बाइडन और पुतिन 16 जून को पहली बार मिलेंगे आमने-सामने
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लाइव कवरेज
बाइडन और पुतिन 16 जून को पहली बार मिलेंगे आमने-सामने
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन से आमने-सामने मुलाक़ात करेंगे.
व्हाइट हाउस ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि दोनों नेता 16 जून को जिनेवा में मुलाक़ात करेंगे.
अमेरिका और रूस के संबंध इन दिनों अच्छे नहीं चल रहे हैं और बाइडन और पुतिन एक दूसरे पर निजी टिप्पणी भी कई बार कर चुके हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने एबीसी न्यूज़ से बात करते हुए कहा था कि पुतिन को साल 2020 के अमेरिकी चुनाव में कथित गड़बड़ी के लिए 'क़ीमत चुकानी होगी.'
बाइडन ने एक साक्षात्कार में यह भी कहा था कि वो पुतिन को 'घातक' मानते हैं.
इसके जवाब में पुतिन ने रशियन टीवी पर बाइडन को आड़े हाथों लेते हुए चुनौती दी थी कि वो उनसे लाइव प्रोग्राम में बात करें.
बाइडेन और पुतिन की मीटिंग को लेकर कई हफ़्तों से क़यास लगाए जा रहे थे. मंगलवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी जेन साकी ने 16 जून की मुलाक़ात पर कहा, ''मीटिंग के दौरान सभी मुद्दों पर बातचीत होगी. और वो मुद्दे कौन से हैं, इसकी जानकारी सभी को है. हम चाहते हैं कि रूस और अमेरिका के रिश्तों में सुधार हो और ग्लोबल इश्यूज पर हम सहयोग करें."
यास तूफ़ान को लेकर ओडिशा और बंगाल में अलर्ट
पश्चिम बंगाल: नतीजे के बाद हिंसा में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया
पश्चिम बंगाल की सरकार ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया है कि राज्य में चुनाव नतीजों की घोषणा के बाद दो मई को हुई हिंसा के मामले में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया गया है.
इन तीन लोगों को बीजेपी के दो कार्यकर्ताओं की हत्या के आरोप में गिरफ़्तार किया गया है.
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस बीआर गवई की बेंच के सामने राज्य सरकार ने बताया कि एफ़आईआर दर्ज कर मामले की तफ़्तीश जारी है.
हिंसा में मारे गए लोगों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी और अदालत से अपील की थी कि वो नतीजों के बाद राज्य में हुए हिंसा की जाँच सीबीआई या एसआईटी से अपने निगरानी में करवाने का आदेश दे.
सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका की सुनवाई के बाद 18 मई को केंद्र सरकार, राज्य सरकार और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को काउंटर हलफ़नामा दायर करने के लिए कहा था.
राज्य में नतीजे आने के बाद राज्य के कई इलाक़ों में टीएमसी और बीजेपी के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें हुईं थीं जिनमें कम से कम 16 लोग मारे गए थे और कई लोग अपने घरों को छोड़कर भागने के लिए मजबूर हो गए थे.
नारदा मामला: सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका वापस ली
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सीबीआई ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के नारदा केस में टीएमसी नेताओं को हाउस
अरेस्ट करने की अनुमति देने वाले कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम
कोर्ट में दायर याचिका वापस ले ली है.
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान तृणमूल के चार नेताओं को
हाउस अरेस्ट करने की अनुमति देने वाले कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के ख़िलाफ़
सीबीआई की अपील पर विचार करते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को याचिका वापस लेने
का सुझाव दिया.
न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति बीआर गवई की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की पीठ ने कहा, सभी दलीलें उच्च न्यायालय के समक्ष उठानी हैं.
सीबीआई ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए कल उच्चतम न्यायालय के समक्ष एक एसएलपी (विशेष अनुमति याचिका) दायर की थी जिसमें नारदा मामले में अभियुक्त तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के चार नेताओं को नज़रबंद करने की अनुमति दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर अपनी अपील में सीबीआई ने कलकत्ता उच्च न्यायालय की पाँच-न्यायाधीशों की पीठ के समक्ष कल के लिए तय की गई बड़ी बेंच की सुनवाई को टालने की माँग की थी.
