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क्रिसमस के दौरान जर्मनी में लॉकडाउन, वजह कोरोना- आज की बड़ी ख़बरें

जर्मनी में अब 16 दिसंबर से 10 जनवरी तक लॉकडाउन होगा. जर्मन चांसलर ने कहा फ़ौरन कार्रवाई करने की ज़रूरत है.

लाइव कवरेज

  1. कोरोना वैक्सीन: अब नहीं लगेगा व्हाइट हाउस के अधिकारियों को पहले टीका

  2. कोरोना वायरस की वजह से क्रिसमस पर जर्मनी में लॉकडाउन

    कोरोना वायरस के संक्रमण और उसकी वजह से होने वाली मौत के बढ़ते मामलों को ध्यान में रखते हुए जर्मनी में क्रिसमस के दौरान सख़्त लॉकडाउन किया जाएगा.

    पूरे जर्मनी में बुधवार से ही ग़ैर-ज़रूरी दुकानों को बंद कर दिया जाएगा. साथ ही स्कूलों को भी बंद किया जा रहा है.

    चांसलर एंगेला मर्केल ने क्रिसमस से पहले शॉपिंग के लिए उमड़े लोगों को मौजूदा हालात के लिए ज़िम्मेदार बताया है.

    जर्मनी में अब 16 दिसंबर से 10 जनवरी तक लॉकडाउन होगा.

    देश के 16 राज्यों के नेताओं के साथ मीटिंग के बाद जर्मन चांसलर ने कहा कि इस मामले में फ़ौरन कार्रवाई करने की ज़रूरत है.

    जर्मनी में रेस्तरां, बार और मनोरंजन की बाकी जगहें नवंबर से ही बंद है और देश के कुछ हिस्से ख़ुद ही लॉकडाउन की स्थिति में चले गए हैं.

    देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान बैंक और भोजन जैसी जरूरतों वाली दुकानें खुली रहेंगी. हेयर सलूनों को बंद रखा जाएगा.

    हालांकि क्रिसमस ट्री बेचने वाली दुकानें खुली रहेंगी.

    कंपनियों से कहा गया है कि वो अपने कर्मचारियों को घर से काम करने दें.

    जर्मनी में रविवार को कोरोना संक्रमण के 20,200 नए मामले सामने आए और 321 लोगों की मौत हुई.

  3. ग़ाज़ीपुर बॉर्डर पर बैठे किसानों का हाल

  4. कोरोना की भेंट चढ़ा शांतिनिकेतन का ऐतिहासिक पौष मेला

    प्रभाकर मणि तिवारी, कोलकाता से

    कोविड-19 की वजह से लगी पाबंदियों की वजह से इस साल पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में स्थित शांतिनिकेतन में मशहूर पौष मेले का आयोजन नहीं किया जाएगा.

    सौ साल से भी ज्यादा पुराने इस ऐतिहासिक मेले में देश-विदेश से लाखों लोग जुटते हैं.

    विश्वभारती विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद की एक उच्च-स्तरीय बैठक में रविवार को इसका फैसला किया गया.

    यह मेला हर साल दिसंबर के आखिर में आयोजित किया जाता है. इस दौरान हस्तशिल्प, हथकरघा, कला प्रदर्शनियों के अलावा संगीत समारोहों का भी आयोजन होता है.

    कार्यकारिणी परिषद के एक सदस्य ने बताया, “कोविड-19 के चलते उपजी परिस्थिति की वजह से इस साल स्थानीय प्रशासन की ओर से मेले के आयोजन को हरी झंडी मिलने की उम्मीद नहीं थी. इसके अलावा विश्वविद्यालय के तमाम छात्रों के परिसर में आने की कोई संभावना नहीं है. इस मेले की बजाय 23 दिसंबर को पौष उत्सव आयोजित किया जाएगा.”

    नोबेल पुरस्कार विजेता कविगुरू रबींद्रनाथ टैगोर के पिता महर्षि देबेंद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1894 में पहली बार इस मेले का आयोजन किया था.

    वर्ष 1951 से इसका आयोजन विश्वभारती विश्वविद्यालय की ओर से किया जाता रहा है.

    वैसे राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण के दिशानिर्देशों की वजह से बीती जुलाई से ही मेले के आयोजन पर सवाल उठ रहे थे.

    लेकिन अगस्त में विश्वविद्यालय ने कहा था कि केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मिलने की स्थिति में वह मेले के आयोजन के लिए तैयार है.

