ईरान के परमाणु संयंत्रों का अचानक निरीक्षण नहीं कर पाएगा आईएईए
ईरान इस सिलसिले में मंगलवार से अपनी नीति में बदलाव कर रहा है.
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ईरान के परमाणु संयंत्रों का अचानक निरीक्षण नहीं कर पाएगा आईएईए
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संयुक्त राष्ट्र की परमाणु हथियारों की निगरानी करने वाली संस्था अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) का कहना है कि ईरान उसके निरीक्षकों को अपने परमाणु संयंत्रों की निगरानी की तीन महीने के लिए अनुमति देने पर राज़ी हो गया है, लेकिन जल्दबाज़ी में हुए इस समझौते में उसके अधिकारियों के अधिकार कम हो गए हैं और अब वो अचानक निरीक्षण नहीं कर पाएंगे.
ईरान इस सिलसिले में मंगलवार से अपनी नीति में बदलाव कर रहा है क्योंकि साल 2015 में राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से परमाणु समझौता तोड़े जाने के बाद अमरीका ने उसके ख़िलाफ़ लगाए गए प्रतिबंधों को नहीं हटाया है.
ईरान का कहना है कि अमरीका साल 2015 में हुए परमाणु समझौते का जब तक पूरी तरह पालन नहीं करता, तब तक वो इन उपायों को जारी रखेगा. दूसरी ओर अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन का कहना है कि शुरूआत ईरान को करना है.
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इमेज कैप्शन, बीते साल ईरान के एक शीर्ष परमाणु वैज्ञानिक की हत्या से इस मुद्दे पर तनाव काफी बढ़ गया था.
ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर ये विवाद लगभग दो दशक से अंतरराष्ट्रीय एजेंडे पर है. ईरान का दावा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमरीका और अन्य देशों को संदेह है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है.
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ईरान: यूएन के जांचकर्ताओं को परमाणु संयत्रों तक जाने से रोकने के लिए पास किया क़ानून
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ईरान की संसद ने एक क़ानून पारित किया है जिसके तहत
अगर 2015 के परमाणु करार के तहत अमेरिका अपनी शर्तों को पूरा नहीं करता है तो ईरान के
परमाणु संयत्रों में संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं की पहुंच को सीमित कर दिया जाएगा.
23 फ़रवरी की इस डेडलाइन से ठीक दो दिनों पहले रविवार
को ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़रीफ़ ने कहा कि बातचीत में इस पहलू पर भी ग़ौर करने
की ज़रूरत होगी कि दोनों पक्ष उन शर्तों को किस तरह लागू करेंगे जो समझौते का हिस्सा
हैं.
उन्होंने रविवार को तेहरान में कहा कि अमेरिका के
साथ परमाणु समझौते को बहाल करने के लिए बातचीत तब शुरू हो सकेगी जब दूसरे पक्ष भी अपने
वायदों को लागू करना शुरू कर दें.
उन्होंने कहा, “जब सभी लोग समझौते के अपने हिस्से की शर्तों को लागू करेंगे, बातचीत तभी होगी, वार्ता समझौते में बदलाव के लिए नहीं होगी, या उसमें कुछ और चीज़ें शामिल करने के लिए, क्योंकि उन चीज़ों पर
बातचीत हो चुकी हैं.“
“हम जिस बात पर वार्ता करेंगे वो इस पर होगी कि हम किस तरह इस बात
की गारंटी दे सकते हैं कि अमेरिका ने जो किया वो फिर से दोहराया न जाए.”
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अमेरिका, ईरान, चार यूरोपीय मुल्कों और चीन के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर 2015 में समझौता हुआ था लेकिन डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने साल 2018 में इसे रद्द कर ईरान में फिर से व्यापक प्रतिबंध लागू कर दिए थे.
समझौते के अमेरिका के बाहर जाने के बाद ईरान ने यूरेनियम संवर्धन के ग्रेड को पहले के मुक़ाबले बहुत बढ़ा दिया. साथ ही संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं की जांच पर भी रोक लगाई.
