24 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान में क्या-क्या हुआ

उथल-पुथल से गुजर रहे अफ़ग़ानिस्तान के लिए मंगलवार एक और गतिविधियों भरा दिन रहा. अफ़ग़ानिस्तान से लोगों को निकाले जाने का अभियान जारी है जबकि बड़ी संख्या में अफ़ग़ान लोग अभी भी देश छोड़ने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं.

लाइव कवरेज

विभुराज, मोहम्मद शाहिद and अपूर्व कृष्ण

  1. 24 अगस्त को अफ़ग़ानिस्तान में क्या-क्या हुआ

    अफ़ग़ानिस्तान, काबुल

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    उथल-पुथल से गुजर रहे अफ़ग़ानिस्तान के लिए मंगलवार एक और गतिविधियों भरा दिन रहा. अफ़ग़ानिस्तान से लोगों को निकाले जाने का अभियान जारी है जबकि बड़ी संख्या में अफ़ग़ान लोग अभी भी देश छोड़ने के लिए अपनी बारी का इंतज़ार कर रहे हैं.

    अफ़ग़ानिस्तान का अब तक का हाल

    • बाइडन प्रशासन ने कहा है कि अमेरिका अपने पहले की योजना के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने की 31 अगस्त की डेडलाइन पर कायम है.
    • नॉर्वे की सेना ने कहा है कि काबुल एयरपोर्ट पर उसका फील्ड हॉस्पिटल 31 अगस्त तक बंद कर दिया जाएगा. नॉर्वे ने ये फ़ैसला अफ़ग़ानिस्तान की बिगड़ती सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए लिया है.
    • यूरोपीय संघ ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के एक दस्तावेज़ पर उसने दस्तखत किए हैं. लेकिन वो तालिबान द्वारा दी गई कथित यातनाओं पर और कड़ी कार्रवाई चाहता है.
    • अमेरिकी सेना के एक अधिकारी ने बताया है कि जुलाई से 63,900 अमेरिकी नागरिक, नेटो के स्टाफ़ और अफ़ग़ान नागरिकों को वहां से हटाया जा चुका है.
    • अफ़ग़ानिस्तान में ब्रिटेन के राजदूत रहे स्टीफन इवांस ने कहा है कि तालिबान का आकलन उसकी बातों से नहीं बल्कि उसके कामों से किया जाना चाहिए.
    • तालिबान ने कहा है कि सभी विदेशी नागरिकों को अफ़ग़ानिस्तान छोड़ने के लिए दी गई 31 अगस्त तक की मोहलत बढ़ाई नहीं जाएगी. साथ ही उसने ये भी कहा है कि वो नहीं चाहता, अफ़ग़ान लोग मुल्क छोड़कर जाएं.
    • किसी के ख़िलाफ़ बदले की कार्रवाई नहीं करने के तालिबान के दावे के बाद संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार कमिश्नर ने उन रिपोर्टों को 'विश्वसनीय' बताया है जिनमें कहा गया था कि वो अपने विरोधियों को 'मौत की सज़ा' दे रहा है.
    • भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के काबिज़ होने के बाद वहाँ से लोगों को बाहर निकालने के अभियान को ऑपरेशन देवी शक्ति नाम दिया है.
    • काबुल पर तालिबान का नियंत्रण स्थापित होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान के ताज़ा हालात और वहां बिगड़ती सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मंगलवार को बातचीत हुई.
    • रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के प्रभावशाली होने के बाद ये ज़रूरी है कि इस्लामी अतिवादियों को दूर रखा जाए.
    • अमेरिकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़ अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर ने काबुल में तालिबान नेता अब्दुल ग़नी बरादर के साथ सोमवार को आमने-सामने की मुलाकात की.
    • केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल से आए श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के स्वरूप को ग्रहण किया है.
  2. तालिबान ने कहा- अफ़ग़ानिस्तान की कामकाजी महिलाएं घरों में ही रहें

    अफ़ग़ानिस्तान की महिलाएं

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    तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में कामकाजी महिलाओं से घर में रहने को कहा है.

