कोरोना अपडेट्स: 20 सेकंड में किया जा सकता है कोरोना वायरस को ख़त्म

दुनिया भर से क्या है कोरोना संक्रमण को लेकर तमाम अपडेट्स और विश्लेषण.

लाइव कवरेज

  1. कोरोना वायरस के लक्षण क्या हैं और कैसे कर सकते हैं बचाव

  2. कोरोना संक्रमण हमारा यह लाइव पेज यहीं समाप्त हो रहा है. बीबीसी हिंदी पर शनिवार को भी कोरोना संक्रमण को लेकर तमाम अपडेट्स और विश्लेषण का सिलसिला जारी रहेगा, आप इसे इस लिंक पर देख सकते हैं.

  3. कोरोना के चलते लेबनान में लॉकडाउन, हॉन्गकॉन्ग में मुफ़्त टेस्ट की सुविधा

    कोरोना वायरस

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    कोरोना वायरस को लेकर शुक्रवार को जो कुछ दुनिया भर में हुआ है, उसकी प्रमुख बातें निम्न रहीं हैं-

    लेबनान में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले को देखते हुए दो सप्ताह का आशंकि लॉकडाउन लागू किया गया है. इसमें रात में क़र्फ्यू लागू किया गया है. चार अगस्त को बेरूत में हुए धमाके के बाद बेरूत की चिकित्सीय व्यवस्था चरमरा गई और उसके बाद से ही कोरोना संक्रमण के मामले दोगुनी रफ़्तार से बढ़े हैं.

    कीनिया की राजधानी नैरोबी के अधिकांश सार्वजनिक अस्पतालों के डॉक्टर हड़ताल पर चले गए हैं. ये डॉक्टर बकाए वेतन की भुगतान के साथ साथ कोरोना संक्रमण से सुरक्षात्मक उपकरणों की मांग कर रहे हैं.

    शुक्रवार को साउथ कोरिया, पोलैंड और स्लोवाकिया में एक दिन में सबसे ज़्यादा संक्रमण के मामले सामने आए हैं. साउथ कोरिया में 324, पोलैंड में 903 और स्लोवाकिया में 123 नए मामले मिले हैं. यूरोप के देशों ख़ासकर स्पेन और फ्रांस में भी कोरोना संक्रमण के मामलों में फिर से तेज़ी देखने को मिल रही है.

    अमरीका में बीते 24 घंटे के दौरान एक हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हुई है. कोरोना से मरने वालों की संख्या एक लाख 75 हज़ार तक पहुंच गई है. अमरीकी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन के मुताबिक अगले चार सप्ताह के दौरान अधिकतम 30 हज़ार लोगों की मौत हो सकती है.

    हॉन्गकॉन्ग एक सितंबर से अपने देश के सभी लोगों को यानी करीब 74 लाख की आबादी को मुफ्त में कोरोना टेस्ट मुहैया कर रहा है. हालांकि अभी यह तय नहीं है कि कितने लोग इस पेशकश का फायदा उठाकर अपना टेस्ट कराएंगे.

  4. अमरीका में डेंगू और ज़ीका वायरस से लड़ने के लिए छोड़े जाएंगे करोड़ों मच्छर

  5. बर्लिन में 40 से अधिक स्कूलों में दर्ज किए गए कोरोना के मामले

    कोरोना वायरस

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    जर्मनी की राजधानी बर्लिन में 40 से अधिक स्कूलों में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले दर्ज किए गए हैं. एक स्थानीय अख़बार के अनुसार दो सप्ताह पहले ही स्कूल खोले गए थे.

    अख़बार डेली बर्लिनर ज़ितुंग के अनुसार संक्रमण के ताज़ा मामलों के सामना आने के बाद दर्जनों शिक्षकों और सैंकड़ों छात्रों को क्वारंटीन में रखा गया है. बर्लिन में कुल 825 स्कूल हैं.

    अख़बार का कहना है कि “अधिकतर मामलों में केवल एक छात्र या शिक्षक ही संक्रमित हैं और अब तक स्कूल के भीतर कोरोना संक्रमण के मामले नहीं पाए गए हैं.”

    इस घटना के बाद जर्मनी में इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि ये वायरस कितनी तेज़ी से फैल सकता है और क्या इससे बचने के लिए जो सुरक्षात्मक उपाय किए जा रहे हैं वो काफी हैं.