बीबीसी की अमेरिकी विदेश मामलों की संवाददाता बारबरा प्लेट ऊशरका कहना है कि अमेरिका और यूरोपीय देशों ने हाल में जो क़दम उठाया वो पिछले चार सालों में ऐसा पहला क़दम था.
वो कहती हैं कि बाइडन प्रशासन ने ईरान के संयुक्त राष्ट्र के राजनयिकों की यात्रा पर लगी रोक में ढिलाई दी है. साथ ही उन्होंने ट्रंप शासन की उस कोशिश को भी पलट दिया है जिसमें वो ईरान पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंध लगवाना चाहते थे.
इस बीच आईएईए के प्रमुख रफायल ग्रोसी दो दिनों की अपनी ईरान यात्रा के लिए तेहरान पहुंच चुके हैं.
सीमा विवाद पर भारत-चीन का साझा बयान, कहा- LAC पर तनाव के मुद्दों पर जारी रखेंगे बातचीत
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भारत और चीन के बीच
कमांडर स्तर की बातचीत के बाद एक साझा बयान में पैंगोंग झील पर डिसइंगेजमेंट
प्रक्रिया को सकारात्मक बताया गया है.
भारतीय रक्षा
मंत्रालय द्वारा जारी इस बयान में कहा गया है कि फ्रंटलाइन सैनिकों का पीछे हटाना एक
महत्वपूर्ण कदम है और ये इसके बाद वेस्टर्न सेक्टर में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल
के पास जारी दूसरे तनाव के मुद्दों को भी सुलझाने के लिए अच्छा आधार हो सकता है.
भारत और चीन के बीच
सीमा विवाद को सुलझाने के मकसद से दोनों पक्षों के कमांडर स्तर की 10वें दौर की बातचीत
फरवरी 20 को चुशुल सीमा पर मॉल्डो में संपन्न हुई थी.
बैठक में दोनों
पक्षों के बीच वेस्टर्न सेक्टर में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल से जुड़े सभी मुद्दों
पर खुल कर बात हुई.
दोनों पक्ष इस बात पर
सहमत हुए हैं कि वो देश के नेतृत्व के दिखाए रास्ते के अनुसार संवाद जारी रखेंगे, ज़मीनी
स्थिति को स्थिर और नियंत्रित करने के लिए बाकी मुद्दों पर पारस्परिक सहमति से धीरे-धीरे
और क्रमबद्ध तरीके के आगे बढ़ेंगे ताकि सीमा के इलाक़ों में शांति बनाई रखी जा
सके.
ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी की पत्नी को सीबीआई का नोटिस
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प्रभाकर मणि तिवारी
कोलकाता से बीबीसी हिंदी के लिए
कोयले के अवैध
खनन के मामले की जांच कर रही सीबीआई की ओर से रविवार को ममता बनर्जी के भतीजे सांसद
अभिषेक बनर्जी की पत्नी रुजिरा बनर्जी को नोटिस देने के मुद्दे पर राजनीतिक विवाद तेज
हो गया है. सत्तारुढ़ टीएमसी और बीजेपी में इस पर आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू हो गया है.
अभिषेक ने आरोप
लगाया है कि उन पर दबाव बढ़ाने के लिए ही सीबीआई ने यह नोटिस भेजा है.
ऑल
इंडिया तृणमूल यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभिषेक बनर्जी ने बताया है कि आज
2 बजे सीबीआई ने उनकी पत्नी के नाम पर नोटिस जारी किया है.
उन्होंने
इस पर कहा कि, “हमें क़ानून पर पूरा भरोसा है. हालांकि
अगर उन्हें यह लगता है कि वो इन हथकंडों से हमें डरा देंगे तो वे गलत सोच रहे हैं.
हम उनमें से नहीं है जो दब जाएंगे.”
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सीबीआई का कहना
है कि इस मामले में रुजिरा के बैंक खाते से वित्तीय लेन-देन किया गया है. इसलिए उनका
बयान लेना जरूरी है. सीबीआई टीम जब अभिषेक के घर पहुंची तो घर पर कोई नहीं था. इसलिए
यह टीम अपना फोन नंबर छोड़ कर लौट आई.
