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टूलकिट मामला: दिशा रवि को पुलिस कस्टडी में भेजने को लेकर उठ रहे हैं सवाल
चुनावी भाषण के बीच स्टेज पर गिर पड़े विजय रुपाणी
गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी आज एक कार्यक्रम के दौरान स्टेज पर भाषण
देते हुए अचानक गिर पड़े.
वडोदरा के निज़ामपुरा में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए प्रचार करने पहुंचे
रुपाणी की तबीयत भाषण के बीच अचानक बिगड़ गई. भाषण के बीच उनकी आवाज़ धीमी हो गई और वो गश खा
कर गिर पड़े.
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इसके बाद रैली में रुपाणी के कार्यक्रम को तुरंत रद्द कर उन्हें अहमदाबाद के
एक अस्पताल में लाया गया है.
माना जा रहा है कि चुनाव प्रचार की व्यस्तता और लो ब्लड प्रेशर के कारण उन्हें
चक्कर आ गया था.
कुछ देर पहले गुजरात भाजपा के अध्यक्ष सीआर पाटिल ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि विजय
रूपाणी अब स्वस्थ हैं.
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उत्तराखंड ग्लेशियर हादसा: 12 और शव बरामद, कुल मौतों का आंकड़ा 50 हुआ
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उत्तराखंड
के चमोली में ग्लेशियर हादसे के एक सप्ताह बाद भी शवों का मिलना जारी है. रविवार
को जारी बचाव कार्य में 12 और शव मिले हैं जिसके बाद मरने वालों का आंकड़ा 50 हो
गया है.
तपोवन टनल
के कीचड़ से पांच शव मिले हैं जबकि रैणी गांव से छह और रुद्रप्रयाग से एक शव बरामद
हुआ है.
7 फ़रवरी
को ग्लेशियर टूटने के बाद ऋषि गंगा नदी में बाढ़ आ गई थी जिसके कारण ऋषि गंगा
हाइडल पावर प्रोजेक्ट पूरी तरह तबाह हो गया था. इस हादसे के बाद अभी भी 150 से
अधिक लोगों का कुछ अता पता नहीं है.
शवों को
तपोवन में बनाए गए अस्थाई मुर्दाघर में रखा गया है. पीटीआई के अनुसार, चमोली की
ज़िलाधिकारी स्वाति भदौरिया ने कहा है कि अगर कोई जीवित बचा शख़्स मिलता है तो
उसको स्वास्थ्य सहायता मुहैया कराने के लिए एक हेलिकॉप्टर तैयार है.
वीगर मुसलमान: चीन कर रहा है जनसंहार, ब्रिटेन की रिपोर्ट का दावा
मुस्लिम लड़की-हिंदू लड़के की वो प्रेम कहानी जिन्हें एड्स भी नहीं रोक पाया
इबोला से साल 2016 के बाद गिनी में पहली मौत
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गिनी के
स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि देश में इबोला के कारण कम से कम तीन लोगों की
मौत हुई है जबकि पांच अन्य लोग टेस्ट में पॉज़िटिव पाए गए हैं.
ये सभी लोग
एक अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे जिसके बाद इन्हें दस्त, उल्टी और लगातार ख़ून
बहने जैसी दिक़्क़तें सामने आई थीं.
पश्चिम
अफ़्रीका इबोला महामारी के कारण 2013 और 2016 के बीच 11,000 से अधिक लोग मारे गए
थे. इसकी शुरुआत गिनी से हुई थी.
इस महामारी के बाद
कई वैक्सीन बनाई गई थीं और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कॉन्गो में महामारी के दौरान
इसका इस्तेमाल हुआ.
दिनभर
पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान विपक्षी नेताओं से बात क्यों नहीं करते
‘...ये हमारी पार्टी हो रही है’ कहकर वायरल होने वाली लड़की कौन है?
अश्विन की फिरकी में फंसी इंग्लैंड, भारत ने 249 रनों की बढ़त बनाई
उत्तराखंड: तपोवन टनल से मिले 8 और शव, अब तक 46 शव निकाले गए
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समाचार एजेंसी पीटीआई ने उत्तराखंड में चमोली के ज़िला प्रशासन के हवाले से ख़बर दी है कि रविवार को तपोवन टनल के पास से 8 और शव
बरामद हुए हैं, जिन्हें मिलाकर मरने वालों की कुल संख्या अब 46 हो गई है.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 12 शव बरामद
होने की बात भी कही गई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की
है.
