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कोरोना अपडेटः दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद 30 जून तक आम लोगों के लिए बंद की गई
दुनिया भर में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़कर 73 लाख से अधिक हो गए हैं. कोविड-19 के कारण अब तक 4 लाख 15 हज़ार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
लाइव कवरेज
अमरीका: अमेज़न और ई-बे को कोरोना से जुड़े भ्रामक दावे करने वाले उत्पाद हटाने का आदेश

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अमरीका की पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी ईपीए ने गुरुवार को ई-कॉमर्स कंपनी अमेज़न और ई-बे से कोरोना वायरस से जुड़े भ्रामक दावे करने वाले कीटनाशकों की बिक्री बंद करने के लिए कहा है.
समाचार ऐजेंसी रॉयटर्स के अनुसार ईपीए ने दोनों कंपनियों से कहा है कि वो अपने प्लेटफॉर्म पर ऐसे कीटनाशक न बिकने दें जो ये दावा करते हैं कि वो कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ प्रभावी हैं.
ईपीए का कहना है कि न तो ये उत्पाद पंजीकृत नहीं हैं, और न ही हर तरह के इस्तेमाल के लिए सही हैं. साथ ही ये उपभोक्ताओं ख़ास कर बच्चों और जानवरों के लिए हानिकारक भी हो सकते हैं.
ईपीए ने करीब 70 ऐसे उत्पादों की एक सूची तैयार कर इन दोनों कंपनियों को सौंपी है.
रॉयटर्स के अनुसार अमेज़न के प्रवक्ता ने कहा है कि ”वो सूची में दिए गए उत्पादों को वेबसाइट से हटाएंगे और जिसने इन्हें लिस्ट किया है उनके ख़िलाफ़ भी कदम उठाएंगे.”
प्रवक्ता का कहना है कि कोरोना महामारी के मद्देनज़र कंपनी ने एक ऐसा टूल बनाया है जो कोविड-19 से जुड़े किसी भी ग़लत दावे के बारे में पता लगाने के लिए वेबसाइट पर लिस्ट किए जाने वाले सभी उत्पादों के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करता है.
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दिल्ली की जामा मस्जिद 30 जून तक आम लोगों के लिए बंद रहेगी

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दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद को 30 जून तक आम लोगों के लिए बंद कर दिया गया है.
मस्जिद के इमाम सैय्यद अहमद बुख़ारी ने एक बयान जारी कर कहा कि दिल्ली में कोरोना के मामले तेज़ी से बढ़ते जा रहे हैं.
इसके लिए उन्होंने कुछ लोगों और धार्मिक गुरुओं से सलाह ली कि क्या मस्जिद को आम लोगों के लिए कुछ दिनों के लिए बंद कर देनी चाहिए.
इमाम बुख़ारी के अनुसार ज़्यादातर लोगों ने उन्हें यही सलाह दी कि मस्जिद को बंद कर देनी चाहिए.
बुख़ारी ने बताया कि तमाम लोगों की राय के बाद ये फ़ैसला किया गया है कि गुरुवार मग़रिब की नमाज़ के बाद 30 जून तक जामा मस्जिद में आम लोगों को आने की इजाज़त नहीं होगी.
उन्होंने ये भी साफ़ किया कि मस्जिद में अज़ान दी जाती रहेगी और मस्जिद के प्रबंधन से जुड़े लोग पाँच वक़्त नमाज़ भी पढ़ते रहेंगे.
कोरोना के रोज़ाना बढ़ते मामलों के कारण सिर्फ़ आम लोगों की भीड़ को रोकने का फ़ैसला किया गया है.
इमाम बुख़ारी ने भारत के सभी मस्जिदों के प्रबंधन से जुड़े लोगों से अपील की कि वो स्थानीय हालात का जायज़ा लेते हुए ऐसा फ़ैसला करें.
उन्होंने कहा कि इस्लामी क़ानून में इसकी पूरी इजाज़त है कि लोगों की जान बचाने के लिए कोई भी फ़ैसला किया जा सकता है.
ग़ौरतलब है कि केंद्र सरकार ने आठ जून से सभी धार्मिक स्थलों को सोशल डिस्टेंसिंग और कुछ शर्तों के साथ खोलने की इजाज़त दे दी थी.
जामा मस्जिद को भी आम लोगों के लिए खोल दिया गया था लेकिन कोरोना मरीज़ों की बढ़ती तादाद के बाद ये फ़ैसला किया गया है.
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चीन ने अमरीकी शोध को ख़ारिज किया

