स' की प्रतिक्रिया में शुरू किया है. यदि डेमोक्रेट सांसदों की ये योजना पास होती तो है तो अरबपति कारोबारी और दुनिया के बसे अमीर लोगों में शुमार एलन मस्क को भारी टैक्स चुकाना पड़ सकता है.
रविवार सुबह तक इस पोल में 28 लाख लोगों ने हिस्सा लिया जिनमें से 57 फ़ीसदी की राय थी कि उन्हें शेयर बेच देने चाहिए. मस्क की दस प्रतिशत की हिस्सेदारी 21 अरब डॉलर के बराबर हो सकती है. टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के पास 200 अरब डॉलर के मूल्य के बराबर के शेयर हैं.

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मस्क अगले साल कुछ ऐसे क़दम उठाने जा रहे हैं जो उनकी नेट वर्थ को और भी अधिक बढ़ा देंगे. लेकिन ऐसा करने पर मस्क को और भी अधिक टैक्स चुकाना होगा.
डेमोक्रेटिक पार्टी ने सीनेट में जो प्रस्ताव पेश किया है उसके तहत अरबपतियों के शेयरों के भाव बढ़ने पर भी उन पर टैक्स लगाया जा सकता है, भले ही वो शेयर बेचे या नहीं. एक और ट्वीट में मस्क ने कहा कि वो कोई वेतन या बोनस नहीं लेते हैं और टैक्स चुकाने के लिए उनके पास शेयर बेचने के अलावा और कोई ज़रिया नहीं है.
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ऐसा माना जाता है कि सरकार के इस क़दम से अमेरिका में 700 अरबपति प्रभावित हो सकते हैं. वहीं आलोचकों का तर्क है कि किसी एसेट की क़ीमत हमेशा ही नहीं बढ़ती है. सरकार का ये प्रस्तावित टैक्स शेयर की क़ीमत बढ़ने पर लगेगा, भले ही उसे बेचा गया हो या नहीं.
मस्क के पास एक और विकल्प है जो अगले साल अगस्त में समाप्त हो जाएगा. इसके तहत वो टेस्ला के 2.28 करोड़ शेयरों को 6.24 डॉलर की क़ीमत पर ख़रीद सकते हैं. इस समय टेस्ला के शेयर का बाज़ार भाव 1222 डॉलर है.
मस्क ने हाल ही में कहा था कि वो टेस्ला में 6 अरब डॉलर क़ीमत के अपने शेयर बेचकर वर्ल्ड फ़ुड प्रोग्राम को दान देंगे. हालांकि उन्होंने ये शर्त रखी थी कि संस्था को अपने ख़र्च के बारे में और अधिक जानकारियां देनी होंगी.
ट्विटर पर मस्क के पोल ने वित्तीय दुनिया में कई सवाल भी खड़े किए हैं. वेंचर इंवेस्टर चामथ पालीहापीटिया ने ट्विटर पर लिखा, 'हम ये देख रहे हैं कि ट्विटर पर भीड़ 25 अरब डॉलर के टॉस का नतीजा तय कर रही है.'
वहीं बर्कले के अर्थशास्त्री गैब्रियल जकमैन ने ट्वीट किया, "मैं उस दिन का इंतेज़ार कर रहा हूं कि जब दुनिया का सबसे अमीर आदमी कुछ टैक्स के लिए ट्विटर पोल पर निर्भर ना रहे."
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टी- 20 वर्ल्ड कप के अहम मुक़ाबले में न्यूज़ीलैंड ने अफ़ग़ानिस्तान को आठ विकेट से हराकर भारत की सेमीफ़ाइनल में पहुंचने की उम्मीदें ख़त्म कर दी हैं.
भारत टी-20 वर्ल्ड कप में न्यूज़ीलैंड के हारने की स्थिति में ही आगे बढ़ सकता था. न्यू़ज़ीलैंड ने अफ़ग़ान टीम को हराकर अब सेमीफ़ाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली है.
अफ़ग़ानिस्तान ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया था लेकिन अफ़ग़ानिस्तान के बल्लेबाज़ कुछ ख़ास नहीं कर सके.
नजीबुल्लाह जादरान एक छोर से रन बनाते रहे और दूसरी तरफ़ से विकेट करते रहे. जादरान ने अकेले ही 73 बन बनाए जबकि अफ़ग़ानिस्तान की पूरी टीम निर्धारित बीस ओवरों में आठ विकेट खोकर सिर्फ़ 124 रन ही बना सकी.

