इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टी-20 सिरीज़ के लिए भारतीय टीम घोषित, विराट होंगे कप्तान
इस सिरीज़ में भारत और इंग्लैंड के बीच पांच टी-20 मैच खेले जाएंगे. पहला मैच 12 मार्च को अहमदाबाद में खेला जाएगा.
लाइव कवरेज
ब्रेकिंग न्यूज़, इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टी-20 सिरीज़ के लिए भारतीय टीम घोषित, विराट होंगे कप्तान
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इंग्लैंड के
ख़िलाफ़ खेले जाने वाले टी-20 सिरीज़ को लेकर टीम इंडिया ने अपनी टीम घोषित कर दी
है.
विराट कोहली इस
टीम के कप्तान होंगे. इस सिरीज़ में भारत और इंग्लैंड के बीच पांच मैच खेले जाएंगे.
पहला टी-20 मैच 12 मार्च कोे अहमदाबाद में खेला जाएगा. सभी पांच मैच अहमदाबैद में ही खेले जाने हैं.
पांचवा और आखिरी मैच 20 मार्च को खेला जाएगा.
भारत की टीम इस प्रकार से है – विराट कोहली (कप्तान), रोहित
शर्मा (उप कप्तान), केएल राहुल, शिखर धवन, श्रेयस अय्यर, सूर्यकुमार यादव, हार्दिक,
ऋषभ पंत (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), यजुवेंद्र चहल, वरुण चक्रवर्ती, अक्षर
पटेल, वाशिंगटन सुंदर, आर तेवतिया, टी नटराजन, भुवनेश्वर कुमार, दीपक चाहर, नवदीप, शार्दुल
ठाकुर.
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म्यांमार: सैन्य तख़्तापलट को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों में दो लोगों की मौत
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म्यांमार के मंडले शहर में सुरक्षाबलों के सैन्य सत्ता का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां
चलाने की ख़बरें मिल रही हैं.
शहर के आपात मेडिकल सुरक्षाकर्मियों का कहना है कि इसमें
कम से कम दो प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई है और क़रीब 20 लोग घायल हुए हैं.
प्रत्यक्षदर्शियों
का कहना है कि हड़ताल कर रहे शिपयार्ड में काम करने वाले कर्मचारियों की पुलिस से
झड़प हुई थी, जिसके बाद प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने पहले आंसू
गैस के गोले छोड़े और रबर की गोलियां चलाईं. बाद में सुरक्षाबलों ने
प्रदर्शनकारियों पर असली गोलियां चलाईं.
इस महीने
म्यांमार में हुए तख़्तापलट के बाद ये पहली बार है जब विरोध प्रदर्शनों में बड़ी
संख्या में लोग घायल हुए हैं.
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इमेज कैप्शन, 20 फरवरी को ली गई इस तस्वीर में प्रदर्शनकारी खाली कारतूस दिखा रहे हैं. उनका कहना है कि सुरक्षाबलों ने इनका इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए किया है.
इससे पहले यंगून में विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक युवा महिला म्या त्वे त्वे कांग की मौत हो गई थी. उन्हें सर पर गंभीर चोट आई थी.
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि उन्हें असली गोली लगी थी जबकि पुलिस का कहना है कि उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर ताकत का इस्तेमाल नहीं किया है.
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ब्रिटेन में मौजूद म्यांमार की नेशनल लीग फ़ॉर डेमोक्रेसी पार्टी की नेता आंग
सान सू ची की प्रवक्ता डॉक्टर विन नियांग ने बीबीसी से कहा है कि म्यांमार की सेना
को सत्ता से निकालने के लिए अंततराष्ट्रीय समुदाय को दबाव बनाना चाहिए.
उन्होंने कहा, “हमारे देश की जनता अब सेना के तख्तापलट से परेशान
हो चुकी है. उन्हें अब तानाशाही नहीं चाहिए, वो इस तरह के शासन को स्वीकार नहीं कर
सकते. इसलिए लाखों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं और विरोध प्रदर्शन
कर रहे हैं. सेना फिर से गणतांत्रिक प्रक्रिया का पालन करते हुए लोगों के नेताओं को
सरकार बनाने दे इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को उन पर दबाव डालना होगा.”
2021 की जनगणना पूरी तरह से डिजिटाइज होगी - नीति आयोग
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगली जनगणना की पहली
और पूरी तरह से डिजिटाइज़्ड जनगणना होने की बात कही है.
नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने इस संदर्भ में कहा
है कि भारत दूसरे देशों के लिए एक उदाहरण पेश करेगा. 2021 की जनगणना पूरी तरह से डिजिटाइज़्ड होगी और एक डिजिटल सिस्टम तैयार करेगी.
देश में हर 10 साल पर जनगणना होती है. आख़िरी जनगणना साल
2011 में हुई थी.
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महाराष्ट्र से कर्नाटक आने वालों के लिए कोविड-19 की निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य
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इमरान कुरैशी
बीबीसी हिंदी के लिए
कर्नाटक सरकार ने महाराष्ट्र से
प्रदेश में आने वाले यात्रियों के लिए कोरोना निगेटिव रिपोर्ट अनिवार्य कर दिया
है. महाराष्ट्र से पहले केरल से आने वाले यात्रियों के लिए कर्नाटक ने यही नियम लागू किया
था.
महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के बढ़ते हुए मामलों के मद्देनज़र ये फ़ैसला लिया गया है.
महाराष्ट्र से आने वाले
सभी यात्रियों को कर्नाटक में प्रवेश से 72 घंटे के अंदर की कोविड-19 की निगेटिव
आरटी-पीसीआर रिपोर्ट दिखानी होगी.
इन निगेटिव रिपोर्ट्स की
पड़ताल हवाई यात्रा के दौरान एयरलाइन स्टाफ़, बस यात्रा के दौरान कंडक्टर और ट्रेन
यात्रा के दौरान टीटीई करेंगे. इसके अलावा अगर कोई सड़क यात्रा करके राज्य के अंदर
प्रवेश कर रहा है तो उसे अपनी निगेटिव रिपोर्ट टोल पर मौजूद कर्मचारी को दिखानी
होगी.
महाराष्ट्र के स्वास्थ्य
एवम परिवार कल्याण मंत्रालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव जावेद अख्तर ने इस बारे में एक
सर्कुलर जारी किया है. सर्कुलर के मुताबिक़ जो लोग महाराष्ट्र से पिछले दो हफ्तों
के दौरान कॉलेज होस्टल, अस्पताल, नर्सिंग होम, होटल और लॉज में आए हैं, उन्हें ‘अनिवार्य तौर परआरटी-पीसीआर
टेस्ट कराना होगा.’
यह सर्कुलर कोविड-19 को
लेकर गठित टेक्निकल एडवायज़री कमिटी की अनुशंसा के आधार पर जारी की गई है. ‘पूरे महाराष्ट्र में कोरोना
के बढ़ते मामलों’ को देखते हुए कमिटी ने यह अनुशंसा की है.
ब्रेकिंग न्यूज़, टूलकिट मामला: दिशा रवि की ज़मानत याचिका पर कोर्ट ने सुरक्षित रखा फ़ैसला
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दिल्ली के पटियाला हाऊस कोर्ट ने आज
बेंगलुरू से गिरफ्तार की गई पर्यावरण कार्यकर्ता दिशा रवि की जमानत याचिका पर
फ़ैसला सुरक्षित रख लिया है.
कोर्ट इस मामले में मंगलवार को यानी 23
फरवरी को आदेश देगी.
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सुनवाई के दौरान एडिशनल सेशन जज जस्टिस धर्मेंद्र राणा ने अभियोजन पक्ष से दिशा रवि पर लगाए गए आरोपों और उन्हें साबित करने के लिए ज़रूरी सबूतों के बारे में सवाल किए.
अभियोजन पक्ष की तरफ से एडिशिनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कोर्ट से कहा कि जांच अभी प्रारंभिक स्टेज पर है और इस मामले में दिशा रवि समेत अन्य लोगों से पूछताछ बाक़ी है इसलिए दिशा की ज़मानत याचिका को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.
उनका कहना था कि दिशा राजू ने माना था कि उन्होंने ही वो व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया था जिसके ज़रिए टूलकिट को बनाने को लेकर बातचीत हुई थी.
उनका कहना था कि "पुलिस को शक़ है कि दिशा सबूत नष्ट कर सकती हैं या फिर उनके साथ छेड़छाड़ कर सकती हैं. उन्होंने कहा कि दिशा राजू ने ही पर्यावरण कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग से संपर्क किया था."
उन्होंने कहा कि ये "योजना दिशा और निकिता ने मिल कर बनाई थी."
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दिशा रवि के वकील ने क्या कहा
दिशा के वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने कहा कि दिशा ने ग्रेटा थनबर्ग से बात की थी और एक ट्वीट कर किसान आंदोलन को समर्थन देने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने खालिस्तानी आंदोलन की बात नहीं की थी. क्या ये कोई समस्या है?