    फिलहाल स्कूल आ रहे छात्रों के लिए कक्षा के बाहर, ब्रेक के दौरान और क्लासरूम में प्रवेश करते वक्त मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है. हालांकि कक्षा के भीतर पढ़ाई के दौरान उन्हें मास्क हटाने की इजाज़त है.

    जर्मनी में जुलाई के आख़िर के बाद से कोरोना संक्रमण के मामलों में तेज़ी दिखाई दे रही है. इसके लिए सरकारी अधिकारी छुट्टियों के बाद देश लौट रहे लोगों और सामाजिक तौर पर अधिक संख्या में लोगों के इकट्ठा होने को ज़िम्मेदार ठहराते हैं.

  6. 1 सितंबर से नेपाल शुरू करेगा अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार नेपाल सरकार के प्रवक्ता युवराज खातीवाड़ा ने कहा है कि कुछ प्रतिबंधों के साथ सितंबर की शुरूआत से नेपाल अंतरराष्ट्रीय विमान सेवा शुरु करेगा.

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  7. हरियाणा: शनिवार, रविवार सभी दुकानें और दफ्तर रहेंगे बंद

    हरियाणा में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनज़र प्रदेश में शनिवार और रविवार को सभी दुकानें और दफ्तर बंद रहेंगे.

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है कि केवल ज़रूरी सेवाओं को ही शनिवार और रविवार को काम करने की इजाज़त दी जाएगी.

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    हरियाणा में बीते चौबीस घंटों में कोरोना संक्रमण के 248 नए मामले सामने आए हैं जिसके बाद प्रदेश में कोरोना के एक्टिव मामलों की संख्या 7,555 हो गई है.

    प्रदेश में कोरोना संक्रमितों का कुल आंकड़ा अब पचास हज़ार के पार जा चुका है और अब तक यहां 578 लोगों की मौत कोरोना वायरस के कारण हो चुकी है.

  8. वुहानः चीन का वो शहर, जो ख़ामोशी में डूबा है...

    कुछ सवाल ऐसे होते हैं जिनके जवाब नहीं मिलते. वुहान फिलहाल ऐसे ही सवालों के केंद्र में है.

    लेकिन उन सवालों पर वुहान में एक तरह की ख़ामोशी है, कोई उन पर बोलना नहीं चाहता, जो बोलना चाहते हैं, उन्हें बोलने की इजाज़त नहीं है.

    फिर भी कुछ संकेत हैं जो अतीत और वर्तमान की कई गुत्थियों को सुलझा सकते हैं. सुनिए दुनिया जहान में.

    प्रस्तुति: मोहनलाल शर्मा

    प्रोड्यूसर: संदीप सोनी

    वीडियो कैप्शन, वुहानः चीन का वो शहर, जो ख़ामोशी में डूबा है...
  9. बिहार में बाढ़ की स्थिति और लॉकडाउन पर आज का कार्टून

    कार्टून

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  10. इसराइल: पानी पर तैरते हुए फ़िल्म देखने का लुत्फ़

    तेल अवीव

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    इसराइल में फ़िल्म देखने के शौक़ीन लोगों के लिए गुरुवार का दिन एक नया अनुभव लेकर आया.

    कोरोना महामारी के कारण फ़िल्म थियेटर बंद हैं, लेकिन फ़िल्म के शौक़ीन लोगों के लिए तेल अवीव म्यूनीसिपालिटी ने एक दूसरा शानदार इंतज़ाम कर दिया.

    तेल अवीव लेक में पानी के ऊपर फ़िल्म देखने का इंतज़ाम किया और लोगों ने नावों में बैठकर फ़िल्म का मज़ा लिया.

    लोग खुले आसमान में फ़िल्म देखने का मज़ा ले रहे थे लेकिन उनकी नावों में सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख़याल रखा गया था.

    यार्कोन पार्क लेक में दो नावों के बीच दो मीटर की दूरी रखी गई थी और कुल 70 नावों पर बैठकर क़रीब 200 लोगों ने फ़िल्म देखी.

    नगर निगम का कहना है कि गुरुवार को तो सिर्फ़ टेस्ट करने के लिए फ़िल्म की स्क्रिनिंग की गई थी और अगस्त के आख़िरी हफ़्ते से हर शाम दो फ़िल्में दिखाई जाएंगी.

