अमेरिका: डोनाल्ड ट्रंप को पद से हटाने की मांग तेज़ हुई, बाइडन ने लगाए गंभीर आरोप
जो बाइडन ने बुधवार को कैपिटल बिल्डिंग में हुई घटना को अमेरिका के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक करार दिया है.
लाइव कवरेज
व्हाइट हाउस ने 'हिंसक दंगाइयों' की निंदा की
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व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी केली मैकएनी ने अमेरिकी कैपिटल पर हुए सशस्त्र विद्रोह की निंदा की.
उन्होंने कहा, ''पूरे व्हाइट हाउस की तरफ से मैं इस घटना की कड़ी निंदा करती हूं.''
इन्होंने इस घटना को ''भयावह, निंदनीय और अमेरिकी तरीके के विपरीत'' बताया.
हालांकि उन्होंने मीडिया के सवाल नहीं लिए और इसके बाद वहां से चली गई.
राष्ट्रपति ट्रंप गुरुवार को सार्वजनिक तौर पर नज़र नहीं आए. उनके सोशल मीडिया अकाउंट भी सस्पेंड हैं.
हमारे देश के लिए मैं आहत हूं: मिशेल ओबामा
अमेरिका की पूर्व प्रथम महिला मिशेल ओबामा ने कहा कि बुधवार को अमेरिकी कैपिटल पर हुई घटना ने ''अमेरिकी सरकार के केंद्र को नीचा दिखाया'' है.
ट्विटर पर जारी किए गए एक लंबे बयान में उन्होंने कहा, ''कल के दंगों और गर्मियों में रंगभेद के ख़िलाफ़ शांतिपूर्वक हो रहे प्रदर्शनों के दौरान जिस तरह प्रतिक्रिया में भेदभाव दिखा वो दर्दनाक है. ये दुखद है.''
उन्होंने कहा कि ''देशद्रोही झंडे लेकर यहां खुलेआम बवाल कर रहे थे और ब्लैक लाइव्स मैटर के प्रदर्शनों के समय ''लोगों की खोपड़ियां फूटीं और बड़ी संख्या में गिरफ़्तारियां'' हुईं.
मिशेल ओबामा ने कहा, ''लाखों लोगों ने एक आदमी को वोट दिया, तो जाहिर है वो अपने अहंकार के लिए हमारे ही लोकतंत्र को जलाने के लिए तैयार है.''
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ''इस राक्षसी बर्ताव को रोकने'' और ट्रंप पर हमेशा के लिए प्रतिबंध लगाने की मांग की.
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शीर्ष डेमोक्रैट नेता ने ट्रंप को ऑफिस से बाहर करने की अपील की
अमेरिका के हाउस ऑफ़ रिप्रेजेंटेटिव की स्पीकर और शीर्ष डेमोक्रैट नेता नैन्सी पेलोसी ने एक न्यूज़ कॉन्फ़्रेंस में कहा कि उनके पास ट्रंप के कैबिनेट सदस्यों के लिए एक संदेश है.
उन्होंने कहा, ''क्या जो कुछ भी हुआ वे लोग उसे सही मानते हैं? क्या वो अगले 13 दिनों तक ये कहने के लिए तैयार हैं कि ये ख़तरनाक आदमी हमारे लोकतंत्र को और अधिक नुकसान पहुंचा सकता है?''
पेलोसी ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप के ''राजद्रोह वाले काम'' की वजह से हाउस उनके ख़िलाफ़ महाभियोग चलाने पर मजबूर हो सकता है.
उन्होंने मीडिया से कहा, ''हालांकि सिर्फ़ 13 ही बचे हैं, लेकिन कोई भी दिन भयावह हो सकता है.''
उन्होंने बताया कि डेमोक्रैट नेता उनसे लगातार संपर्क कर रहे हैं और ट्रंप को ऑफिस से हटाने का दूसरा प्रयास करने की बात कह रहे हैं.
बता दें कि दिसंबर 2019 में भी ट्रंप के ख़िलाफ़ महाभियोग चलाया गया था. उन पर दोबारा चुनाव जीतने के मौके बेहतर करने के लिए यूक्रेन से ग़लत तरीके से मदद मांग ने का आरोप था. अगर दोबारा महाभियोग की प्रक्रिया शुरू होती है तो वो अमेरिका के ऐसे पहले राष्ट्रपति होंगे जिन्हें दो बार महाभियोग का सामना करना पड़ेगा.