कलकत्ता हाई कोर्ट ने 21 मई को अपने आदेश में नारदा मामले के अभियुक्त दो मौजूदा मंत्रियों समेत चार टीएमसी नेताओं को घर में नज़रबंद रखने की अनुमति दी थी.
सीबीआई ने उन्हें गिरफ़्तार कर निचली अदालत में पेश किया था, लेकिन निचली अदालत ने चारों नेताओं को ज़मानत दे दी थी. सीबीआई ने उसी रात ज़मानत के ख़िलाफ़ कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था. दो जजों की बेंच में ज़मानत को लेकर मतभेद हो गए थे जिसके बाद हाईकोर्ट ने उन चारों नेताओं को घर में नज़रबंद करने का आदेश दिया था. अदालत ने इसे पाँच जजों की बेंच के पास भेजने का फ़ैसला किया था.
सीबीआई ने कलकत्ता हाईकोर्ट के इसी आदेश के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. अब सीबीआई दोबारा हाईकोर्ट जा सकती है.
ब्लैक, व्हाइट, यलो फ़ंगस: क्या हैं ये तीनों फ़ंगल इंफ़ेक्शन और इन्हें कैसे पहचानें
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर'
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर' सुनिए संदीप सोनी से.
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इसराइल-ग़ज़ा संघर्ष: ग़ज़ा को दोबारा बसाने में मदद करेगा अमेरिका
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अमेरिकी विदेश मंत्री एंटोनी
ब्लिंकन का कहना है कि इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच
संघर्ष विराम को और सुदृढ़ बनाने के प्रयासों के मद्देनज़र अमेरिका ग़ज़ा को दोबारा से खड़ा करने में सहयोग करेगा.
इसराइल के
प्रधानमंत्री से मुलाक़ात के बाद एंटोनी ब्लिंकन ने कहा कि दोबारा हिंसा और संघर्ष
जैसी स्थिति से बचने के लिए यह ज़रूरी है कि जिस तरह के गंभीर और दयनीय मानवीय
हालात वहां पैदा हुए हैं, उनसे निपटा जाए. उन्होंने कहा कि मौजूदा हालातों से निपटना
बेहद आवश्यक है.
ग़ज़ा के पुनर्निमाण की
बात करने वाले एंटोनी ब्लिंकन ने हालांकि यह भी स्पष्ट कहा कि अमेरिका यह
सुनिश्चित करेगा कि ग़ज़ा पर नियंत्रण रखने वाले चरमपंथी समूह हमास को इससे फ़ायदा
ना हो.
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ब्लिंकन ने इसराइल के
प्रति अमेरिका के समर्थन को भी दोहराया. उन्होंने इसराइल के “ख़ुद की सुरक्षा के अधिकार” को अमेरिकी समर्थन की बात
दोहराई.
11 दिनों तक चले इसराइल-हमास
संघर्ष में कम से कम 250 से ज़्यादा लोगों की जान गई है. जिनमें सबसे अधिक जान-माल का नुकसान
ग़ज़ा में ही हुआ था. इस दौरान 13 इसराइली मारे गए थे.
11 दिनों तक चले इस हिंसक संघर्ष में बीते शुक्रवार को दोनों पक्षों के बीच सीज़फ़ायर की घोषणा की गई थी. दोनों ने ही संघर्ष विराम को इस 'टकराव में अपनी जीत' बताया.
ख़बरों के
अनुसार, संघर्ष-विराम के
लागू होते ही बड़ी संख्या में फ़लस्तीनी लोग ग़ज़ा में सड़कों पर उतरकर जश्न मनाने
लगे थे.
इस बीच हमास ने यह चेतावनी भी दी कि उसके हाथ अभी ट्रिगर से
हटे नहीं हैं;
यानी वो
इसराइली हमले की स्थिति में जवाब देने को तैयार है.
दोनों पक्षों ने 11 दिन की लड़ाई के
बाद आपसी सहमति से संघर्ष-विराम का निर्णय लिया था.
ग़ज़ा में लड़ाई 10 मई को शुरू हुई थी.
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दोनों पक्षों में लड़ाई होने के बाद, अंतरराष्ट्रीय
समुदाय दोनों में सुलह कराने की कोशिश कर रहा था. ख़ासकर मुस्लिम देश इसराइल के
ख़िलाफ़ एक मोर्चा बनाने को लेकर काफ़ी सक्रिय दिख रहे थे.