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टी-20 के लिहाज़ से इस मामूली स्कोर को न्यूज़ीलैंड की टीम ने सिर्फ़ दो विकेट खोकर 11 गेंदें शेष रहते हासिल कर लिया.
पीछा कर रही न्यूज़ीलैंड की शुरुआत बहुत अच्छी नहीं रही थी. ओपनर डेरिल मिचेल सिर्फ़ 17 रन बनाकर चौथे ओवर में ही आउट हो गए थे. मार्टिन गुप्टिल भी 28 रन बनाकर राशिद ख़ान की गेंद पर आउट हो गए. लेकिन दो विकेट गिरने के बाद न्यूज़ीलैंड के बल्लेबाज़ों ने अफ़ग़ानिस्तान के गेंदबाज़ों को कोई मौका नहीं दिया.
विलियमसन 40 और कॉनवे 36 रन बनाकर नाबाद रहे. डेवॉन कॉनवे और केन विलियम्सन ने 56 गेंदों पर 68 रन की नाबाद साझेदारी की.
इस मैच में अफ़ग़ानिस्तान के कप्तान राशीद ख़ान ने विकेट लेने का रिकॉर्ड भी बनाया. वो टी-20 मुक़ाबलों में 400 विकेट लेने वाले दुनिया के चौथे गेंदबाज़ बन गए हैं.
राहुल गांधी ने शुक्रवार को तमिलनाडु से आए एक समूह के लिए दिवाली रात्रिभोज का आयोजन किया था.
इस दौरान उनसे पूछा गया कि अगर वो प्रधानमंत्री बनते हैं तो सबसे पहले क्या करेंगे? जिसपर उन्होंने जवाब दिया कि वो महिलाओं को आरक्षण देंगे.
ये समूह तमिलनाडु के कन्याकुमारी के एक स्कूल से आया था.
समूह से एक शख़्स ने किसान आंदोलन का समर्थन करने के लिए राहुल और प्रियंका गांधी की सराहना भी की.
अक्सर महिलाओं को महसूस होता है कि वो बहुत जल्दी थक जाती हैं, उनके हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगते हैं. उनका शरीर पीला या सफेद होने लगता है.
कमज़ोरी महसूस होती और बिस्तर से उठने पर चक्कर आने लगते हैं. ये तमाम लक्षण एनीमिया के हो सकते हैं. जिसमें हमारे खून में रेड ब्लड सेल्स की कमी होती है.
आखिर एनीमिया को कैसे ठीक किया जा सकता है. इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं डॉक्टर देविका चोपड़ा.
उत्तर प्रदेश में ज़ीका वायरस का कहर बढ़ता जा रहा है. कानपुर के बाद ये वायरस कन्नौज भी पहुंच गया है.
कानपुर में शनिवार को ज़ीका वायरस के कुल 79 मामले हो गए. वहीं कन्नौज में पहला मामला सामने आया.
उत्तर प्रदेश में ज़ीका मामलों को देखते हुए शनिवार को दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा कि उनकी सरकार अलर्ट पर है और हालात पर नज़र बनाए हुए है.

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इसराइल के प्रधानमंत्री नेफ्ताली बेनेट ने यरूशलम में फ़लस्तीनियों के लिए अमेरिका के राजनयिक दफ़्तर को फिर से खोलने के प्रस्ताव को खारिज किया है.
बेनेट ने कहा कि विवादित शहर यरूशलम में ऐसे किसी दफ़्तर के लिए कोई जगह नहीं है. ट्रंप प्रशासन ने यरूशलम में कंसुलेट को बंद कर दिया था, ये दफ़्तर फ़लस्तीनियों के लिए दूतावास की तरह काम करता था.
अमेरिका के विदेश मंत्री एंटॉनी ब्लिंकेन ने कहा था कि वो इस दफ़्तर को फिर से खोलेंगे. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए इसराइल ने कहा था कि ये क़दम यरूशलम पर इसराइल की संप्रभुता को चुनौती दे सकता है.
ट्रंप प्रशासन के समय अमेरिका से फ़लस्तीनियों के जो रिश्ते ख़राब हुए थे वो इस दफ़्तर के खुलने से पटरी पर आ सकते हैं.
शनिवार देर शाम जब बेनेट से कंसुलेट के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने इस विषय पर लंबे समय से चली आ रही इसराइल की नीति को ही दोहराया. उन्होंने कहा, "यरूशलम में एक और अमेरिकी कांसुलेट के लिए कोई जगह नहीं है. यरूशलम एक ही देश की राजधानी है और उस देश का नाम इसराइल है."
इसराइल के विदेश मंत्री याइर लैपिड ने कहा कि अमेरिका इस कंसुलेट को फ़लस्तीनियों के प्रशासनिक मुख्यालय रामाल्ला में खोल सकता है. फ़लस्तीनी इस विचार को नकार देंगे क्योंकि इससे यरूशलम पर उनका दावा कमज़ोर होगा.

