बीबीसी हिंदी के कोरोना लाइव पेज में बस आज इतना ही. लाइव पेज से जुड़े रहने के लिए आपका बहुत-बहुत शुक्रिया.
लेकिन अगर आप जानना चाहते हैं कि दुनिया भर में कोरोना के मामले में क्या हो रहा है, तो आप यहां क्लिक कर सकते हैं.
दुनिया भर में कोरोना संक्रमितों की संख्या डेढ़ करोड़ हो गई है और अब तक छह लाख 22 हज़ार लोग मारे जा चुके हैं.
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अमरीका के पाँच राज्यों- अलाबामा, हवाई, इंडियाना, मिसोरी और न्यू मैक्सिको में कोरोना संक्रमण के नये मामले सामने आने के अब तक के सारे रिकॉर्ड टूट गये हैं.
साथ ही फ़्लोरिडा और टेनेसी में पिछले 24 घंटे के भीतर कोविड-19 से अब तक की सबसे ज़्यादा मौतें हुई हैं.
जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार, बीते 24 घंटे में अमरीका में कोरोना संक्रमण के रिकॉर्ड 68,663 नये मामले सामने आये और 1,114 लोगों की कोविड-19 से मौत हो गई.
विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीका में संक्रमण पहले से भी ज़्यादा तेज़ी से फैल रहा है.
अमरीका में कोरोना संक्रमण के मामलों सिर्फ़ 15 दिनों में 30 लाख से बढ़कर 40 लाख हो गये हैं.
अमरीकी अख़बार ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ के मुताबिक़, कोरोना संक्रमण के मामले दस लाख से बीस लाख होने में 45 दिन और बीस लाख से 30 लाख होने में 27 दिन लगे थे.
कोरोना के संभावित टीकों के बारे में कई पाठकों ने बीबीसी को अपने सवाल भेजे हैं जिनका जवाब देने की कोशिश कर रही हैं बीबीसी की हेल्थ एडिटर मिशेल रॉबर्ट्स.

सवाल: क्या ट्रांसप्लांट यानी अंग प्रत्यारोपण करवा चुके लोग भी टीका लगवा सकेंगे?
जवाब: वैज्ञानिक कई तरह के संभावित टीकों पर काम कर रहे हैं. इन्हें कई तरह से टेस्ट किया जा रहा है. हालांकि, यह अब तक स्पष्ट नहीं है कि इनमें कौनसा टीका सबसे ज़्यादा प्रभावी साबित हो सकता है.
टीके के विभिन्न संस्करण कुछ लोगों के लिए दूसरों की तुलना में अधिक उपयुक्त हो सकते हैं.
इन्हीं सब सवालों के जवाब खोजने के लिए टेस्ट किये जा रहे हैं ताकि ये पता लग सके कि टीकाकरण से किसे-कितना लाभ हो सकता है.
अब बात विशेष रूप से ट्रांसप्लांट की, तो अगर आपने ट्रांसप्लाट करवाया है और इस वजह से आप इम्युनिटी को दबाने के लिए कुछ दवाएं ले रहे हैं ताकि आपका शरीर उस ट्रांसप्लांट को स्वीकार कर ले, तो कुछ वैक्सीन जैसे कि 'जैव' टीके जिसमें कमज़ोर स्तर के बैक्टीरिया या वायरस हों, आपको नहीं लेने चाहिए.