उत्तरखंड के डीजीपी अशोक कुमार ने
दोपहर क़रीब दो बजे बताया था कि ‘तपोवन टनल में बचाव कार्य लगातार
चल रहा है.’
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रविवार सुबह ही चमोली की ज़िलाधिकारी स्वाति भदौरिया और पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने बैराज साइड का निरीक्षण किया था.
उनके साथ एसडीआरएफ़ और एनडीआरएफ़ की टीमें भी थीं.
ज़िलाधिकारी ने रविवार को अपने दौरे के बाद कहा कि ‘तलाशी अभियान बहुत तेज़ी से चल रहा है. प्रशासन ने बैकअप में सात एंबुलेंस, पोस्टमार्टम करने वाली टीमें और एक हेलीकॉप्टर रखा है. अगर कोई व्यक्ति ज़िंदा मिलता है, तो उसे तुरंत उपचार देने की भी पूरी व्यवस्था की गई है.’
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आपदा के बाद से अब तक 160 से ज़्यादा लोग लापता हैं.
रविवार सुबह बचाव कार्य में लगीं टीमों को दो शव मिले थे. इनके बारे में स्थानीय प्रशासन ने बताया कि दोनों उत्तराखंड के निवासी थे.
शवों की शिनाख्त अनिल सिंह और आलम सिंह के रूप में हुई. आलम सीनियर इलेक्ट्रीशियन थे, जबकि अनिल वेल्डिंग का काम करते थे.
डीएम स्वाति भदौरिया के अनुसार, निकाले गये शवों में से अब तक 15 शवों की पहचान हो पायी है.
विनिवेश के लक्ष्यों को हासिल करने में क्यों नाकाम हो रही है सरकार
टोक्यो ओलंपिक के लिए दो भारतीय जवानों ने क्वॉलिफ़ाई किया
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इमेज कैप्शन, संदीप कुमार
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ‘16 जाट रेजिमेंट’ के नायब सूबेदार संदीप कुमार और ‘18 ग्रेनेडियर्स’ के ग्रेनेडियर राहुल ने साल 2021 के टोक्यो ओलंपिक खेलों
के लिए क्वॉलीफ़ाई कर लिया है.
झारखंड की राजधानी रांची में हुई 8वीं
नेशनल रेस वॉकिंग चैंपियनशिप में इन दोनों खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था.
रेस वॉकिंग इवेंट में संदीप कुमार
ने गोल्ड मेडल जीतने के अलावा, एक नया नेशनल रिकॉर्ड भी स्थापित किया है.
मोदी सरकार ने जो बफ़र ज़ोन बनाया, वो चीन के सामने सरेंडर करने जैसा: पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी
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भारत के पूर्व रक्षा मंत्री और
कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने कहा है कि ‘सीमा से जवानों को पीछे हटाना आत्म-समर्पण करने जैसा है.’
एंटनी ने रविवार को एक प्रेस
वार्ता करके भारत-चीन सीमा विवाद समेत कई मोर्चों पर मोदी सरकार को घेरने की कोशिश
की.
उन्होंने कहा कि ‘मोदी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा पर ध्यान नहीं दे रही
है.’
उन्होंने कहा, “यह पहली बार है, जब देश को एक साथ दो मोर्चों पर युद्ध जैसी स्थिति का सामना
करना पड़ रहा है. एक तरफ़ पाकिस्तान है, तो दूसरी तरफ़ विस्तारवादी चीन एक नई
मुश्किल बन गया है. चीन अरुणाचल प्रदेश से लेकर लद्दाख तक सैन्य निर्माण कर रहा
है. पिछले साल की तुलना में इस साल रक्षा बजट भी कम है. यह सेना के साथ धोखा है.
मोदी सरकार ने देश की सेना का मनोबल गिराया है.”
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एंटनी ने कहा कि ‘हमारी सेना वास्तविक नियंत्रण रेखा पर फ़िंगर-8 तक पेट्रोलिंग किया करती थी और चीन की सेना फ़िंगर-4 तक पेट्रोलिंग करती थी. फ़िंगर 4 से फ़िंगर 8 तक का इलाक़ा विवादित था. अब चीन की सेना फ़िंगर-8 के इलाक़े तक आ सकती है. भारत के पास फ़िंगर-4 पर भी पोस्ट है. लेकिन भारतीय सेना फ़िंगर-3 तक ही पेट्रोलिंग कर पायेगी. यह पूरी तरह से सरेंडर है. हमने अपनी पारंपरिक ज़मीन खो दी है. हमने अपने हित खो दिये हैं.’
