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जर्मनी में कोरोना से जुड़े प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ बड़ा प्रदर्शन
भारत में अब तक 36 हज़ार से ज़्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, दुनिया भर से क्या हैं कोरोना को लेकर ताज़ा अपडेट.
लाइव कवरेज
110 साल की बुज़ुर्ग ने दी कोरोना को मात
कर्नाटक के चित्रदुर्ग में 110 साल की एक बुज़ुर्ग महिला सिद्दम्मा ने कोविड-19 को मात दे दी है.
चित्रदुर्ग के जिला सर्जन डॉक्टर बासवराज ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया कि जुलाई 27 को सिद्दम्मा का कोरोना टेस्ट पॉज़िटिव आया था. इलाज के बाद उन्हें एक अगस्त को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.
भारत सरकार ने किया 'वेन्टिलेटर के निर्यात' पर लगी पाबंदी हटाने का फ़ैसला
भारत सरकार ने स्वास्थ्य मंत्रालय के एक प्रस्ताव पर सहमति जताते हुए वेन्टिलेटर के निर्यात पर लगी पाबंदी हटाने और मेड-इन-इंडिया वेन्टिलेटर के निर्यात की अनुमति देने का फ़ैसला किया है.
सरकार के अनुसार देश में कोरोना के मामलों में मृत्यु दर की तेज़ी से गिरावट हो रही है और अब ये 2.15 प्रतिशत तक पहुंच गया है. सरकार के अनुसार 31 जुलाई 2020 तक, पूरे देश में केवल 0.22 फीसदी सक्रिय मामले हैं जो वेन्टिलेटर पर हैं.
इसी साल 24 मार्च में कोरोना महामारी के मद्देनज़र वेन्टिलेटर्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने इसके निर्यात पर पाबंदी लगा दी थी.
जर्मनी में कोरोना से जुड़े प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ विशाल प्रदर्शन
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में शनिवार को हज़ारों लोग कोरोना से जुड़े प्रतिबंधों के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतर आये.
इन प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार ने कोरोना से जुड़े जो प्रतिबंध लगाये हैं, जैसे कि मास्क लगाना या चेहरा ढक कर रखना, वो लोगों के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता का उल्लंघन हैं.
प्रदर्शन के दौरान बर्लिन के ब्रैडनबर्ग गेट के पास हज़ारों लोगों की भीड़ दिखाई दी. हालांकि प्रदर्शन शांति पूर्ण था, पर कुछ ही लोगों ने चेहरे पर मास्क पहने और सोशल डिस्टेन्सिंग का पालन किया.
मेक्सिको: कोविड-19 से अब तक 46 हज़ार की मौत, तीसरे स्थान पर पहुँचा
लातिन अमरीकी देश मेक्सिको कोरोना वायरस से संक्रमित होकर मरने वालों की संख्या के लिहाज़ से दुनिया में तीसरे नंबर पर पहुंच चुका है. इससे पहले स्थान पर अमरीका और ब्राज़ील हैं.
मेक्सिको में अब तक 424,637 लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हुए हैं जिनमें से 46,688 लोगों की मौत हुई है.
इससे पहले तीसरे स्थान पर ब्रिटेन था जहां पर 46,204 लोगों की मौत हुई है.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि इस महामारी का असर आने वाले दशकों तक रहेगा.
मेक्सिको में प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा है कि ये संभव है कि मेक्सिको में कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या अब तक दर्ज किए गए मामलों से कहीं ज़्यादा हो.
पोलैंड: लगातार तीसरे दिन कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड मामले
पोलैंड में लगातार तीसरे दिन कोरोना वायरस संक्रमण के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं.
पोलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक़, पिछले 24 घंटों में 658 मामले सामने आए हैं. इससे पहले शुक्रवार को 657 और गुरुवार को 615 मामले सामने आए थे.
कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में यह वृद्धि ख़ासतौर पर दक्षिणी पोलैंड के सेलेसियन इलाके में स्थित कोयला कारखाने और खनिकों के परिवार में संक्रमण फैलने से हुई है.
स्वास्थ्य मंत्री लुकास जुमोवस्की ने कहा है कि शादियों में पाबंदियाँ फिर से लगाई जा सकती है. फ़िलहाल, शादी जैसे समारोहों में अधिकतम 150 मेहमान शामिल हो सकते हैं.
