कोरोना अपडेट: एक जून से रोज़ाना 200 नॉन-एसी ट्रेन चलेंगी
भारत में अब तक कोरोना मरीज़ों की संख्या एक लाख पार कर चुकी है और मरने वालों की संख्या 3163 हो गई है.
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कोरोना वायरस: बच्चों को हो रही है ये दुर्लभ बीमारी

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अमरीका और ब्रिटेन के कुछ बच्चों में इन दिनों एक गंभीर और दुर्लभ बीमारी देखने को मिल रही है. इस बीमारी का सम्बन्ध कोरोना वायरस संक्रमण से है.
ये बीमारी कुछ बच्चों के लिए गंभीर मुश्किलें पैदा कर सकती है और उन्हें आईसीयू में भर्ती कराने की नौबत भी आ सकती है.
ब्रिटेन में अब तक क़रीब 100 बच्चे इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं. अध्ययन बताते हैं कि यूरोप में अन्य जगहों पर भी बच्चों में ऐसी ही बीमारी के लक्षण देखे जा रहे हैं.
माना जा रहा है कि जिन बच्चों का प्रतिरक्षा तंत्र (इम्यून सिस्टम) कोरोना वायरस पर देर से प्रतिक्रिया दे रहा है, उनमें इस बीमारी की चपेट में आने की आशंका ज़्यादा है. ये बीमारी ‘कावासाकी डिज़ीज़’ से मिलती-जुलती है.
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एक जून से प्रतिदिन 200 नॉन एसी ट्रेन चलेंगी
भारतीय रेल मंत्रालय ने जानकारी दी है कि एक जून से प्रतिदिन 200 ट्रेनें चलेंगी. इन ट्रेनों में सेकेंड क्लास स्लीपर के कोच होंगे. यानी ये ट्रेनें गैर वातानुकूलित होंगी. इन ट्रेनों की टिकटें भी ऑनलाइन उपलब्ध होंगी. भारतीय रेल के मुताबिक इन ट्रेनों की सूचना जल्दी ही उपलब्ध कराई जाएगी.
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WHO प्रमुख: हमलोग जवाबदेही चाहते हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एडहनॉम गिब्रयेसस यूरोपीय यूनियन के उस प्रस्ताव का स्वागत किया है जिसमें कोरोना महामारी को लेकर वैश्विक प्रतिक्रिया की समीक्षा की बात कही गई है.
उनके अनुसार इस प्रस्ताव में कोरोना वायरस को लेकर सिर्फ़ विश्व स्वास्थ्य संगठन के रोल की नहीं बल्कि उसके समेत व्यापक समीक्षा की बात कही गई है.
वर्ल्ड हेल्थ एसेंबली के समापन समारोह में बोलते हुए टेड्रोस एडहनॉम गिब्रेयेसस ने कहा, "किसी से भी ज़्यादा हमलोग जवाबदेही चाहते हैं. कोरोना वायरस पर उठाए गए वैश्विक क़दम में तालमेल के लिए हमलोग रणनीतिक नेतृत्व करते रहेंगे."
कोरोना महामारी को जिस तरह से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हैंडल किया है उसको लेकर संगठन के प्रमुख टेड्रोस को आलोचना का शिकार होना पड़ा है.
अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र की इस संस्था को 'चीन की कठपुतली' तक कह दिया है.
लेकिन चीन ने अमरीका पर आरोप लगाते हुए कहा है कि अमरीका ये सब इसलिए कर रहा है क्योंकि वो कोरोना मामले में अपनी ग़लतियों को छुपाने के लिए मुद्दे से भटकाने की कोशिश कर रहा है.