    तेल अवीव

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    गुरुवार को फ़ैमिली कॉमेडी फ़िल्म पैडिंगटन-2 दिखाई गई थी.

    तेल अवीव के 42 साल के टेक कर्मचारी गालिया रेज़निक ने अपने पूरे परिवार के साथ गुरुवार को फ़िल्म देखी थी.

    मई के महीने में कोरोना पर काफ़ी हद तक क़ाबू पा लिया गया था लेकिन इसराइल कोरोना वायरस की दूसरी लहर से जूझ रहा है और अब तक 10 हज़ार से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 795 लोग मारे जा चुके हैं.

    तेल अवीव

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  11. कोरोना वायरस ने दुनिया को समझाई नमस्ते की क़ीमत

    ज़्यादा पुरानी बात नहीं, जब दो देशों के राष्ट्राध्यक्ष मिलते थे तो गर्मजोशी से हाथ मिलाया जाता था और कैमरा थामे लोग इस पल को कैद कर सकें, इसलिए उसकी अवधि भी काफ़ी होती थी.

    यहां तक कि हाथ मिलाने के अंदाज़ें से मुलाकातों की कामयाबी और नाकामी के संकेत खोजे जाते थे.

    लेकिन कोरोना ने ज़िंदगी बदली और हाथ मिलाने का अंदाज़ भी.

    अब लोग हाथ नहीं मिलाते, ऐसे में अभिवादन करने और स्वीकार करने के लिए भारतीय नमस्ते काफ़ी काम आ रहा है.

    वीडियो कैप्शन, कोरोना वायरस ने दुनिया को नमस्ते की कीमत कैसे समझाई?
  12. चुनाव को लेकर ईसी ने जारी किया गाइडलाइन

    कोरोना, दिल्ली

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    चुनाव आयोग ने कोरोना महामारी के दौरान आम चुनाव या उपचुनाव कराने के संबंध में गाइडलाइन जारी किया है.

    समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार शुक्रवार को आयोग ने गाइडलाइन जारी किया.

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    गाइडलाइन के अनुसार उम्मीदवार अपना नामांकन ऑनलाइन कर सकते हैं और वो चुनाव लड़ने के लिए लगने वाली सिक्युरिटी मनी भी ऑनलाइन जमा कर सकते हैं.

    जहां तक प्रचार का सवाल है, इस पर आयोग ने साफ़ कर दिया है कि केवल पाँच लोग ही एक समय में घर-घर जाकर प्रचार में हिस्सा ले सकते हैं.

    बैठक और रोड शो के लिए गृह मंत्रालय की तरफ़ से सोशल डिस्टेंसिंग और दूसरे गाइडलाइन्स जारी किए गए हैं.

    मतदान के दिन के लिए भी काफ़ी व्यापक तैयारी के दिशा निर्देश जारी किए गए हैं.

    फ़ेस मास्क, ग्लब्स, पीपीई किट और थर्मल स्क्रिनिंग का इंतज़ाम किया जाएगा.

    इसके अलावा ईवीएम मशीन को दबाने के लिए भी मतदाताओं को ग्लब्स दिए जाएंगे.

  13. पाकिस्तान: युवाओं की जनसंख्या ज़्यादा होने के कारण कोरोना का असर कम

    कोरोना, पाकिस्तान

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    सिकंदर किरमानी,

    बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद

    कमज़ोर हेल्थकेयर सिस्टम, ज़्यादा आबादी और भीड़-भाड़ वाले इलाक़े में रहने के लिए मजबूर कई ग़रीब परिवार, इन सबके कारण ऐसा लग रहा था कि पाकिस्तान में कोरोना का क़हर बरपा होगा.

    लेकिन 23 करोड़ की आबादी वाले पाकिस्तान में आज तक कोरोना से क़रीब छह हज़ार लोगों की मौत से ऐसा लगता है कि कई पश्चिमी देशों के मुक़ाबले पाकिस्तान में हालात अच्छे हैं.

    पाकिस्तान में ज़िंदगी दोबारा सामान्य हो रही है, लॉकडाउन की शर्तों में ढील दी जा रही है और रेस्त्रा और बाज़ार दोबारा खुलने लगे हैं.

    लेकिन सवाल ये है कि पाकिस्तान के सरकारी आँकड़ों पर कितना भरोसा किया जा सकता है और अगर यह सच है तो फिर क्या पाकिस्तान को युवाओं की जनसंख्या ज़्यादा होने का लाभ मिला.