पोलैंड में कई पश्चिमी यूरोपीय देशों की तुलना में संक्रमण और उससे होने वाले मौत के मामले कम हैं. पोलैंड में अब तक संक्रमण के 46,346 मामले सामने आए हैं जिनमें 1,721 लोगों की मौत हुई है और 34,374 लोग पूरी तरह से ठीक हुए हैं.
ब्राज़ील के राष्ट्रपति की चेतावनी- 'संभव है हर कोई वायरस की चपेट में आये'
ब्राज़ील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो ने अपने देशवासियों से कहा है कि संभवत: कभी न कभी हर कोई कोरोना वायरस की चपेट में आएगा इसलिए इसका सामना करें.
इस महीने की शुरुआत में राष्ट्रपति बोलसोनारो कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे. उन्होंने बताया कि फेफड़े में संक्रमण की वजह से वो एंटीबायोटिक ले रहे थे.
उन्होंने दक्षिणी राज्य रियो ग्रांडे डो सुल के दौरे के दौरान पत्रकारों से कहा, "मुझे पता था कि किसी न किसी दिन ये संक्रमण मुझे होगा. मुझे लगता है कि दुर्भाग्य से हर कोई आखिरकार इसका शिकार होने वाला है.”
“आप किससे डर रहे हैं? इसका सामना कीजिए. मुझे होने वाली मौतों को लेकर अफसोस है लेकिन हर रोज लोग कई तरह की चीजों से मरते हैं. यही ज़िंदगी है."
बोलसोनारो बार-बार कोविड-19 को एक ‘मामूली फ्लू’ बता चुके हैं और कहते रहे हैं कि वो गंभीर रूप से प्रभावित नहीं होंगे.
उन्होंने लॉकडाउन का भी यह कहते हुए विरोध किया है कि इससे अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँच रहा है.
दुनिया भर में अमरीका के बाद कोरोना से संक्रमित और मरने वालों की सबसे बड़ी संख्या ब्राज़ील में ही है.
ब्रेकिंग न्यूज़, ब्रिटेन: लॉकडाउन की पाबंदियों में अब छूट नहीं
इंग्लैंड में लॉकडाउन की पाबंदियों में और छूट नहीं देना का फ़ैसला लिया गया है.
इस फैसले की वजह से अब ख़ुद को कोरोना वायरस के डर से घरों में बंद कर के रखने वाले लोग घरों से निकल कर दफ्तर जा पाएंगे. इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और उत्तरी आयरलैंड में अधिक जोख़िम वाले बीस लाख लोगों को अब आइसोलेशन में रहने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.
पाबंदियों में छूट नहीं देने की वजह से कुछ व्यवसाय और व्यापार जो खुलने वाले थे, वो अब बंद ही रहेंगे. इंग्लैंड के मुख्य मेडिकल अधिकारी ने चेतावनी दी है कि हम लॉकडाउन की पाबंदियों में छूट देने की अधिकतम सीमा तक पहुँच चुके हैं.
प्रोफेसर क्रिस व्हिटी ने कहा है, "यह ख्याल कि हम सभी कुछ खोल सकते है और साथ में कोरोना वायरस के संक्रमण पर भी नियंत्रण रख सकते हैं, वो ग़लत है.”
जब उनसे पूछा गया कि क्या यह सुरक्षित था कि सभी बच्चों के लिए स्कूल फिर से खोल दिए जाए. इस पर उन्होंने कहा, "संतुलन बिठाने के लिहाज से यह एक मुश्किल काम होता. हम बहुत हद तक लॉकडाउन की पाबंदियों में छूट देने की सीमा तक पहुँच चुँके हैं.
मास्क पहनना ज़रूरी है, ऐसे में कैसे करें मेकअप?
दक्षिण कोरिया: जानकारी छिपाने के आरोप में एक शख़्स को हिरासत में लिया गया
दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने कॉन्टेक्ट ट्रेसर्स से कोविड 19 से जुड़ी जानकारियाँ छिपाने के आरोप में एक गुप्त ईसाई संप्रदाय के संस्थापक को हिरासत में ले लिया है.
ली मान ही नाम के यह शख़्स शिंचिओंजी चर्च से जुड़े हैं और काफ़ी प्रभावशाली माने जाते हैं. दक्षिण कोरिया में संक्रमण के 5200 मामलों को इस चर्च से जोड़कर देखा जा रहा है.
