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ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच 2015 में हुए परमाणु समझौते को बहाल करने के लिए हो रही बातचीत स्थगित हो गई है.
सिंधुवासिनी, अभिजीत श्रीवास्तव and मोहम्मद शाहिद
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ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच 2015 में हुए परमाणु समझौते को बहाल करने के लिए हो रही बातचीत स्थगित हो गई है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार अधिकारियों का कहना है कि कुछ बिंदुओं को लेकर अब भी असहमतियाँ हैं, जिन्हें हल किए जाने की ज़रूरत है.
ईरान के शीर्ष वार्ताकार अब्बास अरक़ची ने वियना से ईरान के सरकारी टीवी चैनल से कहा, “अब हम समझौते से पहले की तुलना में कहीं ज़्यादा करीब हैं लेकिन अभी भी हमारे बीच कुछ ऐसी दूरियाँ हैं जिन्हें पाटना आसान काम नहीं है. आज रात हम तेहरान लौट जाएंगे.”
हालिया राउंड में करीब एक हफ़्ते तक बातचीत करने के बाद अब सभी पक्ष वापस लौट रहे हैं.
बातचीत अब फिर कब शुरू होगी, इसे लेकर अभी कोई तारीख़ निर्धारित नहीं की गई है लेकिन माना जा रहा है कि अगले 10 दिनों में सभी वापस आ सकते हैं.
2015 के परमाणु समझौती की बहाली के लिए इस साल अप्रैल से ही वियना में बातचीत चल रही है ताकि अमेरिका ईरान पर लगी पाबंदियों को हटा सके और समझौता फिर से अपने पुराने रूप में वापस आ सके.
इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने अगस्त के दूसरे हफ़्ते तक जताई थी किसी समझौते तक पहुँचने की उम्मीद जताई थी.
मध्य अगस्त से नया ईरानी प्रशासन पद सँभालेगा. अब बातचीत रुकने के बाद सबका ध्यान ईरान और संयुक्त राष्ट्र से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अन्य समझौते पर चला गया है.
यह समझौता 24 जून को समाप्त हो जाएगा. इसका मकसद ईरान को 2015 के परमाणु समझौते पर नज़र रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सुझाए उपायों को कम करने से रोकना है.

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परमाणु समझौते पर रईसी का रुख कैसा होगा?
ईरान में कट्टरपंथी नेता इब्राहीम रईसी देश ने नए राष्ट्रपति चुने गए हैं.
रईसी को पश्चिमी देशों का मुखर आलोचक माना जाता है. हसन रूहानी के बाद अब रईसी शुक्रवार को पद पर काबिज हो होंगे.
ईरान परमाणु समझौता हसन रूहानी के शासन काल में ही बिखर गया था.
हालाँकि इसकी उम्मीद कम है कि रईसी इस बारे में ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातोल्ला अली ख़ामेनेई से अलग कोई कदम उठाएंगे.
ईरान में नीतियों से सम्बन्धित लगभग सभी फ़ैसले खामेनेई ही लेते हैं.
साल 2018 में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका को ईरान परमाणु समझौते से अलग कर लिया था.
ट्रंप का कहना था कि इस समझौते की शर्तें ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए काफ़ी नहीं हैं.
परमाणु समझौते से अलग होने के बाद ट्रंप ने ईरान पर कड़ी आर्थिक पाबंदियाँ भी लगा दी थीं.
इसके बाद से ही ईरान यूरेनियम संवर्धन की तय सीमा का उल्लंघन करता आया है.

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युगांडा की ओलंपिक टीम का एक सदस्य जापान पहुंचने पर कोरोना पॉजिटिव पाया गया है.
23 जुलाई को जापान की राजधानी टोक्यो में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए पहुंच रहे विभिन्न देशों के दस्ते में किसी व्यक्ति के कोरोना पॉजिटिव आने का यह पहला मामला है.
ओलंपिक का आयोजन बीते वर्ष कोरोना वायरस महामारी की वजह से स्थगित कर दिया गया था. लेकिन फिलहाल कोरोना की नई लहर आने के बाजवदू इसे आयोजित किया जा रहा है.
ओलंपिक खेल जापान की राजधानी टोक्यो में 23 जुलाई से 8 अगस्त के बीच होने हैं.
युगांडा में भी कोरोना वायरस महामारी के बढ़ते मामले देखे जा रहे हैं. इसकी वजह से शुक्रवार को वहां सरकार ने लॉकडाउन के नियमों को और सख्त कर दिया है.
रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना पॉजिटिव पाया गया शख़्स युगांडा की उस नौ सदस्यीय टीम का हिस्सा था जिसने वैक्सीन के दोनों डोज़ ले लिए थे. इस टीम में बॉक्सर, कोच और अधिकारी शामिल हैं.

