ब्राज़ील में कोरोना वायरस
के संक्रमण से बीते 24 घंटों में 4,000 मौत हुई हैं, देश में वायरस के नए वैरिएंट
के कारण संक्रमण के मामले तेज़ी से बढ़ रहे हैं.
अस्पतालों में भारी भीड़
है, कुछ शहरों में तो लोगों की इलाज के इंतज़ार में मौत हो रही है और कई इलाक़ों
में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमारा जाने की कगार पर जा पहुँची है.
देश में अब तक कोरोना से
3 लाख 37 हज़ार लोगों की मौत हो चुकी है और दुनिया भर में ब्राज़ील संक्रमण से मौत के मामले में अमेरिका के बाद दूसरे नंबर
पर है.
लेकिन इन सब के बावजूद
राष्ट्रपति ज़ैर बोलसोनारो लॉकडाउन के ख़िलाफ़ हैं.
उनका तर्क है कि लॉकडाउन से होने वाला आर्थिक नुक़सान कोरोना से होने वाले नुक़सान से बदतर होगा. कुछ स्थानीय
प्राधिकरणों के अदालत की मदद से लगाए गए लॉकडाउन के कुछ प्रतिबंधों को भी
राष्ट्रपति पलटने की कोशिश कर चुके हैं.
मंगलवार को राष्ट्रपति
आवास के बाहर अपने समर्थकों से बात करते हुए बोलसोनारो ने क्वारंटीन के नियमों की
आलोचना की और बिना किसी पुख़्ता सबूत के इसे अवसाद से जोड़ दिया. हालांकि उन्होंने
देश में बीते 24 घंटों में हुई 4,195 मौतों पर कुछ भी नहीं कहा.
स्वास्थ्य मंत्रालय के
आंकड़ों के मुताबिक़ ब्राज़ील में अब तक 1.3 करोड़ लोगों को कोरोना का संक्रमण हो
चुका है. सिर्फ़ मार्च महीने में ही 66 हज़ार
570 लोगों की मौत हो चुकी है.
ब्राज़ील के स्वास्थ्य संस्थान फियोक्रूज़ के मुताबिक़ अधिकतर राज्यों में 90 फ़ीसद आईसीयू बेड कोरोना मरीज़ों के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं.
कई राज्यों के अस्पतालों में ऑक्सीजन और ज़रूरी दवाओं की कमी बताई जा रही है. इतनी संकट की स्थिति होने के बावजूद कुछ शहर और राज्य जनता की गतिविधियो को रोकने वाले नियमों में ढील दे रहे हैं.
ब्राज़ील के इंस्टीट्यूट फ़ॉर हेल्थ पॉलिसी स्टडीज़ के कार्यकारी निदेशक मिगल लागो ने एसोसिएट प्रेस से बात करते हुए कहा है, ‘’ सच ये है कि राष्ट्रपति बोलसोनारो के लॉकडाउन विरोधी नैरेटिव की जीत हो गई है.‘’
‘’मेयर और गवर्नरों को राजनीतिक रूप से समाजिक दूरी की नीतियों के बारे में बात करने से रोक दिया गया है. वे भी जानते हैं कि राष्ट्रपति के समर्थक, व्यापारी इन नीतियों को नहीं मानेंगे.‘’
अति दक्षिणपंथी नेता बोलसोनारो शुरू से ही कोरोना को कम प्रभावी बताते रहे हैं, वैक्सीन पर संदेह ज़ाहिर करते रहे हैं और अप्रमाणिक दवाओं के सेवन को बढ़ावा देते रहे हैं.
लेकिन आजकल उनकी ज़ुबान इसे लेकर कुछ बदली है. आजकल वे टीकाकरण की बात कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि साल 2021 टीकाकरण का साल होगा लेकिन देश टीकाकरण की योजना को लागू करने में संघर्ष कर रहा है.
आलोचक कहते हैं कि उनकी सरकार ने वैक्सीन की सप्लाई के लिए बातचीत में काफ़ी देरी दिखाई है. देश में अब तक सिर्फ़ आठ फ़ीसद आबादी को कोरोना वैक्सीन की पहली ख़ुराक़ मिली है.