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ब्रेकिंग न्यूज़, विश्व स्वास्थ्य संगठन स्वतंत्र जाँच के लिए तैयार
वर्ल्ड हेल्थ असेंबली ने कोरोना वायरस महामारी के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन की प्रतिक्रिया की स्वतंत्र जाँच के लिए सहमति व्यक्त की है.
वर्ल्ड हेल्थ असेंबली की वार्षिक बैठक में डब्ल्यूएचओ के 194 सदस्य देशों में से किसी ने भी, जिनमें अमरीका भी शामिल है, यूरोपीय संघ द्वारा लाये गए प्रस्ताव पर आपत्ति नहीं जताई.
यूरोपीय संघ ने ऑस्ट्रेलिया, चीन और जापान सहित 100 से अधिक देशों की ओर से स्वतंत्र जाँच का प्रस्ताव रखा था.
बहामा के राजदूत और वर्ल्ड हेल्थ असेंबली के अध्यक्ष केवा बैन ने कहा, "किसी ने भी इस जाँच के प्रस्ताव पर आपत्ति दर्ज नहीं कराई है, इसलिए मैं इस प्रस्ताव पर सदन की सहमति व्यक्त करता हूँ."
इससे पहले, विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस ऐडहेनॉम गेब्रीयेसोस ने एक स्वतंत्र मूल्यांकन की बात पर कहा था कि ‘अगर स्वतंत्र मूल्यांकन के ज़रिये कुछ महत्वपूर्ण सबक सीखे जा सकेंगे और हमें कुछ अच्छे सुझाव मिलेंगे, तो जितना जल्दी हो सकेगा विश्व स्वास्थ्य संगठन उन पर काम करेंगे.’
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ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार से कहा – ‘प्रवासियों से भरी ट्रेनें और बसें 24 घंटे के लिए रोकें’
प्रभाकर मणि तिवारी
कोलकाता से, बीबीसी हिंदी के लिए

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चक्रवाती तूफ़ान अंफान को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजधानी कोलकाता समेत राज्य के तटवर्ती इलाक़ों के लोगों से बुधवार सुबह से 24 घंटे तक घरों से ना निकलने की अपील की है.
उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से भी इस दौरान प्रवासियों से भरी बसें या ट्रेनें बंगाल नहीं भेजने का अनुरोध किया है.
मंगलवार को राज्य सचिवालय में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के ज़रिए पत्रकारों से बातचीत में ममता ने कहा, “कल का दिन और रात ख़तरनाक होंगे. इसलिए लोगों को 24 घंटे तक घरों से बाहर नहीं निकलना चाहिए. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी आज फ़ोन पर बातचीत कर तूफ़ान से निपटने में हर संभव मदद का भरोसा दिया है.”
इस बीच, अंफान के असर से राज्य के कई इलाकों में तेज़ हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई है.
कोलकाता में भी सुबह से ही बादल छाये हुए हैं और शहर के कई हिस्सों में हल्की बारिश भी हुई है.

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उन्होंने कहा कि केंद्र से इस दौरान प्रवासियों को बंगाल नहीं भेजने को कहा गया है. इससे वह लोग तूफ़ान में फंस सकते हैं.
कोरोना सक्रमण के दौरान यह तूफ़ान समस्या को और बढ़ा रहा है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने तूफ़ान से निपटने की हर संभव तैयारी कर ली है.
अब तक लगभग तीन लाख लोगों को उनके घरों से निकाल कर शेल्टर होम में पहुँचाया गया है. संवेदनशील इलाकों में एनडीआरएफ़ और एसडीआरएफ़ की टीमें तैनात कर दी गई हैं.
ममता बनर्जी ने कहा, “कोरोना काल में इन शेल्टर होम के भीतर सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना एक समस्या है. प्राकृतिक आपदा की स्थिति में पहले इससे जान बचाना प्राथमिकता होती है. ऐसे में शायद सोशल डिस्टेंसिंग का पूरी तरह पालन संभव नहीं हो सके. लेकिन बावजूद इसके लोगों से जहाँ तक हो सके इसका पालन करने का अनुरोध किया गया है.”
सुंदरबन इलाक़े में लाउडस्पीकरों से लोगों को घरों से बाहर ना निकलने की चेतावनी दी जा रही है.
सरकार ने हालात पर निगाह रखने के लिए मुख्य सचिव राजीव सिन्हा के नेतृत्व में एक टास्क फ़ोर्स का गठन किया है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि तूफ़ान के असर और इससे होने वाले नुक़सान के बारे में सही पूर्वानुमान लगाना बेहद मुश्किल है. ऐसे में सावधानी बरतना ज़रूरी है. सुदंरबन के द्वीपों तक फेरी सेवाएं कल से ही बंद कर दी गई हैं.

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मुख्यमंत्री ने कहा है कि दक्षिण 24-परगना ज़िले पर अंफान का असर सबसे ज्यादा होगा, इसलिए वहाँ अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है. उसके अलावा उत्तर 24-परगना और पूर्व मेदिनीपुर ज़िले के तटीय इलाक़ों में भी इसका ख़ासा असर होगा. जिन तीन लाख लोगों को शेल्टर होम में पहुँचाया गया है उनमें से दो लाख अकेले दक्षिण 24-परगना ज़िले के ही हैं.
सुंदरबन इलाक़ा भी इसी ज़िले में है. वहाँ के कई द्वीपों के लोगों को भी सुरक्षित जगहों पर ले जाया गया है.
