धन्यवाद
बीबीसी हिंदी का यह लाइव पेज अब यहीं बंद हो रहा है. मंगलवार, 24 अगस्त के ताज़ा अपडेट्स, विश्लेषण और वीडियो के लिए यहां क्लिक करें.
अफ़ग़ानिस्तान से बाहर निकलने की कोशिश में काबुल एयरपोर्ट के पास फंसे लोगों ने बयान की अपनी दिक्कत.
अनंत प्रकाश, मोहम्मद शाहिद, विभुराज and अभिजीत श्रीवास्तव
बीबीसी हिंदी का यह लाइव पेज अब यहीं बंद हो रहा है. मंगलवार, 24 अगस्त के ताज़ा अपडेट्स, विश्लेषण और वीडियो के लिए यहां क्लिक करें.

इमेज स्रोत, Getty Images
अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटेन की सेना के लिए काम करने वाले कई हज़ार अफ़ग़ान दुभाषिए और अन्य कर्मचारी का दावा है कि उनकी जान ख़तरे में है.
वो ब्रिटेन जाना चाहते हैं लेकिन तालिबान से भागने के प्रयास में उनमें से कई काबुल हवाई अड्डे पर फंसे हैं.काबुल एयरपोर्ट के बाहर अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर एक शख़्स ने बीबीसी को बताया कि वह ब्रिटेन की सेना के साथ दुभाषिए का काम करते थे, जब अफ़ग़ानिस्तान से निकलने के लिए वह हवाई अड्डे पर आए तो बाहर ही भीड़ में फंस गए.
उन्होंने बताया कि वे ब्रिटिश दुभाषिए के लिए तय गेट पर 12 घंटे से इंतज़ार कर रहे हैं.
उन्होंने बताया, "मैं यहां अपने बच्चों और पत्नी के साथ हूं. लेकिन हमारे पास अंदर जाने और ये पूछने का कोई रास्ता नहीं है कि मेरे मामले में क्या हो रहा है."
"मेरी तरह यहां सैकड़ों अन्य दुभाषिए हैं जिनकी ज़िंदगी ख़तरे में है और भविष्य अनिश्चित. मुझे तो लगता है कि हम नरक में हैं. यहां हम बीते 14 से 15 घंटे से बिना खाना, पानी इंतज़ार कर रहे हैं."
"आप ये सब इसलिए झेल रहे हैं क्योंकि आपने ब्रिटेन की सेना के लिए काम किया है, क्योंकि आपने विदेशियों के लिए काम किया है."

इमेज स्रोत, ANI
लोकसभा सांसद और एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार को घेरने की कोशिश की है. उन्होंने आरोप लगाया है कि मौजूदा सरकार ‘दूरदर्शी’ नहीं है.
ओवैसी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का सीएए पर एक बयान सामने आने के बाद केंद्र सरकार पर निशाना साधा.
ओवैसी ने पुरी से सवाल किया कि क्या वो इस क़ानून को लेकर लोगों को ‘जानबूझकर गुमराह’ कर रहे हैं?
दरअसल, केंद्रीय मंत्री पुरी ने अफ़ग़ानिस्तान की मौजूदा स्थिति को लेकर एक ट्वीट किया था.
अपने ट्वीट में पुरी ने लिखा, “हमारे पड़ोस में हुई हालिया घटनाएं और जिस तरह सिखों और हिंदुओं को भयावह दौर से गुजरना पड़ रहा है, उसी वजह से नागरिकता संशोधन क़ानून बनाना ज़रूरी था.”
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
ओवैसी ने पुरी के इस ट्वीट को लेकर तीन ट्वीट किए. उन्होंने केंद्रीय मंत्री से पूछा कि क्या उन्होंने क़ानून को नहीं पढ़ा है?
ओवैसी ने लिखा, “सीएए सिर्फ़ उन प्रवासियों पर लागू होता है, जिनके पास दस्तावेज नहीं हैं. ये 2014 के बाद आने वालों पर लागू नहीं होता. जो लोग अब वीज़ा के साथ भारत आ रहे हैं, ये उन पर कैसे लागू होगा. आपकी सरकार ने ज़ोरशोर से जो क़ानून बनाया था क्या आपने वो नहीं पढ़ा? या फिर आप जानबूझकर गुमराह कर रहे हैं.”
ओवैसी ने अगले ट्वीट में दावा किया कि उन्होंने धर्मनिरपेक्ष क़ानून बनाने की मांग की थी, जिससे इन शरणार्थियों का भला होता.