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इमेज कैप्शन, वुहान कोरोना महामारी से उबर रहा है, जहां जनजीवन सामान्य हो रहा है चीन की सरकार ने अमरीकी शोधकर्ताओं के उस आरंभिक शोध को सिरे से ख़ारिज कर दिया है, जिसमें ये संकेत दिए गए थे कि कोरोना वायरस वुहान शहर में फैल रहा है, जहां अगस्त 2019 के बाद इसका पहला मामला सामने आया था.
बोस्टन यूनिवर्सिटी और हॉर्वर्ड के विशेषज्ञों का ये शोधपत्र उन तस्वीरों पर आधारित है, जिनमें वुहान के अस्पताल के पार्किंग-लॉट्स दिखाए गए थे.
एक आधार चीन के सर्च इंजन को भी बनाया गया है.
चीन के विदेश मंत्रालय ने इस शोध को एकदम निराधार बताते हुए कहा है कि इसमें 'कई ख़ामियां' हैं और इसका मकसद 'चीन के ख़िलाफ़ माहौल बनाना' है.
अमरीका के साथ दुनिया के कुछ अन्य देशों का ये आरोप है कि चीन ने कोरोना महामारी की शुरुआत कैसे हुई और कैसे इसका प्रसार हुआ, इसके बारे में जानकारी देने में पारदर्शिता नहीं दिखाई.
'कोरोना संक्रमण से होने वाली मौत के मामले भारत में सबसे कम'

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कोविड-19 पर भारत सरकार की गुरुवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया गया है कि प्रति लाख की आबादी पर कोरोना संक्रमण के मामले भारत में सबसे कम हैं.
इसमें ये भी दावा किया गया है कि प्रति लाख की आबादी पर कोरोना संक्रमण से होने वाली मौत के मामले भी भारत में सबसे कम है.
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने बताया है कि भारत में कोरोना वायरस से ठीक होने वाले मरीज़ों का प्रतिशत, 49 फीसद से अधिक है.
उन्होंने बताया कि भारत में अब तक 1.41 लाख लोग संक्रमित होने के बाद इलाज से पूरी तरह ठीक हो चुके हैं.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर विनोद पॉल ने बताया कि भारत के 83 ज़िलों में एक सर्वे (सीरो सर्वे) किया गया है.
सर्वे के मुताबिक, भारत की आबादी के एक बड़े हिस्से पर कोरोना वायरस का ख़तरा बना हुआ है.
उन्होंने बताया कि इस सर्वे से पता चला है कि एक प्रतिशत लोगों में ही कोरोना वायरस के लक्षण पाए गए हैं.
उन्होंने बताया कि ये आकंड़ा 30 अप्रैल तक का है और दावा किया कि कोरोना वायरस से होने वाली मौत की दर बहुत कम है.
प्रोफेसर विनोद पॉल ने कहा कि वायरस देश में मौजूद है और आगे अपना दायरा बढ़ा सकता है, इसलिए एहतियात ज़रूरी है.
कम्युनिटी ट्रांसमिशन से संबंधित एक सवाल के जबाव में आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि भारत में कम्युनिटी ट्रांसमिशन की स्थिति अभी नहीं है. कम्युनिटी ट्रांसमिशन के संबंध में उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी हवाला दिया.
क्या ईरान कोरोना संक्रमण के दूसरे दौर में जा रहा है ?