बदायूं: मंदिर में गैंगरेप के बाद हत्या का मुख्य अभियुक्त पुजारी गिरफ़्तार
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उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले में मंदिर में महिला की गैंगरेप के बाद हत्या के मुख्य अभियुक्त पुजारी सत्यनारायण को गिरफ़्तार कर लिया गया है.
पुजारी पर पुलिस ने पचास हज़ार का इनाम घोषित किया था.
पुलिस के मुताबिक, अभियुक्त पुजारी मेवली गांव में एक भक्त के यहां छुपा हुआ था. ग्रामीणों ने पुजारी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया.
बदायूं ज़िले के उघैती इलाक़े में 50 वर्षीय एक महिला की गैंगरेप के बाद जघन्य हत्या कर दी गई थी.
यह घटना उस वक़्त हुई, जब महिला मंदिर में रविवार शाम पूजा करने गई थी.
आरोप मंदिर के पुजारी और उनके दो साथियों पर लगा है. पुलिस ने दो अभियुक्तों को पहले ही गिरफ़्तार कर लिया था.
अमेरिका के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक है ये घटना: बाइडन
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अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडन ने बुधवार को हुई घटना को अमेरिका के इतिहास के सबसे काले दिनों में से एक करार दिया है.
डेलावेयर में अपने संबोधन में उन्होंने कहा, ''यह हमारे देश के इतिहास में सबसे काले दिनों में से एक है. वो हमला जो आज़ादी के गढ़ में हुआ है.''
उन्होंने कहा, ''यह असंतोष नहीं था. यह कोई विकार नहीं था. यह अराजकता थी. कैपिटल में वे प्रदर्शनकारी नहीं थे बल्कि ''दंगाई भीड़'' थी और ''घरेलू आतंकवादी'' थे.''
''मैं चाहता हूं कि हम कह सकते कि हम इसे देख नहीं पाए.. लेकिन यह सच नहीं है. हम इसे देख सकते हैं.''
उन्होंने कहा, ''पिछले चार सालों में हमारे पास ऐसा राष्ट्रपति था जिसने हमारे लोकतंत्र, हमारे संविधान, हमारे नियम कानून की अवमानना की है. उन्होंने हमारी लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमले किए हैं.''
जो बाइडन ने अपने संबोधन में कहा कि बुधवार को जो प्रदर्शनकारी कैपिटल बिल्डिंग के बाहर जमा हुए थे उनके रंग की वजह से पुलिस ने ज़्यादा सख्ती नहीं दिखाई.
उन्होंने कहा, ''कोई मुझे बता नहीं पाएगा कि अगर कल यही ब्लैक लाइव्स मैटर अभियान के प्रदर्शनकारी होते तो उनके साथ वैसा जो बर्ताव होता वो इन लोगों बिल्कुल अलग होता जिन्होंने कैपिटल पर धावा बोला.''
डोनाल्ड ट्रंप ने हिंसा भड़काने में निभाई भूमिका: बोरिस जॉनसन
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का कहना है कि अमेरिका में कल हुई हिंसा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका भी है.
उन्होंने कहा, ''ऐसा लगता है जैसे उन्होंने लोगों को कैपिटल में घुसने के लिए उकसाया है और अब तक लगातार उन्होंने निष्पक्ष चुनावों पर सवाल खड़े किए हैं. मेरा मानना है कि ये सरासर ग़लत है.''
''मैं बस यही कहूंगा कि मुझे यह जानकर बहुत खुशी हुई है निर्वाचित राष्ट्रपति की जीत पर औपचारिक मुहर लग चुकी है और लोकतंत्र को बचा लिया गया है.''
अमेरिका: हिंसा मामले में अब तक कुल 68 गिरफ़्तार, आठ महिलाएं भी
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वॉशिंगटन डीसी के पुलिस चीफ़ रॉबर्ट कॉन्टी ने बताया है कि कैपिटल हिल्स में हिंसा के मामले में अब तक कुल 68 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है. इनमें से सिर्फ़ एक शख़्स वॉशिंगटन डीसी से है.
उन्होंने कहा उनका विभाग हिंसक भीड़ में से एक-एक की पहचान करने और उन्हें इसका ज़िम्मेदार ठहराने की दिशा में काम कर रहा है.