विदेश मंत्री ब्लिंकन ने इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन
नेतन्याहू से मुलाक़ात के साथ अपनी तीन दिन की मध्यपूर्व की यात्रा शुरू की. इस
मुलाक़ात के दौरान बिन्यामिन नेतन्याहू ने इसराइल को समर्थन देने के लिए अमेरिका को
धन्यवाद कहा.
नेतन्याहू ने चेतावनी देते हुए कहा कि "हम भी अपनी
आत्मरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को क़ायम रखेंगे. अगर हमास शांति भंग करता है
और इसराइल पर हमला करता है, तो हमारी तरफ़ से प्रतिक्रिया बहुत बड़ी होगी."
अदार पूनावाला: घोड़ों के व्यापार से वैक्सीन उद्योग के बादशाह बनने तक का सफ़र
चीन-पाकिस्तान आर्थिक कॉरिडोर भारत को निशाना बनाने के लिए नहीं: चीन
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चाइना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) को
अफ़ग़ानिस्तान तक बढ़ाए जाने के मुद्दे पर चीन ने कहा है कि इस संबंध में
अफ़ग़ानिस्तान और पाकिस्तान से बातचीत चल रही है.
सोमवार को चीन के विदेश मंत्रालय की नियमित ब्रीफ़िंग में
प्रसार भारती की ओर से ये सवाल पूछा गया. साथ ही ये भी पूछा गया कि एक ओर तो चीन
कहता है कि सीपीईसी क्षेत्रीय समृद्धि और कनेक्टिविटी को सुनिश्चित करेगा, लेकिन सीपीईसी
पर भारत की स्थिति को लेकर ये कैसे सुनिश्चित होगा, जब भारत ये कहता है कि
सीपीईसी उन भारतीय इलाक़ों से होकर गुज़रेगी, जिस पर पाकिस्तान ने
ग़ैर-क़ानूनी रूप से क़ब्ज़ा किया हुआ है.
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता चाओ लिजियान ने कहा कि
सीपीईसी आर्थिक सहयोग को लेकर की गई एक पहल है और वो किसी तीसरे पक्ष को निशाना
बनाने के लिए नहीं है. उन्होंने कहा कि इस परियोजना का संबंध किसी की क्षेत्रीय
संप्रभुता को लेकर विवाद से नहीं है. उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि कश्मीर मुद्दे
पर चीन का जो सैद्धांतिक रुख़ है, उसमें कोई बदलाव नहीं आया है.
अफ़ग़ानिस्तान तक सीपीईसी को बढ़ाने के मुद्दे पर उन्होंने
कहा कि इस बारे में पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान से कूटनीतिक माध्यम से बातचीत चल
रही है. तीनों पक्ष सीपीईसी को पाकिस्तान से अफ़ग़ानिस्तान तक बढ़ाने पर विचार
विमर्श कर रहे हैं.
चाओ लिजियान ने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान पहले से ही पाकिस्तान
के ग्वादर और कराची बंदरगाह का इस्तेमाल आयात और निर्यात के लिए करता रहा है.
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विशाखापत्तनम में एचपीसीएल के संयंत्र में भीषण आग लग गई है.
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन
लिमिटेड ने ट्वीट करके अपने विशाखापत्तम स्थित संयंत्र में आग लगने की ख़बर की
पुष्टि की है.
एचपीसीएल ने ट्वीट किया है- “25 मई दोपहर तीन बजे के क़रीब एचपीसीएल की
विशाखापत्तम स्थित रिफ़ाइनरी की एक क्रूड प्रोसेसिंग यूनिट में आग लग गई. जिसके
तुरंत बाद सुरक्षा उपाय अपनाए गए और अग्निशमन को फ़ौरन सक्रिय कर दिया गया. आग
बुझा ली गई है. इस दुर्घटना में कोई हताहत नहीं हुआ है और कोई ख़तरे की आशंका भी
नहीं है. बाकी रिफ़ाइनरियों का परिचालन सामान्य है.”
आग एचपीसीएल की पुरानी सीडीयू ईकाई में लगी. आग पर क़ाबू पाने के लिए दमकल की 20 से ज़्यादा गाड़ियां मौक़े पर मौजूद रहीं.
