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कोरोना अपडेट: फ़्रांस में लॉकडाउन के कारण आठ लाख लोगों की नौकरी को ख़तरा
फ़्रांस के वित्त मंत्री ब्रूनो ले मेयर ने संसद की वित्तीय कमेटी को इसकी जानकारी दी.
लाइव कवरेज
महाराष्ट्र में दोबारा लग सकता है लॉकडाउन: उद्धव ठाकरे
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा है कि अगर मौजूदा पाबंदियों का ठीक से पालन नहीं किया गया तो फिर पूरे राज्य में दोबारा सख़्त लॉकडाउन लागू किया जा सकता है.
महाराष्ट्र में लगातार कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं और बुधवार तक 94 हज़ार से ज़्यादा हो चुके हैं. अकेले राजधानी मुंबई में 50 हज़ार से ज़्यादा पॉज़िटिव मामले हो चुके हैं.
ठाकरे ने कहा कि अगर लॉकडाउन में ढील देना ख़तरनाक होने लगा तो फिर दोबारा लॉकडाउन लागू करने पर मजबूर होना पड़ेगा.
फ़्रांस में आठ लाख लोगों की नौकरी को ख़तरा

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फ़्रांस के वित्त मंत्री ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में फ़्रांस में आठ लाख लोगों की नौकरियां जा सकती हैं.
वित्त मंत्री ब्रूनो ले मेयर ने संसद की वित्तीय कमेटी को कहा, "ये एक बहुत बड़ा झटका है और इससे प्रभावित सभी लोगों की मदद के लिए नीतियां बनाए जाने की ज़रूरत है."
फ़्रांस के फ़ुड, केटरिंग और इवेंट्स इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने बुधवार को राजधानी पेरिस में विरोध प्रदर्शन किया और ये संदेश दिया कि कोरोना महामारी उनकी नौकरियों को ख़त्म कर रही है.
प्रदर्शनकारी काले कपड़े पहने हुए थे जिस पर लिखा था, 'मृत्युदंड'.
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फ़ेसबुक, गूगल और ट्विटर से कोरोना की ग़लत जानकारी पर रोक लगाने की अपील
यूरोपीय यूनियन के शीर्ष अधिकारियों ने फ़ेसबुक, गूगल और ट्विटर जैसी टेक कंपनियों से कहा है कि वो कोरोना वायरस के बारे में सोशल मीडिया पर दी जा रही ग़लत ख़बरों पर रोक लगाने के लिए क़दम उठाएं.
अधिकारियों ने इन कंपनियों से कहा है कि वो इस बारे में हर महीने रिपोर्ट दें कि वो ग़लत ख़बर फैलने से रोकने के लिए क्या कर रही हैं और विदेशी समूहों के ज़रिए यूरोप की स्वास्थ्य सेवाओं को कमज़ोर किए जाने के प्रयासों को रोकने के लिए क्या कर रही हैं.
ईयू के अधिकारियों ने एक बयान जारी कर कहा, "ग़लत जानकारियां न सिर्फ़ हमारे लोकतंत्र के स्वास्थ्य को नुक़सान पहुंचाती हैं, बल्कि ये हमारे नागरिकों की सेहत को भी नुक़सान पहुंचाती हैं."
ईयू ने पहले भी विदेशी ताक़तों ख़ासकर रूस और चीन के बारे में चेतावनी दी थी कि वो किस तरह से ग़लत जानकारी देकर यूरोप के नागरिकों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं.