टीएमसी महासचिव
पार्थ चटर्जी कहते हैं, “यह नोटिस राजनीतिक
मकसद से भेजा गया है. लेकिन कानून अपना काम करेगा.”
दूसरी ओर, बीजेपी नेता शुभेंदु
अधिकारी कहते हैं, “अब धीरे-धीरे
सबके चेहरों से नकाब उतर जाएगा. यह तो शुरुआत है.”
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सीबीआई ने
बीते साल नवंबर में राज्य में ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ईसीएल) की दोखदानों से
कोयला चोरी और अवैध खनन के आरोप में एक मामला दर्ज किया था.
अभियुक्तों
में ईसीएल के दो महाप्रबंधकों समेत तीन सुरक्षा अधिकारी भी शामिल हैं. उसके बाद
सीबीआई अब तक जांच के सिलसिले में बंगाल के अलावा झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के 45
ठिकानों पर
छापेमारी कर चुकी है. इस मामले का मुख्य अभियुक्त अनूप मांझी और उनका सहयोगी विनय
मिश्र फरार हैं.
सीबीआई के
एक अधिकारी बताते हैं, “रुजिरा के बैंकाक और लंदन स्थित बैंक खातों
में कुछ संदिग्ध लेन-देन का पता चलने के बाद उनसे पूछताछ का फैसला किया गया है. यह
जांच के तहत की गई रूटीन कार्रवाई है.”
इसके 48 घंटे पहले ही अभिषेक की ओर से दायर मानहानि के एक मामले में एक स्थानीय कोर्ट
ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को समन जारी किया था.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर'
बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली से..
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ब्रेकिंग न्यूज़, पेट्रोल-डीज़ल पर टैक्स से साढ़े छह सालों में सरकार ने कमाए 21 लाख करोड़ - सोनिया गांधी
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने पेट्रोल और डीज़ल
की बढ़ती क़ीमतों पर केंद्र की बीजेपी सरकार को घेरा है. उन्होंने कहा है कि पेट्रोल और डीज़ल
पर अधिक एक्साइज़ ड्यूटी लगा कर बीते साढ़े छह सालों में सरकार ने 21 लाख करोड़ रुपये
कमाए हैं.
सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक खत लिखा है जिसे कांग्रेस
के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर पोस्ट किया गया है. इसमें उन्होंने लिखा है, “बीते साढ़े छह सालों में सरकार ने डीज़ल पर
एक्साइज़ ड्यूटी 820 फ़ीसद और पेट्रोल पर एक्साइज़ ड्यूटी 258 फ़ीसद बढ़ाई है."
उन्होंने लिखा कि "ऐसा कर के सरकार ने लोगों से 21 लाख
करोड़ रुपये कमाए हैं, ये पैसा उन लोगों तक पहुंचना चाहिए जिनके लिए ये इकट्ठा
किया गया है."
उन्होंने लिखा, “देश में बड़े पैमाने पर नैकरियां ख़त्म हुई हैं और
लोगों की आय कम हुई है. देश का मध्य वर्ग आज परेशानी से जूझ रहा है. देश में महंगाई
बढ़ी है और ज़रूरी सामान की कीमतें भी बढ़ गई हैं जिससे लोगों की परेशानियां और बढ़ गई
हैं. लेकिन इस तरह के मुश्किल हालातों में भी सरकार लोगों की मुसीबतों और
परेशानियों से फायदा उठाना नहीं छोड़ रही.”
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उन्होंने लिखा, “मुझे नहीं समझ आ रहा कि आम लोगों की क़ीमत पर सरकार इस तरह के असंवेदनशील कदम कैसे उठा सकती है.”
सोनिया गांधी ने लिखा, “देश की भीतर डीज़ल और पेट्रोल की क़ीमतें ऐतिहासिक रूप से बढ़ गई हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें अभी उतनी नहीं बढ़ी हैं. अगर कहा जाए तो यूपीए सरकार के कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की जितनी क़ीमत थी अभी उससे आधी है.“
“लेकिन आपकी सरकार ने फायदा कमाने के लिए फरवरी में लगातार 12 दिनों तक तेल की कीमतें बढ़ाईं. बीते साल जब अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की क़ीमतें 20 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई तब भी सरकार ने तेल की क़ीमतें कम नहीं करने का फ़ैसला किया.”