जोकि दक्षिण कोरिया के कुल मामलों का अकेले 36 फ़ीसदी है.
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स की ख़बर के मुताबिक़, अभियोजन पक्ष ने 89 वर्षीय ली समेत उनके अन्य सहयोगियों पर जानकारी छिपाने का आरोप लगाया है. इन पर आरोप है कि जिस समय दक्षिण कोरिया में संक्रमण के मामले अपने चरम पर थे इन्होंने अपने दो लाख अनुयायियों के बीच सही जानकारी साझा नहीं की.
योन हैप न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, ली ने अपने अनुयायियों को कोरोना वायरस संक्रमण के कारण को लेकर ग़लत जानकारी दी और अधिकारियों से संप्रदाय की सभाओं में सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों को लेकर तथ्य छिपाए.
जर्मनी में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर दो लाख दस हज़ार के पार
जर्मनी में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले बढ़कर दो लाख दस हज़ार के पार पहुँच गए हैं.
जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के आँकड़ों के मुताबिक़, जर्मनी में कोरोना संक्रमण के कुल मामले दो लाख दस हज़ार 399 हो गए हैं.
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स ने रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट के हवाले से लिखा है कि बीते चौबीस घंटे में कोरोना संक्रमण के 955 मामले सामने आए जिसके बाद से देश में संक्रमितों की संख्या दो लाख दस हज़ार के पार पहुँच गई है.
जर्मनी में अब तक 9148 लोगों के कोरोना से मरने की पुष्टि की गई है.
ब्रेकिंग न्यूज़, भारत में एक दिन में रिकॉर्ड 57 हज़ार से ज़्यादा मामले
भारत में बीते 24 घंटे के दौरान कोरोना संक्रमण के 57,117 नए मामले सामने आए हैं. इस दौरान देश भर में 764 लोगों की मौत भी हुई है.
भारत में कोरोना संक्रमण के कुल मामले 16,95, 988 हो गए हैं जिसमें 5,65,103 सक्रिय मामले हैं.
भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक अब तक देश भर में 36,511 लोगों की मौत हो चुकी है.
वियतनाम में कोविड-19 से हुई मौत, चार महीने में पहली मौत
वियतनाम में कोविड-19 से पहली मौत का मामला सामने आ गया है. सरकारी मीडिया के मुताबिक शुक्रवार सेंट्रल सिटी होई एन में 70 साल के एक शख़्स की मौत हुई.
इस मौत के साथ ही वियतनाम के कोविड-19 से ज़ीरो मौत के रिकॉर्ड का सिलसिला टूट गया.
इस शख़्स की मौत के कुछ घंटों के बाद वियतनाम में 61 साल के एक अन्य शख़्स की भी कोविड-19 से मौत हुई है. सरकारी मीडिया के मुताबिक इन दोनों शख़्स के स्वास्थ्य की स्थिति पहले से ही गंभीर थी.
पिछले तीन महीनों में वियतनाम में स्थानीय स्तर पर कोविड-19 संक्रमण का कोई भी मामला सामने नहीं आया था. लेकिन इस सप्ताह की शुरुआत में दा नांग रिसार्ट के नजदीक कोरोना संक्रमण फैलने के मामले सामने आए. 25 जुलाई से अब तक इस इलाके में कोरोना संक्रमण के 93 मामले सामने आ गए हैं, जिसके चलते इस पूरे शहर में लॉकडाउन लागू है
करीब 9.5 करोड़ की आबादी वाले वियतनाम में अब तक कोरोना संक्रमण के केवल 546 मामले सामने आए हैं.
वियतनाम के इतने बेहतर रिकॉर्ड की वजह यह रही है कि देश में कोविड-19 संक्रमण की पुष्टि होने से पहले ही देश की सभी सीमाओं को बंद कर दिया गया था. केवल अपने नागरिकों को स्वदेश लौटने की इजाजत थी लेकिन उन्हें भी पहले 14 दिनों तक सरकारी क्वारंटीन में रहना पड़ रहा था और टेस्ट में नेगेटिव होने पर ही उन्हें घर जाने दिया जा रहा था.
ईद की चमक पर पड़ा कोरोना वायरस का साया
पसीना सूंघ कर कोरोना संक्रमण का पता लगाएंगे स्निफर डॉग
चिली में पुलिस अधिकारी स्निफर डॉग्स को इंसान का पसीने सूंघ कर कोरोना वायरस संक्रमण का पता लगाने की ट्रेनिंग दे रहे हैं.