उन्होंने कहा, "पहले ही दिशा को पांच दिन की पुलिस रिमांड पर रखा गया था. फिर भी अब पुलिस का कहना है कि दिशा के पास और डिवाइसेस हो सकते हैं, ये चौंकाने वाला बयान है."
उन्होंने कहा कि "शांतनु जिन पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें कुछ दिनों तक हिरासत में नहीं लिया जा सकता क्योंकि उनके पास अंतरिम जमानत है, न तो निकिता को हिरासत में लिया जा सकता है क्योंकि ऐसा करने के लिए ऑर्डर नहीं हैं तो दिशा को ही अकेले गिरफ्तार क्यों किया गया है."
"अगर दो लोग बिना गिरफ्तार हुए जांच में सहयोग कर सकते हैं तो दिशा भी कर सकती हैं. जांच के दौरान वो दिल्ली में रहेंगी और जांच टीम के साथ पूरा सहयोग करेंगी."
अग्रवाल ने कहा कि "पुलिस ने जिस टूलकिट की बात की है न तो उसमें हिंसा की बात की गई है और न ही झंडा फहराने को लेकर कुछ कहा गया है. टूलकिट में केवल मार्च करने की बात की गई है और इसके लिए खुद दिल्ली पुलिस ने इजाज़त दी थी. दिशा किसी भी तरह से रैली के आयोजन में शामिल नहीं थीं. ऐसे में जो हुआ उसके लिए दिशा को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता."
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पेट्रोल-डीज़ल की बढ़ती क़ीमत को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर
पेट्रोल-डीज़ल के लगातार
बढ़ते दाम को लेकर सरकार ने कहा है कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की बढ़ती
क़ीमतों की वजह से है.
वित्त मंत्री निर्मला
सीतारमण ने शनिवार को चेन्नई में कहा, “तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक (OPEC) ने उत्पादन का जो अनुमान लगाया था वह भी नीचे आने की
संभावना है जो फिर से चिंता बढ़ाने वाला है. तेल के दाम पर सरकार का नियंत्रण नहीं
है, इसे तकनीकी तौर पर मुक्त कर दिया गया है. तेल कंपनियाँ कच्चा तेल आयात करती
है, रिफ़ाइन करती हैं और बेचती हैं.”
फिलहाल देश के कई शहरों में पेट्रोल की क़ीमत 100 रुपये के करीब पहुँच गई है.
उन्होंने आगे कहा, “यह एक गंभीर मुद्दा है जिसपर क़ीमतें कम करने के अलावा कोई
भी जवाब किसी को संतुष्ट नहीं कर सकता. केंद्र और राज्य सरकार दोनों को ही खुदरा
तेल की क़ीमतों को उचित स्तर पर लाने के लिए बात करनी चाहिए.”
वहीं बीजेपी नेता सुशील मोदी ने कहा है कि सरकार खाड़ी के देशों से बात कर रही है, तेल का उत्पादन बढ़ेगा तो फिर से तेल की कीमतों में गिरावट होगी.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी ने इससे पहले बुधवार को कहा था कि अगर पिछली सरकारों ने कच्चे तेल पर देश की
निर्भरता कम की होती तो देश को महंगे तेल का बोझ नहीं सहना पड़ता.
उन्होंने तमिलनाडु में एक
प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के उद्घाटन के मौके़ पर कहा था, “क्या हमें आयात पर
इतना निर्भर होना चाहिए? मैं किसी की आलोचना नहीं
करना चाहता लेकिन यह ज़रूर कहना चाहता हूँ कि यदि हमने इस विषय पर ध्यान दिया होता
तो हमारे मध्यम वर्ग को बोझ नहीं उठाना पड़ता. स्वच्छ और हरित ऊर्जा के स्रोतों की
दिशा में काम करना और ऊर्जा निर्भरता को कम करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है.”
लेकिन तेल की क़ीमतों को लेकर विपक्ष सरकार पर हमलावर है. शनिवार को दिल्ली में युवा कांग्रेस ने पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों में बढ़ोतरी के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन भी किया.
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने ट्वीट कर चुटकी ली है. उन्होंने कहा कि, “भाजपा सरकार को सप्ताह के उस दिन का नाम ‘अच्छा दिन’ कर देना चाहिए जिस दिन डीजल-पेट्रोल के दामों में बढ़ोत्तरी ना हो. क्योंकि महंगाई की मार के चलते बाक़ी दिन तो आमजनों के लिए ‘महंगे दिन’ हैं.”
