दिलनवाज़ पाशा, समालखा (हरियाणा) से
पंजाब से दिल्ली की ओर कूच कर रहे किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने दिल्ली के सभी बाहरी बॉर्डर सील कर दिये हैं.
शाम क़रीब चार बजे दिल्ली पुलिस ने हरियाणा के हिसार की ओर जाने वाले हाईवे को टीकरी बॉर्डर के पास सील कर दिया. दोनों तरफ से ट्रैफ़िक को पूरी तरह रोक दिया गया.
वहीं दिल्ली से चंडीगढ़ की तरफ जाने वाले जीटी-करनाल रोड को भी सिंघू बार्डर पर पूरी तरह सील कर दिया है.
यहाँ पुलिस ट्रैफ़िक रोकने के लिए कंक्रीट के बैरीकेड इस्तेमाल किये हैं. साथ ही रेत से भरे ट्रक खड़े कर दिये गए हैं.
हाईवे पर भारी पुलिस बल तैनात
दिल्ली के केंद्रीय इलाक़े से लेकर सिंघू बॉर्डर तक रास्ते में कई जगह पुलिस के बैरिकेड हैं और भारी पुलिस बल तैनात हैं. सिंघू बार्डर से हरियाणा की ओर जाते हुए पुलिस ने ट्रैफ़िक को कई जगह डाइवर्ट किया है.
सोनीपत ज़िले के मूरथल में भी बैरिकेड लगाकर ट्रैफ़िक रोक दिया गया है. उधर करनाल में किसानों ने पुलिस के बैरिकेड तोड़कर दिल्ली की ओर कूच कर दिया है. इसी के मद्देनज़र हाईवे पर भारी पुलिस बल तैनात हैं और अलग-अलग कस्बों में ट्रैफ़िक को डाइवर्ट किया जा रहा है.
इसी रोड पर समालखा में शाम साढ़े पाँच बजे के क़रीब ट्रैफ़िक को हरियाणा पुलिस ने पूरी तरह रोक दिया.
समालखा में लंबा जाम लग गया है जिसमें अधिकतर भारी वाहन हैं. यहाँ आम लोगों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ड्यूटी से घर लौट रहीं दो युवतियाँ वाहन ना मिलने की वजह से अंधेरे में ही पैदल चली जा रहीं थीं.
इनमें से एक का कहना था, 'प्रशासन का ट्रैफ़िक थामते वक़्त उन लोगों का भी ध्यान रखना चाहिए जिन्हें अपने घर जाना है. मैं मेडिकल प्रोफ़ेशन में हूँ, छुट्टी भीं नहीं ले सकती.'
जाम में फंसे अधिकतर ड्राइवरों को ये नहीं पता था कि पुलिस ने वाहन क्यों रोके हैं.
कुछ लोग ज़रूर ये कह रहे हैं कि किसानों को रोकने के लिए सभी को परेशान नहीं करना चाहिए. शाम ढलते-ढलते परेशान ट्रक ड्राइवर आसपास खाने के ढाबे खोज रहे हैं.
पुलिस बैरिकेड पर मुस्तेदी से खड़ी है. हाइवे के आसपास कच्ची-पक्की सड़कों पर वाहन किसी तरह आगे बढ़ने का रास्ता खोज रहे हैं.
'बैरिकेड चाहे कितने मज़बूत हों, लांघ दिये जाएंगे'
किसान भले ही दिल्ली ना पहुँच पा रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ दिल्ली तक ज़रूर पहुँच गई है, और शायद यही वजह है कि सरकार ने किसानों को दिल्ली पहुँचने से रोकने की हरसंभव कोशिश की है.
कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि किसानों की माँग बहुत साधारण है, वो अपनी फ़सल की पूरी क़ीमत चाहते हैं. सरकार और कृषि पर काम करने वाले अर्थशास्त्रियों को सोचना होगा कि अब तक जो चलता रहा है वो आगे नहीं चलेगा.
किसानों का एक जत्था जिसमें क़रीब साठ वाहन हैं, करनाल से आगे बढ़ गया है. शाम साढ़े छह बजे ये करनाल से करीब पच्चीस किलोमीटर आगे था. जत्थे में शामिल किसान आंदोलनकारी परविंदर ने बीबीसी को बताया, 'करनाल के बाद हमें अभी कोई बैरिकेड नहीं मिला है, अगर आगे पुलिस का बैरिकेड मिला तो पार कर दिया जाएगा.'
भारतीय किसान यूनियन के नेता हरिंदर सिंह लखोवाल के मुताबिक़, जिस जत्थे में वो शामिल हैं वो करनाल पहुँचने वाला है.
लखोवाल कहते हैं, 'किसान दिल्ली पहुँचने से पहले नहीं रुकेंगे. बैरिकेड चाहे कितने मज़बूत हों, लांघ दिये जाएंगे.'