    तालिबान ने कहा है कि जब तक कामकाजी महिलाओं की सुरक्षा तय करने के लिए एक माकूल ढांचा तैयार नहीं हो जाता है, तब तक वो घर में ही रहें.

    तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने मंगलवार को पत्रकारों से कहा, “ये एक अस्थाई प्रक्रिया है.”

    तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान में जब पहले सरकार चलाई थी तब महिलाओं पर कड़ी पाबंदियां लगाई गईं थीं. लेकिन इस बार तालिबान अपनी अलग छवि पेश करने की कोशिश में है.

    तालिबान के प्रवक्ता मजाहिद ने कहाकि कामकाजी महिलाओं पर पाबंदी ज़्यादा दिनों की नहीं होगी.

    उन्होंने कहा, “हमारे सुरक्षा बलों को इस बात का प्रशिक्षण नहीं मिला है कि महिलाओं के साथ कैसा बर्ताव किया जाए. उनमें से कुछ ये नहीं जानते कि महिलाओं से कैसे बात की जाए. जब तक सुरक्षा के पूरे इंतजाम लागू न हो जाएं, हम महिलाओं से कहेंगे कि वो घर में ही रहें.”

  3. तालिबान से 'कनेक्शन', फ्रांस में शरण और अब सरकारी निगरानी में

    सांकेतिक तस्वीर

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    फ्रांस के गृह मंत्री ने बताया है कि काबुल से फ्रांस लाए गए पांच अफ़ग़ानों को निगरानी में रखा गया है.

    इन अफ़ग़ानों को लेकर ये संदेह जताया गया था कि तालिबान के साथ उनके रिश्ते हो सकते हैं.

    गेराल्ड डारमानिन ने रेडियो फ्रांसइन्फो को बताया कि फ्रांस लाए गए हज़ारों अफ़ग़ानों में से एक के तालिबान के साथ रिश्ते होने का संदेह है.

    लेकिन उन्होंने कहा, "लेकिन उसने बहुत मदद की है, फ्रांस की सेना, फ्रांस के नागरिकों और पत्रकारों की. हमने उसे और उसके दोस्तों को फ्रांस पहुंचने पर निगरानी में रखा है ताकि सभी संदेहों को दूर किया जा सके."

    समाचार एजेंसी एएफ़पी ने सरकारी दस्तावेज़ों के आधार पर कहा है कि निगरानी में रखे गए शख़्स ने तालिबान के साथ अपने संबंधों की बात मानी है. उसने कहा है कि वो काबुल में तालिबान की सुरक्षा चौकी का इंचार्ज था.

  4. ऑपरेशन देवी शक्ति- भारत ने काबुल से लोगों को निकालने के अभियान को दिया ये नाम

    नई दिल्ली एयरपोर्ट

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    भारत ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के काबिज़ होने के बाद वहाँ से लोगों को बाहर निकालने के अभियान को ऑपरेशन देवी शक्ति नाम दिया है.

    विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को एक ट्वीट में लिखा- "ऑपरेशन देवी शक्ति जारी है. काबुल से 78 लोगों को दुशांबे के रास्ते लाया गया. वायुसेना, एयर इंडिया और विदेश मंत्रालय की टीम को सलाम."

    मंगलवार को एयर इंडिया का विमान काबुल से 78 यात्रियों को लेकर ताजिकिस्तान के दुशांबे से होता हुआ नई दिल्ली पहुँचा.

    इससे पहले सोमवार को भारत ने 75 सिख लोगों को काबुल से बाहर निकाला था.

    केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को बताया कि अभी तक अफ़ग़ानिस्तान से 626 लोगों को बाहर निकाला गया है.

    इनमें 228 भारतीय हैं. उन्होंने साथ ही बताया कि इनमें 77 लोग सिख हैं.

    पुरी ने बताया कि इन लोगों में भारतीय दूतावास में काम करनेवाले कर्मचारी शामिल नहीं हैं.

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  5. अफ़ग़ानिस्तान पर पहले जर्मनी फिर पुतिन से पीएम मोदी ने की बात

    मोदी-पुतिन

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    काबुल पर तालिबान का नियंत्रण स्थापित होने के बाद अफ़ग़ानिस्तान के ताज़ा हालात और वहां बिगड़ती सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर बढ़ती वैश्विक चिंताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मंगलवार को बातचीत हुई.

