लाठी-पानी-आँसू गैस खाकर दिल्ली पहुँचे किसान, 'भ्रम' दूर करने को तैयार सरकार
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लाइव कवरेज
लाठी-पानी-आँसू गैस खाकर दिल्ली पहुँचे किसान, 'भ्रम' दूर करने को तैयार सरकार
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तीन दिनों तक लगातार मार्च करते, कँपकँपाती सर्दी में पानी
की बौंछारे झेलते, लाठियों की मार और आँसू गैस के गोलों का सामना करते, आख़िरकार पंजाब और
हरियाणा से बड़ी संख्या में किसानों का समूह देश की राजधानी दिल्ली पहुँच गया है.
ये किसान केंद्र सरकार के नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे
हैं और सरकार से उनकी चिंता पर ग़ौर करने की अपील कर रहे हैं.
सरकार ने बैरिकेडिंग लगाकर
और भारी सुरक्षाबल तैनात करके किसानों के जत्थे को रोकने की तमाम कोशिशें की लेकिन
आख़िरकार वो दिल्ली तक पहुँचने में कामयाब रहे.
किसानों को दिल्ली में कुछ तय जगहों पर प्रदर्शन करने की इजाज़त
इसलिए भी मिल सकी क्योंकि आम आदमी पार्टी की सरकार ने कुछ स्टेडियमों को अस्थायी जेल
बनाने की केंद्र सरकार की माँग को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि किसानों का प्रदर्शन पूरी तरह
शांतिपूर्ण हैं और उनकी माँगे जायज़ हैं.
किसान नेताओं से कई राउंड की बातचीत और सरकार से कई बार
विचार-विमर्श के बाद दिल्ली पुलिस ने बुराड़ी मैदान और निरंकारी मैदान में ‘शांतिपूर्ण प्रदर्शन’ की अनुमति दे दी
है.
इधर, केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास नक़्वी ने कहा है कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र
मोदी की सरकार किसानों के हितों के लिए समर्पित है, समर्पित थी और हमेशा
समर्पित रहेगी.’
उन्होंने कहा, “अगर किसानों को कुछ भी भ्रम है, तो सरकार के दरवाज़े बातचीत
के लिए हमेशा खुले हैं. हमने कांग्रेस की तरह नो एंट्री का बोर्ड नहीं लगाया है.’’
इससे पहले भारत के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था, “नये कृषि क़ानूनों
से किसानों के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे. क़ानूनों को लेकर अगर किसी में भ्रम
है, तो उस पर चर्चा करने
के लिए सभी किसान यूनियनों को तीन दिसंबर को दोबारा
बुलाया गया है.”
तोमर ने किसानों से आंदोलन स्थगित करने की अपील की थी.
दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर किसानों का डेरा
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लगभग दो दिन की यात्रा करके दिल्ली-हरियाणा
की सीमा तक पहुँचे पंजाब और हरियाणा के बहुत से किसानों ने सिंघु बॉर्डर पर ही
डेरा डाल लिया है, चूल्हे जल गये हैं और किसान वहीं खाना बना और खा रहे हैं.
समाचार एजेंसी एएनआई ने कुछ
तस्वीरें जारी की हैं जिनमें किसानों को हाइवे पर ही रोटियाँ बनाते देखा जा सकता
है.
‘दिल्ली चलो’मार्च में शामिल किसान, शुरुआत से ही
अपनी तैयारियों के बारे में बात करते हुए यह कहते रहे हैं कि ‘वो कई महीने का राशन साथ लेकर आये हैं और अगर आंदोलन लंबा चला तो भी उन्हें
कोई परेशानी नहीं.’
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शुक्रवार को दिन छिपने के बाद, कुछ किसानों ने प्रेस से बात करते हुए कहा कि “वो छह महीने का राशन साथ लाये हैं और वो तभी वापस लौटेंगे, जब केंद्र सरकार नये कृषि क़ानूनों में सुधार करेगी और उनकी माँगों को मानेगी.”
मार्च में शामिल किसानों को हालांकि दिल्ली पुलिस से बुराड़ी के एक मैदान में प्रदर्शन करने की अनुमति मिल चुकी है. लेकिन बहुत से किसानों का यह मत है कि वो माँगे पूरी ना होने तक सिंघु बॉर्डर पर ही डटे रहेंगे.