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इसराइल यरूशलम को अपनी अविभाजित राजधानी मानता है जबकि फ़लस्तीनी पूर्वी यरूशलम को अपने भविष्य के राष्ट्र की राजधानी के तौर पर देखते हैं. इसराइल ने 1967 के युद्ध में पूर्वी यरूशलम पर क़ब्ज़ा कर लिया था और बाद में इसे अपने अधीन ले लिया था.
ये कंसुलेट बेनेट सरकार और बाइडन प्रशासन के बीच एक परीक्षा के तौर पर भी उभर रहा है. बाइडन इसराइल और फ़लस्तीन को लेकर पारंपरिक अमेरिकी नीति को फिर से लाू करना चाहते हैं. इसराइल-फ़लस्तीन संघर्ष में पूर्ववर्ती ट्रंप प्रशासन इसराइल का पक्ष ले रहा था. ट्रंप ने कंसुलेट के दायरे को सीमित करके उसे तेल अवीव से यरूशलम लाए गए अमेरिकी राजदूत के अधीन कर दिया था.
अमेरिका ने साल 2018 में अपने दूतावास को यरूशलम स्थानांत्रित किया था. अमेरिका के इस क़दम से फ़लस्तीनी नाराज़ हो गए थे और उन्होंने अमेरिका के साथ अपने अधिकतर संबंध ख़त्म कर लिए थे.
अमेरिकी विदेश मंत्री ने अभी यरूशलम में कंसुलेट को फिर से खोलने की कोई तय तारीख़ नहीं दी है. अमेरिकी अधिकारियों को लगता है कि इसराइल का विरोध इसमें बाधा डाल सकता है.
वहीं फ़लस्तीनी अधिकारी वासेल अबु यूसुफ़ का कहना है कि बेनेट का कंसुलेट के लिए इनकार इसराइल की क़ब्ज़ा करने की नीति के तहत है और ये बाइडन प्रशासन के सामने अपने वादे को पूरा करने के लिए चुनौती पेश करता है.
साल 2014 में जिस तरह भारत में नरेंद्र मोदी ने 'अच्छे दिन' के वादे के साथ वोट मांगे थे, उसी तरह इमरान ख़ान ने 2018 में इसी नारे को - 'तब्दीली आ नहीं रही, तब्दीली आ गई है' का जामा पहनाकर युवा वोटरों को दीवाना बना लिया.
लेकिन अब वहां पेट्रोल-डीज़ल के बेतहाशा बढ़े दामों और बढ़ती महंगाई ने लोगों को बेहाल कर दिया है. देखिए इसी पर पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार वुसअतुल्लाह ख़ान का ख़ास टिप्पणी.
दिवाली के बाद फैले प्रदूषण से कोरोना वायरस के मामले बढ़ सकते हैं.
एम्स दिल्ली के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने ये चेतावनी दी है.
डॉक्टरों का कहना है कि कोविड और प्रदूषण, दोनों ही बराबर ख़तरनाक हैं.