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युगांडा छोड़ने से पहले सभी टीम सदस्यों की निगेटिव थी रिपोर्ट
युगांडा छोड़ने से पहले किए गए कोविड टेस्ट में टीम के सभी सदस्यों की रिपोर्ट निगेटिव आई थी. हालांकि जब यह टीम टोक्यो पहुंची और नियमानुसार उनकी जांच हुई तो इनमें से एक सदस्य कोरोना पॉजिटिव पाया गया.
जापान के अधिकारियों ने स्थानीय मीडिया को इसकी जानकारी दी कि कोरोना पॉजिटिव आए युगांडा की टीम के सदस्य को सरकारी मान्यताप्राप्त क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है.
टीम के बाकी सदस्यों को चार्टर्ड बस से पश्चिम जापान स्थित ओसाका ले जाया गया जहां ओलंपिक खेलों के शुरू होने से पहले टीम अभ्यास करेगी.
टोक्यो ओलंपिक के लिए जापान पहुंचने वाले विदेशी खिलाड़ियों के दस्ते में युगांडा केवल दूसरी टीम है. इससे पहले ऑस्ट्रेलिया के महिलाओं की सॉफ़्टबॉल टीम 1 जून को पहुंची थी.

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ओलंपिक आयोजन को लेकर संशय की स्थिति
जापान में चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी को देखते हुए ओलंपिक खेलों के आयोजन के दौरान स्टेडियमों को दर्शकों से खाली रखा जाना सबसे कम जोखिम भरा विकल्प होगा.
लेकिन जापान के अन्य अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर संभव हो तो वे चाहेंगे कि घरेलू प्रशंसक इन महाकुंभ को दर्शक दीर्घा में बैठ कर देखें.
असाही शिंबुन अख़बार के मुताबिक टोक्यो में 20 जून को कोविड के 376 नए मामले सामने आए जबकि एक शख़्स की मौत हो गई है. नए मामले बीते हफ़्ते के मुकाबले 72 अधिक हैं.
स्थानीय मीडिया के पोल में यह बात सामने आई कि वैक्सीन मिलने की सुस्त रफ़्तार की वजह से इस महाकुंभ के आयोजन को लेकर लोगों के बीच पनप रहा संदेह बरकरार है.
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अब तक जापान की आबादी के कुल 16 फ़ीसद लोगों को ही वैक्सीन की डोज़ मिली है.
उधार युगांडा के राष्ट्रपति यूवेरी मुसेविनी ने पर्यटकों और आपातकालीन सेवाओं को छोड़ कर देश में सड़क यातायात पर प्रतिबंध लगा दिया है.
साथ ही वहां स्कूलों, कॉलेजों और धर्मस्थलों को 42 दिनों के लिए बंद करने का एलान भी किया गया है.
मुसेविनी ने बताया कि युगांडा में बीते एक हफ़्ते के दौरान कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या 100 से बढ़कर 1,700 पर पहुंच गई है.

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केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर पर पीएम नरेंद्र मोदी की बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से पहले रविवार को कांग्रेस ने एक बार फिर जम्मू-कश्मीर के राज्य का दर्जा वापस बहाल करने की मांग की है.
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, "कांग्रेस कार्य समिति ने 6 अगस्त 2019 को ही स्पष्ट रूप से जम्मू और कश्मीर के लिए पूर्ण राज्य के बहाली की मांग की थी, जो आज भी बरकरार है."
सुरजेवाला ने कहा, "जम्मू और कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा ख़त्म करके भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने वहां प्रजातंत्र को बहुत बड़ी चोट पहुंचाई है. वहाँ विधायिका को बरकरार किया जाए और जनता को वोट डालकर अपना प्रतिनिधि चुनने का मौका दिया जाए."
उन्होंने कहा, "हमारा मानना है कि इसे ख़त्म करना लोकतंत्र और संवैधानिक सिद्धांतों पर सीधा हमला है."
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सुरजेवाला ने कहा कि केंद्र सरकार को संविधान और लोकतंत्र के हित में जम्मू-कश्मीर पर कांग्रेस की इस मांग को स्वीकार करना चाहिए.
हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता सुरजेवाला ने यह नहीं बताया कि पार्टी 24 जून को होने वाली इस बैठक में हिस्सा लेगी या नहीं.