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ईरान में कोरोना वायरस के मामले एक बार फिर तेज़ी से सामने आ रहे हैं.
ईरान का कहना है कि ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि जांच में तेज़ी आई है, जिनमें मामूली संक्रमण के मामले भी शामिल हैं.
ईरान में जून के पहले हफ्ते में हर दिन 3000 से अधिक कोरोना संक्रमण के मामले सामने आए हैं. जबकि इससे पहले की हफ्ते में इन मामलों की संख्या 50 प्रतिशत कम थी.
ईरान दुनिया के उन शुरूआती देशों में से एक है जहां कोरोना महामारी ने बड़ा हाहाकार मचाया था.
अप्रैल के मध्य में मामले कम होने पर ईरान ने लॉकडाउन में काफी ढील दे दी थी.
लेकिन अब जिस हिसाब से मामले बढ़ रहे हैं, आशंका जताई जा रही है कि ये ईरान में कोरोना संक्रमण के दूसरे दौर की शुरुआत हो सकती है.
इमरान ख़ान ने कोरोना के ख़िलाफ़ भारत को की मदद की पेशकश

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कोरोना वायरस से लड़ने में भारत की मदद की पेशकश की है.
उन्होंने लॉकडाउन से प्रभावित भारतीय परिवारों के लिए पाकिस्तान के 'एहसास प्रोग्राम' के तहत मदद करने की बात की है.
इमरान ख़ान ने ट्वीट किया, "इंडिया में रहने वाले वो घराने जो लॉकडाउन की वजह से माली तौर पर प्रभावित हुए हैं, उनकी आसानी के लिए पाकिस्तान अपने एहसास प्रोग्राम को उनके इस्तेमाल के लिए पेश करने को तैयार है."
"एहसास प्रोग्राम" के तहत लॉकडाउन से पीड़ित ग़रीब परिवारों को आर्थिक मदद दी जाती है.
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कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए भारत में मार्च के आख़िर से सख़्त लॉकडाउन लागू कर दिया गया था.
लॉकडाउन के कारण भारत में बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं.
अमरीका की दो यूनिवर्सिटी और मुंबई स्थित एक संस्था की रिपोर्ट के अनुसार लॉकडाउन के कारण 84 फ़ीसद घरानों के आमदनी में कमी आएगी और 34 फ़ीसद ऐसे घराने हैं जो बग़ैर मदद के एक हफ़्ते से ज़्यादा अपना गुज़ारा नहीं कर पाएंगे.
इससे पहले पाकिस्तान में एहसास प्रोग्राम की प्रमुख सानिया निश्तर ने भी ट्वीट कर बताया कि अब तक एक करोड़ से ज़्यादा परिवारों को 121 अरब पाकिस्तानी रुपये की कैश मदद दी जा चुकी है.
कोरोना वायरस से जुड़ी सबसे रहस्यमयी और सनसनीखेज़ कहानी

जैसे जैसे कोविड-19 की महामारी दुनिया भर में बढ़ रही है, वैसे वैसे वैज्ञानिकों को नए कोरोना वायरस के बारे में एक अजीब, मगर बेहद चिंताजनक बात के सबूत पर सबूत मिल रहे हैं.
इस वायरस के शिकार होने वाले बहुत से लोगों में खांसी, बुख़ार और स्वाद व गंध का पता न चलने के लक्षण दिखाई देते हैं. मगर, इससे संक्रमित कई ऐसे भी लोग हैं, जिनमें कोई लक्षण ही नहीं दिखते.
और, इसी वजह से उन्हें कभी पता ही नहीं चलता कि वो कोविड-19 की बीमारी अपने साथ लेकर घूम रहे हैं. ये ठीक वैसे ही है, जैसे कोई इंसान अपनी जेब में बम लेकर चल रहा हो, और उसे इसकी ख़बर ही न हो.
कोरोना वायरस पर रिसर्च करने वालों का कहना है कि दुनिया में कितने लोग वायरस से ऐसे संक्रमित हैं कि उनमें लक्षण नहीं हैं, इस बात का पता लगना बेहद ज़रूरी है.
क्योंकि इसी से हमें ये पता चलेगा कि क्या ये 'साइलेंट स्प्रेडर' या गुप चुप तरीक़े से वायरस फैला रहे लोग ही महामारी का दायरा बढ़ा रहे हैं.
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पारले-जी: आपदा को अवसर में बदलने की पूरी कहानी