इमेज स्रोत, ANI
सोने की हॉलमार्किंग के नए नियमों के विरोध में सोमवार को देश भर के ज्वेलर्स हड़ताल पर रहे.
अखिल भारतीय जेम जूलरी डोमेस्टिक काउंसिल (जीजेसी) ने कहा है कि 350 जूलरी एसोसिएशन्स इसमें शामिल थे और यह हड़ताल सफल रही है.
काउंसिल ने बताया कि बड़े कॉरपोरेट्स को छोड़कर जूलरी की ज़्यादातर दुकानें सोमवार को बंद रहीं.
जूलरी निकाय का कहना है कि ज्वेलर्स नए हॉलमार्क यूनिक आईडी (एचयूआईडी) को नहीं स्वीकार सकते क्योंकि इसका सोने की शुद्धता से कोई लेना-देना नहीं है, यह केवल ट्रैकिंग की एक प्रणाली है.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई से ऑल इंडिया जेम जूलरी डोमेस्टिक काउंसिल के निदेशक दिनेश जैन ने कहा कि, "एचयूआईडी प्रणाली के ख़िलाफ़ देशव्यापी हड़ताल को बहुत बड़ा समर्थन मिला है. दुकानें दिन भर बंद रहीं."
उन्होंने कहा, "बड़े कॉरपोरेट्स कभी भी इस तरह की हड़ताल में हिस्सा नहीं लेते. देश के चारों ज़ोन में स्थित ज़्यादातर दुकानों का संचालन व्यक्तिगत या पारिवारिक तौर पर किया जाता है."
हालांकि तमिलनाडु और केरल में ओणम के त्योहार की वजह से दुकानों को केवल दोपहर के 12.30 बजे तक ही बंद रखा गया.

इमेज स्रोत, Reuters
क्या है एचयूआईडी?
एचयूआईडी यानी हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन छह अंकों एक अल्फान्यूमेरिक कोड है जिसे जूलरी पर लगाया जाता है.
इसमें इसकी जानकारी भी दी जाती है कि वह सोना कितने कैरेट का है. 16 जून से पूरे देश के 256 ज़िलों में हॉलमार्क जूलरी अनिवार्य कर दिया गया है.
इस कोड के होने से यह पता चल जाता है कि इसे किसने बनाया है, इसका वजन कितना है और इसे कोड किस हॉलमार्किंग सेंटर में दिया गया है.

इमेज स्रोत, ANI
इसका विरोध क्यों?
ज्वेलर्स एचयूआईडी का विरोध करने की वजह बताते हैं कि यह इज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ है.
साथ ही उन्हें इस बात का भी डर है कि हॉलमार्क की गई जूलरी और बेची गई जूलरी में किसी भी तरह का बेमेल होने पर उन पर कार्रवाई की जा सकती है.
उनका यह भी कहना है कि हॉलमार्क की वजह से बड़ी मात्रा में ख़रीदारी करने वाले ग्राहकों को जूलरी ख़रीदने में और अधिक समय लगेगा.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
तालिबान ने अफ़ग़ान राजधानी काबुल के उत्तर में तालिबान विरोधी ताक़तों के आख़िरी प्रमुख गढ़ पंजशीर घाटी की घेराबंदी का दावा किया है.
तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने दावा किया कि बागलान प्रांत के बन्नू, पुल-ए-हिसार और देह-ए-सलाह के तीन जिलों को दुश्मन से पूरी तरह से मुक्त कर दिया गया है.
उन्होंने ट्विटर पर एक ट्वीट में कहा कि सालंग हाईवे खुला है और दुश्मन पंजशीर तक ही सिमट कर रह गया है.
काबुल के उत्तर में हिंदुकुश पहाड़ियों से घिरी पंजशीर घाटी लंबे समय से तालिबान विरोधी ताक़तों का केंद्र रही है.
जबीहुल्लाह मुजाहिद ने कहा कि तालिबान समस्या का शांतिपूर्ण समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

