पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021: ममता विकास योजनाओं के सामने दीवार की तरह खड़ी हैं - पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को खड़गपुर में एक रैली में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बंगाल के ग़रीब लोगों को केंद्र सरकार की योजनाओं से वंचित रखने का आरोप लगाया.

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  1. ममता विकास योजनाओं के सामने दीवार की तरह खड़ी हैं - पीएम मोदी

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    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को खड़गपुर में एक रैली में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर बंगाल के ग़रीब लोगों को केंद्र सरकार की योजनाओं से वंचित रखने का आरोप लगाया.

    पीएम मोदी ने कहा कि मुख्यमंत्री को ये डर था कि इन योजनाओं का फ़ायदा मिल जाता, इस वजह से उन्होंने इनके अमल पर रोक लगा दी.

    पीएम ने कहा, "पिछले 10 साल में तृणमूल सरकार ने हर वो काम किया, जो यहां रोज़गार और स्वरोज़गार के अवसरों को रोकने वाला था. तृणमूल के वसूली गिरोहों, सिंडिकेट के कारण अनेक पुराने उद्योग बंद हो गए. यहां सिर्फ एक ही उद्योग चलने दिया गया है- माफिया उद्योग."

    "आज बंगाल का गरीब पूछ रहा है कि उसको आयुष्मान भारत के तहत मुफ्त इलाज की सुविधा का लाभ क्यों नहीं मिला? आज बंगाल का किसान पूछ रहा है उसको किसान सम्मान निधि के हजारों रुपए क्यों नहीं मिले."

    मोदी

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    "एक तरफ देश निरंतर सिंगल विंडो सिस्टम की तरफ बढ़ रहा है, ताकि कारोबारी को, उद्यमी को यहां-वहां भटकना ना पड़े. लेकिन पश्चिम बंगाल में एक अलग तरह का सिंगल विंडो सिस्टम बना दिया गया है. ये सिंगल विंडो है- 'भाइपो विंडो'. पश्चिम बंगाल में इस विंडो से गुज़रे बिना कुछ नहीं हो सकता."

    "यहां पश्चिम बंगाल में दीदी, विकास की हर योजना के सामने दीवार बनकर खड़ी हो गई हैं."

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा है कि बीजेपी के घोषणापत्र में इन योजनाओं का प्रमुखता से जिक्र किया जाएगा और चुनाव के बाद बीजेपी के सत्ता में आने पर राज्य में इन्हें लागू किया जाएगा. रविवार को बीजेपी का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के लिए घोषणा पत्र जारी किया जाना है.

  2. दत्तात्रेय होसबाले: मोदी के 'क़रीबी' जिन्होंने वाजपेयी को इमरजेंसी की ख़बर दी थी

    दत्तात्रेय होसबोले

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    आरएसएस के नए सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले एबीवीपी और आरएसएस को असम में जगह दिलाने के लिए जाने जाते हैं. असम के रास्ते ही बीजेपी पूर्वोत्तर के राज्यों में अपनी पकड़ मज़बूत करना चाहती है.

    66 साल के दत्तात्रेय होसबाले ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में भैयाजी जोशी की जगह ली. जोशी ने अपने पद से इस्तीफ़ा दिया ताकि नए और कम उम्र के लोग आरएसएस को भविष्य में आगे ले जाने की ज़िम्मेदारी लें.

    काफ़ी लंबे समय से होसबोले एबीवीपी से जुड़े हुए थे. उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि 1980 के दशक के शुरुआती सालों में 'असम चलो' छात्र आंदोलन था का आयोजन था.

    होसबोले के पुराने दोस्त बीएच श्रीधर ने बीबीसी को बताया, "वो पूरी तरह से अपने काम को समर्पित हैं. उन्होंने कई कार्यकर्ताओं को लिफ़ाफ़े पर पता लिखने से लेकर मीडिया के लिए मुश्किल स्टेटमेंट लिखना सिखाया है. उन्होंने सिखाया है कि एक अच्छा प्रचारक कैसे बनते हैं. उन्होंने हमेशा सोशल इंजीनियरिंग पर ध्यान दिया है."