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इस साल जितनी चर्चा लॉकडाउन की हो रही है, पिछले साल उतनी ही चर्चा स्लोडाउन की हो रही थी. और तब एक ख़बर काफ़ी चर्चित हुई थी - कि आर्थिक तंगी का आलम ये है कि मज़दूर 5 रुपए की पारले-जी बिस्किट तक नहीं ख़रीद पा रहें, और बिक्री घटने से कंपनी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.
और इस साल लॉकडाउन के दौर में ये 5 रुपए वाला बिस्किट एक बार फिर सुर्खियाँ बटोर रहा है - पारले-जी बिस्किट बनाने वाली कंपनी ने कहा है कि लॉकडाउन में उनके बिस्किट इतनी संख्या में बिके जितने कि पिछले चार दशकों में भी नहीं बिके थे. यानी लॉकडाउन में कंपनी को ज़बर्दस्त लाभ हुआ है.
पारले-जीबनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्ट्स के एक वरिष्ठ अधिकारी मयंक शाह ने समाचार एजेंसी पीटीआई से कहा, "लॉकडाउन के दौरान ज़बर्दस्त वृद्धि हुई, कम-से-कम पिछले 30-40 सालों में तो ऐसी वृद्धि कभी नहीं हुई."
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भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन के निर्यात से प्रतिबंध हटाया

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भारत ने हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन पर लगा निर्यात प्रतिबंध हटा लिया है. अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दवा को कोरोना के इलाज के लिए ''गेम चेंजर'' बताया था.
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन एंटी मलेरिया के लिए सबसे बेहतर और पुरानी दवा मानी जाने वाली क्लोक्वीन के जैसी ही है. हालांकि एंटीवायरल दवा के तौर पर भी बीते कुछ दशकों में इसको काफी अपनाया गया है.
अमरीका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार इस दवा की तारीफ की और कोरोना संक्रमण के इलाज में इसे कारगर बताया जबकि इस बारे में मेडिकल एक्सपर्ट की ओर से कोई सबूत नहीं दिए गए थे.
भारत हाइड्रोक्लोरोक्वीन का सबसे बड़ा उत्पादक है. मार्च में लॉकडाउन के दौरान सप्लाई चेन बाधित होने की वजह से दवा के निर्यात में रोक लगा दी गई थी.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, भारत ने लॉकडाउन में कुछ छूट दी और अप्रैल में अमरीका को इस दवा की पांच करोड़ गोलियां भेजी गईं.
कोरोना महामारी के कहर और दंगे की आग के बावजूद खिलती उम्मीद की एक कोंपल

गुलिस्तां शेख अपने कमरे में बैठी हुई हैं और उनकी बचपन की सहेली उनकी आंखों में काजल लगा रही हैं.
उन्होंने अपने हाथ में एक छोटा सा आईना पकड़ रखा है. आज उनकी शादी का दिन है. हालांकि पहले उनकी शादी नवंबर में होने वाली थी. जब वो रिलीफ़ कैंप में थीं तब ही उन्होंने मुझसे अपनी शादी का जिक्र किया था. उस दिन ईदगाह में लगे रिलीफ़ कैंप का तंबू मूसलाधार बारिश की वजह से पस्त हो चुका था.
यह रिलीफ़ कैंप उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक ईदगाह में वहाँ हुई हिंसा में प्रभावित हुए लोगों के लिए लगाया गया था. तब गुलिस्तां को उम्मीद थी कि शिव विहार में उनके घर में दूसरे घरों की तरह तोड़फोड़ नहीं हुई होगी. उन्होंने अपने उस कमरे के बारे में बताया था जिसकी दीवारें गुलाबी रंग से रंगी हैं.
उनकी शादी को लेकर उनके अब्बू ने कई चीजें सालों से जोड़कर रखी थीं कि जब उनकी शादी होगी तो वो उन्हें शादी में ये चीजें देंगे. इन चीजों में डिनर सेट, जेवर, सोने की चेन और शादी का जोड़ा शामिल था.
25 फरवरी जब उनके इलाके में हिंसा भड़की थी उसके बाद से उनके परिवार ने दूसरे कई परिवारों की तरह ईदगाह में ही पनाह ले रखी थी. 14 मार्च के दिन ईदगाह के रिलीफ़ कैंप में उन्होंने ये सारी बातें मुझे बताई थीं. उनके परिवार के लोग शिव विहार में अपने घर लौटने को लेकर डरे हुए थे.