इमेज स्रोत, Reuters
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने काबुल में एक मीटिंग के दौरान कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने वाले लोग अगर वापस लौटते हैं तो उन पर कोई ख़तरा नहीं है.
राजधानी काबुल में लोया जिरगा (सम्मानित लोगों की सभा) की एक बैठक के दौरान उन्होंने ये बात कही. उन्होंने कहा कि अगला लक्ष्य अफ़ग़ानिस्तान के निर्माण का है.
"पिछली सरकार के विशेषज्ञ और कर्मचारियों को अपनी सुरक्षा की चिंता नहीं करनी चाहिए. हमारा मक़सद अफ़ग़ानिस्तान का निर्माण करना है."
उन्होंने देश के विद्वानों से अपील करते हुए कहा कि वे आम लोगों और विशेषज्ञों को ये भरोसा दिलाएं कि मुल्क को उनकी ज़रूरत है.
तालिबान के प्रवक्ता ज़बीहुल्ला मुजाहिद ने कहा कि तालिबान की सरकार आर्थिक तरक्की के लिए काम करेगी.
उन्होंने ये भी कहा कि अगली सरकार समावेषी होगी और उसमें सभी गुटों चाहे वे किसी भी दल के हों या नस्ल के, शामिल किया जाएगा.

इमेज स्रोत, ANI
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से किसान आंदोलन के कारण सड़क मार्ग से यातायात बंद होने की समस्या का हल खोजने के लिए कहा है. किसान आंदोलन में भाग ले रहे ये किसान केंद्र सरकार के तीन कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं.
जस्टिस संजय किशन कॉल की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा कि प्रदर्शनकारी किसानों को निर्धारित स्थान पर विरोध करने का हक है लेकिन वे ट्रैफिक के आवागमन को बंद नहीं कर सकते हैं.
इस मामले में केंद्र सरकार का पक्ष रख रहे सॉलीसिटर जनरल तुषार मेहता को बेंच ने कहा, "समस्या का हल केंद्र और राज्य सरकारों के हाथ में है. आपको इसका हल खोजना होगा. उन्हें एक स्थान से विरोध करने का हक हो सकता है लेकिन सड़कें इस तरह से बंद नहीं की जा सकती हैं."
नोएडा की एक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर सरकार को ये निर्देश दिए जाने की मांग की है कि नोएडा से दिल्ली का रास्ता साफ़ रखा जाए ताकि किसी को आने-जाने में दिक्कत न हो. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई 20 सितंबर को मुकर्रर की है.
कोर्ट ने केंद्र सरकार से इसका हल खोजने के लिए समय देते हुए रिपोर्ट करने को कहा है. जस्टिस कौल ने तुषार मेहता से कहा, "आपके पास काफी समय है. कोई हल खोजकर लाइए."
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले में अपने हलफनामे में कहा है कि वो किसानों को समझाने की तमाम कोशिशें कर रहे हैं कि सड़क जाम करने से आने-जाने वालों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश की सरकार को इस मामले में अपना पक्ष रखने के लिए कहा था.