किसान आंदोलन में 'महिलाओं का नेतृत्व' करने वाली दादी
नये कृषि क़ानूनों का विरोध करने के लिए कई किसान पंजाब से दिल्ली पहुँच रहे हैं.
किसानों के इस मोर्चे में कई महिलाएं भी उनके साथ हैं.
इन महिलाओं का नेतृत्व 85 साल की एक बुज़ुर्ग महिला कर रही हैं.
बीबीसी पंजाबी की सहयोगी पत्रकार सुखचरन प्रीत ने इन सभी महिलाओं के साथ ख़ास बातचीत कर यह रिपोर्ट तैयार की है.
वीडियो कैप्शन, किसान आंदोलन की आवाज़ उठाने वाली दादी
किसान आंदोलन में पंजाब से क्यों आये हलवाई?
पंजाब से आंदोलन करने आये किसानों के साथ कई हलवाई भी आये हैं.
इन हलवाइयों का कहना है कि वो खाने पीने की पूरी व्यवस्था के साथ आये हैं. उनका कहना है कि वो प्रदर्शनकारी किसानों का आख़िरी वक़्त तक साथ देंगे.
देखिए बीबीसी की यह रिपोर्ट...
वीडियो कैप्शन, किसान आंदोलन में पंजाब से क्यों आए हलवाई?
किसान आंदोलन में उत्तर प्रदेश के किसान भी उतरे
पंजाब और हरियाणा से दिल्ली पहंचने की कोशिश कर रहे किसानों का प्रदर्शन लगातार जारी है.
ये तमाम किसान केंद्र सरकार की तरफ से लाए गए नए कृषि क़ानूनों का विरोध कर रहे हैं.
इन किसानों का साथ देने के लिए अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान भी आ रहे हैं.
उनके साथ बातचीत की बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव ने.
वीडियो कैप्शन, किसान आंदोलन में यूपी के किसान भी उतरे
सुशील कुमार मोदी होंगे बिहार से बीजेपी के राज्यसभा उम्मीदवार
बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को बीजेपी ने बिहार से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है.
बिहार से राज्यसभा की एक सीट के लिए उप-चुनाव होने वाले हैं.
पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के निधन से राज्यसभा की सीट ख़ाली हुई है.
14 दिसंबर को इस सीट के लिए चुनाव होगा. बीजेपी ने राज्यसभा की सीट एलजीपी को नहीं देकर भी एक संकेत दिया है.
बिहार विधानसभा चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी ने एनडीए से अलग होकर चुनाव लड़ा था और एलजेपी के अध्यक्ष चिराग पासवान ने पूरे चुनाव प्रचार के दौरान नीतीश कुमार को निशाना बनाया था.
लेकिन एनडीए की जीत के बाद सबकी निगाहें इस ओर थीं कि आख़िर रामविलास पासवान की मौत के बाद ख़ाली हुई राज्यसभा सीट चिराग पासवान की पार्टी को मिलेगी या फिर नीतीश के दबाव के कारण बीजेपी उन्हें नहीं देगी.
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आख़िरकरा बीजेपी केंद्रीय कार्यालय ने शुक्रवार को इसकी घोषणा कर दी कि सुशील कुमार मोदी उम्मीदवार होंगे.
सुशील कुमार मोदी पिछले 15 सालों से बिहार के उप-मुख्यमंत्री रहे हैं, लेकिन इस बार एनडीए सरकार में उन्हें बीजेपी ने उप-मुख्यमंत्री नहीं बनाया.
सुशील कुमार को उप-मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाने के बाद से ही इस तरह की अटकलें लगाईं जा रहीं थीं कि उन्हें राज्यसभा भेजकर मोदी मंत्रिमंडल में कोई जगह मिल सकती है.
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‘दिल्ली चलो’ मार्च में शामिल हरियाणा और पंजाब
के किसान दिल्ली के जिस निरंकारी समागम मैदान में प्रदर्शन जारी रखने वाले हैं, अब
से कुछ देर पहले दिल्ली सरकार के कई आला अधिकारी उस मैदान का मुआयना करने पहुँचे.
