कांग्रेस नेता राहुल
गांधी ने शनिवार को असम के गुवाहाटी में पार्टी का चुनावी घोषणा-पत्र जारी किया.
जिसमें किसानों की कर्ज़ माफ़ी और अवैध प्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया शुरू करने
की बात वादों की लिस्ट में सबसे ऊपर है.
पार्टी ने उन महिलाओं को
राहत देने का भी वादा किया है जिन्होंने माइक्रो फाइनेंस बैंकों से कर्ज़ लिया है.
साथ हीमहिलाओं को मुफ़्त सूत,
करघा और अन्य उपकरण देने और साथ ही साथ राज्य परिवहन
की बसों में उनके लिए मुफ़्त यात्रा का वादा किया है.
इस घोषणा-पत्र में
कांग्रेस ने असम समझौते में बताए गए 25 मार्च 1971 के कट-ऑफ़ की तारीख़ के आधार पर
अवैध प्रवासियों की समस्या के समाधान के लिए ज़रूरी कदम उठाने का आश्वासन दिया है.
पार्टी ने कहा है कि अवैध
प्रवासियों की पहचान की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के मुताबिक़ की जाएगी,
जिसने 1951 के असम की एनआरसी को अपडेट करने की प्रक्रिया को मॉनिटर किया था.
घोषणा-पत्र के मुताबिक़,
एनआरसी दफ़्तरों और उनके लिए नियुक्तियों का काम शुरू होगा. इन दफ़्तरों का काम
जल्द से जल्द शुरू किया जाएगा ताकि जो लोग एनआरसी से बाहर रह गए हैं उन्हें वहां
जा सकें. ये आश्वासन भी दिया गया है कि कोई भी भारतीय नागरिक एनआरसी से बाहर नहीं
रहेगा.
राहुल गांधी ने कहा कि 'घोषणा-पत्र सभी वर्गों के लोगों के सुझावों के आधार पर बनाया गया है.'
उन्होंने कहा, “ये लोगों की आकांक्षाओं
का दस्तावेज़ है. बीजेपी और आरएसएस देश की विविध संस्कृति पर हमला कर रहे हैं. वो
हमारी भाषा, इतिहास, सोच और जीने के तरीक़े पर हमला कर रहे हैं. इस घोषणा पत्र में
असम, उसकी संस्कृति और पहचान की सुरक्षा करने की बात है.”
घोषणा-पत्र में उन ‘5 गारंटी’ की बात भी है, जो कांग्रेस के चुनाव अभियान का हिस्सा रहा है.
घोषणा-पत्र में कहा गया है, “असम की भाषा, संस्कृति और इतिहास को ख़तरे में डालने वाले नागरिकता (संशोधन) क़ानून को लागू नहीं किया जाएगा और लोगों को बांटने की बात करने वाले इस क़ानून को रद्द करवाने के लिए कांग्रेस पुरज़ोर कोशिश करेगी.”
कांग्रेस ने पांच लाख सरकारी नौकरियां और 25 लाख निजी क्षेत्र की नौकरियां देना का वादा किया है. साथ ही चाय मज़दूरों की दैनिक मज़दूरी को बढ़ाकर 365 रुपये करने, हर घर को 200 यूनिट तक मुफ़्त बिजली और गृहिणियों के लिए हर महीने 2,000 रुपये की आय का सहयोग देने की बात कही है.
घोषणा-पत्र के मुताबिक़, “स्वतंत्रता सेनानियों और असम आंदोलन, भाषा आंदोलन और सीएए आंदोलन में जान गंवाने वालों के परिवारों को पेंशन दी जाएगी. सरकारी स्वामित्व वाली ज़मीन के भूमिहीनों को ‘ज़मीन का पट्टा’ दिया जाएगा. ताई-अहोम, मोरन, मोटोक, चुटिया, चाय-जनजातियों और कोच-राजबंशी समुदायों को एसटी (अनुसूचित जनजाति) का दर्जा दिया जाएगा.”