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कोरोना: वैक्सीन के लिए भारत और बिल गेट्स फ़ाउंडेशन में डील
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लाइव कवरेज
अमरीका: मौत 1.6 लाख, संक्रमण: 48 लाख, नौकरियां: 30 लाख कम

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जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के ताज़ा आँकड़ों के अनुसार अमरीका में कोरोना से मरने वालों की संख्या एक लाख 60 हज़ार पार कर गई है और कोरोना संक्रमितों की संख्या 48 लाख हो गई है.
आहायो के गवर्नर को भी कोरोना संक्रमण हो गया था जिसके कारण वो अपने यहां का दौरा कर रहे अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का स्वागत नहीं कर पाए.
लेकिन बाद में हुए कोरोना टेस्ट में वो निगेटिव पाए गए हैं.
उधर अमरीकी अर्थव्यवस्था के मामले में लगातार बुरी ख़बरें आ रही हैं.
जुलाई के आँकड़ों के अनुसार अमरीका इस महीने में केवल 18 लाख नई नौकरियां दे सका जबकि जून के महीने में 48 लाख नई नौकरियों पर लोगों को बहाल किया गया था.
इसका अर्थ ये है कि एक महीने के अंतर में अमरीका में 30 लाख कम नौकरियां पैदा हुईं हैं.
बीजिंग बाज़ार के आख़िरी कोरोना मरीज़ को अस्पताल से छुट्टी

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बीजिंग के आख़िरी कोरोना मरीज़ को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है. बीजिंग के सबसे बड़े थोक बाज़ार शिनफ़ाडी में कुछ लोगों को कोरोना संक्रमण हुआ था जिनके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.
11 जून को 52 साल के एक व्यक्ति कोरोना संक्रमित हुए थे, उसके बाद उस बाज़ार के 335 लोग संक्रमित पाए गए थे.
चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार अभी पाँच लोग की हालत नाज़ुक है और 21 की हालत ख़राब है.
बीजिंग को अभी पूरी तरह कोरोना-फ़्री नहीं कहा जा सकता है. शुक्रवार को भी एक मामला आया और उन्हें क्वारंटीन के लिए भेज दिया गया है.
बीजिंग में कभी-कभी विदेशों से आने वालों में कोरोना संक्रमण का मामला आ जाता है. बीजिंग में विदेश से आने वाले सभी यात्रियों के लिए 14 दिनों का अनिवार्य क्वारंटीन बहुत सख़्ती से लागू किया जाता है.
मैक्सिको में मरने वालों की संख्या 50 हज़ार के पार

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मैक्सिको में कोरोना से मरने वालों की संख्या 50 हज़ार पार कर गई है. मैक्सिको से ज़्यादा ब्राज़ील और अमरीका में लोगों की मौत हुई है.
भारत फ़िलहाल चौथे नंबर पर है जहां कोरोना से मरने वालों की संख्या 40 हज़ार पार कर गई है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने रोज़ाना कोरोना बुलेटिन में शुक्रवार को बताया कि शुक्रवार को 819 लोगों की मौत हुई और अब तक कुल 50,517 लोग मारे जा चुके हैं. मैक्सिको में कोरोना का पहला केस फ़रवरी में आया था.
मैक्सिको में फ़िलहाल 462,690 कोरोना पॉज़िटिव मामले हैं और वहां की कुल आबादी क़रीब 13 करोड़ है.
फ़रवरी के आख़िर में राष्ट्रपति लोपेज़ ने कहा था कि छह हज़ार से 30 हज़ार के बीच लोग मारे जा सकते हैं लेकिन ये संख्या अब 50 हज़ार पार कर गई है.
वहां सरकार ने जून के शुरू में लॉकडाउन में ढील दे दिया था जिसके कारण सरकार की काफ़ी आलोचना भी हुई थी.
बीबीसी हिंदी का डिजिटल रेडियो कार्यक्रम 'बीबीसी इंडिया बोल'
भारत में कोरोना के केस 20 लाख से ज़्यादा हुए और 41 हज़ार से ज़्यादा की मौत. क्या कोरोना का डर लोगों में ख़त्म हो रहा है? बीबीसी हिंदी का डिजिटल कार्यक्रम 'बीबीसी इंडिया बोल' मोहनलाल शर्मा के साथ. सुनिए, यूट्यूब पर.
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ब्रेकिंग न्यूज़, भारतीय हॉकी टीम के कैप्टन कोरोना पॉज़िटिव
भारतीय हॉकी टीम के कैप्टन मनप्रीत सिंह और तीन अन्य खिलाड़ी कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं.
छोड़िए X पोस्टX सामग्री की इजाज़त?चेतावनी: बीबीसी दूसरी वेबसाइट्स की सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
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बिहार में पिछले 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 3646 नए मामले