उन्होंने आगे बताया कि पुलिस ने बहुत से लोगों की तस्वीरें निकाली हैं और उनकी पहचान के लिए कम्युनिटी से मदद ली जा रही है. गिरफ़्तार हुए 68 लोगों में से आठ महिलाएं हैं.
वहीं, पड़ोसी राज्य मैरीलैंड में पुलिस ने एक वेबसाइट बनाकर हिंसा में शामिल लोगों की तस्वीरें जारी की हैं ताकि उनकी पहचान करने में मदद मिल सके.
फ़ेसबुक ने ट्रंप पर अनिश्चितकाल या कम से कम दो हफ़्ते के लिए लगाई पाबंदी
बुधवार को अमेरिकी संसद भवन पर हमले के बाद फ़ेसबुक और ट्विटर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर पाबंदी लगा दी थी.
लेकिन अब फ़ेसबुक ने ट्रंप पर अनिश्चितकाल के लिए पाबंदी लगा दी है.
फ़ेसबुक के प्रमुख मार्क ज़करबर्ग ने एक बयान जारी कर इसकी जानकारी दी.
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मार्क ज़करबर्ग ने अपने बयान में कहा कि पिछले 24 घंटों की चौंकाने वाली घटनाओं ने साफ़ कर दिया है कि निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने कार्यकाल के बचे हुए दिनों का इस्तेमाल अपने चयनित उत्तराधिकारी जो बाइडन को शांतिपूर्ण और क़ानूनी तरीक़े से सत्ता हस्तांतरण को बाधित करने के लिए करना चाहते हैं.
ट्रंप ने अपने समर्थकों की निंदा करने के बजाए संसद भवन पर हमला करने के लिए उनको शाबाशी देने के लिए इस प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया.
ट्रंप की इस हरकत ने ना सिर्फ़ अमेरिका बल्कि दुनिया भर के लोगों को चिंता में डाल दिया है.
ज़करबर्ग ने आगे कहा, हमलोगों ने कल उनके बयान को हटा दिया था क्योंकि हमने यह तय किया था कि उनके बयान का असर और मक़सद और हिंसा भड़काना है.
"हमें यक़ीन है कि इस दौरान राष्ट्रपति को इस प्लेटफ़ॉर्म को इस्तेमाल करते रहने की इजाज़त देने का ख़तरा बहुत ज़्यादा है. इसलिए हमलोगों ने राष्ट्रपति की फ़ेसबुक और इंस्टाग्राम पर लगी पाबंदी को अनिश्चितकाल के लिए और कम से कम अगले दो हफ़्तों के लिए जबतक कि सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण तरीक़े से नहीं हो जाता, बढ़ाने का फ़ैसला किया है."
अमेरिका: कैपिटल हिल इलाक़े में अब क्या हैं हालात
अमेरिका के निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने संसद पर उस समय धावा बोल दिया था जब सदन में राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों पर आधिकारिक मुहर लगाने के लिए बहस हो रही थी.
अब वहां क्या हैं हालात, बता रहे हैं बीबीसी संवाददाता विनीत खरे.
45 फ़ीसद रिपब्लिकन्स ने संसद पर हमले का समर्थन किया
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एक सर्वे के अनुसार 45 फ़ीसद रिपब्लिकन्स ने अमेरिकी संसद पर हमले का समर्थन किया है.
बुधवार को निवर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने उस समय संसद भवन पर हमला कर दिया था जब संसद में राष्टपति चुनाव के नतीजे पर आधिकारिक मुहर लगाने के लिए बहस हो रही थी.
सुरक्षाकर्मियों ने चार घंटे की मेहनत के बाद संसद भवन को उपद्रवियों से ख़ाली करा लिया लेकिन इस दौरान चार लोगों की मौत हो गई.
बाद में सदन की कार्रवाही दोबारा शुरू हुई और जो बाइडन और कमला हैरिस की जीत पर सदन ने आधिकारिक मुहर लगा दी.
लेकिन YouGov नामक संस्था ने अपने सर्वे में पाया है कि जहां एक तरफ़ ज़्यादातर अमेरिकियों ने संसद पर हमले को लोकतंत्र के लिए ख़तरा बताया वहीं दूसरी तरफ़ इस मामले में पार्टी के आधार पर लोगों की राय में भारी विभाजन देखा गया.