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टूलकिट मामले में रमन सिंह का ट्विटर पर हमला
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बीजेपी नेता और छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह ने ट्विटर पर हमला करते हुए कहा है, "टूलकिट केस में जब ट्विटर के पास कार्यवाई करने के पर्याप्त सबूत हैं तो फिर दिल्ली पुलिस को जवाब देने में उसकी सांसे क्यों फूल रही हैं. नोटिस मिलते ही ट्विटर के संबंधित अधिकारी ग़ायब हो गए, अब इनकी पैरवी करने वाले राहुल गांधी और भूपेश बघेल बताएंगे ये सब कहां छुपे हैं?"
उन्होंने छत्तीसगढ़ के मौजूदा कांग्रेसी मुख्यमंत्री बघेल के ट्वीट को री-ट्वीट करते हुए यह बातें लिखीं हैं.
कुछ घंटे पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश सिंह बघेल ने ट्वीट करके दावा किया था कि ट्विटर ने रमन सिंह के ट्वीट को भी मैन्युपुलेटेड ट्वीट घोषित कर दिया है.
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उन्होंने ट्वीट किया था, "Twitter ने डॉ रमन सिंह के कथित टूलकिट को भी manipulated media बता दिया है. साँच को आँच नहीं!"
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इससे पहले सोमवार को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की एक टीम ट्विटर इंडिया के दिल्ली और गुरुग्राम दफ़्तरों पर नोटिस देने पहुँची थी. यह नोटिस हालिया टूलकिट मामले को लेकर जारी किया गया था.
बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया था कि कांग्रेस ने बीजेपी और देश को बदनाम करने के लिए टूलकिट को हथियार बनाया.
हालांकि बाद में ट्विटर ने बीजेपी नेताओं के इस तरह के ट्वीट्स को मौन्युपुलेटेड मीडिया बताया था. जिसके बाद से ही बीजेपी और कांग्रेस एक-दूसरे को लेकर हमलावर हैं.
कांग्रेस ने इस मामले में बीजेपी के नेताओं के ख़िलाफ़ केस भी दर्ज करवाया है.
कल देर रात दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद कांग्रेस नेता और प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने बीजेपी पर हमला करते हुए एक के बाद एक कई ट्वीट किये थे और आज इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश सिंह बघेल ने ट्वीट करके छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता रमन सिंह पर हमला बोला है.
ट्विटर ने बीजेपी नेता संबित पात्रा के 'टूलकिट से जुड़े ट्वीट' को मैन्युपुलेटेड ट्वीट बताया था.
मैनिपुलेटेड मीडिया मतलब ऐसी तस्वीर, वीडियो या स्क्रीनशॉट जिसके ज़रिए किए जा रहे दावों की प्रमाणिकता को लेकर संदेह हो और इसके मूल रूप को एडिट किया गया हो या उससे छेड़छाड़ की गई हो.
रामदेव: डॉक्टरों से झगड़ा, बीजेपी से क़रीबी और लगातार विवाद
अफ्रीकी देश माली के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को सेना ने हिरासत में लिया, यूएन ने की नेताओं को रिहा करने की माँग
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अफ्रीकी देश माली में
सैनिकों ने विद्रोह कर दिया है और देश के मौजूदा राष्ट्रपति बाह एन दाव और
प्रधानमंत्री मोक्टार ओउने को हिरासत में ले लिया है. तमाम अंतरराष्ट्रीय
संस्थाओं और संगठनों ने इसकी निंदा की है. वहीं संयुक्त राष्ट्र ने राष्ट्रपति और
प्रधानमंत्री की तत्काल रिहाई की माँग की है.
एक ट्वीट में यूएन
मिशन की ओर से (फ्रेंच भाषा में किये गए ट्वीट) इस ग़रीब पश्चिमी अफ्रीकी देश में शांति
बहाल करने की अपील की गई है.
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राष्ट्रपति और
प्रधानमंत्री को हिरासत में लिए जाने के बाद जो रिपोर्टें सामने आयी हैं उनमें कहा
गया है कि उन्हें देश की राजधानी बामाको के पास कटी मिलिट्री कैंप ले जाया गया था.
इस घटना से देश में
एक ही साल के भीतर दूसरी बार सैन्य तख़्तापलट की आशंका जताई जा रही है.
रक्षा मंत्री सुलेमान
दौरोर को भी कथिक तौर पर हिरासत में लिए जाने की ख़बर है.