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कोरोना महामारी के दौरान बच्चों के स्कूल बंद हैं और सरकारी से लेकर निजी स्कूलों तक, बच्चों की ज़ूम, गूगल मीट और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे ऐप्स के ज़रिये ऑनलाइन क्लासें चल रही हैं जो सिर्फ़ ऑनलाइन क्लासरूम तक सीमित ना रहकर, शिक्षकों की निजी ज़िंदगी तक पहुँच गई हैं.
बच्चों या उनके माता-पिता तक सूचनाएं पहुँचाने के लिए शिक्षकों ने अलग-अलग कक्षाओं के वॉट्सऐप ग्रुप बनाये हुए हैं.
लेकिन जिस मोबाइल से बच्चे क्लास लेते हैं या फिर वॉट्सऐप के ज़रिये बात करते हैं, वो उनके माता-पिता या भाई-बहन का होता है. इसी वजह से शिक्षकों का नंबर बच्चों के अलावा उनके परिवार वालों तक भी पहुँच रहा है.
ऐसे में ऑनलाइन पढ़ा रहे शिक्षकों के साथ सिर्फ़ यही परेशानी नहीं है, बल्कि पढ़ाई के इस नए तरीक़े ने उनके सामने भी चुनौतियों का एक पिटारा खोल दिया है.
बीबीसी से बात करने वाले लगभग सभी शिक्षकों ने कहा कि 'इस वक़्त उन पर परफ़ॉर्मेंस का बहुत दबाव है.'
शिक्षकों ने बताया कि उनका काम अब सिर्फ़ पढ़ाने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हर बच्चे को क्लास में बुलाना, उनसे असाइंमेंट और बाकी एक्टिविटी करवाना भी है जिस वजह से काम और काम के घंटे, दोनों बढ़ गये हैं.

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जॉन्स हॉपकिन्स युनिवर्सिटी के डैशबोर्ड के अनुसार दुनिया भर में कोरोना संक्रमितों की संख्या अब 1.55 करोड़ के पार हो गई है, जबकि कोरोना वायरस से मरने वालों की कुल आंकड़ा अब 634,231 तक पहुंच गया है.

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सुब्रत कुमार पति
ओडिशा, भुवनेश्वर से

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ओडिशा विधानसभा से जुड़े पांच कर्मचारियों के कोरोना पॉज़िटिव पाए जाने के बाद प्रदेश की विधानसभा को बंद कर दिया गया है.
विधानसभा स्पीकर सूर्य पात्रा यह जानकारी देते हुए कहा कि 31 जुलाई तक विधानसभा बन्द रहेगी और इस बीच इसे पूरी तरह से सैनिटाइज़ किया जाएगा.
राज्य में अब तक चार विधायक कोरोना पॉज़िटिव पाए गए हैं.
प्रदेश में आज एक दिन में कोरोना संक्रमण के सबसे अधिक 1,594 नए मामले दर्ज किए गए हैं जिनमें से 527 स्थानीय कांटेक्ट हैं. इसके साथ ही प्रदेश में संक्रमितों का कुल आंकड़ा अब 22,693 तक पहुंच गया है.

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कोरोना वायरस के इस दौर में साफ-सफाई रखने और बार-बार हाथ धोने के लिए कहा जा रहा है ताकि वायरस आपके शरीर तक ना पहुंच पाए.
ऐसे में लोग बार-बार हाथ धो भी रहे हैं लेकिन, अगर आपको लगने लगे कि हर चीज़ में जर्म्स हैं, वायरस है, गंदगी जो आपको नुक़सान पहुंचा सकता है और आप बार-बार हाथ धो रहे हैं या सफाई कर रहे हैं तो ये एक बीमारी का लक्षण है. इसे कहते हैं ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी).
डॉक्टरों का कहना है कि जिन लोगों में ओसीडी की समस्या पहले से ही मौजूद है उनमें कोरोना महामारी के दौरान दिक्कत और बढ़ गई हैं.
इस बारे में क्या कहते हैं जानकार पढ़िए यहां.
कोरोना के संभावित टीकों के बारे में कई पाठकों ने बीबीसी को अपने सवाल भेजे हैं जिनका जवाब देने की कोशिश कर रही हैं बीबीसी की हेल्थ एडिटर मिशेल रॉबर्ट्स.