  3. भारत में कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड मामले

    वीडियो कैप्शन, भारत में कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड मामले

    भारत में कोरोना संक्रमण के मामले फिर से बढ़ रहे हैं. बीते 24 घंटों में देशभर में कोरोना संक्रमण के 40953 मामले सामने आए हैं. साल 2021 में यह संक्रमण के सबसे अधिक मामले हैं. इसके साथ ही देश में कोरोना के कुल मामले 11555284 हो गए हैं.

    केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक बीते 24 घंटों में 23653 लोग रिकवर हुए हैं. देश में फिलहाल संक्रमण के सक्रिय मामले 288394 हैं. बीते 24 घंटों में 188 लोगों की मौत हुई है. देश में अब तक कोरोना से मरने वालों का आंकड़ा 159558 हो गया है.

    आईसीएमआर के मुताबिक 20 मार्च तक कुल 232431517 सैंपल टेस्ट किए जा चुके हैं.

  4. 2000 रुपये के नोट के कम दिखने की वजह क्या है?

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    नोटबंदी होने के बाद एटीएम से 2000 रुपये के इतने नोट निकले थे कि उनका छुट्टा मिलना मुश्किल हो गया. लेकिन अब तो 2000 का नोट मुश्किल से दिखता है. ऐसा क्यों? चलिए समझने की कोशिश करते हैं.

    8 नवंबर 2016 की वो रात कोई नहीं भूला होगा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा करते हुए कहा कि रात 12 बजे के बाद से 500 और 1000 रुपये के नोट बंद हो जाएंगे और इनकी जगह भारतीय रिज़र्व बैंक 2000 रुपये और 500 रुपये के नए नोट जारी करेगी.

    तब से नया 500 का नोट तो ख़ूब चल रहा है. लेकिन बीते दो सालों में 2000 के नए नोट पहले एटीएम और फिर बैंकों से ग़ायब हो गए. हाल ही में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने बताया कि आरबीआई ने साल 2019 और 2020 में 2000 रुपये के नए नोट छापे ही नहीं हैं. तो फिर 2000 रुपये के नोट गए कहां?

  5. चीन और अमेरिका के अधिकारियों के बीच तीखी नोक-झोंक क्यों हुई?

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    राष्ट्रपति जो बाइडन के सत्ता में आने के बाद, अलास्का में चीन और अमेरिका के बीच हो रही पहली उच्च स्तरीय वार्ता में दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिली.

    समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने लिखा है कि 'सार्वजनिक मंच पर, दो शक्तिशाली देशों की इस स्तर की बैठक में ऐसी नोक-झोंक बहुत कम ही देखने को मिली है.'

    चीन के अधिकारियों ने इस बैठक में अमेरिका पर आरोप लगाया कि 'वो अन्य देशों को चीन पर हमले के लिए उकसा रहा है', जबकि अमेरिका ने कहा कि 'चीन बिना सोचे-समझे ही इस निष्कर्ष पर पहुँच गया है.' चीन और अमेरिका के संबंध, मौजूदा दौर में सबसे तनावपूर्ण स्थिति में हैं और पिछले कुछ वर्षों से यही हालात बने हुए हैं.

  6. भारत की जेल में क़ैद नेपाली नागरिक को 40 साल बाद मिली रिहाई

    दीपक जोशी तिमसिना

    इमेज स्रोत, Hirak Sinha

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    चालीस साल से भी ज़्यादा समय से भारत की जेलों में विचाराधीन क़ैदी के तौर पर रहे नेपाली नागरिक दीपक जोशी तिमसिना शनिवार को रिहा कर दिए गए हैं.

    कलकत्ता उच्च न्यायालय ने बुधवार शाम को उनकी रिहाई का आदेश दिया था.

    उनके भाई प्रकाश चन्द्र तिमसिना के नेपाल से कोलकाता आने के बाद, शुक्रवार को कोलकाता के दमदम जेल में उन्हें रिहा करने की प्रक्रिया शुरू हुई.