“दुख की बात है कि बीते सात साल से आपकी सरकार सत्ता में है लेकिन फिर भी आप अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन के लिए पिछली सरकारों को ज़िम्मेदार ठहराते हैं. सच ये है कि साल 2020 में घरेलू स्तर पर कच्चे तेल के उत्पादन 18 साल के अपने सबसे निचले स्तर पर था.”
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बीजेपी नेता को पुलिस ने बांग्लादेशी होने के आरोप में किया गिरफ्तार
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देश में अवैध रूप से रहने के आरोप में मुंबई पुलिस
ने रुबेल जोनू शेख़ नाम के एक बांग्लादेशी नागरिक को गिरफ्तार किया है. पता चला है
कि रुबेल शेख़ वहां के स्थानीय बीजेपी नेता थे.
रुबेल शेख़ उत्तर मुंबई की अल्पसंख्यक शाखा के बीजेपी
प्रमुख थे.
मुबंई पुलिस के डीसीपी एस चैतन्य ने शनिवार को मीडिया
को बताया, “हमने आरोपी को फ़र्जी दस्तावेज़ रखने के आरोप में गिरफ्तार किया है.”
इस पूरे मामले पर कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने सवाल
किया है, “क्या यही बीजेपी का संघ जिहाद है?”
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा
है, “उत्तर मुंबई की अल्पसंख्यक
शाखा के बीजेपी प्रमुख रुबेल शेख़ बांग्लादेशी निकले हैं, क्या नागरिकता संशोधन क़ानून
में बीजेपी के पास इस मामले सुधारने का कोई विकल्प है?”
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सोशल मीडिया पर बीजेपी के सांसद के साथ रुबेल शेख़
की एक तस्वीर काफी शेयर की जा रही है.
गोपाल शेट्टी का कहना है कि रुबेल शेख़ बीजेपी के उत्तर
मुंबई की अल्पसंख्यक शाखा के प्रमुख थे लेकिन अब उन्हें उस पद से बर्ख़ास्त कर दिया
गया है.
वहीं शुक्रवार को इस मामले पर महाराष्ट्र राज्य के
गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा है कि रुबेल शेख़ ने फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी. अब इस मामले की जांच चल रही है.
ब्रेकिंग न्यूज़, बर्ड फ्लू: H5N8 स्ट्रेन से इंसानों में संक्रमण का पहला मामला रूस में
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रूस में बर्ड फ्लू के एच5एन8 स्ट्रेन का पक्षियों से इंसानों में संक्रमण का पहला मामला सामने आया है.
अधिकारियों ने बताया है कि रूस के दक्षिणी
हिस्से में एक पॉलट्री में काम करने वाले सात कर्मचारी वायरस के इस स्ट्रेन से संक्रमित पाए गए हैं. रूस में बीते साल दिसंबर में बर्ड फ्लू फैला था.
उपभोक्ता स्वास्थ्य से जुड़े मामलों पर नज़र रखने वाले संगठन की प्रमुख अन्ना
पोपोवा ने बताया है कि संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए तत्काल पर्याप्त कदम उठाए गए हैं. उन्होंने कहा, "सभी सात लोग अब बेहतर महसूस कर रहे हैं."
उन्होंने बताया कि इसकी जानकारी विश्व स्वास्थ्य संगठन को दे दी गई है.
उन्होंने बताया, “वायरस का ये स्ट्रेन एक नया म्यूटेशन है जो अभी तक इंसानों के बीच नहीं फैला है. इससे पहले ही रूसी वैज्ञानिकों ने एक संक्रमित व्यक्ति के शरीर से इस स्ट्रेन को आइसोलेट कर लिया है. विज्ञान के लिहाज़ से ये बेहद अहम खोज है और अगर भविष्य में ये वायरस म्यूटेट करता है तो हमारे पास इससे निपटने का समय होगा.”
