अमेरिका ने फ़ैसला किया है कि वो सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक करेगा.
ऐसा कहा जा रहा है कि इस रिपोर्ट में ख़ाशोज्जी की निर्मम हत्या के लिए सऊदी अरब के शक्तिशाली युवराज मोहम्मद बिन सलमान को ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस रिपोर्ट को पढ़ लिया है और वो इस मामले में सऊदी अरब के बादशाह शाह सलमान से बातचीत करने वाले हैं.
बाइडन सऊदी अरब से अमेरिकी संबंधों को नए सिरे से देखना चाहते हैं. राष्ट्रपति ट्रंप के समय अमेरिका और सऊदी अरब के संबंध काफ़ी क़रीबी थे.
पत्रकार ख़ाशोज्जी की हत्या दो अक्टूबर 2018 को तुर्की में सऊदी वाणिज्य दूतावास के अंदर कर दी गई थी और उनके मृत शरीर को भी क्षत-विक्षत कर दिया गया था.
लेकिन सऊदी क्राउन प्रिंस इस मामले में किसी भी तरह से शामिल होने के आरोप को ख़ारिज करते हैं.
ख़ाशोज्जी को सऊदी शासकों को आलोचक माना जाता था और उनकी हत्या उस समय कर दी गई थी जब वो अक्टूबर 2018 में इस्तांबूल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में अपने काग़ज़ात लेने गए थे जिनके आधार पर वो अपनी तुर्क मंगेतर से शादी कर सकते थे.
सऊदी अधिकारियों का कहना है कि उनकी हत्या सऊदी अरब के ख़ुफ़िया अधिकारियों की एक टीम ने कर दी थी जिन्हें सिर्फ़ इस बात की ज़िम्मेदारी दी गई थी कि वो सऊदी पत्रकार को वापस सऊदी अरब लाएं.
इस मामले में सऊदी की एक अदालत ने पाँच लोगों को मौत की सज़ा सुनाई थी लेकिन पिछले साल सितंबर में उनकी मौत की सज़ा को 20 साल क़ैद में बदल दी गई थी.
अमेरिका ख़ाशोज्जी की मौत से जुड़ी रिपोर्ट गुरुवार को सार्वजनिक कर सकता है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार चार अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस रिपोर्ट में कहा जा सकता है कि सऊदी क्राउन प्रिंस ने ख़ाशोज्जी की हत्या की मंज़ूरी या संभवत: उनकी हत्या के आदेश दिए थे.
उनके अनुसार इस रिपोर्ट को तैयार करने में अमेरिकी ख़ुफ़िया विभाग सीआईए ने अहम भूमिका निभाई है.
मोहम्मद बिन सलमान कहते रहें हैं कि उन्हें ख़ाशोज्जी की हत्या के बारे में कोई जानकारी नहीं थी लेकिन 2019 में उन्होंने कहा कि वो सऊदी अरब के नेता होने के कारण इस हत्याकांड की पूरी ज़िम्मेदारी लेते हैं और ख़ासकर जब ख़ाशोज्जी की हत्या में वो लोग शामिल हैं जो सऊदी अरब सरकार के लिए काम करते थे.
2019 में यूएन के एक विशेष अधिकारी ने सऊदी सरकार को जानबूझकर पूर्व निर्धारित योजनाबद्ध तरीक़े से ख़ाशोज्जी की हत्या का ज़िम्मेदार ठहराया था और सऊदी सरकार के मुक़दमे को इंसाफ़ के ठीक विपरीत क़रार दिया था.
यह रिपोर्ट अभी क्यों सार्वजनिक की जा रही है?
राष्ट्रपति बाइडन अमेरिका के पुराने साथी सऊदी अरब से अपने संबंधों को नए सिरे से निर्धारित करना चाहते हैं और कुछ मामलों में सऊदी अरब के साथ ट्रंप की तुलना में सख़्त रवैया अपनाना चाहते हैं.
ख़ाशोज्जी की हत्या से जुड़ी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने का फ़ैसला बाइडन की इस नई नीति का हिस्सा है.
इससे पहले ट्रंप ने अगोपनीय रिपोर्ट को सार्वजनिक किए जाने की माँग को ख़ारिज कर दिया था और इसके पीछे यह दलील दी थी कि सऊदी अरब के साथ बढ़ते सहयोग पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं.
व्हाइट हाउस की प्रवक्ता जेन साकी ने बुधवार को कहा कि बाइडन सऊदी बादशाह से जल्द ही बात करेंगे.
एक समय में ख़ाशोज्जी सऊदी शाही परिवार के बहुत क़रीबी थे और उनके सलाहकार भी थे लेकिन फिर उनके संबंध ख़राब हो गए और वो साल 2017 में अमेरिका चले गए और वहां निर्वासन में रहने लगे.
अमेरिका से ही वो वाशिंगटन पोस्ट में एक मासिक कॉलम लिखते थे जिनमें वो अक्सर सऊदी क्राउन प्रिंस की नीतियों की आलोचना करते थे.
अपने पहले ही कॉलम में ख़ाशोज्जी ने लिखा था कि उन्हें इस बात का डर था कि असहमति को दबाने की कोशिश में उन्हें भी गिरफ़्तार किया जा सकता था जिसकी देखरेख उनके अनुसार ख़ुद क्राउन प्रिंस कर रहे थे.
अपने आख़िरी कॉलम में उन्होंने यमन में सऊदी अरब के हस्तक्षेप की आलोचना की थी.