    उनकी ओर से केस लड़ने वाले कोलकाता के एक वकील हीरक सिन्हा ने बीबीसी न्यूज़ नेपाली को बताया कि उन्हें रिहा करने के अदालती आदेश के बावजूद उनका मामला नहीं सुलझा.

  7. बीबीसी इंडिया बोल, 20 मार्च 2021, क्या पाकिस्तान की भारत को लेकर नीति बदल रही है?

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  8. नोटबंदी से बैंक बंदी तक, प्रधानमंत्री मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था तबाह कर दीः ममता बनर्जी

    ममता

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    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर हमला करते हुए शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था तबाह कर दी.

    हल्दिया में एक रैली को संबोधित करते हुए व्हीलचेयर पर बैठी ममता बनर्जी ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया है - नोटबंदी से लेकर बैंक बंदी तक."

    "वो जल्द की हल्दिया के बंदरगाह को भी बेच देंगे."

    बीजेपी को सबसे बड़ा "तोलाबाज़" बताते हुए उन्होंने कहा, "पीएम केयर फंड के नाम पर कर लाखों करोड़ रुपये इकट्ठा किए गए लेकिन लोगों को कोविड-19 वैक्सीन नहीं मिल रही है और कोविड-19 फिर से शुरू हो गया है."

    ममता ने कहा कि बीजेपी "मां-बहनों को परेशान करती है और किसानों से उनकी ज़मीन ले लेती है."

  9. पॉडकास्ट कहानी ज़िंदगी की: सुखांत

    सुखांत

    ये है बीबीसी हिंदी का ताज़ातरीन पॉडकास्ट 'कहानी ज़िंदगी की'

    'कहानी ज़िंदगी की' के हर एपीसोड में रूपा झा आपको सुना रही हैं भारतीय भाषाओं में लिखी ऐसी चुनिंदा कहानियां जो अपने आप में बेमिसाल हैं, जो हमारी और आपकी ज़िंदगी में झांकती हैं और सोचने को मजबूर भी करती हैं.

    इस बार की कहानी है सुखांत.

    ये मूल रूप से तेलुगू में लिखी गई कहानी 'सुखांतम्' का हिंदी अनुवाद है.

    ये कहानी तेलुगू भाषा की चर्चित लेखिका अबूरी छायादेवी ने लिखी है.

  10. राहुल गाँधी बोले- जो चोरी करते हैं वो प्रेस कॉन्फ़्रेंस नहीं करेंगे

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने असम में रैली को संबोधित करते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा. राहुल गांधी ने कहा, ''आज हिन्दुस्तान को हम दो हमारे दो चलाते हैं. चार लोग इस देश को चलाते हैं और पूरा फ़ायदा उन्हीं चार लोगों को जा रहा है. हम असम की सरकार चलाना चाहते हैं, असम की जनता की सरकार चलाना चाहते हैं.''

    राहुल ने कहा, ''मोदी जी ने मेक इन इंडिया की बात की, स्टार्टअप इंडिया की बात की. मगर आप देखिए कि मोबाइल फ़ोन, शर्ट या जूते आपको हर जगह मेड इन इंडिया नहीं मेड इन चाइना दिखाई देगा. हमने अपना घोषणापत्र असम की जनता से बातचीत करके बनाया है. हमने इसे बंद कमरों में नहीं बनाया है.''

    राहुल गांधी ने एक युवा के सवाल के जवाब में कहा, ''जो चोरी करते हैं, वो कभी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं करेंगे. जो चोरी करेगा, वो ऐसे आकर कभी खड़ा नहीं हो सकता.''

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  11. ‘बीजेपी को केरल में एक भी सीट जीतने में मुश्किल होगी’

    शशि थरूर

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    कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर का कहना है कि कांग्रेस के भीतर गुटबाज़ी हो सकती है, लेकिन चुनाव लड़ने के लिए सभी धड़े हमेशा एक साथ आ जाते हैं.

    द हिंदू अख़बार से बातचीत में उन्होंने केरल विधान सभा चुनाव में यूडीएफ़ की चुनावी संभावनाओं से उनकी उम्मीदों, राज्य मे बीजेपी के सफल ना होने के कारणों और जी-23 पर चर्चा की.

    ओपिनियन पोल में केरल चुनावों में सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाली एलडीएफ़ की जीत की बात कही गई है. इस पर शशि थरूर ने कहा कि ओपिनियन पोल पर भरोसा नहीं किया जा सकता.

    उन्होंने कहा, “ब्रितानी प्रधानमंत्री हेरोल्ड विल्सन ने कहा था कि ‘राजनीति में एक हफ़्ता लंबा वक़्त होता है.’ और चुनाव होने में अभी क़रीब चार हफ़्ते हैं. बल्कि सबसे ताज़ा ओपिनियन पोल कुछ हफ़्ते पहले हुआ है. इसलिए मैं मानता हूं कि ओपिनियन पोल लेने के हफ़्तों और चुनाव प्रचार के बचे हुए हफ़्तों के बीच ये चुनाव पलटने वाला है और यूडीएफ़ जीतेगी.”

    हाल में पी सी चाको ने पार्टी की केरल इकाई में गुटबाज़ी का आरोप लगते हुए कांग्रेस छोड़ दी, तो क्या ये गुटबाज़ी कांग्रेस को नीचे नहीं खींच रही है?

    इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा, “पी सी चाको बहुत ही सम्मानित पूर्व सहयोगी रहे हैं. लेकिन वो एक पूर्व एनसीपी नेता हैं और अब उन्होंने एनसीपी में ‘घर वापसी’ कर ली है.और जहाँ तक गुटबाज़ी का सवाल है तो ये सभी दलों को नुक़सान पहुंचाती है और हम भी इससे बच नहीं सकते. लेकिन चुनाव लड़ने के समय सभी धड़े हमेशा साथ आ जाते हैं. कांग्रेस को लेकर दिलचस्प ये है कि चाहे कोई भी धड़ा हो, वो पार्टी और यूडीएफ़ की जीत के लिए अपने मतभेदों को किनारे रखकर एकजुट होकर काम करते हैं.”

    एलडीएफ़ के पास ब्रैंड पिनराई हैं, लेकिन यूडीएफ़ के पास मुख्यमंत्री का कोई चेहरा नहीं है. तो क्या इससे चुनाव में उनकी स्थिति कमज़ोर नहीं हो जाती?

    इस पर उन्होंने कहा, “मुझे ऐसा नहीं लगता. अगर कोई मौजूदा मुख्यमंत्री होता है तो वो अपने आप एक ब्रैंड लीडर बन जाता है. पहले के चुनावों में सीपीआई(एम) के पास भी मुख्यमंत्री का कोई चेहरा नहीं था. कांग्रेस पारंपरिक तौर पर पहले से मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित नहीं करती है, ख़ासकर जब उस वक़्त कांग्रेस का मुख्यमंत्री सत्ता में ना हो. अच्छी बात ये है कि हमारे पास चुनने के लिए बहुत से नेता हैं और बहुत लोगों में क़ाबिलियत है. हम सब जानते हैं कि हमारे वरिष्ठ नेता कौन हैं और मैं आपको विश्वास दिला सकता हूं कि मतदाता चुनाव करेंगे तो उन्हें पता होगा कि वो किसे चाहते हैं.”

    बीजेपी केरल में अपना मौजूदगी बढ़ाने के लिए हर कोशिश कर रही है.आप बीजेपी की चुनावी संभावनाओं को कैसे देखते हैं? इस पर उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि बीजेपी को 140 में से एक सीट भी मिलना मुश्किल है. बल्कि बीजेपी को अपनी एकमात्र निमोम सीट को बचाए रखने में भी दिक़्क़त होगी. ख़ासकर जब कांग्रेस और सीपीआई(एम) ने वहां अपने मज़बूत उम्मीदवार उतारे हैं. लेकिन मैं कहूंगा कि शायद बीजेपी की विश्वसनीयता ऐसे स्तर पर पहुंच गई है जहाँ आगे बदलाव संभव नहीं है. पिछले 15 साल में ये 6% की पार्टी से 15% की पार्टी बन गई है. मुझे लगता है कि जो हो सकता था वो हो चुका है. मुझे नहीं लगता कि इससे ज़्यादा कुछ होगा, क्योंकि केरल उत्तर भारत की तरह नहीं है, जहाँ बीजेपी ने सांप्रदायिक और ध्रुवीकरण की रणनीति तैयार की है. ये एक प्रभावी संस्था है और इसके पास बहुत पैसा है. लेकिन सिर्फ धन और बाहुबल आपको चुनाव नहीं जिता सकते. आपको मतदाताओं की भावनाओं को समझना आना चाहिए.”

    आप उन 23 नेताओं में से एक थे जिन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखी थी. जिस समूह को अब जी-23 कहा जा रहा है. लेकिन उसके बाद से आप समूह से पीछे हटते दिखाई दिए. हाल में जम्मू में जी-23 के कुछ सदस्यों की हालिया सार्वजनिक बैठकों में भी आप नहीं देखे गए, जहां पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के ख़िलाफ़ कई कड़ी टिप्पणियां की गई थीं. ऐसा क्यों?

    इस सवाल के जवाब में थरूर ने कहा, “मैं जम्मू नहीं जा सका. मैं केरल में चुनावी घोषणापत्र के लिए सलाह मशविरा कर रहा था, इसलिए वैसे भी मैं कहीं और नहीं जा सकता था. जी-23 किसी तरह की संस्था नहीं है जैसा मीडिया दिखाता है; ये एक जैसी सोच वाले कांग्रेस नेताओं का एक समूह है जो कांग्रेस को मज़बूत करने के बारे में बात कर रहा है. मेरे अलावा, समूह का हर व्यक्ति खुले तौर पर कह चुका है कि वो पांचों राज्यों के चुनावों में कांग्रेस की जीत के लिए काम करना चाहते हैं. मुझे उनमें और कांग्रेस नेतृत्व या उनमें और मुझ में कोई विरोधाभास नहीं दिखता. गुलाम नबी आज़ाद, कपिल सिब्बल और मनीष तिवारी जैसे लोग कह रहे हैं कि वो पांचों राज्यों में कांग्रेस को जीतते देखना चाहते हैं और उस जीत के लिए काम करने के लिए मैं उस राज्य में जा भी रहा हूं जहां का मैं हूं और जहां का प्रतिनिधित्व मैं संसद में करता हूं, विरोधाभास क्या है? मैं किसी की अवज्ञा नहीं कर रहा हूं. मैंने कोई कड़ा बयान नहीं दिया. मैं पार्टी को मज़बूत होते देखना चाहता हूं.”

    कांग्रेस

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  12. गायत्री मंत्र और प्राणायाम कोरोना में कितने असरदार पर 'रिसर्च'

  13. मिलिए धान के पुआल से साड़ी बनाने वाले किसान से

  14. अमरीका में एशियाई मूल के लोगों पर हमले क्यों बढ़ रहे हैं?

  15. ममता बनर्जी ने टीएमसी छोड़ बीजेपी में जाने वालों को ‘मीर जाफ़र’ बताया

    ममता बनर्जी

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    पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को तृणमूल छोड़ बीजेपी में गए नेताओं पर तंज किया और उन्हें “ग़द्दार” और “मीर जाफ़र” बताया.

    पूर्व मेदिनीपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा, “बीजेपी ने तृणमूल के ग़द्दारों को विधान सभा के टिकट दिए हैं, जबकि बीजेपी के वरिष्ठ और पूराने नेता घर बैठकर आंसू बहा रहे हैं.”

    मीर जाफ़र नवाब सिराज-उद-दौला के एक सेनापति थे, जो प्लासी के युद्ध के दौरान अंग्रेजों के साथ मिल गए थे.

    पार्टी छोड़कर बीजेपी में जाने वाले नेताओं के लिए ममता बनर्जी अक्सर मीर जाफ़र का नाम लेती हैं.

  16. नमस्कार!

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