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वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दामों पर कहा है, “जिस समय पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाता है, उसी समय महंगाई बढ़ जाती है. महंगाई बढ़ाकर इन्होंने पूरे मध्यम वर्ग, गरीब, किसान, नौजवान सबके ऊपर भार डाला है. बेजीपी ने इतनी महंगाई कर दी कि गरीब ये सोच रहा है कि हम बचाएँ क्या...खाएं क्या? और वो तर्क दे रहे हैं कि इससे देश बनेगा.”
वहीं आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढ़ा ने भी चुटली लेते हुए ट्वीट
किया है, “अब शादी ब्याह में शगुन देने के लिए 101 रुपये के छुट्टे न हो तो
चिंता न करें, मोदी सरकार ने पेट्रोल ही ₹101 का कर दिया है. सीधा शगुन की जगह एक लीटर पेट्रोल की बोतल
दे सकते हैं.”
समाचार एजेंसी
एएनआई से बातचीत में उन्होंने कहा है, “भारतीय जनता पार्टी जिस प्रकार से इस देश
को लूट रही है, जिस प्रकार से गरीब लोगों की कमर तोड़ रही
है और लोगों की जेब पर डाका डाल रही है, मुझे नहीं लगता
है इस देश के इतिहास में इस तरह से किसी भी सरकार ने किया होगा.”
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अमेरिका फिर से बना पेरिस जलवायु समझौते का हिस्सा
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अमेरिका अब आधिकारिक तौर
पर पेरिस जलवायु समझौते में फिर से शामिल हो गया है.
जलवायु को लेकर अमेरिकी
राष्ट्रपति के विशेष दूत जॉन कैरी ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अमेरिका ‘विनम्रता और एक उद्धेश्य’ के साथ फिर
से पेरिस जलवायु समझौते का हिस्सा बन गया है.
अमेरिका ने इस समझौते के तहत अगले
तीन दशकों में कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कटौती करने की योजना बनाई है.
वैज्ञानिकों और विदेशी
राजनयिकों ने बाइडन सरकार के इस कदम का स्वागत किया है. जो बाइडन ने राष्ट्रपति के
तौर पर पद ग्रहण करने के बाद पहले दिन ही यह फ़ैसला लिया था. उसके 30 दिन के बाद अब यह आधिकारिक हो गया है.
2015 में तैयार हुए इस
समझौते पर करीब 200 देशों ने हस्ताक्षर किया था. अमेरिका एकमात्र ऐसा देश था जो इस पर हस्ताक्षर करने के बाद इससे अलग हो गया था.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
ने इस समझौते से अलग होने का फैसला लिया था. उन्होंने कहा था इस समझौते की वजह से
अमेरिका को बड़ी कीमत चुकानी पड़ेगी.
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सऊदी अरब अपनी मिलिट्री इंडस्ट्री पर निवेश बढ़ाएगा
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सऊदी अरब अगले दस सालों में अपने सैन्य उद्योग पर 20 अरब
डॉलर से अधिक का निवेश करेगा.
सऊदी अरब की सैन्य उद्योग पर निगरानी रखने वाले
नियामक ने कहा है घरेलू सैन्य उद्योग पर निवेश करने की आक्रामक योजना के तहत देश आने
वाले सालों में इस क्षेत्र में बढ़ाएगा.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सऊदी अरब अब देश
के भीतर ज़्यादा हथियार और सैन्य सिस्टम बनाना चाहता है जिसके लिए वो साल 2030 तक अपने
सैन्य बजट को 50 फ़ीसद तक बढ़ाना चाहता है.
जनरल ऑथोरिटी फ़ॉर मिलिट्री इंडस्ट्रीज़ के गवर्नर
अहमद बिन अब्दुलाज़ीज़ अल-ओहाली ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “सरकार ने एक योजना पेश की है जिसके तहत देश के
सैन्य उद्योग में 10 अरब डॉलर से अधिक निवेश करेगी.”
उन्होंने ये भी कहा कि साल
2030 तक सेना के रिसर्च और डेवलपमेंट का खर्च 0.2 फ़िसद से बढ़ा कर चार फ़ीसद तक
किया जाएगा.
पाकिस्तान को श्रीलंका इसलिए देता है इतनी तवज्जो
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान 23 फ़रवरी को श्रीलंका के दौरे पर जा रहे हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पीएम ख़ान का दौरा श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के आमंत्रण पर होने जा रहा है.