    इस बातचीत के बाद भारत में रूस के दूतावास ने बताया कि दोनों नेताओं ने अफ़ग़ानिस्तान से चरमपंथी विचारधारा और नशीले पदार्थों को फैलने से रोकने के लिए सहयोग बढ़ाने का इरादा जताया.

    दोनों देशों ने इन मुद्दों पर विचार-विमर्श के लिए एक स्थाई द्विपक्षीय व्यवस्था बनाने को लेकर भी सहमति जताई.

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    इस बातचीत की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने एक ट्वीट करके बताया, "अफ़ग़ानिस्तान के ताज़ा घटनाक्रम पर राष्ट्रपति पुतिन के साथ विस्तार से विचारों का आदान-प्रदान हुआ. हमने द्विपक्षीय एजेंडे पर भी बात की जिसमें कोरोना महामारी को लेकर भारत-रूस के सहयोग की बात भी शामिल थी. महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार विमर्श जारी रखने पर हमने सहमति जताई है."

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    रूसी दूतावास ने बताया कि अफ़ग़ानिस्तान के हालात पर दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई है.

    बयान में कहा गया कि दोनों पक्षों ने अफ़ग़ानिस्तान में शांति और स्थिरता स्थापित करने के लिए साझा कोशिशों की अहमियत की ओर भी ध्यान दिलाया ताकि इस क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.

    सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल के साथ भी अफ़ग़ानिस्तान के मुद्दे पर बात की थी.

  6. अफ़ग़ानिस्तान ने एशिया को कैसे किया बेचैन, क्या चीन का होगा फ़ायदा?

    चीन के विदेश मंत्री तालिबान के नेता मुल्ला बरादर के साथ

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    अफ़ग़ानिस्तान से आ रही बेचैन कर देने वाली तस्वीरों ने पूरी दुनिया की तरह एशिया में भी लाखों लोगों को सकते में डाल दिया. कई लोग अब ये सवाल पूछने लगे हैं कि क्या अमेरिका पर अभी भी भरोसा किया जा सकता है?

    तालिबान के लड़ाकों के सामने काबुल के पतन के हफ़्ते भर बाद ही अमेरिका की उपराष्ट्रपति कमला हैरिस रविवार को सिंगापुर पहुँची. कमला हैरिस के एशिया के तूफ़ानी दौरे में सिंगापुर पहला पड़ाव था.

    'एशिया अमेरिका की प्राथमिकता में सबसे ऊपर है', ये कह कर कमला हैरिस ने यहाँ की चिंताओं को दूर करने की कोशिश की है.

    लेकिन एशिया में जो लोग अफ़ग़ानिस्तान के हालात को लेकर परेशान हैं, क्या उनके लिए इतना काफ़ी है?

    और क्या इस संकट का लाभ उठाने की चीनी कोशिश को अमेरिका रोक सकता है, जिसे कुछ लोग अमेरिका विरोधी प्रोपेगैंडा के लिए एक सुनहरा मौक़ा बता रहे हैं?

  7. अफ़ग़ानिस्तान: 'जब तालिबान अपनी बीवियों के लिए मेकअप का सामान ख़रीदते थे'

    तालिबान

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    15 अगस्त, 2021 को तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर क़ब्ज़ा कर लिया. तालिबान इससे पहले 1990 के दशक में अफ़ग़ानिस्तान पर शासन कर चुके हैं.

    वर्तमान स्थिति को देखते हुए, बीबीसी उर्दू ने तालिबान के1990 के दशक के शासन(1996-2001) केसमय केअफ़ग़ानिस्तान के हालात का जायज़ा लेने के लिए आलेखों की एक सिरीज़ शुरू की है, जिसकी तीसरी क़िस्त पाठकों के लिए प्रस्तुत है.

    1988 के बाद से मुझे कई बार अफ़ग़ानिस्तान जाने का मौक़ा मिला, कभी व्यक्तिगत रूप से, कभी पत्रकार के तौर पर या कभी जिरगा (अफ़ग़ानिस्तान में क़बायली सरदारों का समूह) सदस्य के रूप में तो कभी बतौर शिक्षक.