इमेज स्रोत, ANI
कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने सोमवार को कहा कि जो लोग जम्मू और कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानते और पाकिस्तान के समर्थन में झुकाव रखते हैं, क्या उन्हें पार्टी की पंजाब इकाई का हिस्सा होना चाहिए, इसे लेकर उन्होंने पार्टी से आत्ममंथन करने का आग्रह किया है. मनीष तिवारी नवजोत सिंह सिद्धू के दो सलाहकारों पर कटाक्ष कर रहे थे.
उनकी यह प्रतिक्रिया पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के दो सलाहकारों की कश्मीर और पाकिस्तान जैसे संवेदनशील राष्ट्रीय मुद्दों पर हाल की टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताने के एक दिन बाद आई है.
अलोचना का सामना कर रहे सिद्धू ने सोमवार को अपने दोनों सलाहकारों मलविंदर सिंह माली और प्यारे लाल गर्ग को पटियाला स्थित अपने आवास पर तलब किया है.
तिवारी ने अपने ट्वीट में लिखा, "मैं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और पंजाब के प्रभारी हरीश रावत से आग्रह करता हूं कि इसे लेकर गंभीरता से आत्ममंथन करें कि जो लोग जम्मू-कश्मीर को भारत का हिस्सा नहीं मानते और जिनका स्पष्ट रूप से पाकिस्तान के समर्थन में रुझान है, क्या उन्हें कांग्रेस की पंजाब इकाई का हिस्सा होना चाहिए? यह उन सभी लोगों का मज़ाक है जिन्होंने भारत के लिए अपना ख़ून बहाया है."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
अमरिंदर सिंह ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने सिद्धू के इन दोनों सलाहकारों की बातों को आपत्तिजनक और बेतुकी टिप्पणी बताते हुए आगाह किया था कि ऐसी बातें राज्य और देश की शांति के लिए ख़तरनाक हैं.
उन्होंने सिद्धू से अपने सलाहकारों को काबू में रखने को भी कहा और उनके सलाहकारों से कहा कि उन्हें केवल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को सलाह देने पर ही टिके रहना चाहिए और उन मुद्दों पर नहीं बोलना चाहिए, जिनके बारे में उन्हें स्पष्ट रूप से बहुत कम या कोई जानकारी न हो.
इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट YouTube समाप्त
क्या है विवाद का कारण?
सिद्धू ने 11 अगस्त को पूर्व सरकारी शिक्षक और राजनीतिक विश्लेषक माली को और बाबू फरीद यूनिवर्सिटी के पूर्व रजिस्ट्रार गर्ग को अपना सलाहकार नियुक्त किया था.
माली ने हाल के अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कश्मीर में अनुच्छेद 370 को रद्द करने के मुद्दे पर बात की थी, जिसके तहत तत्कालीन राज्य जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्राप्त था.
उन्होंने लिखा था कि जब कश्मीर भारत का अंग था ही तो अनुच्छेद 370 और धारा 35 ए को हटाने की क्या ज़रूरत थी. उन्होंने यह भी लिखा था कि "कश्मीर, कश्मीरियों का देश है."
वहीं, गर्ग ने कथित तौर पर मुख्यमंत्री की पाकिस्तान की आलोचना पर सवाल उठाया था.
इस बीच विपक्षी पार्टी शिरोमणि अकाली दल ने इस पूरे प्रकरण पर सिद्धू की चुप्पी पर सवाल उठाया है.
अकाली नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा है कि सिद्धू ने अब तक अपने सलाहकारों के बयानों का खंडन नहीं किया है.
चीमा ने कहा कि "वह इस मामले पर चुप हैं. इसका मतलब है कि वो (सलाहकार) सिद्धू की सहमति से ऐसी टिप्पणी कर रहे हैं."

इमेज स्रोत, Reuters
ब्रिटेन में सशस्त्र सेना के मंत्री जेम्स हिप्पे ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से लोगों को निकालने का मिशन अमेरिकी सैनिकों के वहां से हटते ही ख़त्म होगा.
उन्होंने कहा कि ब्रिटेन 31 अगस्त की पहले से तय समयसीमा पर काम कर रहा था. इसी तारीख़ को अमेरिका को भी अफ़ग़ानिस्तान छोड़ना है. हालांकि प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से और समय मांगने की उम्मीद है.
जेम्स हिप्पे ने ये भी कहा कि लोगों की वहां से निकालना तालिबान के सहयोग पर भी निर्भर करता है. साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि ब्रिटेन तालिबान के साथ कुछ भी "पहले से मान कर" नहीं चल रहा.
प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन मंगलवार को जी7 देशों की एक आपातकालीन बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से अमेरिकी सैनिकों को वापस लाने की समय सीमा बढ़ाने के लिए कहेंगे ताकि लोगों को वहां से निकालने की उड़ाने जारी रह सकें.