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लॉकडाउन के बाद क्या बच्चों की तस्करी का ख़तरा बढ़ जाएगा?
सोशल डिस्टेन्सिंग के नियम अलग-अलग देशों में अलग कैसे हैं?
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने बुधवार को कहा कि वे ब्रिटेन में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले कम होने के साथ सोशल डिस्टेन्सिंग के लिहाज़ से तय किये गए ‘दो मीटर की दूरी वाले नियम’ में थोड़ी ढील देना चाहते थे.
दरअसल, उनकी सरकार कुछ सांसदों और बड़े व्यापारियों के इस दबाव में आ रही है कि उन्हें सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों में कुछ ढील देनी चाहिए ताकि होटल और रेस्त्रां फिर से खुल सकें.
विश्व स्वास्थ्य संगठन ‘एक मीटर की दूरी’ को सोशल डिस्टेन्सिंग के लिहाज़ से सुरक्षित मानता है और बहुत से देशों ने इसे 1 मीटर ही रखा है. जबकि ब्रिटेन जैसे कुछ अन्य देश भी हैं जहाँ इसे एक मीटर से बढ़ाया गया है.
इसे समझने के लिए यह इन्फ़ोग्राफ़ देखिए:

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वीडियो रिपोर्ट: लॉकडाउन के दौरान पारले-जी कैसे बना मज़दूरों का सहारा
जब शहरों में काम मिलना बंद हुआ और हज़ारों-लाखों मज़दूरों ने अपने घरों की तरफ़ सैकड़ों किलोमीटर का सफ़र शुरू किया, तो यही बिस्कुट काम आए.
बच्चों के साथ-साथ बड़ों की भूख में भी इन्होंने ख़ूब सहायत की. मदद करने वालों ने भी पारले जी के पैकेट बांटना मुनासिब समझा.
दूसरे मध्यम वर्गीय परिवारों ने लॉकडाउन के दौर में अपने रसोई की अलमारी में पारले जी के बिस्कुट भरने से बेहतर कुछ और नहीं समझा.
पारले जी बिस्कुट बनाने वाली कंपनी पारले प्रोडक्टस ने सेल्स के सटीक आंकड़े तो साझा नहीं किए, लेकिन ये ज़रूर बताया कि बिक्री के मामले में मार्च, अप्रैल और मई के महीने बीते 80 साल में सबसे शानदार रहे हैं.
कंपनी में कैटेगरी हेड मयंक शाह ने ईटी के बताया कि उनकी कुल बाज़ार हिस्सेदारी में क़रीब 5 फीसदी का इज़ाफा हुआ है. लेकिन इस ग्रोथ का 80-90 फीसदी अंश पारलेजी की सेल्स से आया है.
लॉकडाउन में फँसे मज़दूरों को घर भेजने सोनू सूद ख़ुद रेलवे स्टेशन आ गए.
कोविड-19 हो या ना हो, पर पाकिस्तान बना एक लॉकडाउन-फ़्री देश
एम इलियास ख़ान, बीबीसी न्यूज़, इस्लामाबाद

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पाकिस्तान में कोविड-19 के मामले रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए हैं, महामारी तेज़ी से फैल रही है, वहीं लॉकडाउन में प्रतिबंधों से मिलने वाली आज़ादी भी रिकॉर्ड स्तर पर कही जा सकती है.
पाकिस्तान सरकार लगातार यह जताने की कोशिश कर रही है कि महामारी की रोकथाम के लिए बनाये गए सोशल डिस्टेन्सिंग से जुड़े दिशा-निर्देशों का बाज़ारों और शहरों में कड़ाई से पालन किया जा रहा है, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त इसे बिल्कुल अलग है.
लोगों के बीच उपयुक्त फ़ासला बनाये रखने के लिए बड़े सुपर बाज़ारों और दवा की दुकानों के बाहर खींची गई लाइनें काफ़ी हद तक मिट चुकी हैं और दुकानों के भीतर ज़्यादा भीड़ जमा ना हो, इसका ध्यान रखने के लिए खड़े किये गए सिक्योरिटी गार्ड भी अधिकांश जगहों से जा चुके हैं.
पाकिस्तान में कोरोना वायरस से संक्रमित हो चुके लोगों की कुल संख्या बुधवार को बढ़कर एक लाख 13 हज़ार के पार चली गई.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार संक्रमण के सबसे ज़्यादा मामले पाकिस्तान के पंजाब और सिंध प्रांत में दर्ज किये जा रहे हैं.
बताया गया है कि पाकिस्तान में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या अब 2,255 हो गई है. बीते 24 घंटे में 83 लोगों की संक्रमण से मौत हुई है.
इस स्थिति को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने पाकिस्तान सरकार को चेतावनी भी दी है कि ‘देश में महामारी का पीक आने से पहले ही लॉकडाउन खोल दिया गया है जो घातक साबित हो सकता है.’
इस पर पाकिस्तान की प्रतिक्रिया बहुत हैरान करने वाली है. पंजाब प्रांत की स्वास्थ्य मंत्री यासमीन राशिद ने एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा, “विश्व स्वास्थ्य संगठन को जो सही लग रहा है वो कहे, पर हमें अपनी परिस्थितियों को देखते हुए आगे बढ़ना होगा.”

