दिलनवाज़ पाशा बीबीसी संवाददाता, दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर से
दिल्ली को हरियाणा से जोड़ने वाले सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस
और हरियाणा पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए चार स्तर का बैरिकेड लगाया है. सबसे पहले
कंक्रीट के स्लैब हैं, फिर कंटीली तारें हैं, उनके पीछे हथियारबंद जवान तैनात खड़े हैं.
इनके पीछे पानी की बौछार करने वाले वाहन और उनके भी पीछे रेत लदे ट्रक खड़े हैं.
पहली नज़र में ये इंतेज़ाम अभेद्य लगते हैं. लेकिन पंजाब से
दिल्ली की ओर कूच करने वाले किसान इन्हें पार करने पर तुले हैं. ट्रैक्टर ट्रालियों, ट्रकों और
गाड़ियों में भर-भर कर आ रहे किसानों ने यहां पहुंचने से पहले हरियाणा में लगाए गए
ऐसे ही बैरिकेडों को या तो तोड़ दिया है या बाई-पास कर दिया है.
किसानों के इस प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि वो दिल्ली
पहुंचकर अपनी बात रखे बिना वापस नहीं लौटेंगे.
26 साल के गोल्डी बाजवा पंजाब के शंभू से इस रैली में शामिल
हुए हैं. वो कहते हैं, 'मैंने बीए किया है और मुझे कोई नौकरी नहीं मिली. पहले मेरे दादा
खेती करते थे, फिर मेरे पिता ने खेती की अब मैं भी खेती ही कर रहा हूं. हमारे
परिवार के पांच लोगों का ख़र्च खेती से ही चलता है. हमारे पास नौकरी पहले से ही नहीं
है, अगर प्राइवेट सेक्टर को ज़मीन देकर खेती भी हमसे ले ली तो हम
अपना पेट तक नहीं भर पाएंगे.'
गोल्डी कहते हैं, 'हम दिल्ली जाएंगे, जहां तक
हमसे जाया जाएगा, हम जाएंगे, हम अपनी आवाज़ सरकार तक पहुंचाना चाहते
हैं. सरकार कह रही है कि हमने जो किया है सही किया है, सरकार हमारे
लिए काम धंधों का इंतेज़ाम कर दे, हम अपने घर लौट जाएंगे.'
गोल्डी शादीशुदा हैं और उनका एक बच्चा भी है. सर्दी के मौसम
में वो अपने परिवार को छोड़कर यहां आए हैं. गोल्डी कहते हैं, 'अगर हमारे
लिए हालात ठीक होते तो हम इतनी ठंडी रात में सड़क पर ना पड़े होते. हमारे पास अब प्रदर्शन
करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.'
बीती रात किसानों ने पानीपत टोल बूथ पर डेरा डाल दिया. गोल्डी
जैसे सैकड़ों नौजवान किसानों के इस मार्च में शामिल हैं. अधिकतर नौजवानों का यही कहना
है कि उनके पास करने के लिए कोई काम नहीं है और अब उनकी अपनी ज़मीन पर भी सरकार की
नज़र है.
जसवीर जैनपुर पानीपत से ही धरने में शामिल हुए हैं. वो गन्ना
संघर्ष समिति से जुड़े हैं. जसवीर कहते हैं, 'सरकार ने किसानों की सुने बिना तीन काले
क़ानून उन पर थोप दिए हैं. जब तक ये क़ानून वापस नहीं लिए जाएंगे, किसानों
का ग़ुस्सा बढ़ता ही जाएगा. हम दिल्ली पहुंचे बिना मानेंगे नहीं.'
सैकड़ों ट्रालियां धीमी रफ़्तार से दिल्ली की ओर बढ़ रहीं थीं.
इनके आगे-आगे छोटे ट्रक और गाड़ियां चल रहीं थीं. कुछ प्रदर्शनकारी मोटरसाइकिलों पर
भी सवार थे.
रास्ते में जगह-जगह हरियाणा पुलिस ने बैरिकेड लगा रखे थे. कई
जगह सड़क को खोदकर मिट्टी डाल दी गई थी तो कई जगह हाइवे के पुल बनाने के लिए तैयार
किए गए सीमेंट के स्लैब सड़क पर रखकर रास्ता रोक दिया गया था.
लेकिन ये रुकावटें किसानों को रोकने वाली नहीं थीं. प्रदर्शनकारियों
ने कई जगह सीमेंट के स्लैब को हटाकर बैरिकेड तोड़ दिए तो कई जगह हाईवे से सटें गांवों
के कच्चे-पक्के रास्तों से आगे बढ़ने का रास्ता बना लिया.
किसानों को दिल्ली आने से रोकने के लिए पुलिस ने नेशनल हाइवे
44 को पूरी तरह से जाम कर दिया है. इसकी वजह से हाइवे से गुज़र रहे ट्रकों और दूसरे
वाहनों को भी ख़ासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
एक प्रदर्शनकारी नौजवान कहता है, 'किसान तो
अपने रास्ते आगे बढ़ रहे हैं, रुकावटें सरकार डाल रही है. कहीं सड़क
खोद दी है तो कहीं रेत से भरे ट्रक खड़े कर दिए हैं, ताकि आम जनता को लगे कि किसानों की वजह
से परेशानी हो रही है. लेकिन लोग समझदार हैं, वो जानते हैं कि इस देश का किसान आम जनता
को परेशान नहीं करेगा.'
दिल्ली कूच कर रहे किसानों ने आगे न बढ़ने देने की स्थिति में
सड़क पर ही डेरा डालने के इंतेज़ाम किए हैं. युवा किसानों का एक दल अंबाला से एसयूवी
कार में आगे बढ़ रहा है. कार के पीछे इस दल ने छोटी ट्रॉली बांध रखी है जिसमें खाने
पीने के सामान के अलावा दो-चार लोगों के सोने की व्यवस्था भी की गई है.
ऐसी दर्जनों गाड़ियां इस प्रदर्शन का हिस्सा हैं. गाड़ी चला
रहा एक युवा कहता है, 'दिल्ली की सरकार अभी हम पंजाबियों के जज़्बे से वाक़िफ़ नहीं
है. सरकार को भी पता चल जाएगा कि हम पंजाबी क्या चीज़ हैं. अब हम डटने के लिए आगे बढ़
रहे हैं, हटने के लिए नहीं.'
रास्ते में राईं बैरीकेड पर किसानों ने कुछ सीमेंट के स्लैब
तोड़ दिए. लेकिन पुल बनाने के लिए तैयार किए गए कई टनों के स्बैल को वो हिला ना सके.
यहां पुलिस ने पानी की बौछार करने की तैयारी की तो किसान हाइवे को बाई-पास कर दिल्ली
की ओर आगे बढ़ गए.
सुबह करीब चार बजे हरियाणा सिंघू बार्डर पर तैनात सीआरपीएफ़
और दिल्ली पुलिस के जवान ऊंघ रहे थे. कैमरा देखते ही वो सावधान होने की कोशिश करते
हैं.
मुझे पानीपत में मिले एक बुज़ुर्ग किसान
नेता के शब्द याद आ जाते हैं जो कह रहे थे, 'दिल्ली वालों सावधान हम आ रहे हैं.'