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सवाल: क्या इस वैक्सीन के कुछ अवांछित दुष्प्रभाव हो सकते हैं?
जवाब: कठोर सुरक्षा जाँच से गुज़रने के बाद ही किसी टीके को व्यापक इस्तेमाल की मंज़ूरी मिलती है. इसके लिए कई चरणों में टेस्ट किये जाते हैं. लेकिन कोविड-19 की वैक्सीन विकसित करने के लिए रिसर्च का काम बहुत ही तेज़ी से किया गया है.
अनुसंधान का काम भी सामान्य स्थिति की तुलना में काफ़ी तेज़ गति में चल रहा है. फिर भी क्लीनिकल ट्रायल के दौरान वो सारे परीक्षण किये जा रहे हैं जो एक टीके को मंज़ूरी देने से पहले ज़रूरी होते हैं.
मेडिकल साइंस मानती है कि किसी भी उपचार के कुछ दुष्प्रभाव हो सकते हैं, और इस मामले में टीके अलग नहीं होते. मगर टीकों का सबसे आम दुष्प्रभाव भी काफ़ी मामूली होता है, जैसे- शरीर के किसी हिस्से पर सूजन आना या त्वचा पर लाल धब्बे पड़ना, वो भी सिर्फ़ उस जगह पर, जहाँ टीका लगाया गया हो.
और सवालों के उत्तर पाने के लिए यहां क्लिक करें.
कोरोना वायरस से जूझने के बीच एक बड़ी चुनौती बायो मेडिकल वेस्ट यानी उपचार से जुड़े सामान के कचरे को सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की भी है.
ऐसा कचरा इकट्ठा करने वाले न सिर्फ़ अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं, बल्कि पैसों की तंगी से भी जूझ रहे हैं. देखिए, ये वीडियो रिपोर्ट.
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अमरीका में कोरोना संक्रमण के बीच 2020 बेसबॉल सीज़न शुरू तो हो गया लेकिन बिना दर्शकों के.
वरिष्ठ स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉक्टर एंथनी फ़ाउची ने शुक्रवार को वॉशिंगटन में एक सांकेतिक पिच के साथ इसकी शुरुआत की.
हालांकि इस दौरान स्टेडियम दर्शकों के बिना खाली ही रहा. वॉशिंगटन की टीम के खिलाड़ी जुआन सोटो भी कोरोना पॉज़िटिव पाए जाने के बाद इस मैच में हिस्सा नही ले सके.


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प्रभाकर मणि तिवारी
कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए
पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण के मामले में कोलकाता शीर्ष पर पहुंच गया है. इसके बाद पड़ोसी उत्तर 24-परगना जिला दूसरे स्थान पर है.
कोरोना संक्रमण की वजह से शुक्रवार को ट्रैफ़िक पुलिस के एक सब-इंस्पेक्टर अभिज्ञान मुखर्जी की मौत हो गई.
राज्य में रोजाना जितने नए मामले सामने आ रहे हैं, उनमें आधे से ज्यादा कोलकाता के ही हैं. मृतकों के मामले में भी आंकड़ा यही है. विशेषज्ञों का कहना है कि कोलकाता की सघन आबादी ही तेजी से फैलते संक्रमण की मुख्य वजह है.
स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी बुलेटिन में कहा गया है कि बीते 24 घंटों के दौरान राजधानी कोलकाता में एक बार फिर सबसे ज़्यादा 795 नए मामले आए हैं.
एक दिन पहले भी महानगर में 692 नए मामले आए थे. अब कोलकाता में संक्रमितों की कुल संख्या 16,127 हो गई है. इनमें 5,908 सक्रिय मामले है.
राज्य में अब तक कोरोना की वजह से जिन 1255 लोगों की मौत हुई है, उनमें 642 अकेले कोलकाता के ही हैं.इसके बाद उत्तर 24 परगना में भी हावड़ा में 303 औऱ दक्षिण 24 परगना से 173 नए मामले आए हैं.
संक्रमण पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने सप्ताह में दो दिन पूर्ण लॉकडाउन का फ़ैसला किया है. इसके तहत गुरुवार को लॉकडाउन के बाद शुक्रवार को कंटेनमेंट ज़ोन के अलावा बाकी सब जगह आम जनजीवन सामान्य रहा. अब शनिवार को फिर पूर्ण लॉकडाउन रहेगा.