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कांग्रेस की ओर से यह बयान 24 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में उनके आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए चार पूर्व मुख्यमंत्रियों समेत केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू और कश्मीर के 14 राजनेताओं को निमंत्रण भेजे जाने के बाद आया है.
न्यूज़ एजेंसी पीटीआई के मुताबिक इस बैठक से जम्मू और कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने का रोड मैप तय होने की उम्मीद है.

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जम्मू-कश्मीर में मुख्यधारा की पार्टियों का समूह गुपकार गठबंधन मंगलवार को बैठक कर यह तय करेगा कि प्रधानमंत्री की बैठक में भाग लेना है या नहीं.
बीते सप्ताह गुपकार गठबंधन की बैठक के बाद नेशनल कॉन्फ़्रेंस के अध्यक्ष फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने कहा था कि वे केंद्र के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं.
उन्होंने कहा था कि उन्होंने कोई दरवाज़ा या विकल्प बंद नहीं किया है अगर वे निमंत्रण देते हैं तो फिर उस समय फ़ैसला लिया जाएगा.

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कोरोना संक्रमण के मामलों में गिरावट के साथ ही दिल्ली सरकार लॉकडाउन में भी लगातार ढील दे रही है.
रविवार को दिल्ली सरकार ने अनलॉक-4 की घोषणा की.
बार, पार्क खोलने की दी गई अनुमति
इसके तहत अब दिल्ली में 21 जून यानी सोमवार से बार भी खोले जा सकेंगे.
बार को दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक, 50 फ़ीसद क्षमता के साथ खोलने की अनुमति दी गई है.
साथ ही रेस्टोरेंट के खुलने के समय को भी बढ़ाया गया. अब रेस्टोरेंट सुबह 8 बजे से रात 10 बजे तक खोले जा सकेंगे. पहले सुबह 10 से रात 8 बजे तक की अनुमति थी. हालांकि रेस्टोरेंट पहले की तरह अपनी 50% क्षमता के साथ ही खोले जा सकेंगे.
सोमवार से राष्ट्रीय राजधानी में पार्क, गार्डन, गोल्फ़ क्लब और आउटडोर योग करने की इजाजत भी दी गई है.
वहीं मार्केट, मार्केट कॉम्पलेक्स और मॉल सुबह 10 से रात 8 बजे तक खोले जा सकते हैं.
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स्कूल, कॉलेज, सिनेमा, स्पा, जिम रहेंगे बंद
सरकार ने अभी स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थानों, स्वीमिंग पूल, स्टेडियम, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को खोलने की अनुमति नहीं दी है.
न ही स्पा, जिम, सिनेमा, मल्टीप्लेकस, बैंक्वेट हॉल, ऑडिटोरियम, एम्य़ूज़मेंट पार्क, वाटर पार्क आदि ही अभी खुले हैं.
धर्मस्थलों को खोलने की अनुमति भी है लेकिन अभी श्रद्धालुओं के यहाँ आने पर प्रतिबंध रहेगा.
दिल्ली मेट्रो भी पहले की तरह 50 फ़ीसद क्षमता के साथ चलती रहेंगी.
ऑटो-कैब में अधिकतम दो सवारी ही बैठ सकेंगे.
शादी को लेकर भी पहले से जारी प्रतिबंध बरकरार रहेंगे. फिलहाल कोर्ट मैरेज और घर पर ही शादियां आयोजित की जा सकती हैं जिसमें अधिकमत 20 लोगों के शामिल होने की अनुमति है.
अंतिम संस्कार में भी अधिकतम 20 लोग ही शामिल हो सकते हैं.