    पहली बार मैं अवामी नेशनल पार्टी के नेता और ख़ुदाई ख़िदमतगार आंदोलन के संस्थापक ख़ान अब्दुल गफ़्फ़ार ख़ान के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए 1988 में जलालाबाद गया था. लेकिन मेरा वो सफ़र काफ़ी ख़राब रहा, क्योंकि उस समय एक बम धमाके में काफ़ी लोग मारे गए थे.

  8. कोरोना की तीसरी लहर की आशंका के बीच कैसे बढ़ाएँ बच्चों में इम्यूनिटी

    मास्क में बच्चा

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    भारत में केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से गठित की गई समिति ने अक्तूबर महीने में कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई है.

    राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के तहत विशेषज्ञों की एक टीम गठित की गई थी. इस समिति ने बच्चों के लिए बेहतर मेडिकल सुविधाओं की तैयारी पर ज़ोर देते हुए बच्चों में भी बड़ों के समान ख़तरे की बात कही है.

    कोविड-19, थर्ड वेव प्रीप्रेयर्डनेस: चिल्ड्रन वल्नरबिलिटी एंड रिकवरी नाम की इस रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अगर बच्चे बड़ी संख्या में संक्रमित होते हैं, तो बच्चों के लिए मेडिकल सुविधाएँ, डॉक्टर, उपकरण जैसे वेंटिलेटर, एंबुलेंस आदि भी उतने नहीं हैं, जितने की ज़रूरत है.

    डॉ एम वली, नई दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल में मेडिसिन विभाग में सीनियर कंसल्टेंट हैं.

  9. तालिबान ने कहा- भूल चुके हैं अतीत, नहीं ले रहे बदला, यूएन ने कहा- दे रहे हैं सजा-ए-मौत

    तालिबान के प्रवक्ता

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    तालिबान ने कहा है कि वो किसी के ख़िलाफ़ बदले की कार्रवाई नहीं कर रहे हैं.

    तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया, “ हम अतीत की सब बातें भूल चुके हैं. तालिबान के पास ऐसे लोगों को कोई लिस्ट नहीं है जिन्हें निशाना बनाया जाना हो या फिर बदला लिया जाना हो.”

    तालिबान के अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा करने के बाद से ऐसी रिपोर्टें सामने आ रही हैं जिनमें दावा किया गया है कि तालिबान के लड़ाके विरोधियों को निशाना बना रहे हैं.

    रिपोर्टों के मुताबिक तालिबान उन्हें ‘मौत की सज़ा’ दे रहे हैं. संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार कमिश्नर मिशेल बैशले ने ऐसी रिपोर्टों को ‘विश्वसनीय’ बताया.

    उन्होंने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार काउंसिल को बताया था कि ऐसी रिपोर्टें भी मिली हैं कि तालिबान महिलाओं पर तमाम पाबंदियां लगा रहे हैं और बच्चों को सैनिक के तौर पर भर्ती कर रहे हैं.

    तालिबान जब पहले 1996 से 2001 के दौरान सत्ता में थे तो उन्होंने इस्लामिक शरिया क़ानून को कड़ाई से लागू किया था. हालांकि तालिबान इस बार अपनी छवि को अलग तरीके से पेश करने की कोशिश में हैं. लेकिन मानवाधिकार उल्लंघन की रिपोर्ट लगातार सामने आ रही हैं.

    बीते हफ़्ते एमनेस्टी इंटरनेशनल ने बताया था कि तालिबान ने हाल में हज़ारा समुदाय के लोगों बुरी तरह से टार्जर किया था और उनकी जान ले ली थी. प्रत्यक्षदर्शियों ने जुलाई में हुई घटना की ख़ौफनाक़ तस्वीर सामने रखी थी.

  10. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान पर सऊदी अरब की चुप्पी का राज़ क्या? 

    प्रिंस सलमान और मुल्ला बरादर

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    1996 में जब तालिबान अफ़ग़ानिस्तान की सत्ता पर काबिज़ हुआ, तब सऊदी अरब, यूएई और पाकिस्तान- वो तीन देश थे, जिन्होंने सबसे पहले तालिबान को मान्यता दी थी.