बर्ड फ्लू के दूसरे स्ट्रेन अक्सर इंसानों को
संक्रमित करते हैं और मौत की वजह भी बनते हैं, लेकिन यह पहला मामला है जब बर्ड फ्लू के एच5एन8 स्ट्रेन ने इंसानों को संक्रमित किया है.
तेल की महंगाई के लिए क्या पिछली सरकारें ज़िम्मेदार हैं?
देखिए, एस जयशंकर के सामने जब मालदीव के विदेश मंत्री हिन्दी में बोलने लगे
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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर मालदीव के दौरे पर हैं. इस दौरे में दोनों देशों के बीच पाँच करोड़ डॉलर की डिफेंस लाइन ऑफ क्रेडिट समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं.
एस जयशंकर ने मालदीव की रक्षा मंत्री मारिया दिदी से मुलाक़ात के बाद कहा कि भारत हमेशा मालदीव का विश्वसनीय रक्षा सहयोगी रहेगा. भारतीय विदेश मंत्री ने मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह से भी मुलाक़ात की. दोनों नेताओं के बीच कई द्विपक्षीय मुद्दों पर भी बात हुई है.
एस जयशंकर ने ट्वीट कर कहा, ''मालदीव की रक्षा मंत्री मारिया दिदी के साथ उन्होंने यूटीएफ़ हार्बर प्रोजेक्ट पर हस्ताक्षर किए हैं. इससे मालदीव की तटीय सुरक्षा और मज़बूत होगी. हम विकास में भी साझेदार हैं और सुरक्षा में भी.''
मालदीव के साथ भारत ने अड्डु में सड़क बनाने पर भी एक समझौता किया है. एस जयशंकर और मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ़्रेस की.
इस प्रेस कॉन्फ़्रेंस में मालदीव के विदेश मंत्री ने हिन्दी में बोलते हुए कहा, ''उड़ान में एक पक्षी दो पंखों के साथ ऊंचाई की ओर बढ़ता है. हम दो देश उन दो पंखों की तरह हैं. हम भी एकता में समान हितों के लिए उन दो पंखों की तरह काम करते हैं. एक ही मंज़िल तक पहुँचने का लक्ष्य रखते हैं. हम जाने-पहचाने रास्तों के साथ-साथ नए रास्तों पर भी मिलकर चलते हैं. हम एक साथ नई ऊंचाइयों को भी छूते हैं.''
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ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने लगवाई फ़ाइजर की बनाई वैक्सीन
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ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने रविवार को कोरोना वायरस की
वैक्सीन लगवाई. ऑस्ट्रेलिया में इसी हफ़्ते से टीकाकरण अभियान शुरू होगा.
आम लोगों में वैक्सीन को लेकर भरोसा बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री मॉरिसन की
वैक्सीन लगवाने की तस्वीरें टीवी पर प्रसारित की गईं.
ऑस्ट्रेलिया में आधिकारिक तौर पर सोमवार से टीकाकरण शुरू किया जाएगा और अगले
हफ़्ते कम से कम 60 हज़ार डोज़ लगाई जाएंगी. शनिवार को कुछ लोगों ने टीकाकरण के
विरोध में प्रदर्शन भी किए.
प्रधानमंत्री मॉरिसन ने रविवार को एक छोटे समूह के साथ वैक्सीन लगवाई, इनमें
कुछ फ्रंटलाइन वर्कर और केयर होम में रहने वाले लोग भी शामिल थे.
ऑस्ट्रेलिया में
टीकाकरण के लिए फाइज़र वैक्सीन का इस्तेमाल किया जाएगा, जिस मंज़ूरी मिल चुकी है. देश
में टीका लगवाने वाली पहली शख़्स एक 85 वर्षीय महिला थीं.
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ब्रेकिंग न्यूज़, नेपाल में राजनीतिक संकट के बीच बाबूराम भट्टराई पहुँच रहे दिल्ली
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नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और जनता समाजवादी पार्टी के सीनियर नेता बाबूराम भट्टराई आज यानी रविवार को दिल्ली आ रहे हैं. पार्टी प्रमुख उपेंद्र यादव ने बीबीसी हिन्दी से इस दौरे की पुष्टि की है.