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दो गुटों में बंटी लोक जनशक्ति पार्टी की लड़ाई अब चाचा पशुपति पारस और भतीजे चिराग पासवान के बीच पार्टी का असली नेता होने की दावेदारी पर आ खड़ा हुआ है.
चिराग पासवान ने रविवार को नई दिल्ली में पार्टी के अपने समर्थकों के साथ बैठक की. इस बैठक में लिहाजा चिराग पासवान ने रामविलास पासवान के राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में अपने समर्थन का प्रदर्शन करने का फ़ैसला लिया.
बैठक के बाद उन्होंने पाँच जुलाई से बिहार में 'आशीर्वाद यात्रा' निकालने का एलान किया.
उन्होंने कहा, "मेरे पिता की जयंती 5 जुलाई को है. मेरे पिता और चाचा अब मेरे साथ नहीं हैं. लिहाजा हमने उस दिन हाजीपुर से आशीर्वाद यात्रा निकालने का फ़ैसला लिया है. यह यात्रा बिहार के सभी ज़िलों से गुज़रेगी, हमें लोगों के और प्यार और आशीर्वाद की ज़रूरत है."
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उन्होंने बताया, "राष्ट्रीय कार्यकारिणी की इस बैठक में अधिकांश सदस्य उपस्थित थे. इस दौरान मौजूद सदस्यों ने निष्कासित सदस्यों के पार्टी के चिह्न के इस्तेमाल का विरोध किया. इस दौरान यह भी मांग की गई कि रामविलास पासवान की एक बड़ी प्रतिमा स्थापित की जाए और उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया जाए."
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रविवार को ही चिराग ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाक़ात की और अपना पक्ष रखा.
चिराग पासवान ने बीते बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को एक पत्र के ज़रिए उन्हें सदन में पार्टी का नेता घोषित करने की अपील की थी.
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तब उन्होंने ये भी कहा था कि वह ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और “यह पद सिर्फ़ दो परिस्थितियों में खाली हो सकता है, जब राष्ट्रीय अध्यक्ष का निधन हो जाए या राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वयं इस्तीफ़ा दे दे.”
हालांकि, इसके बाद भी ओम बिरला ने बीते हफ़्ते ही पशुपति पारस को लोकसभा में एलजेपी के नेता के तौर पर मान्यता दे दी थी.
चिराग पासवान ने इसपर अपनी नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा था कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला को लोक जनशक्ति पार्टी का संविधान देखना चाहिए उसके बाद विचार करना चाहिए.
पशुपति और चिराग के बीच दो गुटों में बंटी पार्टी में निर्वाचित सांसदों की संख्या के लिहाज़ से संख्या बल में पारस गुट का पलड़ा भारी है. उनके पास इस समय पाँच सांसद हैं. और चिराग गुट के पास ख़ुद चिराग पासवान के रूप में एक सांसद है.
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फ़ाइनल के तीसरे दिन का खेल समय पर शुरू नहीं हो सकेगा.
इंग्लैंड के साउथैम्पटन में सुबह बारिश हुई जिसकी वजह से मैदान का आउटफ़ील्ड भीगा हुआ है.
स्थानीय समयानुसार सुबह 10:20 या भारतीय समयानुसार दोपहर 2:50 बजे अंपायर मैदान का दोबारा निरीक्षण करेंगे. मैच भारतीय समय से तीन बजे शुरू होना है.
टेस्ट में न्यूज़ीलैंड ने टॉस जीत भारत को बल्लेबाज़ी थमाई थी. दूसरे दिन का खेल ख़त्म होने तक भारत तीन विकेट खोकर 141 रन बना चुका था.
कप्तान विराट कोहली 44 और अजिंक्य रहाणे 29 रन बनाकर टिके हुए हैं.
इससे पहले शुक्रवार को पहले दिन का खेल बारिश के कारण रद्द करना पड़ा था.
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मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफ़नामा दायर कर कहा है कि आर्थिक तंगी और दूसरे कई अन्य कारणों से वह कोविड19 संक्रमण के कारण जान गंवाने वालों के परिवारों को चार लाख रुपए की सहायता राशि नहीं दे सकती है.
हलफ़नामें में यह भी कहा गया है कि सरकार ने कोविड महामारी से निपटने के लिए और उससे पीड़ित परिवारों के लिए कई तरह की लाभकारी योजनाएं लागू की हैं.
सरकार ने यह भी कहा है कि महामारी से निपटने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की गई हैं जिनका लोगों को फ़ायदा भी मिला है.
यह हलफ़नामा सहायता राशि के संबंध में पीड़ित परिवारों की ओर से दी गई याचिकाओं के जवाब में दायर किया गया है.