इससे पहले इस तरह का परीक्षण ब्रिटेन में भी किया गया था जिसके नतीजे सकारात्मक आए थे.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार शुरूआती ट्रेनिंग के लिए चार स्निफर डॉग्स को चुना गया है जिसमें लैब्राडॉर और गोल्डन रीट्रीवर शामिल हैं.
राजधानी सेन्टियागो में स्पेशल ट्रेनिंग बेस में इन स्निफर डॉग्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है. काम के लिए इनको हरे रंग के ख़ास बायोडिटेक्टर जैकेट दिए गए हैं.
स्निफर डॉग को ड्रग्स, विस्फोटक या संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करने के लिए ट्रेनिंग दी जाती है लेकिन हाल में सूंघ कर मलेरिया, कैंसर और पार्किनसन्स डिज़ीज़ का पता लगाने के लिए भी इनका इस्तेमाल किया जाता रहा है.
कोरोना महामारी के दौर में ईद का जश्न
कोरोना महामारी के बीच देश भर में शनिवार को ईद का त्योहार मनाया जा रहा है.
दिल्ली की जानीमानी जामा मस्जिद में सवेरे से लोग इकट्ठा होने लगे.
मस्जिद में प्रवेश से पहले लोगों की जांच की जा रही है. साथ ही नमाज़ के दौरान लोग सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों का पालन करते दिखे.
ब्रेकिंग न्यूज़, मौतों के मामले में मेक्सिको ने ब्रिटेन को छोड़ा पीछे
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार मेक्सिको के स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा है कि शुक्रवार को देश में कोरोना संक्रमण के 8,458 नए मामले दर्ज किए गए हैं. वहीं शुक्रवार को कोरोना से देश में 688 मौतें हुई है.
इसके साथ ही कोरोना से होने वाली मौतों के मामले में मेक्सिको ब्रिटेन से आगे बढ़ गया है और अमरीका और ब्राज़ील के बाद दुनिया का तीसरा देश बन गया है.
नए आंकड़ों के साथ मेक्सिको में कोरोना से कुल मौतों का आंकड़ा 46,688 पहुंच गया है जबकि ब्रिटेन में कोरोना से अब तक 46,204 लोगों की जान गई है.
वहीं कोरोना संक्रमितों की संख्या की बात करें तो ब्रिटेन में कुल संक्रमितों की संख्या 304,793 जबकि मेक्सिको में कुल संक्रमितों की संख्या 424,637 तक पहुंच गई है.
कोरोना वायरस से किस देश में कितनी मौतें -
- अमरीका - 153,268 मौतें
- ब्राज़ील - 92,475 मौतें
- मेक्सिको - 46,688 मौतें
- ब्रेटिन - 46,204 मौतें
- भारत - 35,745 मौतें
- इटली - 35,141 मौतें
- फ्रांस - 30,268 मौतें
- स्पेन - 28,445 मौतें
कनाडा ने विदेशियों के आने पर लगी रोक 31 अगस्त तक बढ़ाई
कोरोना महामारी को फैलने से रोकने के लिए शुक्रवार को कनाडा ने विदेशी यात्रियों के आने पर लगी रोक को 31 अगस्त कर के लिए बढ़ा दिया है.
साथ ही सरकार ने कोरोना संक्रमण के मामलों की निगरानी के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया है.
हाल में देश की विमानन कंपनी एयर कनाडा और यूरोप की कुछ विमानन कंपनियों से कनाडा सरकार से गुज़ारिश की थी कि वो सुरक्षा के अधिक नियमों के साथ हवाई यात्रा शुरू करें. लेकिन फिलहाल सरकार ने इस गुज़ारिश को नहीं माना है.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक शुक्रवार को लिए फैसले के बाद अब अमरीका को छोड़ कर किसी और देश के नागरिक इस महीने के आख़िर तक कनाडा में प्रवेश नहीं कर पाएंगे.
कनाडा और अमरीका के बीच सीमा को लेकर अलग समझौते हैं और सीमा पर गैर-ज़रूरी यात्रा पर 21 अगस्त तक पाबंदी लगाने के फैसले पर दोनों देशों में पहले ही सहमति बन गई है.