अधिकारियों के साथ आम आदमी पार्टी
के नेता राघव चड्ढा भी थे.
राघव ने कहा, “बुराड़ी के निरंकारी समागम ग्राउंड में जलापूर्ति की व्यवस्था के लिए हम यहाँ
आये. दिल्ली जल बोर्ड के तमाम अधिकारी यहाँ पहुँचे हैं. हरियाणा और पंजाब से जितने
भी किसान अपना विरोध दर्ज कराने दिल्ली आ रहे हैं, उनको कोई असुविधा ना हो, इसलिए यहाँ निरीक्षण किया जा रहा है.”
उन्होंने कहा कि ‘अरविंद केजरीवाल की सरकार किसानों के साथ है. हम मानते हैं
कि उनकी माँगें जायज़ हैं. दिल्ली की सरकार किसानों का ध्यान रखेगी.’
कृषि क़ानूनों से जुड़े 'भ्रम दूर करने को' तैयार मोदी सरकार
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केंद्रीय मंत्री मुख़्तार अब्बास
नक़वी ने कहा है कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार किसानों के हितों
के लिए समर्पित है, समर्पित थी और हमेशा समर्पित रहेगी.’
उनका कहना है कि ‘अगर किसानों को कुछ भी भ्रम है, तो सरकार के दरवाज़े बातचीत
के लिए हमेशा खुले हैं. हमने कांग्रेस की तरह नो एंट्री का बोर्ड नहीं लगाया है.’
इससे पहले भारत के कृषि मंत्री
नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था, “नये कृषि क़ानूनों से किसानों के
जीवन में क्रांतिकारी बदलाव आएंगे. क़ानूनों को लेकर अगर किसी में भ्रम है, तो उस
पर चर्चा करने के लिए सभी किसान यूनियनों को 3 दिसंबर को दोबारा बुलाया गया है.”
तोमर ने किसानों से आंदोलन स्थगित
करने की अपील की थी.
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भारत की जीडीपी: दूसरी तिमाही में कैसा रहा हाल?
कोरोना वायरस संकट के बाद 27 नवंबर को दूसरी बार जीडीपी ग्रोथ के आंकड़े आ गये हैं.
वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में ग्रोथ 23.9% नेगेटिव में रही थी, जिसके मुक़ाबले दूसरी तिमाही में ग्रोथ रिकवर होकर -7.5% रही है.
हरियाणा पुलिस ने खोला पंजाब से लगा शंभू बॉर्डर
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हरियाणा-पंजाब की सीमा पर पड़ने
वाले शंभू बॉर्डर से हरियाणा पुलिस ने अपने बैरिकेड हटा लिये हैं.
किसानों को दिल्ली में एंट्री की
इजाज़त मिलने के बाद हरियाणा सरकार ने यह निर्णय लिया है.
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में
अंबाला (हरियाणा) के एसपी राजेश कालिया ने कहा, “हमें बॉर्डर खोलने के आदेश मिल चुके हैं. हमने अंबाला में शंभू बॉर्डर को खोल दिया है. बैरिकेड हटा दिये हैं. इसके बाद ट्रैफ़िक खुल जायेगा. अब हमारा काम ट्रैफ़िक को कंट्रोल करना है. अब किसी भी किसान को रोका नहीं जाएगा.”
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हुड्डा की अपील – ‘हरियाणा के लोग किसानों की हर संभव मदद करें’
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हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री और
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भुपिंदर सिंह हुड्डा ने हरियाणा के लोगों से अपील की है
कि ‘वो किसानों की हर संभव मदद करें, चाहे खाने-पीने का
प्रबंध हो, उपचार-डॉक्टरी मदद हो, रुकने-ठहरने के लिए जगह की बात हो, लोग किसानों
की मदद के लिए आगे आयें.’
ट्विटर पर हुड्डा ने लिखा है, "हम किसानों के साथ हैं."
हुड्डा ने यह भी कहा है कि ‘केंद्र सरकार पहले ही किसानों से बातचीत में बहुत
देरी कर चुकी है. मोदी सरकार को किसानों से बात करनी चाहिए. अगर पहले चरण की
बातचीत बेनतीजा हो भी गई, तो उन्हें दोबारा बातचीत का प्रयास करना चाहिए.’