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सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर हलफ़नामे में केंद्र सरकार ने यह भी कहा कि केंद्र और सभी राज्य सरकारों ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए ज़रूरतमंद व्यक्तियों के लिए काफ़ी कुछ किया है और इसमें काफ़ी ख़र्च हुआ है, जिससे आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है.
केंद्र सरकार ने अपने हलफ़नामे में कोरोना संक्रमण के कारण मारे गए लोगों के प्रति अफ़सोस ज़ाहिर किया है और माना है कि लोगों का मरना ना सिर्फ़ उनके परिवार के लिए बल्कि राष्ट्र के लिए भी क्षति है.
केंद्र सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा है कि यह महामारी एक आपदा है. इस संक्रमण के असाधारण फैलाव और प्रभाव से निपटने के लिए प्राकृतिक आपदा से निपटने के उपायों से अलग उपायों और प्रयासों की आवश्यकता है. सरकार ने कहा कि यह बेहद चुनौतीपूर्ण है.
हलफ़नामे के अनुसार, महामारी अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और इसे लेकर कोई भी सटीक भविष्यवाणी नहीं की जा सकती है. इसके प्रभावों से निपटने के लिए स्वास्थ्य और ग़ैर-स्वास्थ्य क्षेत्रों में तेज़ी से विकास और उन्हें उन्नत बनाने की आवश्यकता है. इसमें देश के लाखों-करोड़ों रुपए ख़र्च होंगे.

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हलफ़नामे में कहा गया है कि भविष्य में इस महामारी के प्रभावों से निपटने के लिए वित्तीय और तकनीकी दोनों स्तर पर संसाधन जुटाने की आवश्यकता है.
आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 के तहत 12 अधिसूचित आपदाओं के लिए अनुदान राहत राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष के माध्यम से दी जाती है. सभी राज्यों के लिए साल 2021-22 के लिए वार्षिक राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष 22,184 करोड़ रुपये है.
ऐसे में अगर कोविड के कारण जान गंवाने वालों के परिवार वालों को चार लाख रुपये दिये जाते हैं तो राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष का पूरा धन इसी पर ख़र्च हो जाएगा और संभव है कि इससे ज्यादा ही ख़र्च हो जाए. सरकार ने अपने हलफ़नामे में कहा है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत राज्य का विषय है.
बीबीसी के सहयोगी सुचित्र मोहंती ने हलफ़नामे की प्रति के हवाले से लिखा है कि केंद्र सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अगर पूरी एसडीआरएफ़ राशि कोविड पीड़ितों के लिए सहायता राशि पर ही ख़र्च हो जाएगी तो राज्यों के पास कोविड 19 से निपटने के लिए तैयारियों, विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं और ज़रूरी प्रावधानों के लिए या फिर आपदा के समय राहत मुहैया कराने केलिए धन नहीं होगा. जिसमें बाढ़, चक्रवात आदि का ख़तरा भी शामिल हैं.

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तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने कहा है कि तुर्की इस्लामोफ़ोबिया और विद्वेष के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे आगे है.
अंतालया डिप्लोमेसी फ़ोरम में बोलते हुए राष्ट्रपति अर्दोआन ने कहा कि दुनिया लगातार बदल रही है और हमें अपनी कूटनीति को अंतरराष्ट्रीय संबंधों के हिसाब से बनाना चाहिए.
इस दौरान उन्होंने कहा कि तुर्की इस्लामोफ़ोबिया, विद्वेष और सांस्कृतिक नस्लवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सबसे आगे है जो कि महामारी के दौरान ख़तरनाक स्तर पर पहुंच चुका है.
अर्दोआन ने इस दौरान कहा कि तुर्की की कूटनीति एशिया के साथ एशिया अ न्यू इनीशिएटिव के साथ आगे बढ़ रही है तो वहीं अफ़्रीका के साथ भी हर क्षेत्र में सहयोग मज़बूत किए जा रहे हैं.