कनाडा में हाल के सप्ताह में कोरोना संक्रमण के मामलों में किसी तरह की बढ़ोतरी नहीं देखी गई है. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि संक्रमण की दूसरी लहर से बचने के लिए सतर्क रहना और सीमा पर आवाजाही को लेकर पाबंदियां लगाना ज़रूरी है.
देश की मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी टेरीज़ा टैम ने शुक्रवार को चेतावनी दी और कहा, "अगर दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया तो वायरस फिर से नई मुश्किलें पैदा कर सकता है. ये सच नहीं है कि गर्मियों में वायरस ख़त्म हो जाएगा. वायरस बस इस बात का इंतज़ार कर रहा है कि लोग एक दूसरे से मिलना जुलना शुरू करें और पार्टी करें."
कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग मोबाइल ऐप
शुक्रवार को कनाडाई अधिकारियों ने नया कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग मोबाइल ऐप लॉन्च किया है. ये ऐप लोगों को कोरोना वायरस संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर चेतावनी देगा.
मोबाइल ऐप लॉन्च करने की घोषणा सबसे पहले मई के महीने में की गई थी. प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने कहा, "खुद को प्रोटेक्ट करने के लिए आप कोविड अलर्ट ऐप डाउनलोड कर सकते हैं. ये ऐप स्टोर पर उपलब्ध है."
समाचार एजेंसी रॉटर्स के मुताबिक ये ऐप पहले केल ऑन्टोरियो में काम करेगा. सरकार को उम्मीद है कि इसके बाद इसे दूसरी जगहों पर भी काम करने के लिए तैयार किया जा सकेगा.
मोबइल ऐप की सुरक्षा के लिए ब्लैकबेरी और एक्सपोज़र के नोटिफ़िकेशन के लिए गूगल और ऐपल ने कनाडा सरकार के साथ मिल कर इस ऐप को बनाया है.
गुरुवार को कनाडा में संक्रमण के 329 मामले दर्ज किए गए थे. वहीं शुक्रवार को यहां संक्रमण के 476 मामले दर्ज किए गए हैं. अब तक यहां ये वायरस 8,980 लोगों की जान ले चुका है.
ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में कैसे पांव पसार रहा है वायरस?
कोरोना महामारी के शुरूआती कुछ महीनों में ऐसा लगा कि ऑस्ट्रेलिया इस वायरस को फैलने से रोकने में कामयाब रहा. लेकिन जून के आते-आते मेलबर्न में संक्रमण के मामलों में तेज़ी देखी गई.
माना जा रहा है विदेश से आए लोगों को होटलों में क्वारंटीन करने में हुई ढिलाई के चलते वहां कोरोना वायरस ने अपने पैर पसार लिए.
संक्रमण तेज़ी से फैलता देख तीन सप्ताह पहले देश के दूसरे बड़े शहर मेलबर्न में सरकार ने छह सप्ताह का लॉकडाउन लगा दिया.
लेकिन इसके बावजूद विक्टोरिया राज्य में रोज़ाना संक्रमण के सौ मामले आ रहे हैं. गुरुवार और शुक्रवार को यहां संक्रमण के 723 और 627 ताज़ा मामले सामने आए.
संक्रमण का ये आंकड़ा स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुमान से कहीं अधिक है. तो क्या ऑस्ट्रेलिया में लॉकडाउन कारगर नहीं रहा?
ऑस्ट्रेलिया की वास्तविक स्थिति?
ऑस्ट्रेलिया में कोरोना महामारी की दूसरी लहर के केंद्र विक्टोरिया है जहां की राजधानी मेलबर्न में संक्रमण के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए हैं.
जुलाई में यहां कोरोना संक्रमण के क़रीब नौ हज़ार मामले दर्ज किए गए हैं जो देश में दर्ज किए गए कुल मामलों का लगभग आधा हैं.
जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के डैशबोर्ड के अनुसार अब तक ऑस्ट्रेलिया में कोरोना संक्रमण के कुल 16,906 मामले दर्ज किए गए हैं और यहां कोविड से 197 मौतें हुई है.
शुरूआती दौर में ऑस्ट्रेलिया के सिडनी, पास के न्यू साउथ वेल्स और क्वीन्सलैंड में संक्रमण के कुछ मामले दर्ज किए गए थे.