कांग्रेस नेता दीपेंदर सिंह हुड्डा
ने भी किसानों के पक्ष में एक बयान जारी किया है.
उन्होंने कहा है कि “देश में कोई जेल ऐसी नहीं बनी है जिसमें किसानों को क़ैद
करा जा सके. किसान जायज माँग के लिये शांतिप्रिय तरीक़े से केंद्र सरकार के द्वार पर
पहुँचे हैं. दुर्भाग्य ये है कि बातचीत की बजाय सरकार विशेषकर हरियाणा सरकार ने किसान
को दबाने के कुप्रयास किये. आग्रह है कि सरकार बातचीत करके एमएसपी का समाधान दे.”
दिल्ली में किसानों की एंट्री, पर कुछ समूहों का दिल्ली को बाहर से घेरने का इरादा
हरियाणा और पंजाब से आये किसानों
ने दिल्ली में प्रदर्शन करने देने के केंद्र सरकार के निर्णय का स्वागत किया है.
हरियाणा-दिल्ली के टिकरी बॉर्डर से
किसानों के कई जत्थे दिल्ली में दाख़िल हुए हैं. ये किसान बुराड़ी मैदान की ओर बढ़
रहे हैं.
इन जत्थों में शामिल किसानों ने
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा, “हम 10 से ज़्यादा
बैरिकेड पार करके दिल्ली पहुँचे हैं. प्रशासन ने हमें दिल्ली में प्रदर्शन करने की
अनुमति दी, हम इस निर्णय का स्वागत करते हैं. हम शांति से और ख़ुशी-ख़ुशी इस
मुद्दे का हल चाहते हैं.”
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मगर सिंघु बॉर्डर पर किसान अब भी रुके हुए हैं. बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा भी सिंघु बॉर्डर पर किसानों के बीच मौजूद हैं.
उन्होंने बताया कि सिंघु बॉर्डर पर कम से कम दस हज़ार किसान जमा हैं जिन्हें प्रशासन से आगे (दिल्ली) जाने की जानकारी मिल गई है. सिंघु बॉर्डर पर जमा किसानों के बीच यह चर्चा चल रही है कि वो वहीं जमे रहेंगे और दिल्ली को ब्लॉक करेंगे.
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मार्च में शामिल कुछ किसानों ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि ‘आगे जाकर किसी मैदान में बैठने का उनका इरादा नहीं है.’
सिंघु बॉर्डर पर शुक्रवार सुबह दिल्ली पुलिस ने किसानों पर आँसू गैस के गोले दाग़े थे. लेकिन फ़िलहाल स्थिति शांत है.
पाशा ने बताया कि सिंघु बॉर्डर पर अभी तक पुलिस ने बैरिकेड नहीं हटाया है. वहीं किसान छोटे-छोटे समूहों में बैठकर चर्चा कर रहे हैं और लाउड-स्पीकरों से कुछ लोग भाषण भी कर रहे हैं.
ब्रेकिंग न्यूज़, किसानों को दिल्ली में प्रदर्शन करने की इजाज़त मिली
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केंद्र सरकार के समक्ष अपनी माँगों
को रखने के लिए ‘दिल्ली चलो’ मार्च में शामिल हरियाणा और पंजाब
के किसानों को देश की राजधानी में प्रदर्शन करने की इजाज़त मिल गई है. किसान
संगठनों ने इसकी पुष्टि की है.
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता ईश सिंघल
ने बताया है कि “किसान नेताओं से बातचीत के बाद, दिल्ली पुलिस ने किसानों को दिल्ली में आकर
प्रदर्शन करने की इजाज़त दे दी है. किसान दिल्ली के बुराड़ी स्थित निरंकारी समागम
ग्राउंड में शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर सकते हैं. हम किसानों से अपील करते हैं
कि वो शांति व्यवस्था को भंग ना होने दें ताकि औरों को परेशानी ना हो.”
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दिल्ली पुलिस के कमिश्नर ने भी किसानों से अपील की है कि वो शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन करें.