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इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर बिहार में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 71,794 हो गई है.
राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 3646 नए मामले रिपोर्ट किए गए हैं.
इस समय राज्य में कोरोना के सक्रिय मामलों की संख्या 25,128 है. राज्य में कोरोना महामारी ने 400 लोगों की जान भी ली है.
ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना वैक्सीन के लिए भारत की सीरम इंस्टीट्यूट और बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के बीच करार

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सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ़ इंडिया ने शुक्रवार को कहा कि 'बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन' और 'गावी वैक्सीन एलायंस' उसे कोविड वैक्सीन की 10 करोड़ खुराक के उत्पादन के लिए 150 मिलियन डॉलर की रकम देगी.
वैक्सीन की इस खेप का उत्पादन भारत और अन्य विकासशील देशों के लिए 2021 तक किया जाएगा.
कंपनी ने एक बयान जारी कर कहा, "एस्ट्राज़ेनेका और नोवावैक्स की वैक्सीन की कीमत तीन डॉलर प्रति खुराक तय की गई है और ये 92 देशों को उपलब्ध कराया जाएगा."
'बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन' इसके लिए 'गावी वैक्सीन एलायंस' को फंड मुहैया कराएगी. गावी एलायंस को गेट्स फाउंडेशन का समर्थन है.
ये एक पब्लिक-प्राइवेट ग्लोबल हेल्थ पार्टनरशिप है. इसका मक़सद ग़रीब देशों को वैक्सीन मुहैया कराना है.
'मौत को दूर रखने वाला घिनौना' सुपरफ़ूड, जिसे खाना मुश्किल है

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65 साल की मेरी मां हर दिन एक ख़ास डिश बनाती हैं जिसके बारे में कई लोग कहेंगे कि उसे देखना, सूंघना या चखना बहुत घिनौना है.
'नट्टो' एक पारंपरिक जापानी खाना है जो किण्वित सोयाबीन से बनाया जाता है. इसकी अमोनिया जैसी बदबू और बलगम जैसी चिपचिपाहट उन लोगों को भी पसंद नहीं आती जो इसे खाकर बड़े हुए हैं.
2017 में जापानी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर कंपनी निफ्टी ने एक सर्वे किया तो पता चलता कि सिर्फ़ 62 फ़ीसदी लोग नट्टो को चाव से खाते हैं. यह भी पता चला कि 13 फ़ीसदी लोग नट्टो को नापसंद करते हैं, भले ही इसे खाने के कितने भी फ़ायदे हों.
लंदन में कुकिंग स्कूल चलाने वाली जापानी शेफ़ युकी गोमी कहती हैं, "नट्टो में बहुत बदबू होती है. आप इसकी गंध को नोटिस किए बिना नहीं रह सकते. लेकिन मैं इसे हमेशा अपने फ्ऱिज में रखती हूं."
गोमी के घर में यह सामान्य खाद्य सामग्री है, उसी तरह जैसे पश्चिमी देशों में चीज़ और योगर्ट घर-घर में मिलते हैं.
जापान का सुपरफ़ूड
जापान के लोग नट्टो को लंबे समय से सुपरफ़ूड मानते रहे हैं. उनको लगता है कि इसे खाने से रक्त का प्रवाह बेहतर होता है और हृदयाघात का जोखिम कम होता है.
जापान उन देशों में शामिल है जहां बुजुर्गों की आबादी सबसे ज़्यादा है इसलिए यहां नट्टो की ये ख़ूबियां बहुत मायने रखती हैं.
ब्रेकिंग न्यूज़, भारतः कोरोना संकट के बीच 35 लाख से ज़्यादा हेल्थ वर्कर हड़ताल पर