सोमवार देर रात प्रधानमंत्री
मोक्टार ओउने ने न्यूज़ एजेंसी एएफ़पी को एक फ़ोन कॉल पर जानकारी दी थी कि सैनिक
उन्हें हिरासत में लेने आए हैं.
समाचार एजेंसी का कहना है कि इसी दौरान फ़ोन लाइन काट दी गई.
अफ्रीकी संघ, पश्चिमी
अफ्रीकी राज्यों के आर्थिक समुदाय, यूरोपीय संघ और अमेरिका ने भी राष्ट्रपति और
प्रधानमंत्री को हिरासत में लिए जाने की निंदा करते हुए शीर्ष नेताओं को बिना किसी शर्त के रिहा करने की माँग की है.
इस घटना के कुछ देर
पहले ही सरकार में कुछ बड़े उलटफेर किये गए थे. सबसे बड़ा बदलाव यह था कि पिछले
साल तख़्तापलट में हिस्सा लेने वाले दो वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को हटा दिया गया था.
बीबीसी अफ्रीका के संपादक
विल रॉस की ख़बर के मुताबिक़, नौ महीने पहले हुए सैन्य तख़्तापलट के बाद एक बार
फिर माली में अस्थिरता दिखाई दे रही है. नौ महीने पहले तख़्तापलट करते हुए
राष्ट्रपति इब्राहिम बाउबकर कीता को हटा दिया गया था.
माली में कई लोगों ने
इस बदलाव का स्वागत किया था लेकिन उसके बाद सरकार में सेना के प्रभुत्व और किये गए
सुधारों की धीमी गति के कारण लोगों में अब ग़ुस्सा भी है.
इससे पहले साल 2012
में तख़्तापलट के कारण उग्रवादी उत्तरी माली में अस्थिरता का फ़ायदा उटाते हुए क्षेत्र
पर क़ब्ज़ा करने में कामयाब हो गए थे. हालांकि बाद में फ्रांसिसी सैनिकों ने क़ब्ज़े
वाले क्षेत्र को वापस पाने में देश की मदद की लेकिन हमले लगातार जारी रहे.
पश्चिम बंगाल: पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य की हालत नाज़ुक
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इमेज कैप्शन, बुद्धदेव भट्टाचार्य
प्रभाकर मणि तिवारी
बीबीसी हिंदी के लिए, कोलकाता से
पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य पिछले हफ़्ते से
कोरोना संक्रमण से जूझ रहे हैं. मंगलवार को उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें कोलकाता
के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
अस्पताल के एक प्रवक्ता ने बताया कि भट्टाचार्य को फ़िलहाल आईसीयू में बाइपेप सपोर्ट
पर रखा गया है. उनकी हालत गंभीर लेकिन स्थिर बताई गई है.
पूर्व मुख्यमंत्री के इलाज के लिए छह डॉक्टरों का एक मेडिकल बोर्ड बनाया गया है.
उनका इलाज करने वाले डॉक्टर कौशिक चक्रवर्ती ने पत्रकारों को बताया, “वो होश में हैं और बात कर रहे हैं.
उनका सीटी स्कैन कराया गया है. उनके फेफड़ों में भी समस्या है.”
कोरोना संक्रमण से हालत गंभीर
डॉक्टरों के मुताबिक कोविड संक्रमण की वजह से समस्या गंभीर हो गई है.
बताया जा रहा है कि संक्रमित होने के बावजूद भट्टाचार्य अस्पताल जाने के लिए तैयार नहीं थे और घर पर ही उनका इलाज चल रहा था.
उनकी पत्नी मीरा भट्टाचार्य भी संक्रमित थीं और कुछ दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद सोमवार को घर लौटी थीं.
मंगलवार को भट्टाचार्य के शरीर में ऑक्सीजन का लेवल 80 तक पहुंचने के बाद डॉक्टरों उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती करने की सलाह दी.
वैक्सीन ख़रीदने को लेकर महाराष्ट्र ने भी मांगी केंद्र सरकार से मदद
इमेज कैप्शन, महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे
पंजाब और दिल्ली सरकार के बाद अब महाराष्ट्र सरकार ने भी कहा है कि उसे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से कोविड-19 की वैक्सीन नहीं मिल पा रही.