इमेज स्रोत, Reuters
बताया जा रहा है कि काबुल पर तालिबान के क़ब्ज़े के एक हफ़्ते बाद भी वहां देश से बाहर निकलने के लिए हवाई अड्डे पर लोग हज़ारों की संख्या में इंतज़ार में हैं.
मंत्री जेम्स हिप्पे ने बीबीसी ब्रेकफ़ास्ट को बताया कि बीते हफ़्ते तक 6,631 लोगों को वहां से निकाल कर ब्रिटेन लगा गया है और अगले 24 घंटों में नौ और विमान वहां से निकलेंगे.
उन्होंने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान में अब भी ब्रिटिश पासपोर्ट वाले क़रीब 1,800 लोग मौजूद हैं और यूके सरकार के साथ काम करने वाले 2,275 अफ़ग़ान लोगों का भी यहां पुनर्वास किया जा सकता है साथ ही अफ़ग़ान सिविल सोसाइटी के लोगों की भी एक सूची है, अगर हम सक्षम हुए तो उन्हें भी बाहर निकालना चाहेंगे.
उन्होंने कहा कि यह निकासी अमेरिका के बग़ैर संभव नहीं है जिसने हवाई अड्डे पर "पूरे ऑपरेशन को बढ़िया तरीक़े से" संभाल लिया है.
उन्होंने कहा कि अगर समयसीमा बढ़ाने का अवसर नही मिला तो तो हमें 31 अगस्त तक अपनी योजनाओं के मुताबिक काम करना होगा और अगर ऐसा है तो वहां से अधिक से अधिक लोगों को निकालने के लिए हर मिनट मायने रखता है.

इमेज स्रोत, Getty Images
पंजशीर घाटी अब अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के ख़िलाफ़ प्रतिरोध का आख़िरी गढ़ है.
यहां अहमद मसूद के नेतृत्व में तालिबान विरोधी ताक़तों का एक मोर्चा उभरता हुआ दिख रहा है.
पंजशीर में संगठित हो रहे तालिबान विरोधी मोर्चे के प्रवक्ता का कहना है कि उनका गुट 'जंग से पहले बातचीत के जरिए शांति स्थापित करना चाहता' है.
नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट के सदस्य अली नज़री ने बीबीसी को बताया कि तालिबान विरोधी नेता मरहूम अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद के नेतृत्व में हज़ारों लड़ाके वहां जमा हुए हैं.
नज़री ने तालिबान के साथ सार्थक बातचीत के महत्व पर बल देते हुए कहा कि "अहमद मसूद के साथी जंग के लिए भी तैयार हैं."

इमेज स्रोत, Reuters
उन्होंने कहा, "नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट का मानना है कि स्थाई शांति के लिए अफ़ग़ानिस्तान की मूलभूत समस्याओं का समाधान ज़रूरी है. मुल्क में जो रास्ता हम पिछले 40 साल या 100 साल या 200 साल से जिस रास्ते पर चल रहे थे, हम उस रास्ते पर अब नहीं चल सकते हैं."
उन्होंने कहा कि देश की सबसे बड़ी समस्या केंद्रीयकृत राजनीतिक व्यवस्था है.
"अफगानिस्तान विभिन्न जातीय अल्पसंख्यकों का देश है. यह कई संस्कृतियों का घर है. यहां सत्ता में साझेदारी की ज़रूरत है. सत्ता का ऐसा बंटवारा जहां हर कोई खुद को सरकार में देख सके. यदि कोई राजनीतिक ताकत हावी होना चाहती है, तो वह चाहे कहीं भी हो, वह गृहयुद्ध को बढ़ावा देगी और मौजूदा लड़ाई जारी रहेगी."

