भुवनेश्वर से, बीबीसी हिंदी के लिए
कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहे ओड़िशा के लिए चक्रवाती तूफान ‘यास’ एक नई मुसीबत लेकर आ रहा है.
भारतीय मौसम विभाग की ओर से जारी ताज़ा सूचना के अनुसार, मंगलवार शाम तक ‘यास’ एक ‘अति भीषण चक्रवाती तूफान’ का
रूप धारण करेगा और कल दोपहर के आसपास उत्तरी ओड़िशा के बालेश्वर और धामरा तट के बीच
टकराएगा.
मौसम विभाग के ताज़ा बुलेटिन के मुताबिक़ ‘यास’ सुबह साढ़े
5 बजे पारादीप से 320 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व में केंद्रित था और पिछले 6
घंटों से उत्तरी-उत्तर पश्चिम दिशा में 10 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से अग्रसर
हो रहा था. लैंडफॉल के समय हवा की गति 155 से 165 किलोमीटर प्रति घंटा होने की
संभावना है. साथ ही बालेश्वर और भद्रक तट पर 4 मीटर ऊंची लहरें उठने की भी संभावना
है.
तूफ़ान के कारण बालेश्वर, भद्रक, केन्द्रपड़ा
और जगतसिंहपुर ज़िलों में भारी तबाही होने की आशंका है. इन सभी ज़िलों में सोमवार
शाम से ही बारिश हो रही है और मंगलवार रात से इन इलाक़ों में बारिश बढ़ेगी और तेज़
हवाएं चलेंगी.
बुधवार सुबह तक इन इलाक़ों में हवा की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती
है, जिससे कच्चे मकानों के ढहने, पेड़ और बिजली के खंबे
उखड़ने की आशंका है. इन चार ज़िलों के अलावा पुरी, खुर्दा जिलों
में भी ‘यास’ का प्रभाव पड़ेगा. इन
ज़िलों में हवा की गति 90 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा होने का आकलन किया गया है.
सुरक्षित जगहों पर ले जाए जा रहे लोग
तबाही की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने सोमवार शाम से ही तटीय इलाक़ों
में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम शुरू कर दिया है.
राज्य के विशेष राहत आयुक्त प्रदीप जेना ने बताया कि सोमवार देर रात तक
प्रभावित इलाक़ों से क़रीब 15, 000 लोगों को सुरक्षित स्थानों में
पहुँचाया जा चुका है और आज शाम तक स्थानांतरण का काम पूरा कर लिया जाएगा.
आश्रय स्थलों में पानी, बिजली और दूसरी सहूलियतें उपलब्ध
हैं. साथ ही सभी के लिए मास्क का प्रावधान भी किया गया है.
जेना ने लोगों से अपील की है कि वे तूफ़ान पूरी तरह से चले जाने तक घर से
बाहर न निकलें. उन्होंने लोगों से यह भी अपील की है कि वे अपने होर्डिंग और
बिलबोर्ड हटा दें और तूफान के पूरी तरह से गुज़र जाने तक पानी, आम, नारियल या अन्य फल बटोरने के लिए घरों से न निकलें.
राहत आयुक्त ने बताया कि राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ़ की 52 टीमें, ओडीआरएफ़ की 60
टीमें और अग्निशमन विभाग की 206 टीमें तैनात कर दी गई हैं.
यह तूफ़ान ऐसे समय पर आ रहा है जब ओड़िशा में कोरोना की दूसरी लहर भी भारी
तबाही मचा रही है.
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोगों से “डबल (दोहरे) मास्क”
पहनने का अनुरोध किया है. मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे
स्थानांतरण के काम में स्थानीय प्रशासन का सहयोग करें.
यह लगातार तीसरा साल है जब ओड़िशा मई के महीने में तूफ़ान का सामना कर रहा
है. 3 मई, 2019 को ‘फणी’ ने पुरी और
खुर्दा ज़िलों में भारी तबाही मचाई थी जबकि 20 मई, 2020 को ‘अंफन’ से बालेश्वर, भद्रक और
केन्द्रपड़ा ज़िलों में भारी क्षति हुई थी.
लगातार दूसरे वर्ष के लिए ओड़िशा में
तूफान ऐसे समय आ रहा है जब राज्य कोविड से जूझ रहा है, इसलिए
सरकार कड़ी चुनौती का सामना कर रही है.