  5. 'अन्नदाताओं' को चरमपंथी कहने वालों को इंसान कहलाने का हक नहीं - उद्धव ठाकरे

    महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि बीजेपी राज्य में उनकी सरकार गिराने की इस कदर कोशिश कर रही है कि उसे लोगों की भलाई के लिए उठाए जा रहे कदम नहीं दिख रहे.

    रविवार को एक संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने विधानसभा में विपक्ष के नेता देवेन्द्र फड़नवीस की एक टिप्पणी का जवाब दिया और कहा, “अगर मुंबई में अघोषित इमर्जेंसी है तो जो देश के दूसरे हिस्सों में है, वो इमर्जेंसी है.”

    उन्होंने कहा, “जिस तरह दिल्ली के बाहरी इलाक़ों में विरोध कर रहे किसानों के ऊपर कड़कती ठंड में पानी की बौछार की गई, क्या वो सामाजिक सौहार्द्य का प्रतीक था?”

    उद्धव ठाकरे ने किसानों के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की आलोचना की और कहा, “बीजेपी को तय करना होगा कि किसान आंदोलन को कौन सपोर्ट तकर रहा है, पाकिस्तान, चीन या माओवादी.”

    बीजेपी पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, ”आप पाकिस्तान से प्याज आयात करते हैं, तो अब क्या किसान भी पाकिस्तान से आ रहे हैं.”

    इससे पहले रविवार को बीजेपी नेता और रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि किसान आंदोलन अब किसानों का हाथ से निकल गया है और नक्सल और माओवादी इसे चला रहे हैं और जो लोग ‘देशद्रोह के आरोप में’ जेलों में बंद हैं उन्हें छुड़ाने की मांग की जा रही है.

    ठाकरे ने कहा, "अगर फडनवीस का कहना है कि राज्य सरकार आलोचकों के ख़िलाफ़ कदम उठा रही है जिससे अघोषित इमर्जेंसी जैसा हालात पैदा हो रहे हैं, तो अपने हक के लड़ रहे किसानों को देशद्रोही कहुना इमर्जेंसी से भी बुरा है."

    उन्होंने कहा जो देश के 'अन्नदाताओं' को को चरमपंथी कहते हैं उन्हें इंसान कहलाने का भी हक नहीं है.

    उन्होंने कहा, “बीजेपी राज्य सरकार को अस्थिर करने में इतनी बिज़ी है कि उसे ये देखने की फिर्सत नहीं कि बीते एक साल में हमने क्या कुछ काम किया है. महाविकास अघाड़ी को लेकर जनता में कोई संशय नहीं है.”

    इससे पहले देवेन्द्र फडनवीस ने कहा था कि सरकार रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ़ अर्नब गोस्वामी और बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत के पीछे पड़ी है, ऐसा लगता ‘राज्य में अघोषित इमर्जेंसी हैं.‘

  6. सोमवार से 24x7 मिलेगी आरटीजीएस करने की सुविधा

    रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रविवार को यह जानकारी दी है कि सोमवार से रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट (आरटीजीएस) की सुविधा 24 घटों के लिए शुरू हो जाएगी.

    शक्तिकांत दास ने ट्वीट कर बताया,"कल से आरटीजीएस की सुविधा 12.30 बजे (रविवार की मध्य रात्रि) से 24 घंटों के लिए शुरू हो जाएगी. आरबीआई, इंडियन फाइनेनशियल टेक्नॉलॉजी और एलायड सर्विसेज (आईएफटीएएस) को इसे संभव कर दिखाने के लिए बधाइयाँ."

    शक्तिकांत दास ने अपने पहले के बयान में कहा था,"भारत दुनिया के कुछ उन देशों में शामिल होने वाला है जहाँ साल के 365 दिनों 24 घंटे रियल टाइम पेमेंट सिस्टम काम करेगा. इससे बड़े स्तर पर भुगतान के क्षेत्र में नई सुविधाएं पहले से आसान होंगी और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा."

  7. बातचीत हो मगर इस बात पर हो कि यस और नो- गुरप्रीत घुग्गी

    पंजाबी फ़िल्मों के अभिनेता और कॉमेडियन गुरप्रीत घुग्गी आज किसानों से मुलाक़ात करने सिंघु बॉर्डर पहुंचे.

    उन्होंने कहा “ये लड़ाईज़मीर-दारों की है. किसान इन तीनों कृषि क़ानूनों का विरोध करते हैं इसलिए केंद्र सरकार को ये क़ानून वापिस लेने चाहिए.”