भारत में कोरोना महामारी की रोकथाम के लिए काम फ्रंटलाइन पर कर रहे 35 लाख से ज़्यादा स्वास्थ्यकर्मी शुक्रवार से दो दिनों की हड़ताल पर चले गए हैं. वे बेहतर वेतन और पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट्स) किट्स की मांग कर रहे हैं.
इस हड़ताल से जुड़े सेंटर फ़ॉर ट्रेड यूनियंस के सचिव एआर सिंधु ने बताया, "देश में कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ जारी लड़ाई में अब तक कम से कम 100 स्वास्थ्यकर्मी मारे जा चुके हैं लेकिन सरकार ने उन्हें कोई बीमा सुरक्षा नहीं मुहैया कराई है."
एक्रीडिटेड सोशल हेल्थ एक्टिविस्ट्स या आशा कर्मी सामान्य तौर पर आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों तक पहुंचने वाली सरकार की पहली प्रतिनिधि होती हैं. इन्हें सरकारी मान्यता हासिल है.

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इनकी सेवाओं उन इलाकों में मायने रखती हैं जहां स्वास्थ्य सुविधाओं तक लोगों की न के बराबर या सीमित पहुंच होती है. सरकार ने उन्हें ग्रामीण इलाकों में घर-घर जाकर कोरोना मरीज़ों की खोजबीन के काम में तैनात किया था.
इस हड़ताल में दस कर्मचारी यूनियन शामिल हैं. इनमें एंबुलैंस ड्राइवर, कम्यूनिटी सेंटर्स में खाना बनाने वाले रसोइयों का प्रतिनिधित्व करने वाले यूनियंस भी शामिल हैं. इनमें बहुत से लोग राज्य सरकारों के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर सीमित वेतन पर काम करते हैं.

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आशा कर्मियों की एक यूनियन लीडर डी नागालक्ष्मी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया, "कुछ जगहों पर घरों तक पहुंचना मुश्किल होता है. खासकर पहाड़ी इलाकों में. हमें उनके यहां पैदल पहुंचना होता है. बारिश के मौसम में हमें नदी पारकर के जाना पड़ता है."
छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में जिस तरह से संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, जानकारों का कहना है कि भारत में महामारी अपने चरम पर पहुंचने से ज़्यादा दूर नहीं है. इससे पहले से ही खस्ताहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर और बोझ पड़ेगा.
बीबीसी पड़ताल: क्या है ईरान में कोरोना से हुई मौतों का सच?
क्या ईरान कोविड-19 से हुई मौतों की संख्या छुपा रहा है यानी उसे कम करके बता रहा है?
बीबीसी की एक पड़ताल के मुताबिक इसका जवाब है हां.ईरान कोरोना वायरस संक्रमण से हुई मौतों की जो संख्या आधिकारिक तौर पर बता रहा है, हक़ीकत में वहां इससे कई गुना ज़्यादा मौत हुईं हैं.
देखिए, ये वीडियो रिपोर्ट.
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ब्रेकिंग न्यूज़, कोरोना से संक्रमित कैंसर मरीज़ों को कीमोथेरेपी से 'ख़तरा नहीं'

