नीति आयोग ने कहा है कि कुछ राज्यों के नेता वैक्सीन को लेकर रोज़ टीवी पर
आकर लोगों को गुमराह करके डरा रहे हैं जबकि उन्हें पता है कि वास्तविक हालात क्या
हैं.
वैक्सीन अभियान के लिए नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप के प्रमुख और नीति आयोग के सदस्य
डॉक्टर विनोद पॉल की ओर से जारी बयान में सवाल-जवाब के रूप में बताया गया है कि केंद्र
सरकार वैक्सीनेशन के लिए क्या कर रही है.
इसमें कहा गया है कि कोविड-19 के टीकाकरण अभियान को लेकर देश में कई भ्रम फैले हुए हैं जो झूठ
और आधी सच्चाई पर आधारित हैं.
इसमें कहा गया है कि यह पूरी तरह से भ्रामक बात है कि
केंद्र की ओर से राज्यों को पर्याप्त वैक्सीन नहीं दी जा रही है.
नीति
आयोग के मुताबिक़, “केंद्र तय दिशानिर्देशों के तहत पूरी पारदर्शिता से राज्यों को पर्याप्त वैक्सीन
मुहैया करवा रहा है. राज्यों को वैक्सीन की उपलब्धता के बारे में पहले ही सूचित कर
दिया जा रहा है. आने वाले समय में वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ेगी और ज़्यादा सप्लाई
भी हो सकेगी.”
आगे कहा गया है, “हमारे कुछ नेताओं का व्यवहार बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है
जो वैक्सीन को लेकर तथ्यों की पूरी जानकारी होने के बावजूद रोज़ टीवी पर आते हैं
और लोगों के बीच डर फैलाते हैं. यह राजनीति करने का समय नहीं है. हम सभी को इस युद्ध
में संगठित होना होगा.”
‘विदेश
से भी वैक्सीन ख़रीदने की कोशिश में है केंद्र’
नीति आयोग ने इस बात को भी झूठ बताया है कि केंद्र सरकार विदेश से वैक्सीन ख़रीदने के लिए पर्याप्त कोशिश नहीं कर रही.
आयोग की ओर से जारी दस्तावेज़
के अनुसार, “सरकार 2020 के मध्य से ही लगातार सभी बड़ी वैक्सीन बनाने वाली विदेशी कंपनियों के संपर्क में है.
फ़ाइज़र, जॉनसन एंड जॉनस और मॉडर्ना के साथ कई दौर की बात हो चुकी है. सरकार ने उन्हें
भारत में वैक्सीन बनाने के लिए हर मदद का प्रस्ताव भी दिया.”
“यह समझना होगा कि अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से वैक्सीन ख़रीदना
किसी दुकान में जाकर कोई चीज़ खरीदकर लाने जैसा नहीं है. वैक्सीन की सप्लाई सीमित
है और कंपनियों की अपनी प्राथमिकताएं हैं. वे अपने मूल देश को भी प्राथमिकता देती
हैं, जैसा कि हमारे देश की कंपनियों ने हमारे लिए किया. जैसे ही फाइज़र ने वैक्सीन
उपलब्ध होने का संकेत दिया, केंद्र सरकार ने कंपनी के साथ वैक्सीन
को जल्द से जल्द आयात करने की कोशिशें शुरू कर दीं. भारत सरकार के कारण ही स्पूतनिक
वैक्सीन के ट्रायल में तेज़ी आई है.”
‘केंद्र ने राज्यों को अकेला नहीं छोड़ा’
नीति आयोग का कहना है कि केंद्र सरकार ने राज्यों के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी से मुंह नहीं मोड़ा है. उसके मुताबिक़,“केंद्र सरकार फंडिंग जैसे भारी काम कर रही है ताकि वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाया जाए और विदेशी वैक्सीन को भारत लाया जाए. केंद्र वैक्सीन ख़रीदकर उन्हें मुफ्त में लोगों को लगाने के लिए राज्यों को दे रहा है. राज्यों को इस बारे में सब जानकारी है.”
वह कहते हैं, “भारत सरकार ने राज्यों की मांग पर उन्हें यह इजाज़त भी दे दी कि वे ख़ुद वैक्सीन ख़रीद सकें. राज्यों को अच्छी तरह पता है कि देश में वैक्सीन की उत्पादन क्षमता क्या है और विदेश से वैक्सीन खरीदने में क्या मुश्किलें हैं.”
नीति आयोग के अनुसार, भारत सरकार ने जनवरी से अप्रैल तक पूरा वैक्सीन अभियान चलाया और मई की तुलना में यह अच्छी तरह से चला. मगर ‘जो राज्य तीन महीनों में हेल्थकेयर और फ्रंटलाइन वर्कर्स को अच्छी तरह से कवर नहीं सके, वे चाहते थे कि पूरी प्रक्रिया का विस्तार करके और विकेंद्रीकरण किया जाए.’
आगे लिखा गया है, “स्वास्थ्य सुविधाएं देना राज्यों का विषय है और राज्यों की ओर से उन्हें अधिक शक्तियां देने की मांग के कारण ही भारत में उदार वैक्सीन नीति बनाई गई है. राज्यों की ओर से ग्लोबल टेंडर डालने की कोशिश का नाकाम रहने का मतलब वही है जो हम राज्यों को पहले दिन से कह रहे हैं. यानी दुनिया में वैक्सीन की कमी है और तुरंत वैक्सीन खरीद पाना संभव नहीं.”
नीति आयोग ने इस बात को भी भी झूठ बताया कि भारत ने वैक्सीन निर्माओं को समय पर मंज़ूरी नहीं दी.
आयोग के मुताबिक, “केंद्र सरकार ने अमेरिका के दवा नियामक एफ़डीए, ईएमए, ब्रिटेन के एमएचआरए, जापान की पीएमडीए और विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से मंज़ूर वैक्सीन को भारत लाने का रास्ता अप्रैल में ही सरल कर दिया था. इन वैक्सीन को ट्रायल नहीं करने होंगे. अभी किसी विदेशी वैक्सीन कंपनी का आदेवन हमारे ड्रग कंट्रोलर के पास लंबित नहीं है.”
नीति आयोग ने कहा है कि केंद्र सरकार भारत में बन रही वैक्सीन का उत्पादन बढ़ाने के लिए भी कोशिशें कर रही है.
‘वैज्ञानिक लेंगे बच्चों के टीकाकरण का फ़ैसला’
नीति आयोग ने यह भी कहा है कि ‘दुनिया में कहीं पर भी बच्चों को वैक्सीन नहीं दी जा रही हैं और अभी तक WHO ने ऐसा करने की सलाह नहीं दी है.’
यह कहा गया है कि जल्द ही भारत में भी बच्चों को लेकर ट्रायल शुरू होंगे. बयान के मुताबिक़, “ऐसे शोध आए हैं कि बच्चों के लिए वैक्सीन सुरक्षित हैं जो कि उत्साहजनक बात है. भारत में भी जल्द बच्चों को लेकर ट्रायल शुरू होंगे.”
एक बार फिर राजनेताओं का ज़िक्र करते हुए नीति आयोग ने कहा, “बच्चों को टीका लगाने का फैसला वॉट्सऐप ग्रुप में फैले पैनिक के आधार पर नहीं लिया जा सकता क्योंकि कुछ राजनेता इसमें भी राजनीति करना चाहते हैं. हमारे वैज्ञानिक, ट्रायल के बाद आने वाली जानकारियों के अध्ययन के बाद इस बारे में फैसला लेंगे.”