हालाँकि उपेंद्र यादव ने कहा कि भट्टराई इलाज के लिए आ रहे हैं. यादव ने ये भी कहा कि बाबूराम भट्टाराई दिल्ली में लंबे समय तक रहे हैं, इसलिए लोगों से मिलना जुलना कोई बड़ी बात नहीं है. भट्टराई दिल्ली में क़रीब एक हफ़्ते तक रहेंगे. बाबूराम भट्टराई दिल्ली तब आ रहे हैं जब नेपाल राजनीतिक संकट से जूझ रहा है.
प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने संसद को भंग कर दिया और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी दो खेमों में बँट गई है. एक खेमे का नेतृत्व पूर्व प्रधानमंत्री प्रचंड कर रहे हैं और दूसरे का वर्तमान पीएम केपी शर्मा ओली. प्रधानमंत्री ओली ने नेपाल में 30 अप्रैल और 10 मई को चुनाव कराने की घोषणा की है. ऐसे वक़्त में भट्टराई के दिल्ली दौरे को को लेकर कई तरह के क़यास लगाए जा रहे हैं.
संसद भंग करने ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं और इस पर एक हफ़्ते में फ़ैसला आ सकता है. नेपाल के वर्तमान राजनीतिक संकट में चीन और भारत की चर्चा भी ज़ोरों पर है.
हाल ही में प्रचंड ने नेपाल में पीएम ओली के संसद भंग करने के फ़ैसले को लेकर भारत, चीन और अमेरिका से मदद मांगी थी.
बाबूराम भट्टराई से पहले नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप ज्ञवाली भारत के दौरे पर आए थे. जनवरी महीने में पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दाहाल प्रचंड भी अपनी पत्नी सीता दाहाल की इलाज कराने मुंबई गए थे.
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लद्दाख में चीन के साथ समझौते पर विशेषज्ञ उठा रहे हैं सवाल
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पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा
सलाहकार बोर्ड (एनएसएबी) के अध्यक्ष और पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन ने
कहा है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पूरी तरह से सैनिकों के पीछे हटने के लिए एक पैकेज डील के बजाय सैनिकों को “चरणबद्ध” तरीक़े से पीछे करने पर सहमति का फ़ैसला भविष्य में चिंता की वजह बन
सकता है.
श्याम सरन का
कहना है कि उत्तरी पैंगोंग त्सो के फिंगर एरिया में बफर ज़ोन या “नो मेंस लैंड” बनाना, चाहे वो अस्थायी हो, इसका मतलब होगा कि सैनिक
अप्रैल 2020 के पहले की यथास्थिति में नहीं लौट सकेंगे. उन्होंने कहा कि भविष्य इस
बात पर निर्भर करेगा कि बीते सप्ताह शुरू हुए डिसएंगेजमेंट की बाक़ी प्रक्रिया
कितनी सुचारू रूप से चल पाती है.
श्याम सरन ने द हिंदू अख़बार को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “पहले हमें ऐसा आभास
मिला कि भारतीय साइड इस इंगेजमेंट को सेक्टर दर सेक्टर नहीं बल्कि पूरे एलएसी पर
कर रही है, जिसमें हॉट स्प्रिंग एरिया और देपसांग भी शामिल होगा.”
उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि ये यथास्थिति में वापस आना होगा, जिसकी हम लगातार मांग कर
रहे थे. ऐसा लगता है कि हम सीमा पर शांति बहाल करने पर ज़्यादा ध्यान दे रहे हैं,
बजाय ये कहने के कि हमें बीते साल अप्रैल के आस-पास की स्थिति में वापस लौटना
चाहिए.”
शनिवार को भारतीय और चीनी कोर कमांडरों ने बैठक कर हॉट स्प्रिंग्स और गोगरा बिंदु
जैसे क्षेत्रों में डिसएंगेजमेंट के अगले चरण पर चर्चा की, जहाँ चीनी सैनिकों ने
बीते साल बहुत बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किया है, हालांकि जुलाई
2020 में एक आंशिक डिसएंगेजमेंट (सैनिकों का पीछे हटना) हुआ था.