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा, “हमने वैक्सीन ख़रीदने के लिए जो ग्लोबल टेंडर डाला था, उसमें किसी ने दिलचस्पी नहीं दिखाई है. हम केंद्र सरकार से गुज़ारिश करते हैं कि वह टेंडर जारी करके हमें वैक्सीन मुहैया करवाए.”
सोमवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मॉडर्ना और फ़ाइज़र ने यह कहते हुए वैक्सीन बेचने से इनकार कर दिया है कि वह इस मामले में सिर्फ़ केंद्र सरकार से बात करेगी.
दिल्ली के सीएम ने केंद्र सरकार से अपील की थी कि वह वैक्सीन आयात करे और राज्यों को बांटे.
इससे पहले पंजाब सरकार ने भी कहा था कि अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना ने सीधे राज्यों को वैक्सीन बेचने से इनकार कर दिया है.
इसराइल ने कहा- अमेरिका मूल्यवान मित्र, लेकिन हम अपने हित में स्वतंत्र फ़ैसले लेंगे
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''हमारा सबसे मूल्यवान मित्र अमेरिका वर्षों से हमारे साथ रहा है. ये हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है. लेकिन कुछ मामले ऐसे भी हो सकते हैं, जब हमें ये सुनिश्चित करना पड़े कि मुल्ला लोग यहूदियों के अस्तित्व को ख़त्म न करें, जो हज़ारों वर्षों से है. ऐसी स्थिति में हमें साहसी और स्वतंत्र फ़ैसले लेने के लिए मजबूर होना पड़ेगा." इसराइली पीएमओ का ये बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ समय से इसराइल और फ़लस्तीनी चरमपंथी संगठन हमास के बीच संघर्ष चल रहा था.
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पूर्वी यरुशलम के अल अक़्सा मस्जिद से शुरू हुआ संघर्ष 11 दिनों तक चला. हमास ने रॉकेट हमलों में इसराइली शहरों को निशाना बनाया, तो इसराइल ने ग़ज़ा पर हवाई हमला किया.
इसराइली हमले में क़रीब 250 लोग मारे गए. इसराइल का दावा है कि उसका निशाना फ़लस्तीनी चरमपंथी गुटों के ठिकाने और हमास के लोग थे.
लेकिन फ़लस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय का दावा है कि इसराइली हमले में बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे मारे गए हैं.
इसराइली हमले में ग़ज़ा शहर को भी भारी नुक़सान पहुँचा है, जिसके पुनर्निर्माण की शुरुआत होने वाली है. इसराइल ने अमेरिका को अपना सबसे मूल्यवान मित्र कहा है, लेकिन अमेरिका के पहल से ही इसराइल और हमास में संघर्ष विराम हुआ.
हालांकि इस संघर्ष विराम से कुछ दिन पहले ही इसराइली पीएम बिन्यामिन नेतन्याहू ने कहा था कि इस बार सिर्फ़ मरहमपट्टी से काम नहीं चलेगा यानी वो हमास से लंबी लड़ाई की बात कर रहे थे.
ऑस्ट्रेलिया के एक पावर स्टेशन में धमाका, क्वींसलैंड में बिजली गुल, लाखों प्रभावित
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ऑस्ट्रेलिया के प्रांत क्वींसलैंड में लाखों लोगों के यहाँ बिजली चली गई है क्योंकि एक पावर स्टेशन में धमाका हो गया है. एनर्जी कंपनियां अब बिजली बहाल करने के लिए हाथ-पाँव मार रही हैं. स्थानीय अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि ट्रैफ़िक व्यवस्था में अफ़रा-तफ़री मच सकती है.
सीएस एनर्जी का कहना है कि बिलोएला शहर के पास एक पावर स्टेशन में स्थानीय समय के मुताबिक़ 13:45 बजे आग लग गई. बिजली उपलब्ध कराने वाली कंपनियों का कहना है कि इस घटना के बाद से क़रीब ढाई लाख उपभोक्ताओं की बिजली बहाल कर दी गई है. लेकिन अब भी बड़ी संख्या में लोग बिना बिजली के हैं.
पावर कंपनी एनर्जेक्स के शुरुआती बयान मुताबिक़ क़रीब 375000 उपभोक्ता इससे प्रभावित हुए हैं. बिजली गुल होने का असर स्कूलों, घरों और व्यापार पर भी पड़ा है.