एंटनी ने कहा, “डिसएंगेजमेंट और बफ़र ज़ोन का फ़ैसला चीन के सामने हथियार डालने जैसा है.”
एंटनी ने मोदी सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘गलवान घाटी, पैंगोंग त्सो और हॉट स्प्रिंग में यथास्थिति बहाल करने के लिए मोदी सरकार ने क्या क़दम उठाये है?’
कांग्रेस पार्टी की इस प्रेस वार्ता में पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सवाल किया कि “भारतीय क्षेत्र में बफ़र ज़ोन क्यों बनाया जा रहा है? भारतीय इतिहास में किसी भी सरकार के कार्यकाल में ऐसा नहीं हुआ. अप्रैल 2020 से पहले की यथास्थिति कब बहाल होगी? क्या हमने चीन की शर्तों पर विघटन किया है? किन शर्तों पर विघटन किया गया और बफ़र ज़ोन बनाने का निर्णय लिया है?”
कोरोना की वजह से न्यूज़ीलैंड के सबसे बड़े शहर में लॉकडाउन
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कोरोना वायरस के कारण न्यूज़ीलैंड के सबसे बड़े शहर ऑकलैंड
में लॉकडाउन लगाना पड़ा है.
न्य़ूज़ीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डेंट ने कोरोना वायरस के तीन नए मामलों का पता चलते ही पूरे ऑकलैंड शहर में तीन दिन के लॉकडाउन के आदेश दिए हैं.
न्यूज़ीलैंड की इस बात के लिए सराहना होती रही है कि उसने कोरोना वायरस से निपटने के लिए बेहतर रणनीति से काम किया है और देश में कई महीनों तक कोरोना वायरस का कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं होने दिया.
बीते साल कोरोना महामारी की शुरुआत में ही न्यूज़ीलैंड ने अपनी तमाम सीमाओं को सील कर दिया था.
लगभग पचास लाख की आबादी वाले इस देश में कोरोना संक्रमण के लगभग 2300 मामले सामने आए और 25 लोगों की मौत हुई.
महाराजा रणजीत सिंह और एक मुस्लिम लड़की की प्रेम कहानी
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कांग्रेस नेता
राहुल गाँधी ने असम के सिवसागर में रैली के दौरान कहा कि बीजेपी और आरएसएस असम को
विभाजित करने की कोशिश कर रहे हैं.
उन्होंने कहा,“बीजेपी और आरएसएस जो कर रहे हैं उससे अमित शाह नहीं बल्कि असम और बाकी भारत
प्रभावित होगा.”
राहुल गाँधी ने कहा, “मैं और कांग्रेस पार्टी के सभी
कार्यकर्ता असम संधि के सिद्धातों की रक्षा करेंगे. हम इससे एक इंच भी पीछे नहीं
हटेंगे.”
राहुल ने बीजेपी पर तंज करते हुए कहा, “हम दो हमारे दो. असम के लिए और दो और सब कुछ लूट लो.”
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हिंसा भड़काने के आरोपों से ट्रंप बरी हुए तो बाइडन ने क्या कहा?
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इमेज कैप्शन, जो बाइडन
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट
ने छह जनवरी को कैपिटल हिल में हुई हिंसा भड़काने के आरोपों से बरी कर दिया है.
ट्रंप पर महाभियोग का मुक़दमा चल रहा था लेकिन सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी ने उन्हें
दोषी क़रार दिए जाने से बचा लिया.
इस पूरे मामले पर व्हाइट हाउस ने एक आधिकारिक बयान जारी किया है.
बयान में
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने विचार रखे हैं. बयान में उन्होंने जो कुछ कहा
है, उसे पढ़िए-
क़रीब दो हफ़्ते पहले की
बात है जब मैंने और मेरी पत्नी जिल ने छह जनवरी को दंगों के दौरान कैपिटल हिल को
बचाते हुए अपनी जान गँवाने वाले पुलिस अधिकारी ब्रियन सिकनिक को श्रद्धांजलि दी
थी.
आज 57 सीनेटर्स (जिनमें रिपब्लिकन पार्टी के सात सदस्य भी शामिल हैं) ने पूर्व
राष्ट्रपति ट्रंप को हमारे लोकतंत्र पर भयानक हमले के लिए दोषी माना है.
इससे पहले
हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव्स में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों पार्टियों के सांसदों
ने उन पर महाभियोग चलाने के लिए वोट किया था.