    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर तालिबान के नियंत्रण के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने इस वाकये का ज़िक्र किया और कहा कि उसने ग़ुलामी की जंज़ीरों को तोड़ दिया है.

    दूसरी ओर यूएई ने अफ़ग़ानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी को शरण दी है. संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया कि उन्होंने ''मानवीय आधार पर राष्ट्रपति ग़नी और उनके परिवार का अपने देश में स्वागत किया है.'' इसके अलावा तालिबान से जुड़ा उनका कोई बड़ा बयान नहीं आया है.

    सऊदी अरब की सरकार ने इतना ज़रूर कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से उसके सभी राजनयिक सुरक्षित रियाद लौट आए हैं. सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी सऊदी प्रेस एजेंसी के अनुसार विदेश मंत्रालय ने ये फ़ैसला अफ़ग़ानिस्तान की अस्थिर स्थिति को देखते हुए किया.

    लेकिन इसके अलावा पूरे मामले पर सऊदी अरब ने चुप्पी साध रखी है.

  11. अफ़ग़ानिस्तान का काबुल एयरपोर्ट: ज़िंदगी की उम्मीद और मौत के डर से जूझते हज़ारों लोग

    एयरपोर्ट पर फंसे लोग

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    अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल के हामिद करज़ई एयरपोर्ट पर बीते 10 दिनों से अफ़रा-तफ़री का आलम है. हज़ारों लोगों की भीड़. चीख़ पुकार. कभी गोलीबारी तो कभी भगदड़.

    काबुल में तालिबान के कब्ज़े के अगले दिन दुनिया भर में इस एयरपोर्ट की तस्वीर और वीडियो वायरल हुए थे. इसमें अफ़ग़ानिस्तान के लोग अमेरिकी सेना के एक विमान के आगे दौड़ते दिख रहे थे.

    एक तस्वीर प्लेन के अंदर की भी थी. जहाँ बेशुमार लोग विमान में सवार थे. एक विमान से गिरते लोगों की तस्वीरें भी सामने आईं थीं.

    अब भी हालात ज़्यादा नहीं बदले हैं. आलम ये है कि डबलूएचओ ने कहा है कि एयरपोर्ट पर अस्त-व्यस्त स्थिति की वजह से वो सामान नहीं भेज पा रहे हैं.

  12. टोक्यो पैरालंपिक: एक हाथ से दुनिया जीतने निकलीं पलक कोहली

    वीडियो कैप्शन, टोक्यो पैरालंपिक: एक हाथ से दुनिया जीतने निकलीं पलक कोहली

    कितना बुरा लगता होगा, जब किसी को विकलांगता की वजह से खेलने-कूदने से रोक दिया जाए. कितना बुरा लगता होगा, जब किसी को सबकी निगाह में सिर्फ़ तरस नज़र आए.

    लेकिन भारत की पैरा-बैडमिंटन प्लेयर पलक कोहली उस मिट्टी से नहीं बनी हैं, जो इन बातों से हार मान लें. उन्होंने मेहनत की और आज पैरालंपिक्स खेलने जा रहीं सबसे युवा भारतीय बनकर एक मिसाल क़ायम की है.

  13. अफ़ग़ानिस्तान: पंजशीर घाटी में तालिबान और उसके विरोधी आमने-सामने

    वीडियो कैप्शन, अफ़ग़ानिस्तान: पंजशीर घाटी में तालिबान और उसके विरोधी आमने-सामने

    अफ़ग़ानिस्तान की पंजशीर घाटी को लेकर तालिबान और उसकी विरोधी ताक़तों ने अलग-अलग दावे किए हैं.

    तालिबान ने पंजशीर घाटी को घेरने की जानकारी दी है तो विरोधी ताक़तों ने उसे इस इलाक़े से दूर रहने की चेतावनी दी है. अफ़ग़ानिस्तान की पूर्व सरकार के समर्थन वाली सेना और तालिबान ने पंजशीर घाटी को लेकर बातचीत जारी होने की जानकारी भी दी है.

