#FarmersProtest: न किसान पीछे हटे न पुलिस, माहौल तनावपूर्ण
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लाइव कवरेज
नहीं हिले किसान, सड़क पर काटी रात
कृषि क़ानूनों के विरोध में 'दिल्ली चलो' मार्च कर रहे किसान पुलिस की तमाम कोशिशों के बाद भी वापस नहीं लौटे. उन्होंने खुले में सड़क पर रात बिताई.
रॉबिनदीप सिंह नाम के एक किसान ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''हमारे पास एक महीने का राशन है. हमारे पास खाना बनाने के लिए स्टोव और बाकी चीज़ें हैं. हमारे पास ठंड से बचने के लिए कंबल भी है."
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नए कृषि क़ानूनों में ऐसा क्या है कि इतना विरोध हो रहा है?
आख़िर किसानों का एक बड़ा वर्ग केंद्र सरकार के नए कृषि क़ानूनों से इस क़दर क्यों ख़फ़ा है कि वो सड़कों पर आंदोलन करने उतर पड़ा है? इन क़ानूनों में क्या प्रावधान हैं?
किसान संगठनों का आरोप है कि नए क़ानून के लागू होते ही कृषि क्षेत्र भी पूँजीपतियों या कॉरपोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा और इसका नुक़सान किसानों को होगा.
नए कृषि क़ानूनों के बारे में पूरी जानकारी के लिए यहां क्लिक कीजिए.
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ब्रेकिंग न्यूज़, किसानों ने राईं बॉर्डर के पास बैरिकेड पार किया, भारी पुलिसबल तैनात
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बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा और पीयूष नागपाल ने बताया है कि दिल्ली से करीब 12-15 किलोमीटर दूर राईं बॉर्डर के पास किसानों के एक समूह ने बैरिकेड पार कर लिया है.
इलाके में भारी संख्या में पुलिसबल मौजूद है और हालात पर लगातार नज़र रखी जा रही है. किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए तीन स्तरीय बैरिकेडिंग की गई है और चप्पे-चप्पे पर पुलिस मौजूद है.
दिल्ली-चंडीगढ़ हाइवे के पास सिंघु बॉर्डर पर बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात है जिनमें सीआरपीएफ़ के जवान भी शामिल हैं.
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ब्रेकिंग न्यूज़, वीडियो: आधी रात के बाद भी न किसान पीछे हटे, न पुलिस
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आधी रात के बाद भी न किसान हट रहे हैं और न पुलिस. महौल लगातार तनावपूर्ण हो रहा है.
पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग कर रखी है लेकिन किसान जहाँ-जहाँ बैरिकेडिंग हटा सकते हैं, उन्होंने इसे हटा दिया है.
हालाँकि कई जगहों पर बहुत भारी बैरिकेडिंग है और किसान उसे नहीं हटा पाए हैं. इसके बावजूद वो लगातार नारे लगा रहे हैं और मार्च कर रहे हैं. पुलिस भी पूरी तरह चौकन्नी है.
दिल्ली सीमा से लगभग 15 किलोमीटर दूर राईं से बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा और पीयूष नागपाल प्रदर्शन का ताज़ा हाल बता रहे हैं.
पानी की बौछार और आँसू गैस झेलते किसान, सवाल पूछती तस्वीरें
राशन-पानी लेकर आए हैं किसान, दिल्ली रुकने का है इरादा
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हरियाणा और पंजाब से आए किसानों का विरोध प्रदर्शन कवर रहे बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा और पीयूष नागपाल ने बताया है कि किसान पूरी तैयारी से आए हैं.
किसान अगले कुछ दिनों के लिए राशन-पानी और ज़रूरी चीज़ें अपने साथ लेकर चले हैं और उनका दिल्ली रुकने का इरादा है. इधर, किसानों को दिल्ली पहुँचने से रोकने के लिए सरकार ने बड़े स्तर पर तैयारियाँ की है.
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वीडियो: पानी की बौछार और आँसू गैस के गोले: किसानों के साथ दिनभर क्या-क्या हुआ
नए कृषि क़ानूनों के विरोध में गुरुवार को बड़ी संख्या में किसानों ने दिल्ली की ओर मार्च किया.