हालाँकि आख़िरी वोट के बाद ट्रंप को दोषी नहीं माना गया लेकिन उन पर जो आरोप लगे, उनकी गंभीरता से कोई इनकार नहीं कर
सकता.
जिन सांसदों ने ट्रंप को दोषी ठहराए जाने का विरोध किया, जैसे कि सीनेट के
अल्पसंख्यक नेता मैक कॉनेल ने भी माना कि पूर्व राष्ट्रपति ने ‘अपने कर्तव्यों को बुरी तरह नज़रअंदाज़’ किया और वो कैपिटल हिल में हुई हिंसा भड़काने के लिए ‘नैतिक और राजनीति रूप से
ज़िम्मेदार’ हैं.
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आज रात मैं उन लोगों के बारे में सोच रहा हूँ जो उस रात बहादुरी से खड़े रहे. मैं उन सबके बारे में सोच रहा हूँ जिन्होंने उस रात अपनी जान गँवाई, जिनकी जान उस रात ख़तरे में पड़ी और जो आज भी उस रात के डर के साथ जी रहे हैं.
आज रात मैं उन सबके बारे में सोच रहा हूँ जिन्होंने हमारे लोकतंत्र को बचाने के लिए बहादुरी का प्रदर्शन किया. मैं उन सभी डेमोक्रेट और रिपब्लिक सदस्यों, चुनाव अधिकारियों, जजों, चुने हुए प्रतिनिधियों और चुनाव कर्मचारियों के बारे में सोच रहा हूँ जो चुनाव के पहले और बाद में बहादुरी से खड़े रहे.
हमारे इतिहास के इस दुखद अध्याय ने हमें यह याद दिलाया है कि लोकतंत्र नाज़ुक होता है और इसे हर हाल में बचाया जाना चाहिए.
इसने हमें याद दिलाया है कि हमें हमेशा चौकन्ना रहना चाहिए. अमेरिका में हिंसा और कट्टरता की कोई जगह नहीं है. अमेरिकी नागरिक के तौर पर यह हम सभी का, ख़ासकर बड़ों का कर्तव्य और ज़िम्मेदारी है कि हम सच की रक्षा करें और झूठ को हराएं.
असभ्य युद्ध को ख़त्म करने और हमारे देश की आत्मा के घाव भरने का यही एक तरीका है.
भविष्य में हमारे सामने यही काम है और ये एक ऐसा काम है जिसे हम सबको मिलकर पूरा करना चाहिए. युनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका की तरह.
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म्यांमार में 9वें दिन भी प्रदर्शन जारी, लोग कर रहे सू ची को रिहा करने की माँग
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म्यांमार में सैन्य तख़्तापलट के
ख़िलाफ़ नौवें दिन भी प्रदर्शन जारी हैं.
हज़ारों लोग म्यांमार के अलग-अलग
शहरों में प्रदर्शन कर रहे हैं. ये लोग म्यांमार में लोकतंत्र क़ायम रखने की माँग
कर रहे हैं और चाहते हैं कि उनकी नेता आंग सान सू ची को रिहा किया जाये.
म्यांमार के सबसे बड़े शहर यंगून
में इंजीनियरिंग के छात्रों ने सफ़ेद कपड़े पहनकर प्रदर्शन किया. इन छात्रों ने हाथों
में पोस्टर लिये हुए थे, जिनपर सू ची के समर्थन में नारे लिखे थे.
एक फ़रवरी को म्यांमार के सैन्य
शासकों ने तख़्तापलट किया था और लोकतांत्रिक तरीक़े से चुने गये नेताओं को हिरासत
में ले लिया था.
बताया गया है कि अब तक क़रीब 400
प्रदर्शनकारी हिरासत में लिये जा चुके हैं.
म्यांमार के सभी शहरों में पुलिस और
सेना के वाहन गश्त कर रहे हैं. लोगों में सैन्य कार्रवाई का डर भी है, लेकिन इन सब
के बीच ये प्रदर्शन हो रहे हैं.
यंगून में हुए एक प्रदर्शन में
लोगों ने यह नारे भी लगाये कि ‘रात में लोगों को किडनैप करना बंद
करो.’
इससे पहले, म्यांमार के सैन्य
शासकों ने 23 हज़ार क़ैदियों को रिहा करने की घोषणा की थी जिन्हें लेकर स्थानीय
लोगों में यह डर बना हुआ है कि कहीं ये क़ैदी रिहाई के बाद उनके प्रदर्शनों का
अनुशासन भंग ना कर दें.