    उन्होंने कहा किका कहना है कि “बार-बार चर्चा में मत बुलाइए. वो कहते हैं- बातचीत हो मगर इस बात पर हो कि यस और नो.”

  8. ब्रेकिंग न्यूज़, असमः सरकारी मदरसे, संस्कृत केंद्र बंद करने के प्रस्ताव को कैबिनेट की मंजूरी

    दिलीप कुमार शर्मा,

    गुवाहाटी से बीबीसी हिंदी के लिए

    असम सरकार की कैबिनेट ने रविवार को राज्य-संचालित सभी मदरसों और संस्कृत टोल्स (संस्कृत केंद्रों) को बंद करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है.

    कैबिनेट की बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने एक बयान जारी कर कहा कि विधानसभा के आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान इस संबंध में एक विधेयक लाया जाएगा.

    संसदीय कार्य मंत्री पटवारी ने मीडिया से कहा “मदरसों और संस्कृत केंद्रोंसे संबंधित मौजूदा क़ानूनों को निरस्त किया जाएगा. इस संबंध में विधानसभा के अगले सत्र में एक विधेयक पेश किया जाएगा."

    असम विधानसभा का शीतकालीन सत्र 28 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है. इससे पहले असम के शिक्षा मंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा था कि सरकार द्वारा संचालित या फंडेड मदरसों और टोल्स को अगले पांच महीनों के भीतर नियमित स्कूलों के रूप में पुनर्गठन किया जाएगा. क्योंकि एक धर्मनिरपेक्ष सरकार का काम धार्मिक शिक्षा प्रदान करना नहीं है.

    उनका कहना था कि उनकी सरकार धार्मिक शिक्षा के लिए सरकारी फंड ख़र्च नहीं कर सकती.

    हालांकि सामाजिक संगठन और अन्य ग़ैर सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे प्राइवेट मदरसों को लेकर कोई सरकार को कोई दिक्कत नहीं हैं.

    ऑल असम मदरसा स्टूडेंट एसोसिएशन ने सरकार के इस फ़ैसले की आलोचना करते हुए इसे मदरसों में पढ़ाई करने वाले करीब डेढ़ लाख छात्रों के साथ अन्याय बताया है.

    असम में दो तरह के मदरसे हैं. एक सरकारी मान्यताप्राप्त जो पूरी तरह सरकारी अनुदान से चलते हैं और दूसरा खेराजी जिसे निजी संगठन चलाते हैं.

    असम सरकार 614 मदरसे चलाती है, जबकि राज्य में करीब 900 प्राइवेट मदरसे चल रहे हैं. इसके साथ ही राज्य में लगभग 100 सरकारी-संचालित संस्कृत आश्रम हैं और 500 प्राइवेट केंद्र हैं.

  9. क्या शाहजहांपुर बॉर्डर पर सिंघु और टिकरी बॉर्डर जैसा हाल है?

    देविना गुप्ता,

    शाहजहांपुर बॉर्डर से

    किसान आंदोलन में शिरकत करने के लिए सैंकड़ों की संख्या में किसान हरियाणा-राजस्थान के शाहजहांपुर बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं.

    राष्ट्रीय राजमार्ग को बंद करने और दिल्ली की तरफ कूच करने के लिए ये किसान ट्रैक्टरों, बसों और कारों में भरकर बॉर्डर पर पहुंच रहे हैं. इनमें से अधिकांश हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से हैं.

    60 साल के शिवकुमार कहते हैं, “यहां बैठे अपने किसान भाईयों के पास पहुंचने के लिए मैं कल शाम मेवाड़ से निकला हूं. रास्ते में मैं अपनी कंबल ओढ़ कर सो गया और फिर सवेरे सफर शुरू किया.”

    शिवकुमार सोने के लिए अपना गद्दा लेकर सफर पर निकले थे. कार के ऊपर उन्होंने अपना गद्दा बांधा हुआ था.

    यहां हमें बड़ी संख्या में महिला किसान भी दिखीं. एक जगह पर करीब 50 महिलाएं झंडे पकड़ कर नारे लगा रही थीं और उत्साह बढ़ाने वाले गीत गा रही थीं.

    पंजाब से आई मनप्रीत कौर ने हमें बताया, “अगर ज़रूरत पड़ी तो मैं छह महीने तक यहां रुक सकती हूं, इस तैयारी के साथ मैं यहां आई हूं. घर पर मेरे पति बच्चों की देखभाल के लिए रुके हैं. मुझे उनके लिए ये लड़ाई लड़नी है.”