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साथ ही उन्होंने कहा कि तुर्की में एक दशक के दौरान 40 लाख सीरियाई शरणार्थी आए हैं, उन्होंने बताया कि तुर्की 50 लाख और शरणार्थियों की मदद करने जा रहा है.
राष्ट्रपति अर्दोआन ने बताया कि तुर्की इकलौता देश है जिसने सीरिया में पीकेके, पीवाईडी, वाईपीजी और दाएश (आईएस) जैसे चरमपंथी संगठनों से जंग लड़ी है और 4,500 दाएश सदस्यों को मारा है.
उन्होंने कहा, “तुर्की ने 4 लाख से ज़्यादा सीरियाई लोगों को उनकी ज़मीन पर वापस सुरक्षित लौटने में मदद की है.”

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द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, अगले सप्ताह तजाकिस्तान में होने वाली एससीओ (शांघाई को-ऑपरेशन आर्गेनाइज़ेशन) की बैठक में भारत और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हिस्सा लेंगे. भारत और पाकिस्तान के अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है.
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ़ सम्मेलन में हिस्सा लेंगे.
पाकिस्तानी अख़बार, द डॉन से बात करते हुए मोईद यूसुफ़ ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान के एनएसए के बीच सीधी मुलाक़ात की कोई संभावना नहीं है.
दोनों ही देशों के अधिकारियों के मुताबिक़, इस सम्मेलन के दौरान भारत और पाकिस्तान के सुरक्षा सलाहकारों के बीच सीधी वार्ता नहीं होगी.
हाल के महीनों में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी भी कई मौक़ों पर एक जगह आए हैं लेकिन दोनों की सीधी मुलाक़ात नहीं हुई है.
पर्दे के पीछे हुई हैं बैठकें?

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हालांकि ये सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब भारत और पाकिस्तान दोनों ने ही तनाव कम करने के लिए निर्णय लिए हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक,दोनों देशों के बीच पर्दे के पीछे बातचीत भी चली है जिसमें भारत की तरफ़ से अजीत डोभाल और पाकिस्तान की तरफ़ से सैन्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया है. इसकी शुरुआत लाइन ऑफ़ कंट्रोल पर संघर्ष विराम समझौते से हुई थी.
दोनों देशों के बीच भले ही बैक-चैनल बातचीत की रिपोर्टें हों, पाकिस्तान की सरकार सार्वजनिक तौर पर कहती रही है कि भारत जब तक जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने 5 अगस्त 2019 के फ़ैसले को वापस नहीं लेगा, तब तक दोनों देशों के बीच वार्ता नहीं होगी.
तजाकिस्तान में होने वाली एससीओ की बैठक में पहले 22 जून को शीर्ष अधिकारियों की मुलाकात होगी.
पाकिस्तान में होगा साझा सैन्य अभ्यास

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उसके बाद 23 जून को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक होगी. इस बैठक में इस साल पाकिस्तान में होने वाले साझा सैन्य अभ्यास पर भी चर्चा होगी. इसमें भारतीय सैनिक भी हिस्सा लेंगे.
एससीओ सदस्य देशों के सैनिक सालाना 'रीज़नल एंटी टेरर स्ट्रक्चर' सैन्य अभ्यास करते हैं.
हालांकि सितंबर 2020 में जब भारत और पाकिस्तान के एनएसए एससीओ बैठक में आमने-सामने आए थे तब भारतीय एनएसए अजीत डोभाल बैठक से बाहर चले गए थे.
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान के सुरक्षा मामलों पर विशेष सहायक यूसुफ़ ने बैकग्राउंड में विवादित नक्शा दिखाया था जिसमें जूनागढ़ और जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताया गया था.
एससीओ में चीन, रूस, भारत और पाकिस्तान के अलावा मध्य एशिया के कई देश हैं. इस बार बैठक में भारत और चीन के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी पर भी नज़र रहेगी.
अफ़ग़ानिस्तान और ईरान इस संगठन के पर्यवेक्षक सदस्य हैं और वो इस बार बैठक में शामिल नहीं होंगे.