लेकिन विक्टोरिया में संक्रमण के मामले बढ़ने की वजह यहां पर केयर होम्स में रहने वाले बुज़ुर्गों की अधिक संख्या, स्कूल और पब्लिक हाउसिंग इस्टेट हैं. संक्रमण की चपेट में वो लोग भी आ रहे हैं जिनके पास घर से काम करने की सुविधा नहीं होती.
वायरोलॉजिस्ट ये भी कह रहे हैं कि संक्रमण के अधिक मामलों की एक वजह वो लोग भी हैं जो असुरक्षित माहौल में काम करते हैं, कई जगहों पर काम करते हैं या नाते रिश्तेदारों के साथ अधिक घुलते मिलते हैं.
विक्टोरिया की सरकार ने चेतावनी दी है कि कई लोग बीमारी की हालत में भी काम पर जा रहे हैं. उन्होंने कहा कि बीते सप्ताह जिन लोगों के कोरोना टेस्ट हुए उनमें से आधे लोगों के टेस्ट का नतीजा आने तक होम आइसोलेशन में रहना ठीक नहीं समझा.
और तो और दस में से नौ लोगों के लक्षण होने के बावजूद तुरंत टेस्ट नहीं कराया. कई लोगों ने ये कहते हुए लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन किया कि ये मानवाधिकारों की उल्लंघन है.
स्थिति को देखते हुए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने कोरोना हॉटस्पॉट की पहचान करने के लिए हज़ारों स्वास्थ्य कर्मियों को नियुक्त किया है.
लेकिन सरकार की ये कदम कितना कारगर साबित हो रहा है इसके बारे में अभि पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता.
अब आगे क्या होगा?
अधिकारियों की एक इमर्जेंसी बैठक के बाद प्रशासन अब लॉकडाउन के दौरान इकट्ठा किए गए डेटा का विश्लेषण करेगा ताकि महामारी की स्थिति के बारे में स्पष्ट राय बनाई जा सके.
विक्टोरिया के प्रीमियर डेनियल एंड्रूज़ ने शुक्रवार को बताया, "पूरे मसले पर आज और कल विचार किया जाएगा जिसके बाद ही हमेरा पास कुछ ठोस कहने के लिए होगा. मेरा पूरा ध्यान इस बात रप है कि इस शांत और घातक दुश्मन को कैसे हराया जाए."
जानकार मानते हैं कि मेलबर्न में लॉकडाउन को और आगे बढ़ाया जा सकता है. और अब तक जो जानकारी सामने आ रही है उसके आधार पर हो सकता है कि लॉकडाउन के नियमों को और अधिक कड़ा किया जाए.
मेलबर्न में एक सप्ताह पहले ही मास्क पहनना बाध्यकारी बनाया गया है, जिसका अर्थ ये है कि इसका कितना सकारात्मक असर पड़ा ये जानने के लिए अभी कुछ स्पातह का इंतज़ार ज़रूरी है.
जानकार कहते हैं, अगर लगातार एक सप्ताह से अधिक वक्त तक संक्रमण के मामलों में कमी आती रही तो कहा जा सकता है कि स्थिति में सुधार हो रहा है.
हर्ड इम्युनिटी पर भरोसा करना भारत को क्यों ख़तरनाक लग रहा है?
भारत जैसे बड़ी आबादी वाले देश में कोरोना महामारी के ख़िलाफ़ हर्ड इम्युनिटी कोई रणनीतिक विकल्प नहीं हो सकता है. भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने गुरुवार को ये बात कही.
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ विशेषज्ञों का कहना है कि हर्ड इम्युनिटी तभी होती है जब आबादी के एक हिस्से में वैक्सीन या फिर संक्रमण से ठीक होने के बाद प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाए.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में ओएसडी (ऑफ़िसर ऑन स्पेशल ड्यूटी) राजेश भूषण ने कहा, "भारत जैसे बड़ी आबादी और बड़े आकार वाले देश में हर्ड इम्युनिटी कोई रणनीतिक विकल्प नहीं हो सकता है. ये केवल एक नतीजा हो सकता है और उसके लिए भी बड़ी क़ीमत चुकानी होगी. इसका मतलब होगा कि हज़ारों या लाखों मरीज़ संक्रमित होंगे, वे इलाज के लिए अस्पताल जाएंगे, नतीजतन बड़ी संख्या में लोगों की मौत होगी. इसलिए हर्ड इम्युनिटी कभी भी रणनीतिक विकल्प नहीं हो सकती है."