    शाहजहांपुर बॉर्डर से शुरू हुए मार्च में 6 किलोमीटर तक सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर और समाजशात्री योगेंद्र यादव किसान नेताओं के साथ रहे.

    योगेंद्र यादव ने कहा, “हम यहां शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के लिए हैं. अगर हमें दिल्ली में प्रवेश करने की अनुमति नहीं मिलेगी तो हम बॉर्डर पर बैठेंगे.”

    हरियाणा की सीमा पर भारी संख्या में सुरक्षाबलों की तैनाती रही जिन्होंने किसानों को सीमा पार करने से रोका. ऐसे में किसान वहीं हाईवे पर ही बैठ गए और दिल्ली की तरफ आने वाला रास्ता उन्होंने बंद कर दिया.

    पहले राजधानी दिल्ली के बॉर्डर पर पहले ही हज़ारों की संख्या किसान में मौजूद हैं, जिन्होंने दिलिली आने वाली कई सड़कों का बीते कई दिनों से बंद कर रखा है. इसके अलावा अब हरियाणा-राजस्थान का शाहजहांपुर बॉर्डर अब विरोध प्रदर्शन का एक अलग मोर्चा बनता जा रहा है जहां किसानों ने सड़क पर बैठना शुरू कर दिया है.

    मेधा पाटकर ने हमने पूछा कि क्या ‘दिल्ली चलो’ की अपील पर कम किसान यहां पहुंचे हैं. उन्होंने दावा किया कि अभी ये बस शुरूआत है.

    उन्होंने कहा, “किसान कल एक किसान पंचायत करेंगे और आने वाले कुछ दिनों में किसानों की संख्या बढ़ेगी. जब तक क़ानून निरस्त नहीं किए जाते हम पीछे नहीं हटेंगे.“

    किसान हाल में पास किए गए नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे और उनका कहना है कि ये उनके हित में नहीं है. सरकार से उनकी मांग है कि इन क़ानूनों को वापिस लिया जाए.

    दिल्ली में किसानों का विरोध प्रदर्शन आज 18वां दिन है.

    हालांकि सरकार का कहना है कि ये सुधारवादी क़ानून हैं. सरकार के अनुसार खेती के सेक्टर में निजी क्षेत्र को प्रवेश देने वाले इन क़ानून किसानों के हित में हैं. इनकी मदद से किसान अपनी उपज किसी को भी बेचने में सक्षम होंगे.

    किसानों और सरकार के बीच इस मुददे के लेकर पांच दौर की बातचीत ख़त्म हो चुकी है, किसानों के प्रतिनिधियों ने गृह मंत्री से भी मुलाक़ात की, लेकिन अब तक कोई नतीजा नहीं निकल सका.

    फिलहाल प्रधानमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती है वोट बैंक के तौर पर बेहद अहम किसानों के मुद्दों का समाधान खोजना. और अगर आज के आंदोलन को देखा जाए तो ऐसा लगता है आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज़ रूप अख्तियार कर सकता है और सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

  10. बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर'

    बीबीसी हिंदी का डिजिटल बुलेटिन 'दिनभर', 13 दिसंबर 2020, सुनिए फ़ैसल मोहम्मद अली के साथ.

  11. किसानों की मांगें पूरी न होने पर एनडीए छोड़ देंगे: हनुमान बेनीवाल

    राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के संयोजक और नागौर से सांसद हनुमान सिंह बेनीवाल ने किसानों की मांगें पूरी न होने पर एनडीए छोड़ने की धमकी दी है.

    उन्होंने इस मामले को सुलझाने के लिए मोदी सरकार को सात दिनों का वक़्त दिया है.

    उनसे बात कर रही हैं बीबीसी संवाददाता देवीना गुप्ता. वीडियो: गुलशन कुमार

  12. कल किसान करेंगे एक दिन का अनशन

    सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसान आंदोलन के नेताओं का कहना है कि दिसंबर 14 को सवेरे 8 से लेकर शाम 5 बजे तक किसान एक दिन की भूख हड़ताल करेंगे.

    किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि सोमवार 14 दिसंबर को देश के सभी जिला मुख्यालयों पर भी किसान धरना प्रदर्शन करेंगे.

    किसान नेता शिव कुमार कक्का ने कहा है लहम एक बार फिर बताना चाहते हैं कि तीनों कृषि क़ानूनों को रद्द करने की अपनी मांग पर हम अडिग हैं.