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ईरान के सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह ख़ामेनई ने शनिवार को हुए चुनाव में रूढ़िवादी नेता इब्राहिम रईसी की जीत को दुश्मनों के दुष्प्रचार पर ईरान की जीत बताया है.
ख़ामेनई ने कहा, '’18 जून को हुए चुनावों का महान विजेता ईरानी राष्ट्र है क्योंकि एक बार फिर ईरान ने विदेशी दुशमनों के मीडिया के दुष्प्रचार पर जीत हासिल की है.'’
ईरान को शुक्रवार में हुए राष्ट्रपति चुनावों में रूढ़िवादी जज इब्राहिम रईसी ने जीत हासिल की थी.
अपनी जीत पर वैधता की मुहर लगाने के लिए ईरानी धर्मगुरुओं ने लोगों से बड़ी संख्या में वोट देने की अपील की थी लेकिन अधिकतर ईरानी वोट देने बाहर नहीं निकले.
इसकी वजह अंदरूनी विरोध और आर्थिक दिक्क़तों की वजह से पनपे ग़ुस्से को माना जा रहा है. हाल के सालों में ईरानी लोगों की स्वतंत्रता पर भी कई तरह की पाबंदियां लगी हैं.
इब्राहिम रईसी अगस्त में राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे. वो हसन रूहानी की जगह लेने जा रहे हैं. रूहानी ने कहा है कि सत्ता परिवर्तन आसान रहेगा.
इब्राहिम रईसी ने ईरान के चुनावों में एकतरफ़ा जीत हासिल की है. 60 वर्षीय रईसी शिया धर्मगुरु हैं जिन पर अमेरिका के प्रतिबंध लागू हैं. सर्वोच्च नेता अयातोल्लाह ख़ामेनई ने उनकी उम्मीदवारी का खुला समर्थन किया था.
ईरान के मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को डर है कि रईसी का सत्ताकाल दमन के नए दौर की शुरुआत कर सकता है.
इस बार चुनावों में सिर्फ 48 फीसदी मतदाताओं ने वोट डाला. इनमें से अधिकतर ने रईसी को वोट किया.ख़ामेनई ने कहा है कि ये बताता है कि ईरान के लोग ईरान की सत्ता का समर्थन करते हैं.