संस्था ने 1397 मतदाताओं से बातचीत की जिनमें से 62 फ़ीसद ने इस हिंसा को लोकतंत्र के लिए ख़तरा क़रार दिया जिनमें 93 फ़ीसद डेमोक्रेट्स, 55 फ़ीसद निर्दलीय और 27 फ़ीसद रिपब्लिकन्स थे.
रिपब्लिकन्स में 45 फ़ीसद ने ट्रंप समर्थकों की हिंसक कार्रवाई को सही ठहराया जबकि 43 फ़ीसद रिपब्लिकन्स ने इसे ग़लत क़रार दिया.
हाल के वर्षों में कई सर्वे में पाया गया है कि अमेरिकी राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ता जा रहा है और पार्टी के आधार पर लोगों के नज़रिए में भारती मतभेद देखे जा रहे हैं.
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JEE एडवांस की परीक्षा तीन जुलाई को होगी: केंद्रीय शिक्षा मंत्री
आईआईटी में दाख़िले के लिए होने वाली जेईई एडवांस की परीक्षा तीन जुलाई को होगी.
केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ने गुरुवार को इसकी घोषणा की.
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शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस बार जेईई एडवांस की परीक्षा की ज़िम्मेदारी आईआईटी खड़गपुर को दी गई है.
सरकार ने आईआईटी में दाख़िले के लिए 12वीं कक्षा में कम से कम 75 प्रतिशत नंबर लाने की शर्त भी ख़त्म कर दी है.
कोरोना के कारण छात्रों की तैयारी पर असर पड़ा है, इसलिए छात्रों ने सरकार से रियायत की माँग की थी.
जेईई-मेन्स परीक्षा की घोषणा सरकार पहले ही कर चुकी है. इस बार जेईई-मेन्स की परीक्षा साल में चार बार होगी. फ़रवरी, मार्च, अप्रैल और मई के महीने में जेईई-मेन्स की परीक्षा होगी.
किसी भी छात्र को चारों परीक्षा में बैठने की अनुमति होगी.
व्हाइट हाउस के पुराने सहयोगियों ने की ट्रंप की निंदा
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इमेज कैप्शन, डोनाल्ड ट्रंप और जॉन मेटिस
डोनाल्ड ट्रंप के साथ काम कर
चुके दो पूर्व अधिकारियों ने बुधवार को अमेरिकी संसद पर हुई हिंसा के लिए ट्रंप को ज़िम्मेदार ठहराते हुए उनकी निंदा की है. पूर्व रक्षा
मंत्री जेम्स मैटिस ने हिंसा के लिए सीधे-सीधे ट्रंप को दोषी ठहराया है.
अपने बयान में उन्होंने कहा, “केपिटल पर आज हुए हिंसक हमले से अमेरिका के लोकतंत्र को
भीड़तंत्र में बदलने की कोशिश ट्रंप की वजह से हुई है.”
उन्होंने कहा कि ''ट्रंप को छद्म
राजनीतिक नेताओं ने बढ़ावा दिया है जिनके नाम गुमनामी में रहेंगे और कायरता के लिए
जाने जाएंगे.”
मैटिस ने 2018 में अपने पद से
इस्तीफ़ा दे दिया था जब उन्होंने सीरिया में युद्ध को लेकर आपत्ति जताई थी. उन्होंने
जुलाई में हुए ‘ब्लैक लाइव मैटर्स’ प्रदर्शनों को लेकर ट्रंप की प्रतिक्रिया की भी आलोचना की थी.
व्हाइट हाउस के पूर्व चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़ जॉन केली ने ट्विटर पर लिखा कि अमेरिका को बहुत ग़ौर से देखना होगा कि हम
देश के किसी भी पद के लिए किसको चुनते हैं.
उन्होंने कहा कि उम्मीदवार के चरित्र,
मूल्य, आचरण का रिकॉर्ड और ईमानदारी को क़रीब से परखना चाहिए.
उन्होंने
भी साल 2018 में पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और तबसे ही ट्रंप के आलोचक रहे हैं.
अमेरिकी संसद पर हमले का असर ट्रंप की विरासत पर क्या होगा
'ट्रंप के बयान की वजह से हिंसा हुई' - प्रीति पटेल
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ब्रिटेन की गृह मंत्री प्रीति
पटेल ने बुधवार को वाशिंगटन में हुई हिंसा को भयावह और अस्वीकार्य बताया है.