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिल्ली पुलिस के निर्णय का स्वागत किया है.
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा, “केंद्र सरकार ने किसानों को दिल्ली में दाख़िल होने की अनुमति देकर अच्छा निर्णय लिया है. अब उन्हें किसानों से बात भी करनी चाहिए ताकि उनके मुद्दों को समझा जा सके और किसान तबके की परेशानियाँ ना बढ़ें.”
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इससे पहले दिल्ली-हरियाणा के सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस और किसानों के बीच झड़प की ख़बरें आयी थीं.
मार्च में शामिल किसानों ने बीबीसी को बताया कि ‘पुलिस ने पहले उनसे शांतिपूर्वक ढंग से खड़े रहने को कहा, फिर कुछ देर बाद उन पर आँसू गैस के गोले दागे.’
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने इस बीच कहा है कि ‘केंद्र सरकार को किसानों की एमएसपी की माँग मान लेनी चाहिए.’
उधर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर
लाल खट्टर ने कहा है कि ‘केंद्र सरकार हमेशा से बातचीत के
लिए तैयार थी और हल भी बातचीत से ही निकलेगा, प्रदर्शन करने से नहीं.’
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दिल्ली की सीमा पर पहुँचे किसानों ने क्या कहा?
अपनी माँगों को लेकर
पंजाब और हरियाणा से दिल्ली आ रहे किसानों को दिल्ली-हरियाणा की सीमा पर रोका गया. इससे नाराज़ किसान सिंघु
बॉर्डर पर ही धरने पर बैठ गये. ग्राउड से पूरे माहौल का ब्यौरा दिया बीबीसी
संवाददाता दिलनवाज़ पाशा और पीयूष नागपाल ने.
केंद्र सरकार से बात करें, आंदोलन कोई ज़रिया नहीं: मनोहर लाल खट्टर
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हरियाणा प्रशासन की ओर से किसानों को रोकने के लिए वॉटर
कैनन और आँसू गैस के इस्तेमाल के बीच अब प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ट्वीट कर किसानों से
आंदोलन ना करने की अपील की है.
उन्होंने ट्वीट में लिखा है, "केंद्र सरकार बातचीत के लिए हमेशा
तैयार है. मेरी सभी किसान भाइयों से अपील है कि अपने सभी जायज़ मुद्दों के लिए
केंद्र से सीधे बातचीत करें, आंदोलन इसका कोई ज़रिया नहीं है. बातचीत से ही इसका हल निकलेगा."
ब्रेकिंग न्यूज़, केजरीवाल सरकार ने नहीं दी नौ स्टेडियमों को जेल बनाने की इजाज़त
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किसानों के दिल्ली की ओर जारी मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने केजरीवाल सरकार
से नौ स्टेडियम को अस्थायी जेल में तब्दील करने की इजाज़त माँगी थी, मगर दिल्ली
सरकार ने पुलिस की इस माँग को ख़ारिज कर दिया है.
दिल्ली के गृह विभाग की
ओर से दिये गए जवाब में कहा गया है कि ''किसानों की माँगें जायज़ हैं. केंद्र सरकार को
किसानों की माँग तुरंत माननी चाहिए.''
इस जवाब में दिल्ली के गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने लिखा है कि ''किसानों को जेल में डालना इसका समाधान नहीं
है, इनका आंदोलन बिल्कुल अहिंसक है. अहिंसक तरीक़े से आंदोलन करना हर भारतीय का
संवैधानिक अधिकार है. इसके लिए उन्हें जेल में नहीं डाला जा सकता. इसलिए स्टेडियम
को जेल बनाने की दिल्ली पुलिस की इस माँग को दिल्ली सरकार नामंज़ूर करती है.''
कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा- 'केंद्र सरकार जल्द से जल्द किसानों से बात करे'
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पंजाब और हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर किसानों के ऊपर पानी
की बौछार और आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया है.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़, पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार
से अपील की है कि वो किसान संगठनों से जल्द से जल्द बातचीत शुरू करें ताकि दिल्ली
सीमा पर पैदा हो रहे तनाव को कम किया जा सके.