इमेज स्रोत, REUTERS/Tatyana Makeyeva
तालिबान के प्रवक्ता ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान छोड़कर जाने के लिए पश्चिमी देशों को दी गई 31 अगस्त तक की मोहलत बढ़ाई नहीं जाएगी.
तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने कहा कि 31 अगस्त डेडलाइन है.
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा है कि इस तारीख़ तक अमेरिकी फौजे अफ़ग़ानिस्तान से चली जाएंगी और इस तारीख़ के बाद रुकने को अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़े के तौर पर देखा जाएगा.
उन्होंने इस रुख पर किसी बदलाव की सूरत में अंज़ाम भुगतने की चेतावनी दी है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन मंगलवार को ग्रुप-7 देशों की बैठक में राष्ट्रपति बाइडन से काबुल में थोड़ा और समय रुकने के लिए कह सकते हैं.

इमेज स्रोत, TASNIM
ईरान में विदेशों से कोविड वैक्सीन मंगाने के सवाल पर देश की एलीट कमांडो यूनिट रिवॉल्यूशनरी गार्ड के कमांडर-इन-चीफ़ मेजर जनरल हुसैन सलामी ने कहा है कि उन्हें दुश्मनों की वैक्सीन पर यकीन नहीं है.
वे ईरान के केरमन प्रांत में कोरोना महामारी की स्थिति का जायजा लेने के लिए आधिकारिक दौरे पर थे.
सुप्रीम लीडर खामनेई के नेतृत्व की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि ईरान कई अभूतपूर्व चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है. उसके सामने कोरोना महामारी और आर्थिक प्रतिबंधों की चुनौती है. ईरान के दुश्मन उसका मनोबल तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा कि ईरान को अपने इन दुश्मनों पर रत्ती भर भी यकीन नहीं है. उन्होंने कहा, "जैविक हथियारों का इस्तेमाल हमारे दुश्मनों की सैन्य रणनीति का एक अभिन्न अंग है. ऐसे में दुश्मन की वैक्सीन को इजाजत नहीं दी जाएगी."
ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी आईआरआईबी (इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान ब्रॉडकास्टिंग) ने मेजर जनरल हुसैन सलामी को ये कहते हुए बताया कि अमेरिका 'ईरान का दुश्मन नंबर' एक है.
उन्होंने पूछा है, "चूंकि अमेरिका ने ईरान को दवा खरीदने से रोक दिया था तो इस बात की क्या गारंटी है कि वे हमें कुछ ऐसा नहीं दे देंगे जिससे लोगों को लकवा मार दे या फिर भविष्य के लिए कोई समस्या पैदा हो जाए?"
रिवॉल्यूशनरी गार्ड के कमांडर-इन-चीफ़ उन अमेरिकी प्रतिबंधों का जिक्र कर रहे थे जिसकी वजह ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापार नहीं कर सकता है. इसी वजह से वो दवाएं भी नहीं खरीद सकता है.
हालांकि ब्रिटेन ने उस हद तक ईरान पर पाबंदियां नहीं लगाई हैं लेकिन ईरान का कहना है कि वो ब्रिटेन और अमेरिका से वैक्सीन नहीं लेगा.
हालांकि ईरान ने जापान के द्वारा दी गई एस्ट्रा ज़ेनेका वैक्सीन स्वीकार की है. ईरान अपने यहां वैक्सीन तैयार करने की कोशिश कर रहा है और वो ऐसे देशों से भी वैक्सीन लेने के लिए तैयार है जिन पर उसे यकीन है.