  13. ब्रेकिंग न्यूज़, बीजेपी नेता जेपी नड्डा कोरोना पॉज़िटिव पाए गए

    बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बताया है कि वो कोरोना पॉज़िटिव हैं और डॉक्टरों की सलाह पर फिलहाल होम आइसोलेशन में हैं.

    सोशल मीडिया पर उन्होंने कहा उन्होंने कहा “कोरोना के शुरूआती लक्षण दिखने पर मैंने टेस्ट करवाया और रिपोर्ट पॉजिटिव आई है.”

  14. किसान आंदोलन में शामिल महिला किसानों का क्या है कहना

    गाज़ीपुर बॉर्डर पर कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रही महिला किसानों और आंदोलनकारियों से बात कर रहे हैं बीबीसी के सहयोगी पत्रकार समीरात्मज मिश्र.

    कैमरे के साथ हैं बीबीसी संवाददाता बुशरा शेख़.

    आप इस वीडियो को यूट्यूब पर भी देख सकते हैं.

  15. किसानों और सरकार के बीच गतिरोध जारी

    किसानों और सरकार के बीच गतिरोध नए कृषि कानूनों को लेकर गतिरोध जारी है.

    आज केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र तोमर और मंत्री सोम प्रकाश ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है.

    दिल्ली की सीमाओं पर चल रहे किसानों के विरोध प्रदर्शन का आज 18वां दिन है और किसान दिल्ली-जयपुर हाइवे ब्लॉक करने की धमकी दे रहे हैं.

    किसान संगठनों ने 14 दिसंबर को सिंघु बॉर्डर पर सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक भूख हड़ताल करने की बात कही है.

  16. ब्रेकिंग न्यूज़, सरकारें जनता से बनती हैं, जनता सरकारों से नहीं बनतीं- केजरीवाल

    दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि किसानों के समर्थन में वो सोमवार को एक दिन का उपवास रखेंगे.

    उन्होंने कहा कि किसानों ने 14 दिसंबर को एक दिन का उपवास रखने की अपील की है कि सभी उनके समर्थन में एक दिन का उपवास रखें.

    उन्होंने पार्टी कार्यकर्ता और देश के सभी लोगों को किसानों की मांगों के समर्थन में सोमवार को एक दिन का उपवास रखने के लिए कहा.

    उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार से गुज़ारिश की है कि वो अहंकार छोड़े और किसानों की मांगों को मंज़ूर करे.

    उन्होंने कहा, “सरकारें जनता से बनती हैं, जनता सरकारों से नहीं बनतीं. अगर जनता इन तीनों क़ानूनों को पसंद नहीं करती को इन्हें तुरंत ख़त्म किया जाए और एमएसपी को लेकर किसानों की फसलें खरीदने की गारंटी क़ानून बनाएं और किसानों की मांगों के तुरंत मंज़ूर करे.“

    'आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है'

    अरविंद केजरीवाल ने कहा कि किसान आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है, ऐसा नहीं होना चाहिए.

    उन्होंने कहा, “पिछले कुछ दिनों से केंद्र सरकार के कुछ मंत्री और बीजेपी के कुछ लोग बार-बार कह रहे हैं कि ये आंदोलन देशद्रोहियों का है.”

    उन्होंने सवाल कया, ”मैं उनसे पूछना चाहता हूं हज़ारों पूर्वसैनिक किसानों के साथ बैठे हुए हैं. हज़ारों सेनिक घरों में बैठ कर किसानों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. क्या वो देशद्रोही हैं? देश विदेश में खेले कई खिलाड़ी आज किसानों के लिए प्रार्थना कर रहे हैं, क्या वो देशद्रोही हैं? कई डॉक्टर, कई व्यापारी उन्हें समर्थन दे रहे हैं, क्या वो सब देशद्रोही हैं?”

    उन्होंने कहा, “बीते दिनों मैंने कुछ लोगों से बात की उन्होंने मुझे बताया कि ये बिल ख़तरनाक हैं, क्योंकि इनमें लिखा है कि कोई व्यक्ति जितना चाहे अनाज की जमाखोरी कर सकता है.“

    “अब तक जो ये क़ानून हैं उनके अनुसार इस देश के बीतर जमाखोरी करना अपराध है और ऐसा करने पर सज़ा होती थी, क्योंकि जमाखोरी से महंगाई बढ़ेगी. लेकिन अब इस क़ानून के अनुसार जमाखोरी करने पर कोई सज़ा नहीं होगी और जब तक महंगाई दोगुनी न हो जाए जमाखोरी पर पाबंदी नहीं लगाई जाएगी.“

    उन्होंने कहा कि कोई इस ग़लतफहमी में न रहे कि चंद किसान ही इन क़ानूनों के ख़िलाफ़ हैं.