कुछ समय के लिए इसके कारण ब्रिसबेन शहर के हवाई अड्डा और ट्रैफ़िक लाइट्स पर भी असर पड़ा. क्वींसलैंड की इमरजेंसी सर्विस का कहना है कि व्यवस्था को पूरी तरह बहाल करने में अभी और समय लग सकता है.
आईटी नियमों को लेकर सरकार से और चर्चा की ज़रूरत: फ़ेसबुक
फ़ेसबुक ने कहा है कि वह
भारत के नए आईटी नियमों का पालन करना चाहती है मगर कुछ मसले हैं जिन पर सरकार के
साथ और चर्चा की ज़रूरत है.
कंपनी ने यह भी कहा है
कि वह इस बात के लिए प्रतिबद्ध है कि उसके मंच पर लोग 'बिना किसी डर के खुलकर अपनी
बात कह सकें.
भारत सरकार ने इस साल
फ़रवरी में सोशल मीडिया, ओटीटी, डिजिटल प्लेटफॉर्म के
नियमन के लिए नए प्रावधान किए थे. इन नए नियमों के पालन के लिए कंपनियों को तीन महीने
का समय दिया गया था जिसकी मियाद आज ख़त्म हो रही है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, फ़ेसबुक के प्रवक्ता
ने कहा, “हमारा इरादा आईटी नियमों के प्रावधानों का पालन करने और कुछ
ऐसे मसलों पर चर्चा जारी रखने का है जिनपर सरकार के साथ और विमर्श की ज़रूरत है."
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फ़ेसबुक की ओर से यह भी कहा गया है कि वह इस बात के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि उसके प्लेटफ़ॉर्म पर लोग खुलकर और सुरक्षित होकर अपनी बात कह सकें.
राहुल गांधी ने टूलकिट मामले पर कहा - सत्य डरता नहीं
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टूलकिट मामले पर ट्वीट करते हुए लिखा है कि 'सत्य डरता नहीं'.
इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच विवाद खड़ा हो गया है.
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कुछ दिन पहले आरोप लगाया था कि कांग्रेस टूलकिट का इस्तेमाल कर बीजेपी और देश की छवि ख़राब कर रही है.
कांग्रेस ने इस आरोप को ग़लत बताते हुए इसके ख़िलाफ़ केस भी दर्ज कराया.
बाद में ट्विटर ने संबित पात्रा के ट्वीट्स को 'मैनिपुलेटेड मीडिया' की श्रेणी में रख दिया.
मैनिपुलेटेड मीडिया का मतलब ऐसी तस्वीरें, वीडियो या स्क्रीनशॉट को संदेहास्पद बताया जाता है जिसके ज़रिए दावे किए जाते हैं.
माना जाता है कि ऐसी सामग्रियों की प्रामाणिकता संदिग्ध होती है और उनके साथ छेड़छाड़ की गई है.
टूलकिट में आमतौर पर यह बताया जाता है कि लोग क्या लिख सकते हैं, कौन से हैशटैग इस्तेमाल कर सकते हैं, किस वक़्त से किस वक़्त के बीच ट्वीट या पोस्ट करने से फ़ायदा होगा और किन्हें ट्वीट्स या फ़ेसबुक पोस्ट्स में शामिल करने से फ़ायदा होगा.
जानकारों के अनुसार, इसका असर ये होता है कि एक ही वक़्त पर लोगों के एक्शन से किसी आंदोलन या अभियान की मौजूदगी दर्ज होती है, यानी सोशल मीडिया के ट्रेंड्स में और फिर उनके ज़रिये लोगों की नज़र में आने के लिए इस तरह की रणनीति बनायी जाती है.
आंदोलनकारी ही नहीं, बल्कि तमाम राजनीतिक पार्टियाँ, बड़ी कंपनियाँ और अन्य सामाजिक समूह भी कई अवसरों पर ऐसी 'टूलकिट' इस्तेमाल करते हैं.
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यास तूफ़ान: ओड़िशा में सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए जा रहे हज़ारों लोग
इमेज स्रोत, विश्वरंजन मिश्रा
संदीप साहू
भुवनेश्वर से, बीबीसी हिंदी के लिए
कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहे ओड़िशा के लिए चक्रवाती तूफान ‘यास’ एक नई मुसीबत लेकर आ रहा है.