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एक वैज्ञानिक शोध में ये बात सामने आई है कि कोरोना से संक्रमित कैंसर मरीज़ों पर कीमोथेरेपी और इम्युनोथेरेपी जारी रखने से उनके जीवन पर कोई ख़तरा नहीं है.
रिसर्च में ये भी कहा गया है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा पर और शोध किया जाना चाहिए. इस दवा से कुछ मरीज़ों को फायदा होते हुए देखा गया है.
रिसर्च में ब्रिटेन, स्पेन, इटली और जर्मनी के कोरोना संक्रमित 890 कैंसर मरीज़ों को शामिल किया गया था.
माना जा रहा है कि इस शोध से उन मरीज़ों की पहचान करने में मदद मिलेगी जिन पर कोरोना वायरस के संक्रमण से ज़्यादा ख़तरा हो सकता है. स्तन कैंसर के मरीज़ों की मृत्यु दर अन्य मरीज़ों की तुलना में आधी थी.
लंदन के इम्पीरियल कॉलेज के रिसर्चरों की अगुवाई में ये स्टडी की गई. इसमें यूरोप के अलग-अलग 19 अस्पतालों ने हिस्सा लिया है.
शोधकर्ताओं का कहना है कि वे अब इसके कारणों का पता लगाने की दिशा में काम करेंगे. उन्हें इस सवाल का जवाब भी खोजना है कि आख़िर क्यों ब्रिटेन के कैंसर मरीज़ों पर यूरोप के दूसरे मरीज़ों की तुलना कोरोना संक्रमण से जान का जोख़िम ज़्यादा है.

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'कैंसर का इलाज सुरक्षित हो सकता है'
रिसर्च प्रोजेक्ट के टीम लीडर और इम्पीरियल कॉलेज लंदन के सर्जरी और कैंसर विभाग के डॉक्टर डेविड पिनाटो कहते हैं कि वे आंकड़ों को लेकर चिंतित हैं. और उन्होंने ब्रिटेन से मृत्यु दर के आंकड़ों पर गौर करने की अपील की है.
उन्होंने कहा, "महामारी का कैंसर मरीज़ों पर असर पड़ा है. उन्हें ठीक से कैंसर का इलाज नहीं मिल पा रहा है. कुछ मामलों में 'थोड़े से पुख़्त सबूतों की बुनियाद पर' कैंसर का इलाज या तो टाल दिया गया है या फिर रोक दिया गया है. अब हमारे पास इस बात की बेहतर समझ है कि हम इसमें कैसे सुधार ला सकते हैं."
डॉक्टर डेविड पिनाटो का कहना है कि कीमोथेरेपी और इम्युनोथेरेपी जैसे इलाज के कारण कोरोना से होने वाली मौत की संभावना नहीं बढ़ती है.
"इसका मतलब ये हुआ कि बहुत से मामलों में महामारी के दौरान कैंसर का इलाज सुरक्षित हो सकता है लेकिन ये इस बात पर निर्भर करेगा कि मरीज़ की अपनी स्थिति कैसी है और दूसरे रिस्क फ़ैक्टर्स क्या हैं."
नरेंद्र मोदी की सरकार पर राहुल गांधी का तंज
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कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर तंज करते हुए कहा कहा, "20 लाख का आँकड़ा पार, ग़ायब है मोदी सरकार."
इससे पहले 17 जुलाई को राहुल गांधी ने कहा था, "10,00,000 का आँकड़ा पार हो गया. इसी तेज़ी से कोरोना फैला तो 10 अगस्त तक देश में 20,00,000 से ज़्यादा संक्रमित होंगे. सरकार को महामारी रोकने के लिए ठोस, नियोजित कदम उठाने चाहिए."
हालांकि भारत में कोरोना संक्रमण के मामले सात अगस्त को ही 20 लाख पार कर गए.
ब्रेकिंग न्यूज़, 'हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर ज़रूरत से ज़्यादा राजनीति और नकारात्मक प्रचार'

