रूस दुनिया की पहली कोरोना वैक्सीन बाज़ार में
लाने के लिए तैयार है, भले ही इस वैक्सीन की प्रभावशीलता और सुरक्षा पर कुछ
विशेषज्ञों द्वारा संदेह किया जा रहा है.
रूसी वैक्सीन पर आशंका ज़ाहिर करने वालों का कहना है कि इस
वैक्सीन का ट्रायल दो महीने से भी कम वक़्त के लिए किया गया, ऐसे में इसे इंसानों
के लिए सुरक्षित घोषित करने में कहीं जल्दबाज़ी तो नहीं की गई.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मंगलवार को घोषणा की
थी कि रूस ने कोविड-19 की पहली वैक्सीन तैयार कर ली है जिसने सभी ज़रूरी परीक्षणों
को पार किया है और यह वैक्सीन कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ इम्युनिटी देने में सफल
साबित हुई है.
रूस ने इस वैक्सीन का नाम सोवियत संघ द्वारा लॉन्च किये गए दुनिया
के पहले उपग्रह की याद में ‘स्पूतनिक वी’ रखा है. हालांकि, इस वैक्सीन ने अभी तक तीसरे-चरण का ट्रायल पूरा नहीं किया है
जिसमें हज़ारों प्रतिभागियों के साथ व्यापक पैमाने पर टेस्टिंग की जाती है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया भर में 200 से
ज़्यादा उम्मीदवार हैं जिन्होंने कोरोना वैक्सीन तैयार करने का दावा किया है और
इनमें से क़रीब 24 ऐसे हैं जिनके वैक्सीन का इंसानों पर ट्रायल जारी है.
नई वैक्सीन को पास होने के लिए सामान्य तौर पर तीन-चरण के ट्रायल पूरे करने होते हैं.
पहले चरण में बहुत कम लोगों पर वैक्सीन का ट्रायल होता है और उन्हें वैक्सीन की सीमित डोज़ दी जाती है.
दूसरे चरण में लोगों की संख्या बढ़ाई जाती है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वैक्सीन का इम्यून रिस्पॉन्स कैसा है और वैक्सीन के कुछ साइड-इफ़ेक्ट तो नहीं है.
तीसरे और सबसे बड़े चरण में देखा जाता है कि वैक्सीन संक्रमित लोगों पर कितनी प्रभावशाली है. यह चरण महज़ औपचारिकता के तौर पर पूरा नहीं किया जा सकता. यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है. इम्युनिटी पर वैक्सीन का रिस्पॉन्स अगर दूसरे चरण में ही दिख जाता है, तब भी तीसरे चरण का ट्रायल ज़रूरी समझा जाता है.
एक वेबसाइट के अनुसार, रूसी शोधकर्ताओं ने पहले और दूसरे चरण का ट्रायल अगस्त की शुरुआत में ही पूरा कर लिया था, जिसके बाद दावा किया गया कि वैक्सीन का रिस्पॉन्स बढ़िया है और इसका कोई बुरा असर इंसानों पर नहीं देखा गया. लेकिन इससे संबंधित कोई डिटेल रिपोर्ट इन शोधकर्ताओं ने जारी नहीं की.
इसमें यह भी दावा किया गया कि तीसरे चरण के ट्रायल ब्राज़ील, मैक्सिको, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में किये जाएंगे.
इसका मतलब साफ़ है कि रूस की इस वैक्सीन ने ट्रायल के तीनों चरण अब तक पूरे नहीं किये हैं.
वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले और दूसरे चरण की रिपोर्ट सार्वजनिक किये बिना यह दावा करना ठीक नहीं कि वैक्सीन इंसानों के लिए सुरक्षित है. और तीसरे चरण का ट्रायल किये बिना यह दावा करना भी ठीक नहीं कि ये वैक्सीन काम करती है.
एक ओर वो देश हैं जिनका मानना है कि रूस जल्दबाज़ी कर रहा है, वो सिर्फ़ दौड़ जीतना चाहता है, वो लोगों की सुरक्षा को दरकिनार कर वैक्सीन ला रहा है और वो बिना ट्रायल पूरे किये कैसे एक वैक्सीन को अनुमोदित कर सकता है? तो दूसरी तरफ वो देश हैं जो रूस की वैक्सीन को लेकर बहुत उत्साहित हैं और उन्होंने स्पूतनिक-वी नामक वैक्सीन में दिलचस्पी दिखाई है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि ‘वो रूसी वैक्सीन के क्लीनिकल ट्रायल्स की समीक्षा करना चाहेगा.’
दुनिया के अन्य देशों के विज्ञानियों ने ही नहीं, बल्कि रूस के कुछ सम्मानित वैज्ञानिकों ने भी वैक्सीन विकसित होने की रफ़्तार और पारदर्शिता की कमी पर सवाल खड़े किये हैं और कहा है कि अगर ट्रायल पूरे किये बिना किसी भी वैक्सीन को बाज़ार में लाया गया, तो मानव जाति पर इसके परिणाम बहुत गंभीर हो सकते हैं.
इस बीच, फ़िलीपींस ने योजना बनाई है कि वो अक्तूबर में वैक्सीन लानी शुरू करेगा. वहीं ब्राज़ीलियन टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट ने कहा है कि वो 2021 की दूसरी छमाही में इस विवादास्पद वैक्सीन का उत्पादन शुरू कर सकता है क्योंकि मॉस्को और उनके बीच इसे लेकर समझौता हुआ है.