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कोरोना वायरस महामारी का असर दुनियाभर में देखने को मिल रहा है. लेकिन हमारे ही समाज में मौजूद मूक-बधिर लोगों को इसकी जानकारी काफी देर से मिली.
भारत में मूक-बधिर लोगों के लिए साइन-लैंग्वेज में समाचारों की व्यवस्था बहुत कम होती है.
ऐसे में इन लोगों को इस महामारी और इससे जुड़ी सरकारी घोषणाओं की सूचनाएं बहुत मुश्किल से मिल पाती हैं.
उनकी इन्हीं मुश्किलों को हल करने के लिए कुछ समूह आगे आए हैं. बीबीसी संवाददाता दिव्या आर्य और प्रेम भूमिनाथन की यह रिपोर्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें.
ब्रिटेन की सरकार ने कहा है कि इस साल वहां लगभग सभी लोगों (30 करोड़) को फ़्लू का टीका लगाया जाएगा.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी है कि सर्दियों के मौसम में कोरोना वायरस संक्रमण में तेज़ी की आशंका है. इन्हीं चेतावनियों को देखते हुए ब्रिटेन सरकार संक्रमण पर काबू रखने की कोशिशों में जुट गई है.
इस टीकाकरण अभियान में पहली बार 50 साल से ज़्यादा उम्र के सभी लोगों और उनके साथ रहने वालों को शामिल किया जाएगा. इसके साथ ही ये पहली बार होगा जब सेकेंड्री स्कूल में पहले साल के बच्चों को भी टीका लगाया जाएगा.

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आज (शुक्रवार) से जापान की राजधानी टोक्यो में साल 2020 के ओलंपिक गेम्स शुरू होने वाले थे लेकिन अब उसे अगले साल के तक के लिए स्थगित कर दिया गया है.
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि टोक्यो 2021 भी हर मंजूरी और बिना किसी बदलाव के मुमकिन हो पाएगा या नहीं.
अगर अगले साल तक ओलंपिक होता भी है तो कुछ खिलाड़ियों की उम्र तय आयु सीमा से ज़्यादा हो जाएगी. वहीं, कुछ खिलाड़ियों के लिए 2021 तक इंतज़ार करना मानसिक और आर्थिक रूप से बहुत मुश्किल हो जाएगा.

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एक नई रिसर्च से पता चला है कि लॉकडाउन की वजह से धरती पर होने वाले शोर में 50 फ़ीसदी की कमी आई है.
शोध के मुताबिक़ इंसानों के चलने-दौड़ने और ट्रैफ़िक जैसी गतिविधियों से धरती पर जो शोर पैदा होता है, वो साल के मध्य में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लागू लॉकडाउन के कारण लगभग आधा हो गया.
ये शोध बेल्जियम की रॉयल ऑब्ज़र्वेटरी की अगुवाई में हुआ जिसमें 70 से ज़्यादा वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया था. उन्होंने दुनिया की अलग-अलग 300 जगहों से मिले डेटा का अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्यटन और लोगों की आवाजाही की कमी के कारण धरती के शोर में कमी आई है.
इस शोध से जुड़ी एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि वैज्ञानिकों को चीन और इटली से लेकर बाकी दुनिया में भी लॉकडाउन का असर देखने को मिला.