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इसे सुनकर पाकिस्तान के बहुत से लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि सरकार के इस रवैये से डर लग रहा है.
हालांकि यासमीन राशिद का यह बयान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के नज़रिये से काफ़ी मेल खाता है.
उन्होंने हाल ही में कहा था, “पाकिस्तान में ग़रीबी की स्थिति को देखते हुए, लॉकडाउन हमारे लिए कभी भी ऑप्शन नहीं था.”
मगर पाकिस्तान सरकार के इस नज़रिये से वहाँ की हेल्थ-वर्कर कम्युनिटी सहमत नहीं है.
पाकिस्तान के डॉक्टरों, नर्सों और अन्य हेल्थ वर्करों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्थाएं लगातार कह रही हैं कि ‘देश में सख़्त लॉकडाउन की ज़रूरत है.’
इस मुद्दे पर शुरुआत से ही राजनीति भी हो रही है और विपक्षी पार्टी – पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी इसे हवा दे रही है. ये पार्टी देश में सख़्त लॉकडाउन जारी रखे जाने की समर्थक है.
लेकिन पाकिस्तान सरकार ने लॉकडाउन से संबंधिक लगभग सारे प्रतिबंध अब हटा दिये हैं.
इसलिए, कोविड-19 हो या नहीं हो, पाकिस्तान फ़िलहाल एक लॉकडाउन –फ़्री देश बन चुका है.
ब्रेकिंग न्यूज़, दिल्ली के अस्पतालों के लिए उप-राज्यपाल के निर्देश
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दिल्ली के उप-राज्यपाल अनिल बैजल जो दिल्ली आपदा प्रबंधन अथॉरिटी के चेयरमैन भी हैं, उन्होंने दिल्ली के सभी बड़े अस्पतालों, क्लीनिक और नर्सिंग होम को अपनी बिल्डिंग के बाहर एक एलईडी बोर्ड के माध्यम से बड़े-बड़े अक्षरों में बेड की उपलब्धता (कोविड और ग़ैर-कोविड) दर्शाने का निर्देश दिया है.
उप-राज्यपाल के आदेश के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन को यह बताना भी अनिवार्य होगा कि अस्पताल में इलाज का ख़र्च कितना होगा और भर्ती होने के लिए किनसे संपर्क करना होगा.
केजरीवाल ने दिल्ली में कोरोना के हालात और उप-राज्यपाल के आदेश पर क्या कहा?
कोविड-19: दिल्ली में 35 साल के बीएसएफ़ जवान की मौत
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समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार दिल्ली में तैनात एक 35 वर्षीय बीएसएफ़ जवान की कोविड-19 के कारण मौत हो गई है.
बीएसएफ़ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया है कि ‘कोविड-19 के कारण बीएसएफ़ में यह तीसरी मौत है. 35 वर्षीय इस जवान को बलगम और शारीरिक कमज़ोरी की शिकायत पर दिल्ली स्थित एम्स अस्पताल में 5 जून को भर्ती कराया गया था. वे दिल्ली में क़ानून-व्यवस्था बनाये रखने में दिल्ली पुलिस के साथ तैनात थे.’
कोरोना वायरस कॉलर ट्यून के पीछे किसकी आवाज़ है?
अनलॉक में मॉल तो खुल गए, पर क्या लोग वहाँ जा रहे हैं?