    तालिबान के प्रवक्ता ज़बिउल्लाह मुजाहिद ने पंजशीर घाटी को तीन तरफ से घेरे जाने की जानकारी दी और ट्विटर पर लिखा, "अमीरात मामले को शांति के साथ सुलझाना चाहता है. "

    तालिबान ने राजधानी काबुल समेत अफ़ग़ानिस्तान के ज़्यादातर हिस्सों पर कब्ज़ा कर लिया है लेकिन पंजशीर घाटी अब तक तालिबान के पहुंच से दूर रही है. हालांकि, सोमवार को काबुल के बाहर भी तालिबान का विरोध होने की रिपोर्टें मिली हैं.

  14. अफ़ग़ान शरणार्थी परिवार की दिल छू लेने वाली दास्तां

    वीडियो कैप्शन, अफ़ग़ान शरणार्थी परिवार की दिल छू लेने वाली दास्तां

    शेर ख़ान डगरवाल का परिवार 2011 में काबुल से भारत आया था. शेर ख़ान अफ़ग़ान फ़ौज में थे और वहाँ उन्होंने लगभग 16 साल काम किया.

    शेर ख़ान के परिवार में 7 सदस्य हैं और यहाँ जीवनयापन के लिए वह कबाड़ी की दुकान चलाते हैं.

    उनकी बेटी सितारा एक डेंटिस्ट्री में हेल्पर का काम करती है. वो काबुल को किस तरह याद करते हैं और तालिबान शासन पर क्या कहते हैं?

  15. राहुल गांधी: 'हिन्दुस्तान की पूंजी बेची जा रही है, ये युवाओं के भविष्य पर आक्रमण है'

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    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को कहा कि नेशनल मोनेटाइज़ेशन पाइपलाइन पॉलिसी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछले 70 सालों में जो संसाधन बनाए गए थे, सरकार उन्हें बेच रही है.

    राहुल गांधी पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे. उन्होंने कहा कि "बीजेपी ये दावा करती है कि पिछले 70 सालों में कोई काम नहीं हुआ है. लेकिन इन सालों में जो राष्ट्रीय संपत्तियां बनाई गई हैं, उन्हें बेचा जा रहा है."

    उन्होंने कहा, "हिन्दुस्तान की पूंजी बेची जा रही है, ये आपके भविष्य पर आक्रमण है. नरेंद्र मोदी जी अपने 2-3 उद्योगपति मित्रों के साथ हिन्दुस्तान के युवा पर आक्रमण कर रहे हैं, इसे आप अच्छी तरह समझिए."

    "जैसे ही एकाधिकार बनता जाएगा उसी तेज़ी से आपको रोज़गार मिलना बंद हो जाएगा. इस देश में जो छोटे और मध्यम व्यवसाय हैं जो कल आपको रोज़गार देंगे वो सब बंद हो जाएंगे, ख़त्म हो जाएंगे. 3-4 व्यवसाय रहेंगे इनको रोज़गार देने की कोई ज़रूरत नहीं रहेगी."

    राहुल गांधी ने ये आरोप लगाया कि मोदी सरकार की इस निजीकरण की योजना का मकसद अर्थव्यवस्था के प्रमुख क्षेत्रों में एकाधिकार पैदा करना और नौकरियां ख़त्म करना है.

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    राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए स्मृति इरानी ने कहा, "साल 2008 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के संदर्भ में एक आरएफपी तब घोषित हुआ जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी. क्या राहुल गांधी का ये आरोप है कि जिस सरकार की मुखिया उनकी माता जी थी वे सरकार देश बेचने का दुस्साहस कर रही थी."

    "पारदर्शिता के साथ जिस सरकार ने राष्ट्र की तिजोरी को भरने का काम किया और कांग्रेस के लुटेरों से सुरक्षित किया उस सरकार पर छींटाकशी करने का राहुल गांधी का प्रयास है."

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    "कल वित्त मंत्री द्वारा जो घोषणा हुई उसमें स्पष्ट कहा गया कि सरकार अपनी ऑनरशिप रिटेन करेगी और मॉनिटराइजेशन की प्रक्रिया में सरकार की ऑनरशिप को मेंटेन करने के साथ-साथ ये भी चिन्हित किया गया कि सभी राज्य अपने नोडल ऑफिसर इस प्रक्रिया के लिए घोषित करेंगे."