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कोरोना महामारी के मद्देनज़र, जुमे की नमाज़े के लिए तुर्की की ऐतिहासिक इमारत हागिया सोफ़िया में कुछ सावधानियाँ बरती जा रही हैं.
इस्तांबुल के गवर्नर अली येरलिकाया ने लोगों से कहा है कि ‘वो नमाज़ के लिए फ़ेस मास्क लगाकर घर से निकलें, अपने साथ अपनी चटाई लेकर मस्जिद में जायें, धैर्य रखें और समझदारी से काम करें.’ उन्होंने कहा कि ‘नमाज़ के दौरान वहाँ हेल्थ केयर वर्कर भी तैनात रहेंगे.’
इस महीने की शुरुआत में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने इस्तांबुल स्थित हागिया सोफ़िया म्यूज़ियम को दोबारा मस्जिद में बदलने का आदेश दिया था जिसके बाद अब पहली बार, वहाँ जुमे की नमाज़ की तैयारियाँ की गई हैं.
तुर्की के धार्मिक मामलों के मंत्री अली इरबास ने कहा, “हागिया सोफ़िया परिसर में क़रीब एक हज़ार लोग एक बार में नमाज़ के लिए जमा हो सकते हैं.”

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उन्होंने कहा कि “मुस्लिम काफ़ी उत्सुक हैं, हर कोई वहाँ मौजूद रहना चाहता है. इसे देखते हुए इमारत के परिसर में कुछ बदलाव किये गए हैं, जैसे कि नमाज़ के लिए एक गार्डन तैयार किया गया है. साथ ही निर्णय लिया गया है कि इमारत पूरी रात खुली रहेगी.”
1500 साल पुरानी यूनेस्को की ये विश्व विरासत मूल रूप से मस्जिद बनने से पहले चर्च थी और 1930 के दशक में इसे म्यूज़ियम बना दिया गया था.
तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने पिछले साल चुनाव में इसे मस्जिद बनाने का वादा किया था.
तुर्की का हागिया सोफ़िया दुनिया के सबसे बड़े चर्चों में से एक रहा है. इसे छठी सदी में बाइज़ेंटाइन सम्राट जस्टिनियन के हुक्म से बनाया गया था.
लेकिन डेढ़ हज़ार साल पुराने इस चर्च को पहले मस्जिद, फिर म्यूज़ियम, और अब एक बार फिर मस्जिद बनाने का निर्णय किया गया. पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए क्लिक कीजिए.

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रूस में कोरोना संक्रमण के मामले आठ लाख से ज़्यादा हो गये हैं. देश के कोरोना वायरस क्राइसिस रिस्पॉन्स सेंटर ने यह जानकारी दी है.
अब तक रूस में संक्रमण के कुल 800,849 मामले दर्ज किये गए हैं.
यहाँ संक्रमण की चपेट में आकर अब तक कुल 13,046 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 5,88,774 लोग इलाज के बाद ठीक हुए हैं.
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कोरोना से ठीक होने के बाद भी बीमारी के लक्षण इंसानी शरीर में बने रह सकते हैं.
कई मरीज़ों में इसके सबूत मिले हैं कि कोरोना नेगेटिव होने के बाद भी उनमें सिरदर्द, थकान और माँसपेशियों में दर्द जैसे लक्षण हैं.
ऐसे मरीज़ों को कोविड लॉन्ग हॉलर कहा जा रहा है.
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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन का कहना है कि देश में अब तक डेढ़ करोड़ आरटीपीसीआर टेस्ट किए गए हैं.
उन्होंने कहा, “अब हमारा लक्ष्य रोज़ाना 10 लाख टेस्ट करना है.भारत में अभी तक कोविड-19 की वजह से 30 हज़ार से ज़्यादा मौतें हुई हैं लेकिन प्रति 10 लाख की आबादी के हिसाब से देखें तो हमारे यहां संक्रमण मामले और मृत्यु दर अब भी काफ़ी कम है. देश में मृत्यु दर 2.3 फ़ीसदी है जबकि रिकवरी रेट 63.45 फ़ीसदी.”