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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा कोविड-19 की बीमारी के रोकथाम में कारगर है या नहीं? इस पर रिसर्च कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि शायद इस सवाल का जवाब कभी न मिल पाए.
वैज्ञानिकों ने इसकी वजह भी बताई है. इस दवा को लेकर चल रहा विवाद और इंटरनेट पर मौजूद भ्रामक जानकारियां इसके ट्रायल को पूरा होने से रोक रही हैं.
अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीज़ों पर ये दवा बेअसर रही है लेकिन शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि अगर हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की खुराक थोड़ा पहले दी जाए तो ये कारगर हो सकता है.
इसके ट्रायल से अस्पतालों ने अपने कदम वापस खींच लिए हैं.

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'ज़रूरत से ज़्यादा राजनीति और नकारात्मक प्रचार'
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के नेतृत्व में चल रहे ट्रायल में दुनिया भर के 40 हज़ार फ्रंटलाइन वर्कर्स को शामिल किए जाने का लक्ष्य रखा गया है.
शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि बड़े पैमाने पर की गई स्टडी से ये नतीजे मिल सकते हैं कि कोरोना के इलाज की शुरुआत में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के इस्तेमाल से मरीज़ की हालत को और बिगड़ने से रोका जा सकता है.
रिसर्च टीम से जुड़े प्रोफेसर निक व्हॉइट कहते हैं, "हम जानते हैं कि अस्पताल में भर्ती मरीज़ों के इलाज में ये दवा कारगर नहीं लेकिन ये फिर भी एक दवा है जो कोविड-19 को रोकने में फायदेमंद हो सकती है."
लांसेट मैगज़ीन में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा के नुक़सान पर एक रिसर्च पेपर छपने के बाद ब्रिटेन की नियामक एजेंसी एमएचआरए ने इससे जुड़े ट्रायल रोक दिए थे. हालांकि अब उस रिसर्च पेपर को खारिज कर दिया गया है.

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जून में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर ट्रायल फिर शुरू हुए लेकिन शोधकर्ताओं का कहना है कि सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं और दवा को लेकर राजनीति के कारण ट्रायल में भाग लेने के लिए लोगों को जुटाने में मुश्किल आ रही है.
प्रोफ़ेसर व्हॉइट का कहना है कि कई ट्रस्ट अस्पतालों ने ट्रायल से अपना समर्थन वापस ले लिया है.
ये क्यों विवादास्पद है?
हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का इस्तेमाल सालों से मलेरिया के इलाज में होता रहा है. फिलहाल इस बात के कोई सबूत नहीं है कि ये कोरोना संक्रमण के मामलों में भी कारगर है.
और विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी चेतावनी दी है कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन के दुरुपयोग से गंभीर नतीज़े हो सकते हैं क्योंकि इस दवा के साइड इफेक्ट्स हैं.
कोरोना वायरस से बचाएंगे रोबोट
वीडियो कैप्शन, कोरोनावायरस से बचाएंगे रोबोट्स बीमारी से बचाव का ज़िम्मा रोबोट्स का. ऐसा ही हो रहा है लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पर.
कई महीनों तक अलग-थलग रहने के बाद हवाई यात्रा करना तो दूर, भीड़भाड़ भरे एयरपोर्ट पर जाने का सोचने से भा डर लगता है.
हम लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट गए और देखा कि इसे सुरक्षित बनाने के लिए क्या तरीके अपनाए जा रहे हैं.
मुंबईः विमान यात्रियों को रहना होगा 14 दिन क्वारंटीन में
मुंबई महानगरपालिका ने विमान से शहर आने वाले सभी घरेलू यात्रियों को 14 दिन के लिए होम क्वारंटीन पर जाना अनिवार्य कर दिया है.
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धमाके के बाद लेबनान में बढ़ सकते हैं कोरोना वायरस संक्रमण के मामले: स्वास्थ्य मंत्री
लेबनान में कोरोना वायरस संक्रमण मामलों में उछाल आ सकता है. बेरुत में हुए धमाके के बाद स्वास्थ्य सुविधाओं पर निश्चित रूप से दबाव बढ़ा है और ऐसे में हो सकता है कि कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़ें.
देश के स्वास्थ्य मंत्री ने यह आशंका जताई है.
लेबनान की राजधानी बेरुत में मंगलवार को हुए धमाके में अब तक कम से कम 137 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है और मौजूदा समय में कोरोना संक्रमण के मामलों के बढ़ने की आशंका ने भी चिंता बढ़ा दी है.
लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री हमद हसन ने स्थानीय मीडिया से कह “घायलों की सहायता और सुरक्षात्मक आपूर्ति की कमी से कोरोना वायरस केस की संख्या पर असर पड़ सकता है.”
उन्होंने इस बात का आश्वासन दिया कि आने वाले दिनों में कुछ दिनों सिर्फ़ कोरोना संक्रमित मरीज़ों के लिए फ़ील्ड अस्पतालों का प्रबंध किया जाएगा.