    पाकिस्तान में अभी तक दो लाख 90 हज़ार कोरोना संक्रमित हैं. इसमें कोई शक नहीं कि पाकिस्तान में टेस्ट बहुत कम हो रहे हैं लेकिन ये भी सच है कि कुल टेस्ट और कोरोना पॉज़िटिव का अनुपात भी कम हो रहा है.

    पाकिस्तान के दो सबसे बड़े शहर कराची और लाहौर में जून के महीने में क़ब्रिस्तानों में दफ़न होने वाले लोगों की संख्या में काफ़ी बढ़ोत्तरी देखी गई थी, लेकिन ये सारी मौतें कोरोना के कारण हुई थीं, यह दावे के साथ नहीं कहीं जा सकतीं.

    डॉक्टर राना जव्वाद असग़र का कहना है कि कोरोना के कम असर की सबसे बड़ी वजह पाकिस्तान की आबादी का युवा होना है. पाकिस्तान की आबादी की औसत उम्र सिर्फ़ 22 साल है. ब्रिटेन में औसत उम्र 41 साल हैय

    दुनिया भर में कोरोना से मरने वालों में बुज़ुर्गों की तादाद ज़्यादा है.

    डॉक्टर असग़र के अनुसार पाकिस्तान में सिर्फ़ चार फ़ीसद आबादी है जिसकी उम्र 65 या उससे ज़्यादा है. ज़्यादातर विकसित देशों में ये संख्या 20 से 25 फ़ीसद है.

    पाकिस्तान में कोरोना मामले में कमी उस वक़्त से आने लगी जब प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने स्मार्ट लॉकडाउन लागू करना शुरू किया.

    हालांकि जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण के मामलों के बढ़ने का ख़तरा अभी भी बना हुआ है. लॉकडाउन ख़त्म होने के बाद बड़ी संख्या में पाकिस्तानी शहरों को छोड़कर गांवों की तरफ़ जा रहे हैं और ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि उन इलाक़ों में भी वायरस फैल सकता है.

    डॉक्टर असग़र कहते हैं कि पाकिस्तान ने अब तक जितना डर था, उस हिसाब से कोरोना पर क़ाबू पाने में सफलता पाई है लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि पाकिस्तान ख़तरे से बाहर आ गया है.

  14. महाराष्ट्र: 300 से ज़्यादा पुलिसकर्मी पॉज़िटिव, पाँच की मौत

    समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार पिछले 24 घंटों में महाराष्ट्र में 300 से ज़्यादा पुलिसकर्मी कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं और पाँच पुलिसकर्मी की मौत हो गई है.

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    महाराष्ट्र कोरोना से सबसे ज़्यादा प्रभावित प्रदेश है. महाराष्ट में अब तक 13 हज़ार से ज़्यादा पुलिसकर्मी संक्रमित हो चुके हैं और 136 पुलिसकर्मी की मौत हो चुकी है.

    पिछले 24 घंटों में 14 हज़ार से ज़्यादा मामले सामने आए और 326 लोगों की मौत हुई.

    राज्य के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार पूरे प्रदेश में अब तक छह लाख 43 हज़ार से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि पूरे राज्य में कोरोना से मरने वालों की संख्या 21 हज़ार को पार कर गई है.

  15. धनबाद में कोरोना पॉज़िटिव बीजेपी नेता के दाह संस्कार में उमड़ी भीड़, जाँच के आदेश

    अंतिम यात्रा

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    रवि प्रकाश

    राँची से, बीबीसी हिन्दी के लिए.

    धनबाद में बीजेपी के एक नेता सतीश सिंह के कोरोना संक्रमित होने के बावजूद उनके अंतिम संस्कार में सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई. लोगों के दबाव के बाद उनका शव परिजनों को सौंप दिया गया था.

    आइसीएमआर के प्रोटोकॉल के तहत कोरोना पॉज़िटिव होने के कारण उनका अंतिम संस्कार प्रशासनिक स्तर पर ही कराया जाना चाहिए था. लेकिन, बीजेपी समर्थकों द्वारा धनबाद-बोकारो मुख्य मार्ग सहित तीन जगहों पर सड़क जाम करने के बाद दबाव में आए प्रशासनिक अधिकारियों ने मृत बीजेपी नेता का शव उनके परिजनों को सौंप दिया था.