इमेज स्रोत, EPA
जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल ने कहा है कि अगर रूस ने यूक्रेन के ख़िलाफ़ विवादास्पद गैस पाइप लाइन का इस्तेमाल किया तो उस पर और प्रतिबंध लगाए जाएंगे.
चांसलर का पद छोड़ने से पहले आख़िरी बार कीव के दौरे पर आईं एंगेला मर्केल ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से कहा कि वो 'नॉर्ड स्ट्रीम-2' प्रोजेक्ट को लेकर उनकी चिंताएं समझती हैं.
यूक्रेन इस गैस पाइप लाइन का विरोध कर रहा है. उसका कहना है कि इस पाइप लाइन से उसकी सुरक्षा को ख़तरा पहुंचता है. ये गैस पाइप लाइन बाल्टिक सागर के नीचे से होकर गुजरेगा और इससे जर्मनी को रूस की तरफ़ से गैस का निर्यात दोगुना हो जाएगा.
यूक्रेन को डर है कि रूस की 'नॉर्ड स्ट्रीम-2' गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट के कारण इस क्षेत्र से होने वाली ऊर्जा आपूर्ति पर मॉस्को का नियंत्रण बढ़ जाएगा और उसका प्रभाव और मजबूत हो जाएगा.

इमेज स्रोत, EPA/SERGEY DOLZHENKO
रविवार को एंगेला मर्केल के साथ एक साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने इस प्रोजेक्ट को 'क्रेमलिन का जियोपॉलिटिकल वीपन' (भूराजनीतिक हथियार) करार दिया. उन्होंने कहा कि ये परियोजना पूरे यूरोप के लिए खतरनाक बन जाएगी.
लेकिन 16 साल सत्ता में बने रहने के बाद आने वाली सर्दियों में पद छोड़ रहीं एंगेला मर्केल ने कहा कि जर्मनी और अमेरिका इस बात पर सहमत हैं कि 'नॉर्ड स्ट्रीम-2' गैस पाइप लाइन प्रोजेक्ट का इस्तेमाल यूक्रेन के ख़िलाफ़ नहीं किया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा कि 'गैस का इस्तेमाल हथियार की तरह' किया गया तो जर्मनी और अमेरिका के बीच हुए समझौते के तहत रूस के ख़िलाफ़ पाबंदियां लगाई जा सकती हैं.
दूसरी तरफ़, वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की का कहना है कि वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यूक्रेन की पाइपलाइन के जरिए जब रूसी गैस की डिलेवरी का अनुबंध तीन साल में ख़त्म हो जाएगा तो क्या होगा.

यूक्रेन को ट्रांजिट फी के नाम पर अरबों डॉलर की आमदनी होती है और इसके बंद होने से उसकी अर्थव्यवस्था को नुक़सान होगा.
शुक्रवार को मॉस्को में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात के बाद कीव दौरे पर आईं जर्मन चांसलर ने यूक्रेन से उसके रीन्यूएबल एनर्जी सेक्टर को विस्तार देने के लिए एक अरब डॉलर से ज्यादा की मदद देने का वादा किया है.
यूरोपीय संघ की गैस की ज़रूरत का 40 फ़ीसदी रूस पहले से ही आपूर्ति करता है. नई पाइपलाइन से बाल्टिक सागर के नीचे से गुजरने वाले गैस की मात्रा बढ़कर हर साल 55 अरब क्यूबिक मीटर हो जाएगी.
मर्केल ने मध्य और पूर्वी यूरोप के देशों को ये भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि इस पाइपलाइन से जर्मनी रूस की ऊर्जा आपूर्ति पर निर्भर नहीं हो जाएगा.

इमेज स्रोत, EPA
ग्रुप-7 देशों ने अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर चर्चा के लिए मंगलवार को एक आपातकालीन बैठक बुलाई है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के बीच बातचीत के बाद इस वर्चुअल सम्मिट को लेकर सहमति बनी है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा है कि दोनों नेता इस बात पर सहमत थे कि इस मानवीय आपदा को रोकने के लिए वैश्विक समुदाय के एक साथ आने की ज़रूरत है.
इस साल ग्रुप-7 देशों के समूह का नेतृत्व ब्रिटेन के पास है.
ब्रिटेन के अलावा इस समूह में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान शामिल हैं.
व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर बताया कि जी-7 देशों के नेता तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान को अपने नियंत्रण में लेने के बाद साझा रणनीति और नज़रिये पर चर्चा करेंगे.