सरकार की ओर से किसानों को रोकने की हरसंभव कोशिश की गई. फिर चाहे वो कड़कड़ाती सर्दी में उन पर पानी की बौछारें डालना हो, आँसू गैस का इस्तेमाल करना हो या फिर उनके रास्ते में बैरिकेड और कँटीले तार लगाना हो.
इस वीडियो रिपोर्ट में देखिए, मार्च कर रहे किसानों के साथ गुरुवार दिन भर क्या-क्या हुआ.
पानीपत पार करके दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं किसान
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हरियाणा के पानीपत में मौजूद बीबीसी संवाददाता दिलनवाज़ पाशा और पीयूष नागपाल ने अभी-अभी जानकारी दी है कि रोके जाने की तमाम कोशिशों के बावजूद विरोध प्रदर्शन करते किसानों के समूह पानीपत पार करते दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं.
बड़ी संख्या में किसान देर रात भी लगातार मार्च कर रहे हैं.
इधर, हरियाणा के डीजीपी मनोज यादव ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा है कि हरियाणा पुलिस किसानों के साथ 'काफ़ी संयमित' तरीके से पेश आई जबकि किसानों ने पुलिस पर हमला किया.
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ममता बनर्जी ने कहा- 'प्रदर्शनकारी किसानों के साथ जो हुआ, वो ग़लत'
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता
बनर्जी ने किसानों पर पुलिस कार्रवाई की आलोचना की है.
उन्होंने कहा कि 'केंद्र सरकार
किसानों के लोकतांत्रिक अधिकारों को उनसे छीन नहीं सकती.'
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा- 'सरकार किसानों के मुद्दे की गंभीरता समझे'
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राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक
गहलोत ने कहा है कि “एनडीए की जन विरोधी नीतियों के कारण समाज के कई तबक़े प्रदर्शन करने के लिए
बाहर आ चुके हैं. किसान भी उनके क्षेत्र में सरकार द्वारा लाये गये काले क़ानूनों
का विरोध कर रहे हैं. पर उनकी बात सुनने की जगह, सरकार उनसे दो-दो हाथ करना चाहती
है.”
ट्विटर पर उन्होंने लिखा, “सभी किसान संगठन इन काले
क़ानूनों के ख़िलाफ़ एक हुए हैं. इसलिए इस मुद्दे की गंभीरता को समझते हुए, सरकार
को बिना किसी इंतज़ार के उनसे बातचीत करनी चाहिए.”
ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा पुलिस ने किसानों से हाइवे नंबर 10 और 44 पर यात्रा ना करने की अपील की
हरियाणा के मुख्यमंत्री कार्यालय
ने यह सूचना दी है कि ‘हरियाणा पुलिस ने ‘दिल्ली चलो’अभियान में शामिल सभी नागरिकों से अपील
की है कि हरियाणा से दिल्ली में प्रवेश करने वाले नेशनल हाइवे नंबर-10 (हिसार-रोहतक-दिल्ली)
और नेशनल हाइवे नंबर-44 (अंबाला-पानीपत-दिल्ली) पर यात्रा करने से बचें, ताकि किसी
को भी परेशानी का सामना न करना पड़े.’
अखिलेश यादव ने किसानों पर हमले को बताया 'सरकारी आतंक'
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समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने हरियाणा की बीजेपी सरकार द्वारा किसान प्रदर्शनकारियों पर किये गये हमले को 'सरकारी आतंक' बताया है.
उन्होंने ट्विटर पर लिखा है, "आज ‘संविधान दिवस’ पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर घोर निंदनीय हमला हुआ है. भाजपा सरकार द्वारा किसानों पर हमला सरकारी आतंक का अति वीभत्स रूप है."
अखिलेश ने लिखा, "सरकार की विनाशकारी कृषि नीति के विरूद्ध अपना विरोध प्रकट करने के लिए अन्नदाता किसानों के ख़िलाफ़ भाजपा सरकार आँसू गैस व वॉटर कैनन जैसे हिंसक मनोवृति के साधनों से प्रहार कर रही है. घोर निंदनीय! अमीरों की पक्षधर भाजपा ग़रीब हलधर का दर्द क्या जाने!"
प्रदर्शनकारी किसानों के साथ बीजेपी सरकार के रवैये की सीपीआई ने की निंदा
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सीपीआई के महासचिव डी राजा ने कहा
है कि किसानों पर वॉटर कैनन चलाना, उन पर आँसू गैस के गोले दागना – बीजेपी के
किसान विरोधी चेहरे को बेनक़ाब करता है.