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अफ़ग़ानिस्तान के टीवी चैनल टोलो न्यूज़ को दिए साक्षात्कार में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने अफ़ग़ानिस्तान में भारत की मौजूदगी पर सवाल उठाए.
उन्होंने ये भी कहा कि भारत पाकिस्तान के ख़िलाफ़ अफ़ग़ानिस्तान की ज़मीन का इस्तेमाल करता है. पढ़ें टोलो न्यूज़ के प्रमुख लोतफ़ुल्लाह नजफ़िज़ादा दिए साक्षात्कार का भारत से जुड़ा हिस्सा.
नजफ़िज़ादाः आइये अफ़ग़ानिस्तान पर भारत के प्रभाव पर लौटते हैं. आपने ही इसका ज़िक्र किया था. अफ़ग़ानिस्तान में कितने भारतीय वाणिज्य दूतावास हैं?
कुरैशीः क़ाग़ज़ पर, चार ही हैं.
नजफ़िज़ादाः अनाधिकारिक तौर पर?
क़ुरैशीः ये आपको बेहतर पता होगा.
नजफ़िज़ादाः तो आपको इस पर शक है? जो अधिकारिक तौर पर है, उस पर शक़ है?
क़ुरैशीः नहीं, मैं ये कह रहा हूं कि, हमें ऐसा लगता है, कई बार हमें ऐसा लगता है, आप जानते हैं, भारत के साथ आपकी सीमा नहीं लगी है. ज़ाहिर तौर पर आपके स्वतंत्र संबंध हैं और द्विपक्षीय संबंध भी हैं और आपके पास भारत से स्वतंत्र और द्विपक्षीय रिश्ते रखने का हर अधिकार है. आप भारत के साथ कारोबार करते हैं, वो यहां आते हैं और विकास कार्य करते हैं. ये ठीक है, हमें इससे कोई दिक्क़त नहीं है. लेकिन कई बार हमें ये भी लगता है कि उनकी मौजूदगी ज़रूरत से ज़्यादा है क्योंकि आपकी सीमा उनके साथ नहीं लगी है.
नजफ़िज़ादाः तो क्या इससे आपको दिक्कत है?
क़ुरैशीः अगर वो आपकी ज़मीन का इस्तेमाल हमारे ख़िलाफ़ करते हैं तो मुझे इससे दिक्क़त है.
नजफ़िज़ादाः क्या वो ऐसा करते हैं?
क़ुरैशीः हाँ, वो करते हैं
नजफ़िज़ादाः कैसे?
क़ुरैशीः कैसे? आतंकवादी गतिविधियां करके. आप जानते हैं कि हमारे पास इंटेलिजेंस है, हमारे पास जानकारियां हैं, हमने ये साझा भी की हैं और आप जानते हैं, हमारे पास एक बेहद चर्चित व्यक्ति है जिसने पाकिस्तान में, बलूचिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों में संलिप्तता स्वीकार की है.
नजफ़िज़ादाः कोई भी लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद का मुद्दा उठाएगा. क्या ये पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूह हैं?
क़ुरैशीः साफ़तौर पर कहूं तो हमारी सरकार बहुत स्पष्ट है. हम किसी आतंकवादी समूह का समर्थन नहीं कर रहे हैं. हम किसी आतंकवादी समूह का समर्थन नहीं करते हैं.
नजफ़िज़ादाः ये भी हो सकता है कि आप उन्हें आतंकवादी ही ना मानते हों...
क़ुरैशीः आप मेरे मुँह में अपनी बात ना डालें. मैं सिर्फ़ अपनी ही बात रख सकता हूं. लेकिन भारत के साथ हम शांति चाहते हैं. इमरान ख़ान ने प्रधानमंत्री बनते ही कहा कि आप शांति की तरफ एक क़दम उठाइये तो हम दो उठाएंगे. दुर्भाग्यवश, भारत ने इसका जवाब नहीं दिया. दुर्भाग्यवश, भारत ने ऐसे क़दम उठाए जिनसे माहौल और भी ख़राब हुआ. बावजूद इसके, बावजूद इसके हमें ये लगता है कि जम्मू-कश्मीर में जो हालात हैं वो राजनीतिक हैं, और वहां भारत गलत कर रहा है. भारत ने 05 अगस्त 2019 का क़दम उठाकर कश्मीरियों को और अलग-थलग कर दिया है, इससे उनकी कोई मदद नहीं हुई है और आज कश्मीर में परिस्थितियां बहुत नाज़ुक हैं.
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने प्रस्ताव दिया है कि उनकी सरकार की दो बच्चों की नीति राज्य सरकार की ख़ास योजनाओं के लाभ के लिए भी लागू की जाएगी.
असम की पूर्ववर्ती बीजेपी सरकार ने जनसंख्या एवं महिला सशक्तीकरण नीति के तहत असम में जिस भी व्यक्ति के दो से अधिक बच्चे हैं उनको सरकारी नौकरी देने और उनके पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने पर रोक लगा दी है. यह नीति इसी साल एक जनवरी से प्रभाव में आई थी.
द इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ़्रेंस में कहा, “हम धीरे-धीरे सरकारी योजनाओं के लिए जनसंख्या नियम लागू करेंगे. कुछ योजनाएं ऐसी हैं जिसमें हम दो बच्चों की नीति लागू नहीं कर सकते जैसे कि स्कूलों, कॉलेजों में मुफ़्त दाख़िला या फिर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर देना. हर किसी को यह मिलेगा.”

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“लेकिन कुछ योजनाओं के मामले में जैसे कि मुख्यमंत्री आवास योजना जो भविष्य में मध्यम वर्ग के लिए लागू की जाएगी तब दो बच्चों की नीति लागू की जाएगी. इसी तरह, कुछ चुनी हुई योजनाओं के मामले में जनसंख्या नियम धीरे-धीरे लागू किए जाएंगे.”
द हिंदू अख़बार के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने पत्रकारों से कहा कि ‘यह शर्त शुरुआत में चाय बागान समुदाय के लोगों और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगी.’
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि ‘जहां तक क़र्ज़ में छूट या सरकारी योजनाओं का मामला है, हम वहां पर जनसंख्या नियम भविष्य में लागू करने जा रहे हैं.’

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समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सरमा ने विपक्ष पर उनके परिवार को निशाना बनाने की भी आलोचना की. सरमा के परिवार में पाँच भाई थे.
उन्होंने कहा, “हमारे परिजनों या 1970 में लोगों ने जो किया उस पर बात करने का कोई तर्क नहीं है. विपक्ष यह अजीब चीज़ें कह रहा है और हमें 70 के दशक में धकेल रहा है.”
इस महीने की शुरुआत में सरमा की आलोचना तब हुई थी जब उन्होंने मुस्लिम अप्रवासी परिवारों को परिवार नियोजन अपनाने के लिए कहा था.
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