    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को छह लाख करोड़ की महत्वाकांक्षी नेशनल मोनेटाइज़ेशन पाइपलाइन की घोषणा की थी. इस योजना के तहत, सड़क, रेलवे स्टेशन, यात्री ट्रेन, स्टेडियम, एयरपोर्ट जैसे बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों को निजी कंपनियों को लीज पर दिए जाने का प्रस्ताव रखा गया है.

  16. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 24अगस्त 2021, सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली के साथ

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  17. तालिबान ने कहा- नहीं बढ़ाई जाएगी 31 अगस्त की डेडलाइन

    तालिबान प्रवक्ता ज़बीउल्लाह

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    तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने कहा कि काबुल से विदेशियों के बाहर जाने की तारीख़ आगे नहीं बढ़ाई जाएगी. अभी ये तारीख 31 अगस्त है.

    उन्होंने कहा, “ मुझे नहीं लगता कि 31 अगस्त की डेडलाइन बढ़ाई जाएगी”

    मुजाहिद ने कहा, “विदेशी नागरिकों के पास डेडलाइन ख़त्म होने के पहले बाहर निकलने का पर्याप्त वक्त है.”

    अमेरिका और सहयोगी देशों को कहना है कि 31 अगस्त तक सभी लोगों को बाहर ले जाना मुश्किल है. जी-7 की मंगलवार को हो रही बैठक में भी इस पर बात होनी हैं. इसके पहले तालिबान ने अपना रुख साफ कर दिया है.

    तालिबान के प्रवक्ता ने ये भी कहा कि तालिबान नहीं चाहते हैं कि अफ़ग़ानिस्तान का कोई भी नागरिक देश छोड़कर बाहर जाए. अमेरिका और सहयोगी देशों की मदद करने वाले अफ़ग़ानिस्तान के लोग तालिबान के काबुल पर कब्ज़े के बाद देश छोड़कर निकल जाना चाहते हैं.

    तालिबान प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद

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    तालिबान प्रवक्ता ने मुल्ला बरादर की अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसी सीआईए के प्रमुख से बातचीत के बारे में कोई भी जानकारी होने से इंकार किया है.

    ज़बीउल्लाह ने ये भी कहा है कि तालिबान पंजशीर घाटी में, उनका विरोध करने वालों के साथ बातचीत करके समाधान निकाला चाहते हैं.

  18. पुतिन ने अफ़ग़ानिस्तान में इस्लामिक स्टेट को लेकर किया आगाह

    व्लादिमीर पुतिन

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    रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के प्रभावशाली होने के बाद ये ज़रूरी है कि इस्लामी अतिवादियों को दूर रखा जाए.

    रूसी राष्ट्रपति ने सोमवार को मध्य एशियाई देशों के सैन्य संगठन सीएसटीओ के एक शिखर सम्मेलन में ये बात कही.

    ये आपात बैठक अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी जिसमें रूस के अलावा ताजिकिस्तान, आर्मीनिया, बेलारूस, कज़ाकस्तान और किर्गिस्तान के नेताओं ने हिस्सा लिया.

    इस ऑनलाइन बैठक की जानकारी देते हुए रूस सरकार के प्रवक्ता ने दमित्री पेस्कोव ने कहा कि सभी छह सदस्यों ने अफ़ग़ानिस्तान की स्थिति पर गहरी चिंता जताई.

    रूसी समाचार एजेंसी इतरतास के अनुसार पेस्कोव ने कहा, "सदस्य देशों ने माना कि ये ज़रूरी है कि चरमपंथी इस्लामी तत्वों को अपने इलाक़े में घुसपैठ करने से दूर रखा जाए और हमारे नागरिकों की चरमपंथियों के गुट में नियुक्ति को रोका जाए, जिसके लिए सोशल नेटवर्क और इंटरनेट की भी सहारा लिया जाता हो."

    प्रवक्ता ने कहा, "रूसी राष्ट्रपति ने ख़ास तौर पर इस्लामिक स्टेट को लेकर चिंता जताई जो अफ़ग़ानिस्तान में मज़बूती से बने रहे हैं. ये एक ख़तरनाक स्थिति है जिससे सीएसटीओ के इलाक़े को ख़तरा है."