उन्होंने बीबीसी के प्रोग्राम ब्रेकफास्ट
में कहा, “उनके बयान की वजह से हिंसा हुई
है और अब तक उन्होंने हिंसा की निंदा तक नहीं की और ये पूरी तरह ग़लत है.”
वहीं, जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल ने
कहा कि वे अमरीकी संसद पर हुए हिंसक हमले को देखकर नाराज़ और दुखी हैं.
उन्होंने जर्मनी के सांसदों से
कहा, “मुझे इस बात का दुख है कि राष्ट्रपति
ट्रंप ने अब तक अपनी हार स्वीकार नहीं की है.”
“चुनाव के नतीजों पर संदेह को बढ़ाया गया, जिसकी वजह से ऐसा माहौल बना और कल ऐसी घटना
को अंजाम दिया गया.”
उन्होंने राष्ट्रपति-इलेक्ट जो
बाइडन के बयान और संसद के उनके राष्ट्रपति चुने जाने पर मुहर लगाने का स्वागत किया
है.
उन्होंने कहा कि बाइडन अमेरिका
के लोकतंत्र में नया अध्याय शुरू करेंगे.
एंगेला मर्केल ने कहा, “इसका मतलब है कि लोकतांत्रिक शक्तियों की जीत हुई. अमेरिका
के बारे में मुझे ये हमेशा से पता था और यही उम्मीद थी.”
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अमेरिका: संसद भवन पर हमले के दौरान तिरंगा लिए एक आदमी दिखा
बुधवार को अमेरिकी संसद भवन पर राष्ट्रपति ट्रंप के समर्थकों के ज़रिए हमले के दौरान एक व्यक्ति भारतीय झंडा लिए भी दिखा था.
इस पर कई लोग अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं.
भारतीय जनता पार्टी के सांसद वरुण गांधी ने भी इस पर आपत्ति जताते हुए ट्वीट किया है.
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वरुण गांधी ने उस वीडियो को ट्वीट करते हुए लिखा है, "वहां भारतीय झंडा क्यों दिख रहा है? यह एक ऐसी लड़ाई है जिसमें हमलोगों को निश्चित तौर पर शामिल होने की ज़रूरत नहीं है.''
बहुत से लोगों भाजपा सांसद के सवाल को जवाब भी दिया है.
@enthahotness के हैंडल से एक महिला ने ट्रंप और मोदी की कुछ तस्वीरों को शेयर करते हुए कहा कि इसका कारण ये तस्वीरें हैं.
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ट्रंप ने कहा, 'व्यवस्थित रूप' से होगा सत्ता का हस्तांतरण
अमेरिकी संसद भवन पर हमले और फिर जो बाइडन और कमला हैरिस की जीत पर संसद की आधिकारिक मुहर के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान जारी कर कहा है कि अमेरिका में सत्ता का हस्तांतरण 'व्यवस्थित रूप' से होगा.
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हालांकि चुनावों में धांधली के अपने आरोपों पर वो अभी भी क़ायम हैं.
ट्रंप ने कहा है, हालांकि मैं चुनाव के नतीजे से पूरी तरह असहमत हूं, और इस बात के प्रमाण भी हैं लेकिन बावजूद इसके 20 जनवरी को सुचारू रूप से सत्ता का हस्तांतरण होगा.
ट्रंप का यह बयान उनके प्रवक्ता के ट्विटर हैंडल से जारी किया गया है क्योंकि ट्विटर ने ट्रंप के अकाउंट को ब्लॉक कर दिया है.
उन्होंने आगे कहा, "मैंने हमेशा कहा है कि सिर्फ़ वैध मतों की गिनती हो इसको सुनिश्चित करने के लिए हमलोग अपनी लड़ाई जारी रखेंगे. अमेरिकी राष्ट्रपति के इतिहास में इसके साथ ही सबसे महान पहले कार्यकाल का अंत होता है, लेकिन अमेरिका को दोबारा महान बनाने की हमारी लड़ाई में यह सिर्फ़ एक शुरूआत है.''
ट्रंप की चुनावी टीम ने नवंबर में हुए राष्ट्रपति चुनाव के नतीजों को चुनौती देने के लिए 60 से ज़्यादा मुक़दमा किया था लेकिन वे सभी ख़ारिज कर दिए गए हैं.