इस दौरे में इमरान ख़ान श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाभाया राजपक्षे और प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे. इसके अलावा भी कई उच्चस्तरीय बैठक होनी है. पाकिस्तानी पीएम बिज़नेस और निवेश फोरम की बैठक में भी शामिल होंगे.
साथ ही क्रिकेट को लेकर भी कुछ समझौते हो सकते हैं. दोनों मुल्कों के बीच कई एमओयू पर भी हस्ताक्षर होंगे. प्रधानमंत्री के तौर पर इमरान ख़ान पहली बार श्रीलंका जा रहे हैं. इस साल का यह उनका पहला विदेशी दौरा है.
इमरान ख़ान के साथ एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा. इस दौरे में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी, इमरान ख़ान के सलाहकार अब्दुल रज़ाक दाऊद और विदेश सचिव सुहैल महमूद के अलावा कई सीनियर अधिकारी रहेंगे.
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श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने शनिवार को ट्वीट कर कहा है कि इमरान ख़ान का श्रीलंका में स्वागत है. उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा है, ''श्रीलंका अगले हफ़्ते इमरान ख़ान के स्वागत के लिए तैयार है. इस दौरे से दोनों देशों के संबंध और मज़बूत होंगे.''
पाकिस्तान को श्रीलंका इतनी तवज्जो क्यों देता है?
1950 के दशक में पाकिस्तान और श्रीलंका दोनों अमेरिका के नेतृत्व वाले कम्युनिस्ट विरोधी खेमे में थे. जब श्रीलंका ने प्रधानमंत्री श्रीमाओ भंडारनायके के काल में सोवियत संघ और चीन के पक्ष में राजनीतिक रंग बदला तब भी दोनों देश क़रीब रहे.
यहाँ तक कि श्रीमाओ भंडारनायके ने बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तानी एयरक्राफ़्ट को कोलंबो में 174 बार ईंधन भरने की अनुमति दी थी जबकि भारत ने पाकिस्तानी विमानों को अपने हवाई क्षेत्र में उड़ान भरने पर पाबंदी लगा रखी थी. श्रीलंका ने भारत की आपत्ति को भी अनसुना कर दिया था.
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इसके बाद 1990 के दशक में जब पश्चिम के देश और भारत ने तमिल विद्रोहियों से लड़ाई में हथियार की आपूर्ति रोकी तो पाकिस्तान सामने आया और उसने हथियार भेजे. तमिलों के ख़िलाफ़ युद्ध में पाकिस्तान की सरकार ने श्रीलंका की खुलकर मदद की थी.
श्रीलंकाई अख़बार डेली स्टार के अनुसार पाकिस्तानी पायलटों ने श्रीलंका की वायुसेना को ट्रेनिंग भी दी थी. तमिलों के ख़िलाफ़ युद्ध अपराध को लेकर भी पाकिस्तान ने हमेशा श्रीलंका की मदद की. 2000 से 2009 के बीच पाकिस्तान और श्रीलंका काफ़ी क़रीब रहे.
तब श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों और श्रीलंका की सेना के बीच युद्ध चल रहा था. 2000 में जाफना में जब श्रीलंका के सैनिक फँसे थे तो पाकिस्तान ने उन्हें एयरलिफ़्ट किया था. 2006 में एलटीटीई ने कोलंबो में पाकिस्तानी उच्चायुक्त बशीर वली मोहम्मद पर हमला भी किया था. कहा जाता है कि वली ही श्रीलंका में एलटीटीई के ख़िलाफ़ पाकिस्तान को आगे करने में लगे थे.
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क्या भारत चीनी इंजीनियरों को वीज़ा नहीं दे रहा?
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शुक्रवार को चीनी विदेश मंत्रालय की प्रेस कॉन्फ़्रेंस में ब्लूमबर्ग ने मंत्रालय की प्रवक्ता हुअ चुनयिंग से पूछा कि भारत चीन के इंजीनियरों को वीज़ा देने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है या फिर इसकी प्रक्रिया बहुत धीमी है. क्या चीन ने भारत से स्किल्ड वर्कर्स के आने पर शिकंजा कसा है?