    इसके बाद दर्जनों गाड़ियों के क़ाफ़िले में उनकी शवयात्रा निकाली गई. इसमें बीजेपी विधायक राज सिन्हा समेत कई दर्जन लोग शामिल हुए. हालाँकि, श्मशान स्थल के अंदर सिर्फ़ 20 लोगों को जाने की अनुमति दी गई थी लेकिन बाहर काफ़ी भीड़ जमा रही.

    अंतिम यात्रा

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    प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि शव को सुरक्षात्मक नज़रिए से पैक भी नहीं किया गया था. उन्हें सामान्य तरीक़े से श्मशान स्थल तक ले जाया गया. इससे संक्रमण का ख़तरा बढ़ गया है. अब उन सभी लोगों की पहचान की जा रही है, जो इस शवयात्रा में शामिल हुए थे. ताकि, उनकी कोरोना जाँच करायी जा सके.

    धनबाद के डीसी उमाशंकर सिंह ने मीडिया से कहा कि यह बड़ी चूक है. इसकी जाँच का ज़िम्मा एक वरिष्ठ अधिकारी को सौंपा गया है. उनका अंतिम संस्कार प्रोटोकॉल के तहत ही कराया जाना चाहिए था.

    ग़ौरतलब है कि बीजेपी नेता सतीश सिंह की हत्या अपराधियों ने गोली मारकर कर दी थी. बीजेपी का आरोप है कि प्रशासन ने जान-बूझकर कोरोना की ग़लत रिपोर्ट बनवायी थी.

  16. ब्रिटेन के लिए ख़ुशख़बरी, खुदरा व्यापार में उछाल

    ब्रिटेन

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    ब्रिटेन के लिए एक अच्छी ख़बर आई है. एक तरफ़ जहां कोरोना महामारी के कारण सरकारी क़र्ज़ रिकॉर्ड 2.6 खरब डॉलर पहुँच गया है, वहीं दूसरी तरफ़ रिकवरी की भी ख़बरें आ रही हैं.

    सरकारी आँकड़ों के अनुसार खुदरा व्यापार कोरोना से पहले की स्थिति में पहुँच गया है.

    आँकड़ों के अनुसार दुकानों में बिक्री फ़रवरी की तुलना में तीन फ़ीसद ज़्यादा हो रही हैं.

    फ़रवरी में ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोरोना को महामारी घोषित किया था और उसके बाद से दुनिया भर के कई शहरों में लॉकडाउन लागू कर दिया गया था.

    ताज़ा रिपोर्टों के अनुसार ब्रिटेन में ऑनलाइन बिक्री में सात फ़ीसद की कमी आई है और लोग अब बाज़ारों और शॉपिंग सेंटर में जाकर ख़रीदारी कर रहे हैं. सबसे ज़्यादा बिक्री कपड़ों की और पेट्रोेल की हो रही है.

    लेकिन बावजूद इसके लोगों का दर्द ख़त्म नहीं हुआ है.

    कई खुदरा व्यापारियों ने महीनों तक चले लॉकडाउन के कारण नौकरियां कम कर दी हैं.

    ब्रिटेन के एक बड़े ब्रांड मार्क्स एंड स्पेन्सर अगले तीन महीने में सात हज़ार नौकरियां ख़त्म करने की योजना बना रहा है.

    बूट्स 4000 और जॉन लेवाइस 1300 नौकरियां ख़त्म कर रहा है.

  17. 20 सेकंड में कोरोना वायरस को कैसे ख़त्म किया जा सकता है?

    हाथ धोना

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    बीते छह महीनों से कुछ चीज़ों को लेकर लोगों की आदतें बदल चुकी हैं. कोरोना वायरस महामारी ने लोगों को मास्क, सेल्फ़-आइसोलेशन और सोशल डिस्टेंसिंग के महत्व के बारे में बताया लेकिन अभी भी बहुत महत्वपूर्ण चीज़ को कम करके आंका जा रहा है और वो है हाथ धोना.

    फ़रवरी में जब पूरी दुनिया में कोरोना वायरस महामारी फैली तो स्वास्थ्य एजेंसियों ने लोगों को सलाह दी कि वो नए वायरस से ख़ुद को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं.