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दक्षिण अमेरिका के60 लाख वर्ग किलोमीटरके इलाक़े में अमेज़न के वर्षावन फैले हुए हैं. ये जंगल पूर्व में अटलांटिक सागर से लेकर पश्चिम में एंडीस पर्वत श्रंखला और उत्तर में गाइना हाइलैंड्स से लेकर दक्षिण में ब्राज़ील के पठारों तक फैले हैं.
दुनिया की ऑक्सीजन की ज़रूरत का15 फीसदीसे अधिक पूरा करते हैं. हाल के सालों में ये वर्षावन आग और पेड़ों की कटाई के कारण चर्चा में रहे हैं.
आग लगने की67 फीसदीघटनाएं उन इलाक़ों में हुईं जहां पेड़ों की कटाई की गई थी. वर्ल्ड वाइल्डलाइफ़ फंड के आकलन के अनुसार हाल ऐसा ही रहा तो 2030 तक अमेज़न के27 फीसदीजंगल ख़त्म हो जाएंगे.
भारत की बात करें तो देश की 7 लाख वर्ग किलोमीटर भूमि वनक्षेत्र है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का क़रीब21 फीसदीहै. यहां विकास योजनाओं, उद्योग, सड़क और सिंचाई परियोजनाओं के अलावा आग,वनक्षेत्र के कम होनेका बड़ा कारण है.

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अरब सागर में गुजरात के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में पाकिस्तानी मैरीटाइम सिक्योरिटी एजेंसी (पीएमएसए) की गोलीबारी में महाराष्ट्र के एक मछुआरे की मौत हो गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस का कहना है कि इस गोलीबारी में एक नाविक घायल भी हुआ है.
पुलिस के मुताबिक ये घटना शनिवार शाम क़रीब चार बजे की है. देवभूमि द्वारका के पुलिस अधीक्षक सुनील जोशी के मुताबिक जलपरी नाम की एक मछली पकड़ने वाली नाव पर सवार महाराष्ट्र के थाणे के रहने वाले एक मछुआरे की पीएमएसए की गोलीबारी में मौत हो गई.
इस नाव पर सात लोग सवार थे जिनमें से एक मामूली रूप से घायल हुआ है. मारे गए मछुआरे श्रीधर रमेश के शव को रविवार को ओखा बंदरगाह पर लाया गया.
पोरबंदर नवी बंदर पुलिस ने इस मामले में एफ़आईआर दर्ज की है. अरब सागर में 12 नॉटिकल मील दूर गुजरात के तट पर जो भी घटना होती है उसकी रिपोर्ट इसी थाने में दर्ज होती है.
जलपरी नाम की ये नाव ओखा से ही 25 अक्तूबर को समंदर में गई थी. इसके सात नाविको में से पांच गुजरात के और दो महाराष्ट्र के हैं. पुलिस के मुताबिक घटना की जांच की जा रही है.

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जम्मू और कश्मीर पुलिस ने एक हुर्रियत नेता और दक्षिण कश्मीर के एक वकील समेत नौ लोगों पर मुकदमा चलाने को लेकर गृह विभाग की मंज़ूरी मांगी है. इनपर पाकिस्तान के कॉलेज़ों की एमबीबीएस सीट कश्मीरी छात्रों को बेचने और उस पैसे का इस्तेमाल चरमपंथ की फंडिग के लिए करने का आरोप है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक रविवार को अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी.
मामला पिछले साल जुलाई में सीआईडी की ब्रांच काउंटर इंटेलीजेंस कश्मीर (सीआईके) ने दर्ज किया था. उन्हें विश्वसनीय सूत्रों से ख़बर मिली थी हुर्रियत नेता समेत कुछ लोग कंसल्टेंसी के साथ मिलकर पाकिस्तान की एमबीबीएस सीटें और कई दूसरे कॉलेज और विश्वविद्यालयों की सीटों को बेच रहे थे.
सीआईके ने कम से कम चार लोगों को अगस्त में गिरफ़्तार किया था और पाकिस्तान में बसे दो और लोगों की जानकारी दी थी जो इनके साथ काम कर रहे थे. जांच के बाद सीआईके ने यूएपीए अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने की मंज़ूरी मांगी है.
अधिकारियों के मुताबिक ऐसे सबूत सामने आए हैं, जो इशारा करते हैं कि एडमिशन से मिले पैसों का इस्तेमाल चरमपंथी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया गया.
इस केस का इस्तेेमाल हुर्रियत कॉन्फ्रेंस को बैन करने में की मांग के लिए किया जा सकता है क्योंकि इसके एक प्रमुख नेता मौहम्मद अकबर भट्ट ऊर्फ़ ज़फ़र भट्ट इन नौ लोगों में शामिल हैं.