सीमा पर तनाव घटाने को लेकर हुए चीन के साथ समझौते की कई विशेषज्ञ आलोचना कर रहे हैं. जाने-माने सामरिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने भी ट्वीट कर कहा है कि चीन को पीछे हटना था और पिछले साल के अप्रैल महीने से पहले की यथास्थिति लाने की ज़िम्मेदारी उसी की थी लेकिन भारत अपने सैनिकों को पीछे क्यों कर रहा है?
पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और चीन में भारत के राजदूत रहे शिवशंकर मेनन ने भी इस इस समझौते को भारत के हक़ में नहीं बताया है. मेनन ने जाने-माने पत्रकार करन थापर को दिए इंटरव्यू में कहा है कि चीन को पीछे हटना था लेकिन भारत उन इलाक़ों से पीछे हट रहा है, जहाँ भारतीय सैनिक पहले से गश्त लगाते रहे हैं. मेनन ने कहा है कि चीन दो क़दम आगे बढ़ता है और एक क़दम पीछे हटता है और यही उसकी रणनीति रही है.
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2013 में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए एलएसी पर इन्फ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत से जुड़े सुझावों की एक रिपोर्ट तैयार करने वाले श्याम सरन के मुताबिक़, डिसएंगेजमेंट के पहले चरण में भारतीय सैनिकों का कैलाश रेंज हाइट्स, जिसमें रेचिन ला और रेजांग ला शामिल हैं, उसे ख़ाली करने का फ़ैसला तब मान्य होता जब सभी अन्य क्षेत्रों को ख़ाली करने का “समग्र समझौता” किया जाता, जिसका चीन भी पालन करता.
हालांकि, उन्होंने कहा कि 2017 में डोकलाम विवाद के बाद भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों को भूटान के क्षेत्र में एक सड़क बनाने से रोक दिया था, लेकिन चीनी सैनिक बाद में उसी क्षेत्र के अन्य इलाक़ों में सड़कों और इन्फ्रास्ट्रक्चर का निर्माण करने लगे.
वो कहते हैं, अगर कैलाश रेंज खाली करना एक बड़े समझौते का हिस्सा है, जहां हम यथास्थिति पर लौट जाएंगे और इस प्रक्रिया की आख़िर में पूरे एलएसी पर डिसएंगेजमेंट करवा पाते हैं तो हाँ, ये ठीक रहेगा. लेकिन अगर हम इन ऊंचाई वाली जगहों को ख़ाली कर देते हैं और बाद में हमें पता चलता है कि चीनी डिसएंगेजमेंट की हमारी उम्मीद उस तरह से पूरी नहीं हुई जो ज़मीन पर हुआ है, तो हाँ, हम कहेंगे कि ये हमारी तरफ़ से कोई होशियारी भरा क़दम नहीं था.
जब उनसे पूछा गया कि उन्हें क्या लगता है कि चीन डिसएंगेजमेंट के लिए राज़ी क्यों हुआ होगा, जबकि उसने क़रीब एक साल से एलएसी के पास के इलाक़े कब्ज़े में लिए हुए हैं, इस पर सरन ने कहा कि हो सकता है चीन ने “ग़लत अनुमान” लगा लिया हो कि उसके आक्रामक रवैये की“ कम क़ीमत या कम जोखिम” होगा.
लेकिन गलवान की घटना के बाद जिसमें 20 भारतीय सैनिक मारे गए थे और चीन ने भी अपने कम से कम चार सैनिक मारे जाने की बात कही है, चीनी“स्क्रिप्ट” उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रही और बल्कि ऐसा भी लग सकता है कि चीन को तनातनी से ज़्यादा कुछ हासिल नहीं हुआ, क्योंकि भारतीय सेना अपनी ज़मीन पर बनी रही.
इमेज स्रोत, WASEEM ANDRABI/HINDUSTAN TIMES VIA GETTY IMAGE
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