    एक सुझाव को लगातार हर दिन विशेषज्ञों ने सबके लिए महत्वपूर्ण बताया और वो था गर्म पानी से कम से कम 20 सेकंड तक हाथ धोना.

    बॉस्टन, मैसाच्युसेट्स के नॉर्थ-ईस्टर्न विश्वविद्यालय में रसायन विज्ञान और रासायनिक जीव विज्ञान के एसोसिएट प्रोफ़ेसर थॉमस गिलबर्ट कहते हैं कि कोरोना वायरस को सिर्फ़ एक सस्ते साबुन और गर्म पानी से भी हटाया जा सकता है.

    वो कहते हैं, “इस वायरस के चारों ओर आनुवंशिक कण की झिल्ली है जिसे लिपिड मेंबरेन कहा जाता है क्योंकि यह तैलीय और चिकनी संरचना है. इस तरह की संरचना को साबुन और पानी से प्रभावहीन किया जा सकता है.”

    वायरस के इस बाहरी ‘खोल’को मिटाते ही वायरस की आनुवंशिक सामग्री टूट जाती है. इसके कारण आरएनए भी नष्ट हो जाता है जो मानवीय शरीर में सेल के ज़रिए इस वायरस की कई कॉपियां बनाता है.

    गिलबर्ट कहते हैं कि साबुन से हाथों को ख़ूब रगड़ना चाहिए और हर कोने तक ले जाना चाहिए जिससे वक़्त मिलता है और लिपिड मेंबरेन और साबुन के बीच संपर्क होता है.

    वो कहते हैं कि इससे साबुन को उस वायरस को मिटाने में मदद मिलती है. गिलबर्ट गर्म पानी पर कहते हैं कि यह वायरस से लड़ने में तेज़ी लाता है.

    ब्रिटेन के केंट विश्वविद्यालय में मॉलिक्यूलर साइंस के प्रोफ़ेसर मार्टिन मिशलिस कहते हैं कि सिर्फ़ पानी से वायरस को प्रभावहीन नहीं किया जा सकता है.

    वो कहते हैं, “जब आप खाना पका रहे हों और आपके हाथ में ज़ैतून का तेल हो तो उसे पानी से हटा पाना बहुत मुश्किल है. आपको साबुन की ज़रूरत होती है. इसी तरह से कोरोना वायरस के मामले में साबुन की ज़रूरत होती है.”

    हाथ धोना कितना महत्वपूर्ण है, यह जानने के लिए बीबीसी फ़्यूचर की यह स्टोरी क्लिक करके पढ़ें.

  18. स्पेन में कोरोना की 'दूसरी लहर'

    स्पेन, कोरोना

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    यूरोप में सबसे सख़्त लॉकडाउन स्पेन में लागू किया गया था, लेकिन लॉकडाउन हटा लेने के दो महीने बाद यूरोप के किसी भी देश की तुलना में स्पेन में कोरोना वायरस ज़्यादा तेज़ी से फैल रहा है.

    जब 21 जून को स्पेन से कोरोना इमरजेंसी हटाई गई, उस वक़्त स्पेन में रोज़ाना 100 से 150 संक्रमण के मामले आते थे, लेकिन अब वो संख्या बढ़कर तीन हज़ार हो गई है.

    लेकिन कोरोना से मरने वालों की संख्या में उतना इज़ाफ़ा नहीं हो रहा है. गुरुवार को 122 लोगों की मौत हुई जबकि अप्रैल में कोरोना जब अपने चरम पर था तो सिर्फ़ एक दिन में 2 अप्रैल को 950 लोगों की मौत हुई थी.

    यह अभी भी एक दिन में स्पेन में सबसे ज़्यादा मरने वालों की संख्या है.

    अब जो वायरस फैल रहा है उनमें युवा ज़्यादा शिकार हो रहे हैं और क़रीब 75 फ़ीसद मामले में तो कोरोना का कोई लक्षण भी नहीं देखा गया है.

    सरकार का कहना है कि वो इतनी बड़ी संख्या तो बिल्कुल भी नहीं चाहती लेकिन पिछली बार की तुलना में इस बार महामारी की तीव्रता में कमी देखी जा रही है.

    सरकार के अनुसार फ़िलहाल केवल तीन फ़ीसद कोरोना संक्रमित लोगों को अस्पताल की ज़रूरत पड़ रही है, 0.5 फ़ीसद से भी कम लोग आईसीयू में हैं और मरने वालों की दर 0.3 फ़ीसद से भी कम है.