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हरियाणा के सिरसा में किसानों के एक समूह ने बैरिकेडिंग पार
कर लिया है.
समाचार एजेंसी एएनआई से एक किसान ने कहा, ‘’हम जो
भी करेंगे शांतिपूर्वक करेंगे, हम किसी भी इंसान को या संपत्ति को नुकसान नहीं
पहुँचाएंगे. अगर हमें महीने भर भी सड़कों पर रहना होगा तो रहेंगे, अगर हमें शहीद भी होना पड़ा तो हो जाएंगे‘’
सिंघु बॉर्डर पर किसानों को रोकने के लिए चलाए गए आंसू गैस
हरियाणा दिल्ली की हर सीमा पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, सिंघु बॉर्डर पर पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे हैं.
आंसू गैस के इस्तेमाल के कारण पूरे इलाके में धुआं फैल गया है.
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किसान प्रोटेस्टः बैरिकेड लांघ रात में कैसे आगे बढ़े किसान
दिलनवाज़ पाशा बीबीसी संवाददाता, दिल्ली-हरियाणा बॉर्डर से
दिल्ली को हरियाणा से जोड़ने वाले सिंघु बॉर्डर पर दिल्ली पुलिस
और हरियाणा पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए चार स्तर का बैरिकेड लगाया है. सबसे पहले
कंक्रीट के स्लैब हैं, फिर कंटीली तारें हैं, उनके पीछे हथियारबंद जवान तैनात खड़े हैं.
इनके पीछे पानी की बौछार करने वाले वाहन और उनके भी पीछे रेत लदे ट्रक खड़े हैं.
पहली नज़र में ये इंतेज़ाम अभेद्य लगते हैं. लेकिन पंजाब से
दिल्ली की ओर कूच करने वाले किसान इन्हें पार करने पर तुले हैं. ट्रैक्टर ट्रालियों, ट्रकों और
गाड़ियों में भर-भर कर आ रहे किसानों ने यहां पहुंचने से पहले हरियाणा में लगाए गए
ऐसे ही बैरिकेडों को या तो तोड़ दिया है या बाई-पास कर दिया है.
किसानों के इस प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि वो दिल्ली
पहुंचकर अपनी बात रखे बिना वापस नहीं लौटेंगे.
26 साल के गोल्डी बाजवा पंजाब के शंभू से इस रैली में शामिल
हुए हैं. वो कहते हैं, 'मैंने बीए किया है और मुझे कोई नौकरी नहीं मिली. पहले मेरे दादा
खेती करते थे, फिर मेरे पिता ने खेती की अब मैं भी खेती ही कर रहा हूं. हमारे
परिवार के पांच लोगों का ख़र्च खेती से ही चलता है. हमारे पास नौकरी पहले से ही नहीं
है, अगर प्राइवेट सेक्टर को ज़मीन देकर खेती भी हमसे ले ली तो हम
अपना पेट तक नहीं भर पाएंगे.'
गोल्डी कहते हैं, 'हम दिल्ली जाएंगे, जहां तक
हमसे जाया जाएगा, हम जाएंगे, हम अपनी आवाज़ सरकार तक पहुंचाना चाहते
हैं. सरकार कह रही है कि हमने जो किया है सही किया है, सरकार हमारे
लिए काम धंधों का इंतेज़ाम कर दे, हम अपने घर लौट जाएंगे.'
गोल्डी शादीशुदा हैं और उनका एक बच्चा भी है. सर्दी के मौसम
में वो अपने परिवार को छोड़कर यहां आए हैं. गोल्डी कहते हैं, 'अगर हमारे
लिए हालात ठीक होते तो हम इतनी ठंडी रात में सड़क पर ना पड़े होते. हमारे पास अब प्रदर्शन
करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है.'
बीती रात किसानों ने पानीपत टोल बूथ पर डेरा डाल दिया. गोल्डी
जैसे सैकड़ों नौजवान किसानों के इस मार्च में शामिल हैं. अधिकतर नौजवानों का यही कहना
है कि उनके पास करने के लिए कोई काम नहीं है और अब उनकी अपनी ज़मीन पर भी सरकार की
नज़र है.