  17. तेज़ हो रहा है किसान आंदोलन

    कृषि क़ानूनों के मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटेकर और अन्य प्रदर्शनकारियों से बात कर रही हैं बीबीसी संवाददाता देवीना गुप्ता.

    कैमरे के साथ हैं गुलशन कुमार.

    आप इस वीडियो को यूट्यूब पर भी देख सकते हैं.

  18. देश को तोड़ने की कोशिश होगी तो जवाब दिया जाएगा- रविशंकर प्रसाद

    केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि किसान आंदोलन की आड़ में देश को तोड़ने की कोशिश की जाएगी को उसके ख़िलाफ़ सख्त कदम उठाए जाएंगे.

    साथ ही उन्होंने कहा कि "जो जानेमाने लोग आज किसान आंदोलन में शामिल हो रहे हैं कि वो केवल क़ानून के विरोध करने किए ऐसा कर रहे हैं. पहले वो इस तरह की सुधारों की ज़रूरत से सहमत थे. लवेकिन हम लोगों के पास जाएंगे और उन्हें इस क़ानून के फायदे बताएंगे.“

  19. नोएडा के पास चिल्ला बॉर्डर पर किसानों से बातचीत

    किसान आंदोलन दिन पर दिन व्यापक रूप ले रहा है. नोएडा के पास चिल्ला बॉर्डर पर किसानों से बात कर रहे हैं बीबीसी के सहयोगी पत्रकार समीरात्मज मिश्र.

    कैमरा सँभाल रही हैं बुशरा शेख़.

  20. किसानों के कंधों पर बंदूक रखकर देश की एकता को चुनौती दी जा रही है- योगी आदित्यनाथ

    उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि किसानों के कंधों पर बंदूक रखकर भारत की एकता और अखंडता को चुनौती दी जा रही है.

    उन्होंने ये भी कहा कि समाधान संवाद से होगा संघर्ष से नहीं.

    मेरठ में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि, “किसान भाईयों के कंधों पर बंदूक रखकर देश की सुरक्षा में सेंध लगाने का कार्य किया जा रहा है. ये स्वीकार्य नहीं हो सकता है.”

    उन्होंने कहा, “जिन्हें किसान की समृद्धि और उसकी प्रगति से आपत्ति है वही लोग गुमराह करने के लिए नए-नए शगूफे छोड़ रहे हैं. अब तो उन्होंने नई शर्त भी जोड़ दिए हैं. जो भारत के टुकड़े-टुकड़े करने के लिए नारेबाज़ी करते थे आज उनके द्वारा कहा जा रहा है जब पुलिस ने उनको जेल में बंद किया तो कहा जा रहा है कि उनको छोड़ो.“

    “जो भारत विरोधी कामों में लिप्त हैं एकता अखंडता को नुकसान पहुंचाने के आदी है, दंगा भड़काने के षडयंत्र में जिनके नाम सामने आए हैं आज उनकी पैरवी हो रही है. “

    उन्होंने कहा कि सरकार और किसानों के बीच बातचीत जारी रहनी चाहिए और इसके लिए किसानों को आगे आना पड़ेगा.

    उन्होंने कहा, “देश के विरोध में काम करने वालों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार होना होगा. लेकिन हम लोकतंत्र में हैं हमें शासन के साथ संवाद कर रास्ता निकालना होगा. समाधान संवाद से होगा न कि संघर्ष से और इसके लिए किसानों को आगे आना पड़ेगा.“

    उन्होंने कहा, “मोदी जी ने यही तो कहा है कि किसान कहीं और अपनी फसल बेचना चाहता है तो उसे इसके लिए पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए. किसान अपनी फसल का मालिक होगा न कि कोई और. कुछ लोगों को इसी से परेशानी है कि किसान इस तरह की कार्यों से कैसे जुड़ सकता है. किसान अन्नदाता है और वही तय करेगा कि वो अपनी फसल किसे बेचेगा, उस पर न मंडी के भीतर न बाहर कोई टैक्स लगेगा.“

    “मोदी ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था.सरकार ने सीधे किसान के खाते में पैसे दिए हैं. लोगों का कहना था कि कोरोना काल में ये रुकेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ.“