किसानों के प्रदर्शन पर क्या बोले कृषि मंत्री?
तस्वीरों में: किसानों का 'दिल्ली चलो' मार्च
पंजाब से शुरू हुए इस मार्च को हरियाणा राज्य की सीमा पर रोक दिया गया.
इस मार्च को रोके जाने के बाद यह हिंसक हो गया.
इस दौरान पुलिस ने किसान प्रदर्शनकारियों पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े.
किसानों के विरोध प्रदर्शन में पूरे दिन क्या-क्या हुआ?
किसान मार्च: कल एनसीआर से दिल्ली के लिए मेट्रो सेवाएं बाधित रहेंगी
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दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने यह
सूचना दी है कि शुक्रवार, 27 नवंबर को दिल्ली से एनसीआर के स्टेशनों के लिए मेट्रो
सेवाएं सामान्य रूप से रहेंगी, लेकिन सुरक्षा कारणों से एनसीआर के स्टेशनों से दिल्ली
आने के लिए मेट्रो सेवा बाधित रहेगी.
दिल्ली मेट्रो के अनुसार, यह निर्णय
दिल्ली पुलिस के सुझाव को ध्यान में रखकर लिया गया है.
बताया गया है कि यह निर्णय अगले
आदेश तक लागू रहेगा.
पानीपत में प्रदर्शनकारी किसानों से बीबीसी ने की बातचीत
किसानों का मार्च: हरियाणा पार कर रहे किसान, ग्राउंड पर कैसी है स्थिति?
दिलनवाज़ पाशा, समालखा (हरियाणा) से
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पंजाब से दिल्ली की ओर कूच कर रहे किसानों को रोकने के लिए पुलिस ने दिल्ली के सभी बाहरी बॉर्डर सील कर दिये हैं.
शाम क़रीब चार बजे दिल्ली पुलिस ने हरियाणा के हिसार की ओर जाने वाले हाईवे को टीकरी बॉर्डर के पास सील कर दिया. दोनों तरफ से ट्रैफ़िक को पूरी तरह रोक दिया गया.
वहीं दिल्ली से चंडीगढ़ की तरफ जाने वाले जीटी-करनाल रोड को भी सिंघू बार्डर पर पूरी तरह सील कर दिया है.
यहाँ पुलिस ट्रैफ़िक रोकने के लिए कंक्रीट के बैरीकेड इस्तेमाल किये हैं. साथ ही रेत से भरे ट्रक खड़े कर दिये गए हैं.
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हाईवे पर भारी पुलिस बल तैनात
दिल्ली के केंद्रीय इलाक़े से लेकर सिंघू बॉर्डर तक रास्ते में कई जगह पुलिस के बैरिकेड हैं और भारी पुलिस बल तैनात हैं. सिंघू बार्डर से हरियाणा की ओर जाते हुए पुलिस ने ट्रैफ़िक को कई जगह डाइवर्ट किया है.
सोनीपत ज़िले के मूरथल में भी बैरिकेड लगाकर ट्रैफ़िक रोक दिया गया है. उधर करनाल में किसानों ने पुलिस के बैरिकेड तोड़कर दिल्ली की ओर कूच कर दिया है. इसी के मद्देनज़र हाईवे पर भारी पुलिस बल तैनात हैं और अलग-अलग कस्बों में ट्रैफ़िक को डाइवर्ट किया जा रहा है.
इसी रोड पर समालखा में शाम साढ़े पाँच बजे के क़रीब ट्रैफ़िक को हरियाणा पुलिस ने पूरी तरह रोक दिया.
समालखा में लंबा जाम लग गया है जिसमें अधिकतर भारी वाहन हैं. यहाँ आम लोगों को काफ़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. ड्यूटी से घर लौट रहीं दो युवतियाँ वाहन ना मिलने की वजह से अंधेरे में ही पैदल चली जा रहीं थीं.
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इनमें से एक का कहना था, 'प्रशासन का ट्रैफ़िक थामते वक़्त उन लोगों का भी ध्यान रखना चाहिए जिन्हें अपने घर जाना है. मैं मेडिकल प्रोफ़ेशन में हूँ, छुट्टी भीं नहीं ले सकती.'
जाम में फंसे अधिकतर ड्राइवरों को ये नहीं पता था कि पुलिस ने वाहन क्यों रोके हैं.