इस सवाल के जवाब में चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ने कहा, ''भारत के वीज़ा के लिए चीनी नागरिकों के आवेदन के बारे में मुझे नहीं पता है. मैं आपको सलाह दूंगी कि इसकी जानकारी भारत से ही मांगनी चाहिए. अब भी वैश्विक कोरोना महामारी की हालत जटिल है. हम अपने यहाँ बाहर के लोगों को कोरोना से जुड़ी गाइडलाइन्स के अनुसार ही आने दे रहे हैं. हमारी तरफ़ से यह अस्थायी प्रबंध है ताकि कोरोना पर क़ाबू पाया जा सके.''
सद्दाम हुसैन की बेटी रग़द हुसैन बचपन में शादी और पिता से संबंधों पर खुलकर बोलीं
नासा का पर्सिवियरेंस रोवर मंगल की सतह पर उतरा, जानिए इसके मायने
वीडियो कैप्शन, मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बीबीसी से कहा, हम वापसी कर रहे हैं
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अमेरिका के नए
विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने बीबीसी से कहा है कि “अमेरिका इज़ बैक” यानी अमेरिका वापसी
कर रहा है और वो महामारी,
जलवायु परिवर्तन और ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं समेत कई मसलों को सुलझाने में
मदद के लिए पूरी तरह लगा हुआ है.
ये डोनाल्ड ट्रंप
की “अमेरिका फ़र्स्ट” की नीति से अलग
है.
अपने पहले
अंतरराष्ट्रीय इंटरव्यू में ब्लिंकन ने कोविड -19 के ख़िलाफ़ दुनिया भर में टीकाकरण
के महत्व पर ज़ोर दिया.
उन्होंने बताया कि अमेरिका कोवैक्स वैक्सीनेशन स्कीम के
लिए 4 अरब डॉलर दे रहा है, जिसका एक साल से कम वक़्त में 190 देशों के लोगों के
लिए दो अरब से ज़्यादा डोज़ डिलिवर करने की मक़सद है.
उन्होंने कोरोना
वायरस की उत्पत्ति को लेकर पारदर्शिता में कमी बरतने के लिए चीन की आलोचना भी की. उन्होंने
आरोप लगाया कि चीन कोरोना वायरस की उत्पत्ति पर रोशनी डालने वाली जानकारी साझा
करने में नाकाम रहा.
2021 की शुरुआत में विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक टीम चार
हफ़्ते के लिए फैक्ट-फाइंडिंग मिशन पर चीन गई थी. हालांकि डब्ल्यूएचओ की टीम के दो
विशेषज्ञों ने कहा कि चीन ने उन्हें पूरा डेटा मुहैया कराने से इनकार कर दिया.
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एंटनी ब्लिंकन जी7 के सबसे अमीर औद्योगिक देशों के नेताओं के वर्चुअल सेशन में बोल रहे थे.
ईरान को लेकर ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगी ईरान पर “एक बार फिर एकमत हैं.”
उन्होंने कहा, “राष्ट्रपति बाइडन ने स्पष्ट किया है कि अगर ईरान परमाणु समझौते के तहत अपने दायित्वों पर लौटता है, तो अमेरिका वही करेगा.”
उन्होंने कहा कि फिर अमेरिका दूसरे देशों के साथ मिलकर क्षेत्र में ईरान के प्रभाव और उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम जैसे अन्य मसलों पर ईरान से निपटेगा.
बीबीसी की याल्दा हकीम ने जब उनसे उन आरोपों के बारे में पूछा जिनमें कहा जाता है कि अमेरिका ने ईरान को रियायतें दी थीं, तो उन्होंने कहा कि पिछली अप्रोच नाकाम रही थी.
उन्होंने कहा, “हाल के सालों में हमारी नीति ईरान पर तथाकथित ‘अत्याधिक दबाव’ बनाने की रही है, जिससे कोई नतीजा नहीं निकला बल्कि समस्या और गंभीर हो गई. ईरान अब परमाणु हथियार के लिए पर्याप्त सामग्री का उत्पादन करने के ज़्यादा नज़दीक आ गया है.”
मानवाधिकारों और प्रिंसेज़ लतीफा पर विदेश मंत्री एंटोनी ब्लिंकन ने कहा कि अमेरिका स्थिति पर क़रीबी नज़र बनाए हुए है. उन्होंने कहा, “हम अपने विरोधियों, प्रतिद्वंदियों और सहयोगियों को लेकर एक सोच रखते हैं, हम मानवाधिकारों को गंभीरता से लेते हैं और राष्ट्रपति ने इसे हमारी विदेश नीति के केंद्र में रखा है और देशों को हमसे इसी पर चलने की उम्मीद करनी चाहिए.”
इमेज स्रोत, MARK MAKELA
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