भारतीय मौसम विभाग की ओर से जारी ताज़ा सूचना के अनुसार, मंगलवार शाम तक ‘यास’ एक ‘अति भीषण चक्रवाती तूफान’ का
रूप धारण करेगा और कल दोपहर के आसपास उत्तरी ओड़िशा के बालेश्वर और धामरा तट के बीच
टकराएगा.
मौसम विभाग के ताज़ा बुलेटिन के मुताबिक़ ‘यास’ सुबह साढ़े
5 बजे पारादीप से 320 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण पूर्व में केंद्रित था और पिछले 6
घंटों से उत्तरी-उत्तर पश्चिम दिशा में 10 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से अग्रसर
हो रहा था. लैंडफॉल के समय हवा की गति 155 से 165 किलोमीटर प्रति घंटा होने की
संभावना है. साथ ही बालेश्वर और भद्रक तट पर 4 मीटर ऊंची लहरें उठने की भी संभावना
है.
तूफ़ान के कारण बालेश्वर, भद्रक, केन्द्रपड़ा
और जगतसिंहपुर ज़िलों में भारी तबाही होने की आशंका है. इन सभी ज़िलों में सोमवार
शाम से ही बारिश हो रही है और मंगलवार रात से इन इलाक़ों में बारिश बढ़ेगी और तेज़
हवाएं चलेंगी.
बुधवार सुबह तक इन इलाक़ों में हवा की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा हो सकती
है, जिससे कच्चे मकानों के ढहने, पेड़ और बिजली के खंबे
उखड़ने की आशंका है. इन चार ज़िलों के अलावा पुरी, खुर्दा जिलों
में भी ‘यास’ का प्रभाव पड़ेगा. इन
ज़िलों में हवा की गति 90 से 120 किलोमीटर प्रति घंटा होने का आकलन किया गया है.
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सुरक्षित जगहों पर ले जाए जा रहे लोग
तबाही की आशंका को देखते हुए राज्य सरकार ने सोमवार शाम से ही तटीय इलाक़ों
में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने का काम शुरू कर दिया है.
राज्य के विशेष राहत आयुक्त प्रदीप जेना ने बताया कि सोमवार देर रात तक
प्रभावित इलाक़ों से क़रीब 15, 000 लोगों को सुरक्षित स्थानों में
पहुँचाया जा चुका है और आज शाम तक स्थानांतरण का काम पूरा कर लिया जाएगा.
आश्रय स्थलों में पानी, बिजली और दूसरी सहूलियतें उपलब्ध
हैं. साथ ही सभी के लिए मास्क का प्रावधान भी किया गया है.
जेना ने लोगों से अपील की है कि वे तूफ़ान पूरी तरह से चले जाने तक घर से
बाहर न निकलें. उन्होंने लोगों से यह भी अपील की है कि वे अपने होर्डिंग और
बिलबोर्ड हटा दें और तूफान के पूरी तरह से गुज़र जाने तक पानी, आम, नारियल या अन्य फल बटोरने के लिए घरों से न निकलें.
राहत आयुक्त ने बताया कि राहत और बचाव के लिए एनडीआरएफ़ की 52 टीमें, ओडीआरएफ़ की 60
टीमें और अग्निशमन विभाग की 206 टीमें तैनात कर दी गई हैं.
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यह तूफ़ान ऐसे समय पर आ रहा है जब ओड़िशा में कोरोना की दूसरी लहर भी भारी
तबाही मचा रही है.
मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने लोगों से “डबल (दोहरे) मास्क”
पहनने का अनुरोध किया है. मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की है कि वे
स्थानांतरण के काम में स्थानीय प्रशासन का सहयोग करें.
यह लगातार तीसरा साल है जब ओड़िशा मई के महीने में तूफ़ान का सामना कर रहा
है. 3 मई, 2019 को ‘फणी’ ने पुरी और
खुर्दा ज़िलों में भारी तबाही मचाई थी जबकि 20 मई, 2020 को ‘अंफन’ से बालेश्वर, भद्रक और
केन्द्रपड़ा ज़िलों में भारी क्षति हुई थी.
लगातार दूसरे वर्ष के लिए ओड़िशा में
तूफान ऐसे समय आ रहा है जब राज्य कोविड से जूझ रहा है, इसलिए
सरकार कड़ी चुनौती का सामना कर रही है.