    बैठक में आए नेताओं में इस बात पर भी सहमति हुई कि वो अफ़ग़ानिस्तान से आने वाले ख़तरों का मिलकर जवाब देने के बारे में 16 सितंबर तक सहमति बना लेंगे.

    क्रेमलिन प्रवक्ता पेस्कोव ने साथ ही कहा कि रूस का अफ़ग़ानिस्तान की घटनाओं में हस्तक्षेप का कोई इरादा नहीं है.

    प्रवक्ता से जब पूछा गया कि रूस क्या अफ़ग़ानिस्तान में किसी तरह की मध्यस्थता करेगा तो उनका उत्तर था - "ऐसा बिल्कुल नहीं है."

    उन्होंने कहा राष्ट्रपति पुतिन ने बैठक में कहा कि अभी ये ज़रूरी है कि संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद और जी-20 देश आपस में तालमेल कर अफ़ग़ानिस्तान के संकट का समाधान निकालें.

  19. सुप्रीम कोर्ट के बाहर कथित ख़ुदकुशी की कोशिश करने वाली महिला की मौत

    सुप्रीम कोर्ट

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    दिल्ली पुलिस ने बताया है कि पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के बाहर कथित तौर पर ख़ुद को आग लगाकर ख़ुदकुशी करनेवाली महिला की मौत हो गई है.

    16 अगस्त को इस महिला और एक पुरुष ने कथित तौर पर ख़ुद को आग लगा लिया था. पुरुष की मौत 21 अगस्त को हो गई.

    समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक़ पुलिस ने बताया है कि इस घटना से पहले महिला और पुरुष ने फ़ेसबुक पर एक लाइव वीडियो रिकॉर्ड किया था.

    पुलिस के अनुसार इस घटना के बारे में और जाँच की जा रही है.

  20. सीआईए डायरेक्टर ने की तालिबान नेता मुल्ला बरादर से खुफिया मुलाकात: रिपोर्ट

    सीआईए के डायरेक्टर विलियम जे बर्न्स

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    इमेज कैप्शन, सीआईए के डायरेक्टर विलियम जे बर्न्स

    अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए के डायरेक्टर ने काबुल में तालिबान नेता अब्दुल ग़नी बरादर के साथ सोमवार को आमने-सामने की मुलाकात की.

    अमेरिकी अख़बार वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक़ काबुल पर तालिबान का नियंत्रण स्थापित होने के बाद दोनों पक्षों के बीच इतने उच्च स्तर पर होने वाली ये पहली मुलाकात है.

    15 अगस्त को तालिबान ने काबुल को अपने नियंत्रण में ले लिया था. इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी देश छोड़कर संयुक्त अरब अमीरात चले गए थे.

    वाशिंगटन पोस्ट ने एक अनाम अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा है कि सीआईए के डायरेक्टर विलियम जे बर्न्स इस खुफिया मीटिंग के लिए काबुल गए थे.

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    अख़बार ने लिखा है, "राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने सबसे शीर्ष स्तर के जासूस को काबुल भेजने का फ़ैसला ऐसे समय में लिया है जब काबुल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से लोगों को लाने की जबर्दस्त कोशिश चल रही है. राष्ट्रपति इसे इतिहास का सबसे मुश्किल एयरलिफ्ट ऑपरेशन करार दे चुके हैं."

    इस मुलाकात के बारे में तालिबान ने आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है लेकिन ऐसा माना जा रहा है कि 31 अगस्त की डेडलाइन के बारे में संभवतः बातचीत हुई हो.

    बाइडन प्रशासन पर उसके सहयोगी देशों का दबाव है कि वो 31 अगस्त की डेडलाइन के बाद भी अमेरिकी सैनिकों को वहां कुछ समय के लिए रखें ताकि पश्चिमी देशों के नागरिकों और अफ़ग़ान सहयोगियों को वहां से लाया जा सका.

    हालांकि तालिबान के एक प्रवक्ता ने सोमवार को इस बात के लिए चेताया था कि अगर अमेरिका और ब्रिटेन ने 31 अगस्त के बाद भी अपनी सेनाएं वहां रखीं तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं.