म्यांमार के शहर मांडले में सैन्य शासन के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शनों के दौरान मारी गए 19 साल की महिला क्याल सिन के जनाज़े में हज़ारों की संख्या में लोग शामिल हुए. बुधवार को गोली लगने से उनकी मौत हो गई थी.
क्याल सिन को एंजल यानी परी के नाम से पुकारा जा रहा है. विरोध प्रदर्शनों के दौरान वो एक टी-शर्ट पहने हुए थीं जिस पर लिखा था "सब कुछ ठीक हो जाएगा."
सोशल मीडिया पर भी लोग क्याल सिन को याद कर रहे हैं और उन्हें हीरो कह रहे हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार गुरुवार को क्याल सिन के जनाज़े में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग आए. लोगों ने वहां क्रांति के गीत गाए और सैन्य तख़्तापलट के विरोध में नारे लगाए.
विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने से पहले क्याल को इस बात का अंदाज़ा था कि उनके साथ कुछ भी हो सकता है. उन्होंने फ़ेसबुक पर अपने ब्लड ग्रूप के बारे में जानकारी पोस्ट की थी और लिखा था कि अगर उन्हें कुछ हो जाए तो उनके अंग ज़रूरतमंदों को दान कर दिए जाएं.
बुधवार को विरोध प्रदर्शन में उनके साथ रही मिएत थू ने बताया कि प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने आंसू गैस के गोले दाग़े थे. इससे प्रभावित प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए क्याल ने पानी की एक पाइप उठा ली थी और मुंह धोने में वो लोगों की मदद करने लगीं.
वो कहती हैं, "इसी दौरान पुलिस ने गोली चला दी थी. तब उसने मुझे वहां से जाने को कहा था."
वो कहती हैं, "ये युद्ध नहीं था. लोगों पर गोलियां चलाने की कोई ज़रूरत नहीं थी."
'ख़ूनी बुधवार' के बाद फिर सड़कों पर निकले प्रदर्शनकारी
इससे पहले बुधवार को देश में हुए विरोध प्रदर्शनों में कम से कम 38 प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी. लेकिन इसके बावजूद गुरुवार को देश के दो बड़े शहरों यंगून और मांडले में हज़ारों की संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर निकले.
न्यूज़ वेबसाइट म्यांमार नाउ के अनुसार गुरुवार को मिनग्यान शहर में भी दसियों हज़ारों लोगों ने सैन्य तख़्तापलट का विरोध किया. यहां एक दिन पहले प्रदर्शनों के दौरान एक प्रदर्शनकारी की गोली लगने से मौत हो गई थी.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार मोन्यावा में पुलिस ने प्रदर्शनकारी पर आंसू गैस के गोलों और गोलियों का इस्तेमाल किया है.
मांडले के नागरिकों का कहना है कि गुरुवार को शहर के आसमान में पांच जेट विमानों को एक ख़ास आकार बनाकर बेहद नीचे उड़ान भरते हुए देखा गया.
बुधवार को यहां हुई मौतों के बाद संयुक्त राष्ट्र ने इस दिन को 'ख़ूनी बुधवार' कहा था. संयुक्त राष्ट्र ने कहा था कि ऐसा लगता है कि सुरक्षाबल प्रदर्शनकारियों के लिए असली गोलियों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
म्यांमार के लिए संयुक्त राष्ट्र के दूत क्रिस्टीन श्रैनर बर्गेनर ने कहा है कि देश में सैन्य शासन के विरोध में हो रहे विरोध प्रदर्शनों में अब तक पचास से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
वहीं समाचार एजेंसी एएफ़पी का कहना है कि म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट के बाद जारी विरोध प्रदर्शनों में अब तक 54 लोगों की जान जा चुकी है जबकि 1,700 लोगों को हिरासत में लिया गया है.
बुधवार को एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस में बर्गेनर ने कहा कि क़रीब 1,200 को हिरासत में लिया गया है और इनमें से कई लोगों के परिजनों को ये नहीं बताया गया है कि उन्हें कहा रखा गया है.
उन्होंने कहा कि म्यांमार की सेना के साथ हुई बातचीत में चेतावनी दी गई है कि संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देश और सुरक्षा परिषद इसके ख़िलाफ़ 'कड़ा रुख़' अख़्तियार कर सकते हैं. उनका कहना है कि इसके उत्तर में सेना ने कहा था कि 'हमें प्रतिबंधों की आदत है, हम पहले भी प्रतिबंध झेल चुके हैं.'
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में म्यांमार को लेकर शुक्रवार को चर्चा होने वाली है.