कुछ लोग ज़रूर ये कह रहे हैं कि किसानों को रोकने के लिए सभी को परेशान नहीं करना चाहिए. शाम ढलते-ढलते परेशान ट्रक ड्राइवर आसपास खाने के ढाबे खोज रहे हैं.
पुलिस बैरिकेड पर मुस्तेदी से खड़ी है. हाइवे के आसपास कच्ची-पक्की सड़कों पर वाहन किसी तरह आगे बढ़ने का रास्ता खोज रहे हैं.
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'बैरिकेड चाहे कितने मज़बूत हों, लांघ दिये जाएंगे'
किसान भले ही दिल्ली ना पहुँच पा रहे हैं, लेकिन उनकी आवाज़ दिल्ली तक ज़रूर पहुँच गई है, और शायद यही वजह है कि सरकार ने किसानों को दिल्ली पहुँचने से रोकने की हरसंभव कोशिश की है.
कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि किसानों की माँग बहुत साधारण है, वो अपनी फ़सल की पूरी क़ीमत चाहते हैं. सरकार और कृषि पर काम करने वाले अर्थशास्त्रियों को सोचना होगा कि अब तक जो चलता रहा है वो आगे नहीं चलेगा.
किसानों का एक जत्था जिसमें क़रीब साठ वाहन हैं, करनाल से आगे बढ़ गया है. शाम साढ़े छह बजे ये करनाल से करीब पच्चीस किलोमीटर आगे था. जत्थे में शामिल किसान आंदोलनकारी परविंदर ने बीबीसी को बताया, 'करनाल के बाद हमें अभी कोई बैरिकेड नहीं मिला है, अगर आगे पुलिस का बैरिकेड मिला तो पार कर दिया जाएगा.'
भारतीय किसान यूनियन के नेता हरिंदर सिंह लखोवाल के मुताबिक़, जिस जत्थे में वो शामिल हैं वो करनाल पहुँचने वाला है.
लखोवाल कहते हैं, 'किसान दिल्ली पहुँचने से पहले नहीं रुकेंगे. बैरिकेड चाहे कितने मज़बूत हों, लांघ दिये जाएंगे.'
अकाली प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कहा, 'आज पंजाब का 26/11 है'
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शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और
पंजाब से सांसद सुखबीर सिंह बादल ने किसानों के ‘दिल्ली चलो’ मार्च पर ट्वीट किया है और हरियाणा सरकार द्वारा
किसानों के साथ किये गए सुलूक की उन्होंने निंदा की है.
ट्विटर पर उन्होंने लिखा, “आज पंजाब का 26/11 है. हम लोकतांत्रिक
ढंग से विरोध प्रदर्शन करने के अधिकार का दमन होते देख रहे हैं. अकाली दल हरियाणा
सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की निंदा करता है. केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार
किसानों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन को दबाना चाहती है.”
एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, “पानी की बौछारों से पंजाब के किसानों के अधिकारों की
लड़ाई को दबाया नहीं जा सकता. इससे प्रतिरोध और बढ़ेगा.”
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‘हरियाणा के किसान भी पंजाब के किसानों का साथ दें’
इससे पहले प्रेस से बात करते हुए सुखबीर सिंह बादल ने कहा था कि “मैं हरियाणा के किसानों से अपील करूंगा कि वो पंजाब के किसानों के समर्थन में आयें.”
बादल ने कहा, “किसान किसी भी राजनीतिक पार्टी के झंडे तले यह प्रदर्शन आयोजित नहीं करना चाहते. सभी पार्टियों से जुड़े किसान इस प्रदर्शन में शामिल हैं. सभी किसान नये कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ हैं.”
कैप्टन अमरिंदर सिंह की भूमिका पर सवाल
पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की भूमिका पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “सीएम का दबाव काफ़ी मायने रखता है. अगर सीएम चाहे, तो वो कई मामले सुलझा सकता है. केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए कैप्टन अमरिंदर सिंह को ख़ुद दिल्ली जाना चाहिए था.”
शिरोमणि अकाली दल भी अपने स्तर पर मोदी सरकार द्वारा लाये गये नये कृषि क़ानूनों की मुखालफ़त कर चुका है.
इन क़ानूनों से नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए केंद्र सरकार में मंत्री रहीं हरसिमरत कौर बादल ने अपने पद से इस्तीफ़ा भी दिया था.