    लेकिन जब तक संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है, यह कहा जा सकता है कि कोरोना की दूसरी लहर आने वाली है.

    स्पेन के राजनीतिज्ञ भी कोरोना से लड़ाई के मामले में किसी एक राय पर सहमत नहीं दिखते.

    प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ पर विपक्ष आरोप लगा रही है कि सरकार ने मृत्यु दर के मामले में झूठ बोला तो दूसरी तरफ़ कंज़र्वेटिव पार्टी के शासन वाली मैडरिड की प्रांतीय सरकार भी आलोचकों की शिकार बन रही है.

    स्पेन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार स्पेन में अब तक 28,813 लोगों की मौैत हुई है, लेकिन दूसरे आँकड़ों के अनुसार 44,596 लोग कोरोना के शिकार हुए हैं.

    सरकार का कहना है कि केयर होम्स में 19 हज़ार से ज़्यादा बुज़ुर्ग मारे गए हैं लेकिन सरकी आँकड़ों में केवल आधे लोगों की मौत को शामिल किया गया है.

  19. दिल्ली में कोरोना की ज़्यादा शिकार औरतें हुईं हैं- सीरो रिपोर्ट

    कोरोना, दिल्ली

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    दिल्ली में हुए दूसरे राउंड के सीरो सर्वे से पता चला है कि मर्दों की तुलना में औरतें कोरोना वायरस की ज़्यादा शिकार हुईं हैं.

    सर्वे में पता चला कि लगभग एक तिहाई लोगों ने कोरोना का एंटीबॉडीज़ विकसित कर लिया है.

    इस सर्वे के लिए 15 हज़ार से ज़्यादा लोगों के ब्लड सैंपल जमा किए गए थे.

    जुलाई के महीन में दिल्ली में पहला सीरो सर्वे हुआ था जिसमें पाया गया था कि 23.48 फ़ीसद लोगों ने एंटीबॉडीज़ डेवेलप कर लिया है.

    दिल्ली में अब तक डेढ़ लाख से ज़्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं और 4257 लोगों की मौत हो चुकी है.

    दूसरा सर्वे अगस्त के शुरू में किया गया था. इस सर्वे के अनुसार 32.2 फ़ीसद महिलाओं ने एंटीबॉडीज़ विकसित किया है जबकि मर्दों में ये संख्या 32.2 फ़ीसद है.

    इसकी क्या वजह है, अभी ये नहीं पता चल सका है. सर्वे में पता चला है कि कुल मिलाकर 29 फ़ीसद लोगों में एंटीबॉडीज़ डेवेलप हुआ है.

    इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि दिल्ली की कुल आबादी दो करोड़ का तीस फ़ीसद यानी क़रीब 60 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हुए थे और वो अब ठीक भी हो चुके हैं.

    दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि अभी भी दिल्ली हर्ड इम्युनिटी विकसित करने से बहुत दूर है.

    जब किसी एक जगह में बहुत सारे लोग वायरस से इम्युन हो जाते हैं तो इसे हर्ड इम्युनिटी कहा जाता है और फिर वायरस का फैलाव बंद हो जाता है.

    स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार अगर किसी जगह पर 40 से लेकर 70 फ़ीसद लोग एंटीबॉडीज़ विकसित कर लेते हैं तो वहां हर्ड इम्युनिटी विकसित हो जाती है.

    मुंबई और पुणे में किए गए ठीक इसी तरह के सर्वे से पता चला है कि वहां 40 फ़ीसद से ज़्यादा लोगों ने एंटीबॉडीज़ डेवेलप कर लिया है. पुणे में तो ये 50 फ़ीसद तक पहुँच गया है.

    दिल्ली भारत के सबसे ज़्यादा कोरोना प्रभावित शहरों में से एक है और जून के पहले दो हफ़्तों में तो यहां अस्पतालों में बेड की भारी कमी देखी गई थी.

    लेकिन फिर उसके बाद से अस्पतालों की हालत में सुधार हुई है, अस्पतालों में बेड बढ़ा दिए गए हैं और रोज़ाना संक्रमितों की संख्या में भी काफ़ी कमी देखी जा रही है.

  20. कोरोना से लड़ रहीं आशा वर्कर्स को क्या-क्या झेलना पड़ रहा है?