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इराक़ के प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अल-कदीमी पर बगदाद में हुए जानलेवा हमले की आलोचना करते हुए सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने 'कायराना चरमपंथी हमला' करार दिया है.
रविवार सुबह इराक़ की राजधानी बगदाद में प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अल-कदीमी के आवास को विस्फोटक से लैस एक ड्रोन से निशाना बनाया गया था.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इराक़ की सेना ने इस हमले को प्रधानमंत्री की हत्या की कोशिश करार दिया है.
हालांकि प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अल-कदीमी इस हमले में सुरक्षित बच गए हैं. अभी तक किसी गुट या संगठन ने मुस्तफ़ा अल-कदीमी पर हुए हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा नहीं किया है.

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दिल्ली में बुराड़ी के संत नगर इलाक़े में बिरयानी की दुकान चलाने वाले एक मुस्लिम दुकानदार को एक शख़्स का धमकियां देते हुए वीडियो सामने आया है.
अंग्रेज़ी अख़बार टाइम्स ऑफ़ इंडिया के अनुसारइस वीडियो में एक शख़्स एक दुकानदार को दिवाली पर दुकान खोलने को लेकर धमकियां दे रहा है. दिल्ली पुलिस ने इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए घटना की एफ़आईआर दर्ज कर ली है.
इस वीडियो में धमकियां देने वाला शख़्स अपना नाम नरेश कुमार सूर्यवंशी बता रहा है और ख़ुद को बजरंग दल का सदस्य कह रहा है.
वीडियो में वह दुकान के कर्मचारियों को त्योहार पर दुकान खोलने को लेकर धमकियां देते हुए दिख रहा है.
उसकी धमकी के बाद दुकान के मालिक और उसके कर्मचारियों ने तुरंत दुकान बंद कर दी. ये वीडियो गुरुवार रात करीब 9 बजे रिकॉर्ड किया गया है जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.
साथ में ख़बरें और भी हैं.

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अमेरिका ने रविवार सुबह इराक़ी प्रधानमंत्री मुस्तफ़ा अल-कदीमी के आधिकारिक आवास पर हुए ड्रोन हमले को एक आतंकी हमला बताया है.
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने रविवार सुबह एक बयान जारी करते हुए बताया है कि "हम इस ड्रोन हमले और उसके बाद के हालातों पर नज़र बनाए हुए हैं."
नेड प्राइस ने इस बयान को ट्वीट करते हुए लिखा है, "हम इराक़ी प्रधानमंत्री कदीमी के आवास पर हुए ड्रोन हमले पर नज़र बनाए हुए हैं. हम इस आतंकी गतिविधि की कड़ी निंदा करते हैं और इराक़ी सुरक्षाबलों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं. इराक़ी साझेदारों के साथ हमारा समर्पण अटूट है."
इस बयान में प्राइस की ओर से ये भी बताया गया है कि अमेरिका ने इस हमले की जांच में इराक़ी सेना का सहयोग करने का प्रस्ताव भी दिया है और अमेरिका इस मौके पर इराक़ी सरकार एवं इराक़ी आवाम के साथ खड़ा है.

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अख़बार दुनिया के मुताबिक़ पाकिस्तान की इमरान ख़ान सरकार ने प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) से पाबंदी हटाने की मंज़ूरी दे दी है.
चार नवंबर को पंजाब प्रांत की सरकार ने टीएलपी को प्रतिबंधित संगठनों की लिस्ट से बाहर करने का प्रस्ताव स्वीकार किया था और फिर केंद्र सरकार से भी सिफ़ारिश की थी कि टीएलपी पर लगे सारे प्रतिबंध हटा लिए जाएं.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पंजाब प्रांत की सरकार की सिफ़ारिश पर क़ानून मंत्रालय से सलाह ली थी. क़ानून मंत्रालय की हरी झंडी के बाद इमरान सरकार ने टीएलपी से सभी प्रतिबंध हटाने का फ़ैसला किया.
इस साल अप्रैल में टीएलपी ने तीन दिनों तक हिंसक विरोध प्रदर्शन किया था जिसके बाद सरकार ने उन्हें आतंकवाद निरोधी क़ानून के तहत प्रतिबंधित संगठन क़रार दिया था.
बदले में टीएलपी ने विश्वास दिलाया है कि वो अपने सारे विरोध प्रदर्शन वापस ले रही है. इसके अलावा टीएलपी ने कहा कि वो पाकिस्तान के संविधान और क़ानून का पालन करेगी.