जसवीर जैनपुर पानीपत से ही धरने में शामिल हुए हैं. वो गन्ना
संघर्ष समिति से जुड़े हैं. जसवीर कहते हैं, 'सरकार ने किसानों की सुने बिना तीन काले
क़ानून उन पर थोप दिए हैं. जब तक ये क़ानून वापस नहीं लिए जाएंगे, किसानों
का ग़ुस्सा बढ़ता ही जाएगा. हम दिल्ली पहुंचे बिना मानेंगे नहीं.'
सैकड़ों ट्रालियां धीमी रफ़्तार से दिल्ली की ओर बढ़ रहीं थीं.
इनके आगे-आगे छोटे ट्रक और गाड़ियां चल रहीं थीं. कुछ प्रदर्शनकारी मोटरसाइकिलों पर
भी सवार थे.
रास्ते में जगह-जगह हरियाणा पुलिस ने बैरिकेड लगा रखे थे. कई
जगह सड़क को खोदकर मिट्टी डाल दी गई थी तो कई जगह हाइवे के पुल बनाने के लिए तैयार
किए गए सीमेंट के स्लैब सड़क पर रखकर रास्ता रोक दिया गया था.
लेकिन ये रुकावटें किसानों को रोकने वाली नहीं थीं. प्रदर्शनकारियों
ने कई जगह सीमेंट के स्लैब को हटाकर बैरिकेड तोड़ दिए तो कई जगह हाईवे से सटें गांवों
के कच्चे-पक्के रास्तों से आगे बढ़ने का रास्ता बना लिया.
किसानों को दिल्ली आने से रोकने के लिए पुलिस ने नेशनल हाइवे
44 को पूरी तरह से जाम कर दिया है. इसकी वजह से हाइवे से गुज़र रहे ट्रकों और दूसरे
वाहनों को भी ख़ासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
एक प्रदर्शनकारी नौजवान कहता है, 'किसान तो
अपने रास्ते आगे बढ़ रहे हैं, रुकावटें सरकार डाल रही है. कहीं सड़क
खोद दी है तो कहीं रेत से भरे ट्रक खड़े कर दिए हैं, ताकि आम जनता को लगे कि किसानों की वजह
से परेशानी हो रही है. लेकिन लोग समझदार हैं, वो जानते हैं कि इस देश का किसान आम जनता
को परेशान नहीं करेगा.'
दिल्ली कूच कर रहे किसानों ने आगे न बढ़ने देने की स्थिति में
सड़क पर ही डेरा डालने के इंतेज़ाम किए हैं. युवा किसानों का एक दल अंबाला से एसयूवी
कार में आगे बढ़ रहा है. कार के पीछे इस दल ने छोटी ट्रॉली बांध रखी है जिसमें खाने
पीने के सामान के अलावा दो-चार लोगों के सोने की व्यवस्था भी की गई है.
ऐसी दर्जनों गाड़ियां इस प्रदर्शन का हिस्सा हैं. गाड़ी चला
रहा एक युवा कहता है, 'दिल्ली की सरकार अभी हम पंजाबियों के जज़्बे से वाक़िफ़ नहीं
है. सरकार को भी पता चल जाएगा कि हम पंजाबी क्या चीज़ हैं. अब हम डटने के लिए आगे बढ़
रहे हैं, हटने के लिए नहीं.'
रास्ते में राईं बैरीकेड पर किसानों ने कुछ सीमेंट के स्लैब
तोड़ दिए. लेकिन पुल बनाने के लिए तैयार किए गए कई टनों के स्बैल को वो हिला ना सके.
यहां पुलिस ने पानी की बौछार करने की तैयारी की तो किसान हाइवे को बाई-पास कर दिल्ली
की ओर आगे बढ़ गए.
सुबह करीब चार बजे हरियाणा सिंघू बार्डर पर तैनात सीआरपीएफ़
और दिल्ली पुलिस के जवान ऊंघ रहे थे. कैमरा देखते ही वो सावधान होने की कोशिश करते
हैं.
मुझे पानीपत में मिले एक बुज़ुर्ग किसान
नेता के शब्द याद आ जाते हैं जो कह रहे थे, 'दिल्ली वालों सावधान हम आ रहे हैं.'
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