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अमरीका के कोरोना विशेषज्ञ डॉक्टर फ़ाउची ने कहा, उन्हें धमकी मिल रही है
अमरीका के वरिष्ठ कोरोना विशेषज्ञ और व्हाइट हाउस कोरोना वायरस टास्क फ़ोर्स के सदस्य डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने कहा है कि उन्हें धमकी दी जा रही है और उनकी बेटियों को परेशान किया जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अमरीका में कोरोना वायरस से निपटने के लिए क्या किया जा रहा है उसपर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है.
उन्होंने सीएनएन से बातचीत में कहा, "मुझे और मेरे परिवार को जान से मार डालने की धमकी, मेरी बेटियों को इस क़दर परेशान करना कि मुझे अपने लिए सुरक्षाकर्मी रखना पड़े, यह तो अपने आप में ग़ज़ब है."
डॉक्टर फ़ाउची ने आगे कहा, "काश उन लोगों (मेरे परिवार वालों) को ये सब नहीं झेलना पड़ता. मैं दूर-दूर से ख़्वाब में भी नहीं सोच सकता कि जो लोग मेरी बातों से इत्तफ़ाक़ नहीं रखते जो कि पूरी तरह स्वास्थ्य से जुड़ा मामला है, वो इस हद तक चले जाएंगे कि वो मुझे जान से मारने की धमकी देंगे."
कोरोना महामारी के दौरान डॉक्टर एंथनी फ़ाउची का चेहरा घर-घर में पहचाना जाने लगा है और कई बार उन्होंने कोरोना के मामले में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपनी असहमति को सार्वजनिक किया था.

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ब्रेकिंग न्यूज़, भारत में संक्रमण के मामले 20 लाख के पार, मरने वालों की संख्या 40 हज़ार से अधिक

संक्रमण के लिहाज़ से भारत दुनिया का तीसरा सबसे अधिक प्रभावित देश है. भारत में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर बीस लाख के पार पहुँच गए हैं.
आधिकारिक आँकड़ों के मुताबिक़, बीते 24 घंटे में देश में 58 हज़ार से अधिक नए मामले सामने आए जिसके साथ ही संक्रमण के कुल मामले बढ़कर 20,21,407 हो गए हैं.
बीते 20 दिनों में संक्रमण दोगुना हुआ है. यह दर अमरीका और ब्राज़ील की तुलना में भी अधिक है. संक्रमण के लिहाज़ से यही दो देश भारत से आगे हैं.
अमरीका पहले स्थान पर है और ब्राज़ील दूसरे.
भारत में अब तक कोरोना संक्रमण के कारण 40 हज़ार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है. मरने वालों के आँकड़ों के आधार पर भारत दुनिया का पाँचवा सबसे अधिक प्रभावित देश है.

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